चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Tuesday, December 29, 2009

“चिट्ठा-जगत लौट आया है” (चर्चा मंच)

"चर्चा मंच" अंक-13

चर्चाकारः डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
इस खुशखबरी के साथ आज का "चर्चा मंच" सजाते हैं-
जाल-जगत के सभी हिन्दी चिट्ठाकारों को यह जानकर हर्ष होगा कि
चिट्ठा-जगत अब फिर से वापिस आ गया है और
इसके सभी विजेट विल्कुल सही काम करने लगे हैं।
चिट्ठाजगत
सबसे पहले आज का चुटकुला
बेलन महिमा –7

घरवाला बोला, - “पता नहीं इस घर में शांति कब होगी

तुम मुझे चैन से मरने भी नहीं दोगी”।

रवाली बोलीं, - “कोई भी काम ढ़ंग से तो करते नहीं

उल्टे मुझ पर अकड़ रहे हो…

अविनाश वाचस्पति को मिल गई यमुना

अविनाश वाचस्पति

मिल गई मुझे यमुना, यमुनानगर में : आप भी मिलिए (अविनाश वाचस्‍पति) -यमुनानगर से पहुंचा दिल्‍ली दिल्‍ली से चला आगरा पर वापिस आऊंगा दिल्‍ली तब सभी दूंगा समाचार द्वितीय हरियाणा अंतर्राष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह के है जिनका इंतजार आ...

राज कुमार ग्वालानी जी बता रहे हैं एक टोटका
गुस्सा आए तो जाने राज पिछले जन्म का

एक महिला राह में जा रही है, उसको लोग गंदी नजरों से देख रहे हैं, उसको बहुत गुस्सा आ रहा है। यह कोई नई बात नहीं है, अपने देश में हर दूसरी महिला के साथ ऐसा होता है। लेकिन क्या ऐसा होने का मतलब यह है कि आपके साथ जरूर पिछले जन्म में ऐसा कुछ हुआ है जिसकी वजह से आपको गुस्सा आता है। अगर यह सच है तो जरूर हर दूसरी महिला के साथ पिछले जन्म में ऐसी कोई घटना हुई होगी जिसका लावा इस जन्म में फूट रहा है।

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Dhiraj Shah

तोता राम

तोता राम भाई तोता राम
पंख हरे चोंच है लाल
गले मे पहने गहरी कंठी माला


ज़रा अपनी गर्दन घुमा कर तो देखो...


पिछले कई पोस्ट्स में मैंने अपने बच्चों के साथ हुई गुफ्तगू को शामिल किया...वजह कई थे मसलन, मुझे समय नहीं मिल रहा था कुछ नया सोचने का ....उनसे बात-चीत में ही कुछ विषय निकल आते थे ...जिन्हें मैं आप सबसे बाँट कर सुख का अनुभव करती हूँ....साथ ही अपने बच्चों से आपका तार्रुफ़ कराना,

आपके समक्ष नई पीढ़ी के कुछ खयालातों को लाना, बच्चों को हिंदी ब्लॉग की दुनिया से मिलवाना, और उनकी अपनी सोच में कुछ इजाफा या फिर कुछ बदलाव लाना....बढ़ते बच्चे कच्ची मिटटी के घड़े होते हैं....अभी ही उन्हें सही दिशा मिल सकती है...इतने सारे अंकल-आंटीज कहाँ मिलेंगे उन्हें....वो भी खालिस हिन्दुस्तानी.....आप लोगों का हृदय से आभार कि आपने उनकी बातें सुनी और अपने विचार दिए.....मुझे पूरा विश्वास है आपकी बातों से मेरे बच्चे लाभान्वित होंगे....

आज एक बात फिर एक पुरानी ग़ज़ल आपको समर्पित..
मैंने धुन भी दी है इसे कामचलाऊ सा सुनियेगा..

कबीर के श्लोक –३
कबीर ऐसा एक आधु,जो जीवत मिरतकु होइ॥
निरभै होइ के गुन रवै,जत पेखऊ तत सोइ॥५॥

कबीर जी कहते है कि इस संसार मे कोई बिरला ही होता है जो अपने जीवन को इस तरह जीए जैसे कोई जीवत व्यक्ति किसी मरे हुए के समान इस संसार से संबध रखता है।निरभय हो कर सुख और दुख से ऊपर उठ जाए।अर्थात सुख और दुख को एक समान महसूस करे और उस परम पिता परमात्मा को ही हर जगह देखे।…..

