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Sunday, January 03, 2010

आईना और मेरा अक़्स "चर्चा मंच"-ललित शर्मा


"चर्चा मंच" अंक-18
चर्चाकारः ललित शर्मा
कल बाबाजी के ब्लॉग पर काफी बढ़िया संवाद हुए, बाबा लंगोटा नन्द जी हास्य व्यंग से पूर्ण समाधान देने को ब्लॉग जगत में आये हैं. चलिए चर्चा प्रारंभ करते हैं आज रविवार है, आप भी मजे से चर्चा का आनंद लीजिये.

प्राथमिक विद्यालय, बिहार का विकास , सच या झूठ (ग्राम प्रवास -३ )जैसा कि पिछली पोस्टों में भी कह चुका हूं कि इस बार ग्राम प्रवास के दौरान जिस बात की सबसे अधिक जिज्ञासा थी वो बात थी बिहार में बह रही विकास की बयार को महसूस करना । क्योंकि इधर कुछ समय से बिहार के प्रगति पथ पर लौटने की कई सारी बातें सुनता आ रहा था ।

पान की दुकान पर एक नाटक जो लिखा नहीं गया ! "शठ को कोटि प्रणाम्!" का  मंचन हुआ आप भी देखे, कोई टिकिट नहीं लगी है. सब कुछ फ्री में है."आज पान की दुकान पर संजीव तिवारी जी का ड्यूटी था लेकिन वह अपने उकिली काम से कहीं फँस गए तो क्या  करें हम पान की दुकान पर बैठ के चुना लगा रहे थे. तभी महेंद्र मिश्रा जी आ गए!हमने कहा......."पाय लगी मिसिर जी, आज कैसे विलम्ब हो गया? हम तो आपका पान लगा कर

  नर्क में भी जगह नहीं मिली  बता रही हैं हास्यफुहार  अब क्यों नहीं मिली तो वहीं जा कर देखन पड़ेगा. एक कवि जी का इंतकाल हो गया। इष्ट मित्रों ने, उनकी शवयात्रा निकले उसके पहले उनके सम्मान में एक लघु कवि गोष्ठी का आयोजन कर डाला। अभी उनके सम्मान में रचानाओं का वाचन हो ही रहा था कि कवि जी के शव में हलचल हुई 


गुजरे साल में मिले कई ब्लागर मित्र और आपको भी उनसे मिलवा रहे हैं राजतन्त्र पर राजकुमार ग्वालानी जी,  हमारे लिए गुजारा साल कई मायने में महत्वपूर्ण रहा। एक तो हमने इसी साल ब्लाग जगत में कदम रखा और इस पहले ही साल में हमारी मुलाकात कई ब्लागर मित्रों से हुई। जिन मित्रों से मुलाकात हुई उनमें जहां कई दिग्गज ब्लागर शामिल हैं, वहीं फोन पर ब्लाग बिरादरी के बिग-बी समीरलाल जी से भी चर्चा हुई। फोन पर और भी कुछ मित्रों से रूबरू होने का मौका मिला।

गोदियाल जी अंधड़ ! पे कह रहे हैं पापों को धोने की ठान ही ली है तो ज़रा सावधानी से !आज हरिद्वार कुम्भ के बाबत एक लम्बी-चौड़ी पोस्ट लिखी थी, लेकिन वह Google Transliteration की भेंट चढ़ गई ! अब दोबारा लिखने का मूड नहीं ! बस पाठको से संक्षेप में इतना ही कहूंगा कि १३ जनवरी से शुरू हो रहे कुम्भ में जाने का प्लान अगर आप बना रहे है तो कृपया; आप भी सुन लीजिये

