Followers

Wednesday, January 06, 2010

ब्लॉग और ब्लागर भी हो गए शिकार- "चर्चा मंच"

चर्चा मच-अंक-21
चर्चा कार-ललित शर्मा

सभी को नमस्कार-ठंड कड़ाके की पड़ रही है। देश मे कई जगह पर भीषण ठड के कारण कई लोग अपने प्राण गंवा बैठे हैं। इसका असर ब्लाग जगत पर भी दिख रहा है। यहाँ पर भी अलबेला खत्री जी की योजना पर पाला पड़ चुका है। उन्होने ब्लागर सम्मान 2009 स्थगित कर दिया है अब क्यों किया है इसके बारे मे उन्होने जानकारी दी है। चलिए चर्चा पर आगे बढते है
लो जी ! इस प्रकार एक बुढ़िया बचपन में 1ही मर गई .....
परसों से अब तक कोई 200 फोन आ चुके हैं कुछ परिचित ब्लोगरों के, कुछ अपरिचित ब्लोगरों के........सब का एक ही कहना है कि सम्मान समारोह करके वाद-विवाद को हवा मत दो, देना है तो जिसका नाम हम बताएं उसको दो, फलां को दिया गया तो ठीक नहीं होगा, फलां को दिया गया तो फलां फलां को भी देना पड़ेगा, कुछ लोगों का साफ़ साफ़ कहना है कि हम ब्लोगरी में पैसे का
आगमन करके इसे भ्रष्ट नहीं करना चाहते इसलिए केवल शाल-श्रीफल से ही सम्मानित करो और रुपया खर्च करना ही है तो ब्लोगरों को सपरिवार बुला कर एक पिकनिक करो ताकि सब मिलजुल कर एन्जॉय कर सकें...........वगैरह वगैरह – इस वगैरह वगैरह में वे धमकियां शामिल हैं जो उन्होंने दी कि यदि तुमने अपनी मन मर्ज़ी से आयोजन किया तो बेटा ! कभी  हमारे शहर में मत आना, वर्ना हुलिया बिगाड़ देंगे ..
फ़र्रुखाबादी विजेता (161) : रेखा प्रहलाद
ताऊ रामपुरिया  ताऊजी डॉट कॉम -गया
नमस्कार बह

नों और भाईयो. रामप्यारी पहेली कमेटी की तरफ़ से मैं समीरलाल "समीर" यानि कि "उडनतश्तरी" फ़र्रुखाबादी सवाल का जवाब देने के लिये आचार्यश्री यानि कि हीरामन "अंकशाश्त्री" जी को निमंत्रित करता हूं कि वो...
दोस्त बन बन के सताने वाले 

दोस्त बन बन के सताने वाले
अब तरसते है मेरे बाद ज़माने वाले
आज वो हाल पूछ बैठे मेरा
आज फिर ज़ख्म उभर आए पुराने वाले
आज फिर चैन में खलल सा है
सपनों में आने लगे चैन चुराने वाले
तेरी दस्तक का मुझे इंतजार आज भी है
बेकली में मुझे ऐ छोड़ के जाने वाले
'हैप्पी अभिनंदन' में समीर लाल "समीर"

युवा सोच युवा खयालात
जिस शख्सियत से आप आज रूबरू होने जा रहे हैं, वो शख्सियत उन लोगों के लिए किसी प्रेरणास्रोत से कम न होगी, जो लकीर के फकीर हुए फिरते हैं। भगवान ने हर व्यक्ति को किसी न किसी कला से नवाजा है, लेकिन लकीर के फकीर...
क्या कोई ब्राम्हण उफ अल्ला कह सकता है?

