चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Wednesday, January 27, 2010

“नई बात-हरियाणा के पूर्व प्रधानमंत्री- श्री अटल बिहारी वाजपेयी” (चर्चा मंच)

"चर्चा मंच" अंक-42


चर्चाकारः डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"


आज के "चर्चा मंच" को सजाते हैं-


आप सबको गणतन्त्र-दिवस की बधाई देते हुए-


आज कुछ

गणतन्त्र-दिवस की पोस्ट इस अंक में दिखाता हूँ-

नई बात

SAROKAAR

यह राजपथ है

यह राजपथ
प्रगति पथ
उन्नति पथ
स्वाभिमान पथ
आत्मसम्मान पथ
यह राजपथ
विजय पथ
विकास पथ
अखंडता पथ
संप्रभुता पथ
यह राजपथ……..

A poetess blog
शहीद

अंग्रेजों को भागने का कारण
क्या देश को आजाद कराना था?
नहीं उनके हाथ की रोटी छीन कर...
दो टुकड़ों में बाँट कर खाना था.
दो टुकड़ों को बाँट कर नेता बना दिया,
शहीदों को देश का विजेता बना दिया…

………..
अंग्रेज़ चले गए लेकिन अंग्रेजी विरासत में छोड़ गए

आज गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर भी मस्तिष्क में न जाने क्यूँ एक उलझन है कि आखिर हम अंग्रेजी भाषा के दीवाने क्यों है?मैने बहुत से पुरुषों एवम खासतौर पर महिलाओं को देखा है कि यदि अंग्रेजी में उनकी फीस माफ़ है तो वो ज़रूरत से ज्यादा कोशिश करेगीं इसमें सबसे बड़ा उदहारण ड्रामा कि सरताज राखी सावंत है|…….


सभी देशवासियों को ६१ वे गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं।

सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमाराहम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिसतां हमारा
गुरबत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन मेंसमझो वहीं हमें भी, दिल हो जहाँ हमारा…….

सिर्फ़ ब्लोग्गिंग ही सब कुछ नहीं है , अगली ब्लोगर्स बैठक की घोषणा

आज जब ये पोस्ट लिखने बैठा तो समझ ही नहीं पा रहा था कि लिखूं कैसे और क्या आखिर दो विरोधाभासी बातें एक पोस्ट में ही कहना करना ठीक होगा या नहीं , मगर फ़िर सोचा कि जब है तो है यही बात । और यदि इतना सोच नोच के लिखना होल तो ब्लोग्गिंग की स्वाभाविकता ही कम नहीं हो जाएगी सो जैसा का तैसा ठेल रहा हूं । इससे पहले कि बात को आगे बढाऊं ये बताता चलूं कि कल छत्तीसगढ में हुई ब्लोग्गर्स मीट के लिए सभी शामिल मित्र , …….


नार्वे में गणतंत्र दिवस मनाया गया -सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

नार्वे में गणतंत्र दिवस मनाया गया -सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

भारतीय राजदूत को सम्मानपत्र और पदक दिया गया।

ओस्लो, नार्वे में भारतीय दूतावास में भारतीय गणतंत्र दिवस बहुत धूमधाम से मनाया गया।

भारतीय राजदूत बी ए राय ने ध्वजारोहण किया और राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के राष्ट्र के नाम सन्देश को पढ़ा। सभी भारतीयों ने राष्ट्रगान गाया। इस अवसर पर भारतीय-नार्वेजीय सूचना और सांस्कृतिक फोरम के अध्यक्ष सुरेशचन्द्र शुक्ल…….

राजतन्त्र
दमदार कौन ?

आज छुट्टी का दिन है। घर में खाली बैठे-बैठे बोर हो रहे हैं तो ऐसे में हमें दो दोस्तों का एक किस्सा याद आ गया। इस किस्से को यहां बताकर हम जानना चाहते हैं कि इनमें वास्तव में दमदार कौन है।
बात दरअसल यह है कि दो दोस्त रहते हैं। एक दोस्त काफी पहले पीएससी की परीक्षा देते हैं। जब वे परीक्षा देते हैं तब उस समय परीक्षा में बमुश्किल 500 परीक्षार्थी शामिल होते हैं। ऐसे में उन महाशय का नंबर किसी भी तरह से पहले 100 में आ जाता है। इसके बाद दूसरे दोस्त की बारी आती है…….


खून की नदियां बहाना डेमोक्रेटिक और उनके समर्थकों का विरोध करने वाले अनडेमोक्रेटिक,वाट ए क्लासीफ़िकेशन सर जी!