रमेश शर्मा जी दे रहे हैं यायावर पर खबर नक्सलियों का बरपा है फिर कहर नक्सलियों ने पूरे साल सबको थर्राया २००९ छत्तीसगढ़ में पूरे साल हादसों और नक्सली मोर्चे पर भारी नरसंहार और आतंक के फैलाव के काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गया | कोरबा
में बालको-वेदांता के निर्माणाधीन बिजलीघर की चिमनी ढह जाने से ५० से ज्यादा लोग मारे गए वहीं राज्य में नक्सलियों के हौसले इस साल इतने क्रूर हुए कि उन्होंने अंधाधुंध गोलीबारी करके राजनांदगाँव के पुलिस अधीक्षक विनोद चौबे समेत 30 पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतार दिया |वैसे अब तक राज्य में 250 से ज्यादा लोग नक्सली हादसों में मारे जा चुके हैं|

टिप्पणियों Comments के बदले बधाई व शुभकामनाएँ? ऐसा कैसे हो गया!! बता रहे हैं बी.एस. पावला जी. तकनीकि का इस्तेमाल कीजिये. टिप्पणियों से हालांकि आए दिन बवाल मचा रहता है, किन्तु टिप्पणियों के सम्पर्क में रहने हेतु कुछ व्यवहारिककुछ तकनीकी बातों से लाभ उठाने वाले पाठकों ने इसकी परवाह नहीं की है। इस बार जब मैंने हिन्दी ब्लॉगरों के जनमदिन वाले ब्लॉग का टेम्पलेट बदला तो ख्याल आया कि अलग अलग तरह के ब्लॉगों में कई बार रूखे-सूखे से दिखने वाले टिप्पणी लिंक को अपने मनमुताबिक शब्दों से बदलने की तकनीक के बारे में कई पाठकों ने जानना चाहा है।
राजीव तनेजा जी  कह रहे हैं मंत्री जी, प्रणाम और मंतरी जी बन गए हैं संतरी सुनिए इनकी भी कहानी. आपके चौसठवें जन्मदिवस पर आपके दीर्घायु होने की कामना करने के साथ-साथ हम उस ऊपरवाले... परवरदिगार का भी शुक्रिया अदा करना चाहते हैँ जिसने आपको इतना नेक...इतना सहनशील एवं प्रगतिशील विचारों का जनक बनाया...आपकी छत्रछाया में हमारे इलाके का जो चहोमुखी विकास हुआ है ..उसके लिए हम सदैव आपके आभारी रहेंगे
"जन्म दिन का केक बिटिया ने काटा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

कल 1 जनवरी को

मेरी पुत्र-वधु श्रीमती कविता का जन्म दिन था

लेकिन मेरी 6 वर्षीया पौत्री कु0 प्राची

मिष्ठान केक काटने की जिद करने लगी।

और मम्मी का केक बिटिया ने काटा।



Science Bloggers' Association

वो आसमान से मौत बनके बरसेगी। -सलीम खान - लोककथाओं में ही नहीं अनेक किवदंतियों में भी आसमान से ईश्वर का क़हर बरसने के किस्से प्राचीन काल से चले आ रहे हैं। हालाँकि इन कथाओं को हमेशा शक की निगाह से देख...



ताऊ डॉट इन

ताऊ पहेली -55 - प्रिय बहणों और भाईयों, भतिजो और भतीजियों सबको शनिवार सबेरे की घणी राम राम. ताऊ पहेली *अंक 55 *में मैं ताऊ रामपुरिया, सह आयोजक सु. अल्पना वर्मा के साथ आपका ...



उच्चारण

“लुटेरे ओढ़ पीताम्बर लगे खाने-कमाने में” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”) - *मुखौटे राम के पहने हुए रावण जमाने में। * *लुटेरे ओढ़ पीताम्बर लगे खाने-कमाने में।।* *दया के द्वार पर, बैठे हुए हैं लोभ के पहरे, * *मिटी सम्वेदना सारी, मनु...



. ... ... हार्दिक शुभकामनाएँ!
नए साल का सुहाना मौसम चल रहा है!
शुभकामनाएँ देने का सिलसिला जारी है -
…………………………………
सभी के पास समय की कमी है!
समझ में तो ये सभी ढंग आ रहे हैं,
पर समय हो, तो आइए तलाश करें -
इनमें से कौन-कौन से सही हैं और कितने?