  Rajkumr Prins      राजकुमार ग्वालानी राजतन्त्र पर -
आप लोगों को लगता है कि कोई ब्राम्हण जाने-अंजाने में कभी उफ अल्ला कह सकता है। जिस तरह से हिन्दुओं के मुंह से किसी भी अच्छी या बुरी बात पर हे भगवान निकलता है, ठीक उसी तरह से किसी मुस्लिम भाई के मुंह के या अ...
अमेरीकी पति सोना और भारतीhasya fuharय पति चांदी
आज का सवाल है। बेहद महत्वपूर्ण सवाल !
सवाल ये है कि अमेरीकी पति सोना और भारतीय पति चांदी क्यूँ होते हैं ?
और जवाब है, भैय्या विज्ञान का ज़माना है।
अमेरीकी औरत अपने पति को "Au" कह कर बुलाती हैं और भारतीय महिलायें अपने पति को "Ag"कह कर। और विज्ञान कहता है Au- सोना और Ag-चांदी है।
हा....हा...हा.... !!!
shabanm khan अन्जाम-ए-मौहोब्बत
शबनम खान  क्योंकि मैं झूठ नहीं बोलती...... – पर -
होठो की मुस्कुराहट *दिल में न उतर पायी* *तुझे खुद से दूर कर दिया* *पर खुद दूर न हो पाई....* * * *ये कैसा इम्तेहा है* *ये कैसी मजबूरियाँ* *सब कुछ कह दिया* *पर कुछ भी न कह पायी* * * *अंधेरो में तलाशा तुझे* *उ...
सायबर क्राइम :मेरी आई डी का दुरूपयोग
DSC04487 आज अचानक भोपाल में विभागीय मीटिंग के समय एक +918040932451  से प्राप्त सन्देश का कुछ इस प्रकार था मैं बैंगलोर से बोल रहा हूँ आपके पास ढ़ेड़ करोड़ इ-मेल आई०डी० हैं इस आशय का मेल मुझे मिल गया है मेल के ज़रिये मिले आई डी पर मैंने मेल भेजी है . आपका  उत्तर न मिला इस लिए फोन कर रहा हूँ ?अचानक आए इस फोन का अर्थ अभी तक मुझे समझ न आया लेकिन इस भय से कि फोन करने वाले व्यक्ति किसी साजिश के शिकार  न हों अतएव उनको फ़ौरन sms करके बताया कि यह मेल मेरे आई डी से मेरे द्वारा नहीं किया है ! मित्रों इस घटना का अर्थ जानने की कोशिश कर रहा हूँ
वेब होस्टिंग व्यवसाय
संचार के बढ़ते साधनों के साथ साथ इन्टरनेट का भी तेजी से प्रसार हो रहा है आज गांवों तक में इंटरनेट दस्तक दे चुकी है | इन्टरनेट के बढ़ते प्रसार को देख हर व्यवसायिक प्रतिष्ठान अपनी वेब साईट बनाकर इन्टरनेट पर अपनी उपस्थिति चाहता है | किसी भी उत्पाद के प्रचार प्रसार के लिए आजकल ज्यादातर उत्पादक इन्टरनेट पर विज्ञापनों का सहारा ले रहे है | व्यासायिक प्रतिष्ठानों के साथ साथ लोगों में अपनी अपनी वेब साईट बनाने का रुझान भी बढ़ता जा रहा | इन्टरनेट पर उपलब्ध फ्री ओपन सोर्स वेब स्क्रिप्ट , फोरम स्क्रिप्ट , ब्लोगिंग स्क्रिप्ट , ई कामर्स वेब स्क्रिप्ट व वेब साईट बनाने वाले ऑनलाइन व ऑफलाइन सोफ्टवेयर्स ने वेब साईट बनाना आसान व सस्ता कर दिया है जिससे वेब साईट्स बनाने के कार्य को और गति मिली है |जिस तरह से इन्टरनेट पर अपनी अपनी वेब साईट बनाने का रुझान बढ़ा है उसी अनुरूप वेब होस्टिंग सेवा प्रदाताओं का व्यवसाय भी बढ़ा है और आगे भी इसके बढ़ते रहने के भरपूर अवसर है | आज इन्टरनेट पर हजारों वेब साइट्स है जो वेब होस्टिंग का अच्छा व्यवसाय कर रही है |
हिंदी की सेवा, विदाऊट ऐनी मेवा.....नो वे जी , नो वे ajay-kumar-jha

इस दुनिया में निंदक नियरे राखिए टाईप मेरे दो ही दोस्त हैं, नहीं नहीं ऐसा नहीं है कि दोस्त नहीं हैं, या कि निंदा नहीं करते, बस ये है कि वे सब नियरे नहीं हैं ,,,,,फ़ायरे हैं , अरे यार मतलब फ़ार अवे हैं....बहुत दूर ॥हां तो वो दोनों दोस्त हैं चिट्ठा सिंह और लपटन जी । आजकल चिट्ठासिंग हैप्पी नव वर्ष ,मना रहे हैं सो लपटन जी ही आ धमके । वे भी हमारी तरह ही एक जागरूक ब्लोग प्रेमी हैं । बस हमही को जगाते धकियाते रहते हैं
ब्लॉग और ब्लॉगर भी हो गए शिकार - वही राजनीति , वही उठा पठक ,वही उछाdhiru singड पछाड़ .
.
क्या करु मैं ? दुविधा में हूँ .  मैं जिस दुनिया से भाग कर शांति की तलाश में ब्लॉग की दुनिया में आया वहां पर भी वही सब कुछ हो रहा है . वही राजनीति ,  वही उठा पठक ,वही उछाड पछाड़ . 
अगर इन्ही सब में पिसू या देखू तो इससे अच्छा है अपने टांगे गए हथियारों को थाम फिर निकल पडू क्योकि समर शेष है . और तटस्थ रह कर मै अपराधी नहीं बनना चाहता . 
पश्चिम की नारी “बिच्च” कहा जाने पर गर्व महसूस करती है
भारतीय स्त्रियों ने अपने लिये सोचने का ठेका पश्चिमी नारियों को दे दिया लगता है! उन्ही की तर्ज पर आपको नारीवादी होने के लिये पुरुष-विरोधी होने की जरूरत क्यों पडती है? पश्चिमी नारी नें बराबरी का नारा बुलंद किया - वोट देने का अधिकार, न्याय का अधिकार, समान
चौदहवीं का चांद हो या आफ़ताब हो...