विनोद कुमार पांडेय

[Image072.jpg]

"अपने ही समाज के बीच से निकलती हुई दो-दो लाइनों की कुछ फुलझड़ियाँ-2"

दौर आज का उल्टा-पुल्टा,उल्टा बहे समीर|
रांझा आवारा फिरे,हुई बेवफा हीर||
रक्षक ही भक्षक बनें,किसे सुनाएँ पीर|
कुछ घर में भूखे मरे,गटक रहे कुछ खीर||.....

शांति का दूत


लघुकथा शांति का दूत

--- --- मनोज कुमार

साइबेरिया के प्रदेशों में इस बार काफी बर्फ पड़ रही थी। उस नर सारस की कुछ ही दिनों पहले एक मादा सारस से दोस्ती हुई थी। दोस्ती क्या हुई, बात थोड़ी आगे भी बढ़ गई। इतनी बर्फ पड़ती देख नर सारस ने मादा सारस को अपनी चिंता जताई हमारी दोस्ती का अंकुर पल्लवित-पुष्पित होने का समय आया तो इतनी जोरों की बर्फबारी शुरू हो गई है यहां .. क्या करें ?”

इस एहसास को कोई नाम न दो...

अबयज़ ख़ान

इस प्यार को कोई नाम न दो.. इस एहसास को कोई नाम न दो.. इस जज़्बात को कोई नाम न दो... मगर ये कैसे मुमकिन है... जब एक ज़िंदगी दूसरी ज़िंदगी से मुकम्मल तरीके से जुड़ी हो... आंखो में लाखों सपने हों... दिल में हज़ारों अरमान हों... हज़ार ख्वाहिशें हों... फिर कैसे कोई नाम न दें...


मेरा फोटो

राजीव रंजन
दिल्ली, दिल्ली, India
जन्म तेंतीस साल पहले बिहार के आरा में हुआ. पैतृक घर बिहार के रोहतास जिले के एक छोटे से गांव में है,जहाँ आज भी बिजली, पानी और सड़क नहीं है. गांव जाने के लिए कम से कम एक कोस पैदल चलना पड़ता है या कच्चे रस्ते पर निजी साधन से जाना पड़ता है. गांव वाले बाजार जाने के लिए ज्यादातर साइकिल का प्रयोग करते है.मातृक निवास यानी ननिहाल आरा में है. यहीं के महाराजा कॉलेज से संस्कृत में स्नातक तक शिक्षा ग्रहण की है, दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज से संस्कृत में स्नातकोत्तर की पढाई की है. पिछले दस सालों से दिल्ली में हूँ और करीब आठ सालों से पत्रकारिता में हाथ-पैर मार रहा हूँ.
साहिर लुधियानवी की नज्‍म 'कल और आज'


आज भी बूंदें बरसेंगी
आज भी बादल छाये हैं
और कवि इस सोच में है
बस्‍ती पे बादल छाये हैं, पर ये बस्‍ती किसकी है
धरती पर अमृत बरसेगा, लेकिन धरती किसकी है


"हैप्पी अभिनंदन" में मिथिलेष दुबे

आज आप जिस ब्लॉगर हस्ती को मिलने जा रहे हैं, वो पेशे तो इंजीनियर हैं, लेकिन शौक शायराना रखते हैं। इस बात का पता तो उनकी ब्लॉगर प्रोफाइल देखने से ही लगाया जा सकता है, इस हस्ती ने अपना परिचय कुछ इस तरह दिया है "कभी यूं गुमसुम रहना अच्छा लगता है, कभी कोरे पन्नों को सजाना अच्छा लगता है, कभी जब दर्द से दहकता है ये दिल तो, शब्दों में तुझको उकेरना अच्छा लगता है"। इससे आप कई दफा मिले होंगे, पर ब्लॉग की जरिए, कविताएं लिखते हैं, लेकिन उससे ज्यादा वस्तुओं, शब्दों एवं अन्य चीजों के उत्थान पर कलम घसीटते हुए ही मिलते हैं, जो उनके गंभीर व्यक्तित्व एवं एक स्पष्ट व्यक्ति होने की पुष्टि करता है। निजी जीवन में क्रिकेट देखने व खेलने, लोगों से मिलने, घूमने एवं साहित्यिक पुस्तकों को पढ़ने में विशेष रुचि लेने वाले गायत्री एवं रामायण जैसी पवित्र किताबों से बेहद प्रभावित हिन्दी पुराने एवं दर्द भरे गीत सुनने के शौकीन मिथिलेश दुबे जी आज हमारे बीच हैं।


मेरा फोटो

aradhana chaturvedi "mukti"
कुछ ख़ास नहीं,बस नारी होने के नाते जो झेला और महसूस किया ,उसे शब्दों में ढालने का प्रयास कर रही हूँ.चाह है, दुनिया औरतों के लिए बेहतर और सुरक्षित बने .