दिनेश राय दिवेदी जी पहुँच गए हैं चांदनी चौक से इंडिया गेट पराठा गली में प्रवेश के पहले हम चांदनी चौक की मुख्य सड़क से गुजरे तो वह ट्रेफिक विहीन थी, और अधिकांश दुकानें बंद थीं। वह सोमवार का दिन था, दुकानें खुली हुई होनी चाहिए थीं। गौर किया तो पता लगा कि जितनी भी ज्वेलरी और सोने-चांदी के व्यवसाय से संबद्ध दुकानें

राज भाटिया जी लाये हैं राज !! अगले जन्म का?? भाग ३ नमस्कार, आप सभी का स्वागत है हमारे इस अति सुंदर स्टुडियो मै, मै बेकार कुमार, ओर मेरे साथी डा, झटका जी आप सभी को हाथ जोड कर अभिनंदन करते है.....आज हमारे स्टुडियो मै हमारे मेहमान है..... सेठ कुडा मल जी, यह शहर के बहुत बडी जान मानी हस्ती है,यह गर्म मसालो, 

अदा जी कह रही हैं मेरे घर की उखड़ी साँस उजड़ा छप्पर टूटी बाँस मेरे घर की उखड़ी साँसयादें सूखीं पपड़ी भयींकहीं फँसी है दर्द की फाँसलोग कहाँ हैं बस्ती सूनी घर में उग आई है काँसमौत कभी कुंडा खडकाए मुश्किल हो जाए लेना साँसचलो,अब चलती है जी 'अदा' दो गज कपड़ा लाओ बाँस


स्वधर्म-पालन 'इन देवदारु वृक्षों की रक्षा के लिए मै यहाँ स्वयं भगवान् पशुपतिनाथ द्वारा नियुक्त हूँ | आज सात दिनों की प्रबल भूख के पश्चात् मुझे यह गाय स्वयं प्राप्त-भजन के रूप में मिली है | तुम्हारे लिए गाय कुछ भी हो किन्तु मेरे लिए तो मेरा केवल भोज्य पदार्थ ही है |

 चलते-चलते

आईना और मेरा अक़्स -कविता है मस्त 



ब्लोगर सम्मान 2009 अब तीन लोगों को मिलेगा, वोटिंग के लिए स्वयं को तुरन्त रजिस्टर कीजिये...  अलबेला खत्री जी कर रहे हैं  ब्लागरों का सम्मान. आप भी वोट कीजिए श्रीमान .

चिटठा चर्चा" अर्थात वैयक्तिक कुंठाओं की वमन थैली का मुँह बन्द क्यों है भाई ? खोलो तो हम भी थोड़ा सा थूक लें.  ये क्या हो रहा है भाई.........................


अनुप शुक्ला फुरसतिया, कितने अजीब हो तुम। कह रहे हैं.स्वार्थी जी अपनी कलम से - आप भी देखिये कलम की धार

बस चर्चा को यही देते हैं विराम- आप सभी को रविवार की राम-राम 
ललित शर्मा 


10 comments:

  1. अरे वाह!...इहाँ तो हमरे ब्लॉग का लिंक भी दिख गया...

    बढिया चिट्ठा चर्चा

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  2. बहुत ही मस्त चर्चा है. शुभकामनएं.

    रामराम.

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  3. बने सुघ्घर चरचा करे हस महराज!

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  4. हूँ..हमारे ब्लाग का लिंक तो है ही नहीं(:
    लेकिन फिर भी चर्चा बढिया रही :)

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  5. बच्चा ललित, कल्याण हो ! आज लंगोटा नंद को मात्र एक लाइन की चर्चा में निपटा डाला.. चलो कोई बात नहीं, तुम हमारे परम शिष्य हो,
    बहुमूल्य समय निकालकर तुम्हारे ब्लॉग पर आ गए !

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  6. ललित जी, बहुत उम्दा और बेहतरीन चर्चा !

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