कल एक फ़ोन आया।उधर जो विद्वान थे उन्होने बिना किसी औपचारिकता के रायपुर प्रेस कलब को अनडेमोक्रेटिक ठहरा दिया।कारण रायपुर प्रेस क्लब की बैठक मे लिया गया फ़ैसला था,जिसमे बाहर से आकर स्थानीय मीडिया को बिकाऊ और गैर ज़िम्मेदार कहने वालों का विरोध किया गया था।बैठक मे ये फ़ैसला भी लिया गया था कि ऐसे लोगों को और उनके समर्थकों को प्रेस क्लब अपना मंच नही

देगा।बस यही उन्हे नागवार गुज़रा।इसे उन्होने सीधे-सीधे अभिव्यक्ति पर हमला समझा और लगे ज़िरह करने।जिस तरह से वे ज़िरह कर रहे थे ऐसा लगता है कि वे स्वतंत्र या निष्पक्ष न हो कर उन लोगों के पैरवीकार हो जो बस्तर के हरी-भरी वादियों को खून से लाल क रहे हों।मुझे ये समझ नही आया कि घर मे घुस कर बेवज़ह बिना किसी ठोस आधार के हम सब लोगों को कोई अगर बिकाऊ कहता है तो उसका विरोध करना अनडेमोक्रेटिक कैसे हो गया?या फ़िर हमारे प्रदेश मे खून की होली खेलने वालों के पक्ष मे कांट्रेक्ट पर रोने वाले रूदाली डेमोक्रेट कैसे हो गये?जिनका डेमोक्रेसी पर विश्वास ही नही है,जो बंदूक की नोक पर या खूनी क्रांति के जरिये सत्ता हासिल करना चाहते हैं,उनका समर्थन करना डेमोक्रेटिक कैसे है?ऐसे लोगों को जो डेमोक्रेसी पर विश्वास नही करते,का विरोध अनडेमोक्रेटिक कैसे हो सकता है?……………………

ऐ गणतंत्र तुझे सलाम!

आज़ाद भारत के ६१ वे गणतंत्र के दिन मुझे इकबाल की कुछपंक्तियाँ याद आ रही हैं जो हिंदुस्तान के इतिहास मेंस्वरानाक्षरों मेंकही जाती हैं।

सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा
हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिसतां हमारा

गुरबत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में
समझो वहीं हमें भी, दिल हो जहाँ हमारा……



मध्यप्रदेश राजपथ से फिर गायब

भले ही मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आज अमरकंटक में आओ बनाएं अपना मप्र यात्रा शुरू कर रहे हों और वे राष्ट्रीय खेल हॉकी की दुर्दशा की भी चिंता कर रहे हैं लेकिन राष्ट्रीय गणतंत्र दिवस समारोह में लगातार दूसरी बार मप्र की झांकी शामिल नहीं हुई है। राजपथ पर हृदयप्रदेश की झांकी नहीं होने के बीच जिम्मेदार अफसरों की लापरवाही उजागर होती है। सूत्रों के मुताबिक पिछले साल की तरह इस साल भी करीब 15 लाख रुपए लैप्स हो जाएंगे, जो राजपथ पर शानदार झांकी के लिए खर्च किए जाना थे।………


चीत्कार उठी भारत माता


सर उठा रहा भुजंग है
क्रोध, रोष, दंभ है
बेबस है लाल भूमि के
शत्रु हो रहा दबंग है
फलफूल रहा आतंक है
और सो रहा मनुष्य है
अपनी ही माँ की छाती पर
वो उडेल रहा रक्त है
जिन चक्षु में था नेह भरा

वो पीडा से आज बंद हैं……..

आरंभ Aarambha


रायपुर हिन्दी ब्लागर्स परिचय मिलन और चिट्ठा चर्चा विवाद के पार्श्व से
छत्तीसगढ के रायपुर में प्रदेश के हिन्दी ब्लॉगरों का परिचय मिलन की चित्रमय खबरें आप पिछले दिनों से छत्तीसगढ के ब्लॉगरों के पोस्टों में देख रहे हैं. आपकी सार्थक प्रतिक्रिया भी टिप्पणियों के माध्यम से वहां दर्शित हो रही है और हिन्दी ब्लागिंग के विकास……

JHALLI KALAM SE


एक कांग्रेसी

ओये झ्ल्लेया हसाड़े सोणे ते मज़बूत ६१वे गणतंत्र दी लख लख वधाइयां+मुबारकां+कान्ग्रेचुलेशना…..


2008 में गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ पर हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत की झांकी निकली थी !!
दो वर्ष पहले गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ पर हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत की झांकी निकली थी , उसकी रिपोर्ट मैने बनायी थी ,जो आज आपके लिए पुन: प्रेषित कर रही हूं


..........इंडिया गेट न्यूज से अजय सेतियाजी की खबर है कि आज गणतंत्र दिवस के मौके पर………


मत हवा दो
भड़कती चिंगारीधधकता ज्वालामुखीहर सीने में हैमत हवा दोचिंगारी गर शोला बन जाएगीकहर बन बरस जाएगीज्वालामुखी गर जो फट जायेगासैलाब इक ले आएगामत हवा दोहवा का रुखज़रा तो देखा करोकुछ तो सोचासमझा करोमत आदमी केसब्र का इम्तिहान लोगर एक बारआदमी , आदमी बन गयाशोलो को………

bhartimayankpaheli17

“रविवासरीय साप्ताहिक पहेली-17 का उत्तर” (अमर भारती) - *र**विवासरीय साप्ताहिक पहेली-17 का सही उत्तर है-** उत्तराखण्ड विधान सभा, देहरादून [image: paheli 17] पहेली के विजेता हैं श्री समीर लाल जी Udan Tashtari...