सृजन के बीज

(नये साल की पूर्व संध्या पर वर्ष की अन्तिम पोस्ट)
तुझमें जो आग है
उस आग को तू जलने दे
अपने सीने में उसे
धीरे-धीरे पलने दे...
भभक कर जलेगी
तो राख बन जायेगी
धुयें के साथ यूँ ही
आप से सुलगने दे...

गीतों और गज़लों से सजी हिन्दी चित्रपट की दुनिया का सुरीला सफ़र

हिन्दी फिल्मों में अपनी दर्दभरी , दिल को छु लेनेवाली आवाज़ , दिलकश अदाकारी और गंभीर हुस्न के लिए पहचानी जानेवाली मशहूर अदाकारा स्व. मीना कुमारी जी ने कई सुमधुर और अविस्मरनीय गीतों में अपने सशक्त अभिनय से जान फूंक दी .........

बोले तू कौनसी बोली ? ४: सहपरिवार ...!

काफ़ी साल हो गए इस घटनाको...बच्चे छोटे थे...हमारे एक मित्र का तबादला किसी अन्य शेहेर मे हो गया। हमारा घर मेहमानों से भरा हुआ था, इसलिए मेरे पतीने उस परिवार को किसी होटल मे भोजन के लिए ले जाने की बात सोची।
एक दिन पूर्व उसके साथ सब तय हो चुका था... पतीने उससे इतना ज़रूर कहा था, कि, निकलने से पहले, शाम ७ बजेके क़रीब वो एकबार फोन कर ले। घरसे होटल दूर था...बच्चे छोटे होने के कारण हमलोग जल्दी वापस भी लौटना चाह रहे थे।
उन दिनों मोबाईल की सुविधा नही थी। शाम ७ बजे से पहलेही हमारी land लाइन डेड हो गयी...! मेरे पती, चूंकी पुलिस मेहेकमे मे कार्यरत थे, उन्हों ने अपने वायरलेसऑपरेटर को, एक मेसेज देके उस मित्र के पास भेजा," आप लोगों का सहपरिवार इंतज़ार है..."

अंतर्मन

अपने विचार

ग़ज़ल

फर्क क्या पड़ता है तुम आओगे के न आओगे
ये तेरा नाम फिज़ाओं में लिखा रक्खा है
है ये मुमकिन नहीं यादों को तेरी मिट जाना
तेरे उन ख़तो को किताबों में छुपा रक्खा है

तारीख पर तारीख, तारीख पर तारीख....खुशदीप

नब्बे के दशक में एक फिल्म आई थी- दामिनी...फिल्म में सनी देओल वकील की भूमिका में थे...सनी देओल का फिल्म में एक डॉयलॉग बड़ा हिट हुआ था...मी लॉर्ड, मुवक्किल को अदालत के चक्कर काट-काट कर भी मिलता क्या है...तारीख पर तारीख, तारीख पर तारीख, तारीख पर तारीख...लेकिन इंसाफ़ नहीं मिलता...ख़ैर ये तो फिल्म की बात थी...लेकिन हमारे देश की न्यायिक व्यवस्था का कड़वा सच भी यही है..रुचिका गिरहोत्रा के केस में ही सबने देखा...दस साल बाद मुकदमा दर्ज हुआ...नौ साल मुकदमा चलने के बाद नतीजा आया...गुनहगार को 6 महीने कैद और एक हज़ार रुपये जुर्माना...

आंसुओं के नाम

इन आंसुओं को नाम क्या दूं दोस्तों
जिन्होंने धोखा हर बार दिया है
वक्त को पल में बदल देते हैं जो
इन्होंने अपना रूप हजार किया है।
अछूता नहीं कोई इनसे जहां में
सभी का इनसे पड़ता है वास्ता
कहीं खुशी के इजहार में छलके आंसू
तो कभी गम में भी बरसात किया है।

बातचीत : भगवान से - रावेंद्रकुमार रवि का एक बालगीत

रावेंद्रकुमार रवि

हम शोभा बन जाएँ

हे ईश! तुम्हारा हर पल हम गुण गाएँ!

हमको ऐसे ज्ञान-दीप दो, कभी न जो बुझ पाएँ !

हे ईश! तुम्हारा ... ... ... ... ... ... ...