'चौदहवीं का चांद हो या आफ़ताब हो,
जो भी हो तुम ख़ुदा की क़सम लाज़वाब हो '
रवि द्वारा संगीतबद्ध'
फिल्म -'चौदहवीं का चांद हो'
लिखा था शकील बदायुंनी ने .
मेरी पसंद में अभी तक मैने आप को राजा पाहवा,डॉकटर विकास अग्रवाल और सरिता जी की गाये गीत आप को सुनवाए.
आज मैं आप को एक बहुत ही अच्छे गायक और हमारे साथी ब्लॉगर श्री दिलीप कवठेकर जी का गाया गीत प्रस्तुत कर रही हूँ.
270520081468[3]
“वो कुदरत की संरचना को कैसे प्यार करेगा?” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)
जो बहती गंगा मे अपने हाथ नही धो पाया, जीवनरूपी भवसागर को कैसे पार करेगा? जो मानव-चोला धर कर इन्सान नही हो पाया, वो कुदरत की संरचना को कैसे प्यार करेगा? जो लेने का अभिलाषी है, देने में पामर है, जननी-जन्मभूमि का. वो कैसे आभार करेगा? वो कुदरत की संरचना को
चलते-चलते
एक लाईना
2012 में इस दुनिया के अंत की संभावना हकीकत है या भ्रम ??(चौथी और अंतिम कडी)

किस्से और कहानी भी

किसे भिखारी की संज्ञा दें? किसको बोलूँ राजा...,

विश्‍व विटप की डाली पर

बल्ब से भी अधिक चमकीली, धूप जैसी सफेद रोशनी देने वाले कागज़: जहां चाहो चिपका लो

पुराने कागज के चंद टुकड़ो से - "उनकी यादो में,अब हम विरह गीत गाने लगे हैं"

मेरी झूठी जिंदगी की सच्चाई...

काठ का चाँद!!!

संघर्ष विराम हुआ, चलो काम पर चलें ......

हमें अपने देश के परंपरागत ज्ञान को सुरक्षित रखने का प्रयास करना होगा !!

इन भुक्खड़ ब्लॉगरों को पहचानिए: एक पहेली ऐसी भी
फिर एक झोपड़ा बना लिया कल्याण सिंह ने        आज का कार्टुन

ITNI SI BAAT -
अब देते हैं चर्चा को विराम-सभी को राम-राम  !!!

19 comments:

  1. बढ़िया चिट्ठाचर्चा

    ReplyDelete
  2. ललित जी धन्यवाद!
    बढ़िया चर्चा की है!

    ReplyDelete
  3. सुन्दर चर्चा ! धन्यवाद !

    ReplyDelete
  4. बेहतरीन चर्चा जी...क्या जबरदस्त चर्चा कर गये..वाह वाह!!


    ’सकारात्मक सोच के साथ हिन्दी एवं हिन्दी चिट्ठाकारी के प्रचार एवं प्रसार में योगदान दें.’

    -त्रुटियों की तरफ ध्यान दिलाना जरुरी है किन्तु प्रोत्साहन उससे भी अधिक जरुरी है.

    नोबल पुरुस्कार विजेता एन्टोने फ्रान्स का कहना था कि '९०% सीख प्रोत्साहान देता है.'

    कृपया सह-चिट्ठाकारों को प्रोत्साहित करने में न हिचकिचायें.

    -सादर,
    समीर लाल ’समीर’

    ReplyDelete
  5. बहुत अच्छा चर्चा।

    ReplyDelete
  6. वाह बहुत अच्छी चर्चा

    ReplyDelete
  7. ललित जी लाजवाब चर्चा की है आपने. सब विधाओं के माहिर हो आप तो.

    रामराम.

    ReplyDelete
  8. સુંદર ચર્ચા છે... सुंदर चर्चा है ਚੱਕਦੇ! ਫੱਟੇ

    ReplyDelete
  9. बढ़िया चर्चा ,बेहतरीन, Lalitji

    ReplyDelete
  10. बहुत अच्छी चर्चा।

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

"राम तुम बन जाओगे" (चर्चा अंक-2821)

मित्रों! सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...