पोस्टर छाप पोलटिक्स

कुल जमा तीन जन थे। रात कमर तक घनी हो चुकी थी और ठंड की ठिठुरन में उनका हाल बहुत बुरा नहीं तो बुरा तो कहा ही जाएगा। एक आदमी सीढ़ी लगाकर डिवाइडर पर बने पोस्ट लैंप पर पोस्टर टांगने की कोशिश कर रहा था, दूसरा सीढ़ी संभाले हुए था और तीसरा इधर-उधर छिटके पोस्टरों को समेट रहा था। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पोस्टर थे, जिन पर काफी बड़े आकार में राहुल गांधी मुस्कुरा रहे थे। इधर उधर छिटके पोस्टरों में राहुल बाबा का एक पोस्टर डिवाइडर से नीचे सड़क पर आ गया था, जिसपर चिपकाने वाले की नजर शायद गयी नहीं। कांग्रेस का भविष्य तो इस देश की जनता बांचेगी

एक 'मर्द' शीला बाकी सब...?

सुना आपने, बाल ठाकरे के ज्ञान-चक्षु की नई खोज के विषय में, नहीं तो सुन लीजिए। बाल ठाकरे की ताजा शोध के अनुसार, पूरी की पूरी कांग्रेस पार्टी में सिर्फ एक 'मर्द' है और वह है दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित। अर्थात, कांग्रेस पार्टी में शेष सभी 'नामर्द' हैं। सचमुच अद्वितीय खोज है यह- चाहें तो अद्भुत भी कह लें। अब कांग्रेस की इस पर क्या प्रतिक्रिया है, इसकी जानकारी फिलहाल नहीं मिली है किंतु यह तो तय है कि कांग्रेस अपनी झेंप मिटाने के लिए इसे मंद-बुद्धि खोज बताकर खारिज कर देगी। हाल के दिनों में अपने दड़बे से बाहर निकल राजनीतिक सक्रियता प्रदर्शित करने वाले बाल ठाकरे दुखद रूप से अब तक अर्जित अपनी प्रतिष्ठा, गरिमा, आभा खोते जा रहे हैं। वह भी किसलिए? अपने भतीजे राज ठाकरे की बढ़ती राजनीतिक ताकत को रोकने के लिए! ताकि उनके वारिस उद्धव ठाकरे को चुनौती देने वाला कोई न रहे। दूसरे शब्दों में भतीजे राज ठाकरे इतने ताकतवर न बनें कि पुत्र उद्धव ठाकरे को चुनौती दे सकें। राजनीतिक विरासत का यह नाटक सचमुच दिलचस्प है।

रवि सिंह

क्या ये जिन्दगी है! कैसी बेबसी है…



किससे बात करें

alok


एक काम जो बरसों से होता रहा है, पर इधर कुछ ठप सा पड़ा हुआ है, वह है भारत पाकिस्तान की शांति वार्ता। जितनी भी हुई, उसमें शांति कम थी, वार्ता अधिक थी। पर अब वह भी नहीं है। सवाल यह उठता है कि पाकिस्तान में वार्ता किससे की जाये ।

1- क्या राष्ट्रपति जरदारीजी से बात की जा सकती है। पाकिस्तान में पब्लिक का मानना है कि जरदारीजी से की जा सकती है, अगर बात नान सीरियस हो तो। पर भारत पाक शांति वार्ता नान सीरियस बात नहीं है। इसलिए जरदारीजी से बात करना बेकार है। जरदारी के मामले में एक बात और कही जाती है कि जरदारीजी को कोई सीरियसली नहीं लेता, खुद जरदारीजी भी खुद को सीरियसली नहीं लेते।

अन्त में आज का कार्टून
Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून

कार्टून:- कस्तूरी कुंडलि बसे, मृग ढूंढ़े वन माहिं...Twitter Twitter

आज के लिए बस इतना ही…..!
नमस्ते!

12 comments:

  1. चिट्ठा जगत का लॉगिन और पसंद बटन अभी भी काम नहीं कर रहा है !!

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  2. c hitthajagat vapas aa gaya achchhi khush khabari.
    bhagyodyorganic@spotblog.com

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  3. बहुत अच्छी चर्चा।
    आपको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  4. यह यमुना तो मैंने सबके लिए तलाशी है
    मेरे पास तो दिल्‍ली जल बोर्ड का पानी है
    बनारस वालों को जरूरत नहीं वहां काशी है
    बैंक वालों को करना क्‍या है वहां राशि है।

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  5. waah ...........bahut hi sundar charcha.

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  6. बहुत बढ़िया चित्र सहित चर्चा बधाई ..

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  7. कुछ दिन बाद सक्रिय हो रहा हूँ , आपकी सक्रियता से सबक ले रहा हूँ । बेहतरीन चर्चा । कलेवर भी जम रहा है । आभार ।

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  8. बहुत अच्छे ढंग से सजायी गयी चर्चा. साधुवाद!! एवं धन्यवाद!!

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