हिन्दी साहित्य संगम जबलपुर

दोहा श्रृंखला (दोहा क्रमांक ८१) - *नियम तोड़ना जब बनी,* *आज हमारी शान। * ** *क्या? कहलाता है यही,* *संविधान का मान॥ * * * *- विजय तिवारी " किसलय " *

Hindi Tech Blog

दो एक्स्प्लोरर एक साथ - आपके विंडोज एक्स्प्लोरर का एक बेहतर विकल्प जी आपको एक साथ दो एक्स्प्लोरर उपयोग करने की सुविधा देता है । अब आप ज्यादा आसानी से अपने फाइल और फोल्डर को कॉपी..

GULDASTE - E - SHAYARI

- वीरों ने जो किया वतन के लिए कुर्बान, आज हम फिर से याद करें उनकी बलिदान, लाखों कुर्बानियों से मिली हमें आज़ादी, आओ मिलकर हम रोके देश की बर्बादी !

भारतीय नागरिक - Indian Citizen

एक चित्र पहेली मेरी तरफ से भी. - आप लोगों के लिये एक बड़ी आसान चित्र पहेली दे रहा हूं, देखिये और बताइये. आपको अपने शब्दों में इस चित्र को देखकर बताना है कि इस पहेली का क्या अर्थ है. एक मि...

पल्लवी

"तब और अब" (श्रीमती रजनी माहर) - *(श्रीमती रजनी माहर) तब रुपये किलो था * *आटा, अब है * *कितना घाटा, नानी संग * *जाती बाजार, नौ रुपये किलो था * *अनार, एक रुपये में * *दो किलो ज्वार, गेहूँ ..

ललितडॉटकॉम

गणतंत्र दिवस की झलकियां-गाँव की सुबह के साथ(ललित शर्मा) - आज २६ जनवरी है. जिसे हम गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं. गांव, गली, मोहल्ले, कसबे, शहर सभी जगह तिरंगा झंडा फहराया जाता है. हमारे गांव में भी गणतंत्र दि...

बगीची

हिन्‍दी ब्‍लॉगर को पद्म पुरस्‍कार (अविनाश वाचस्‍पति) - क्‍या कोहरा कभी छंटेगा और उससे देश को दिखेगा हिन्‍दी ब्‍लॉगर कोई जिसे दे सकें वे पद्म पुरस्‍कार कोई श्री,श्रीमती,सुश्री भूषण, आभूषण,विभूषण। सब चाहेंगे उसे ...

शब्द-शिखर

गणतंत्र दिवस की बधाईयाँ -

*!! गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाईयाँ !!*

कुछ इधर की, कुछ उधर की

चिट्ठाकारों के लिए एक नायाब नुस्खा!!!!!!!!!!!!!!!!!! - कुछ दिनों पहले हमने अपनी एक पोस्ट के जरिए आप लोगों से चिट्ठाकारी करने के उदेश्यों के बारे में जानना चाहा था। जिसमें आप सब लोगों नें अपने अपने उदेश्यों को .

अपनी बात...

सारे जहाँ से अच्छा.... - [image: गणतंत्र दिवस] आज गणतंत्र दिवस है. इधर विद्यालय में बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रिहर्सल चल रही थी, और ..

एक बूँद

नमक रोटी - "जसुमति नंदन रोटी खावे, भीम रे जैसो बड्को होवे" "क्या माँ...तू रोज़ एक ही बात कहे है.." मुझे नी खानी सूखी रोटी- अचार...... ..


पराया देश

ब्लांगर टंकी का उदघाटन... - गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाओ साहित हाजिर हुं आप सब को आज इस दिन की बहुत बहुत बधाई, ओर हमे उन सभी शहीदो का धन्यवाद करना चाहिये, जिन्होने इन गोरो को ई..

"हिन्दी भारत"

गणतंत्र के अक्षुण रहने व समर्थ बनने/ बनाने हेतु - !!भारत के सभी वीरगति पाए महानायकों व संस्कृति पुरुषों की स्मृति !! को !! विनम्र प्रणाम !! गणतंत्र दिवस पर भारतीय गणतंत्र के अक्षुण रहने व समर्थ ब..


Gyanvani

पिता के साथ बिताये आखिरी ३ दिन ...पिता की याद - पिताजी को गुजरे आज १२ वर्ष हो गए ...मगर जेहन में उनके साथ बिताये आखिरी तीन दिन हमेशा की तरह ताज़ा ही हैं ... माँ के घर उपरी मंजिल का निर्माण कार्य चल रहा था..

शिल्पकार के मुख से

जागो मेरे प्यारे धरती पुत्रों -अपना लक्ष्य संधान करो-गणतंत्र दिवस - जागो मेरे प्यारे धरती पुत्रों तुम राष्ट्र हित में कुछ काम करो गणतंत्र दिवस की पावन बेला में देश हित में कुछ संकल्प करो भीष्म प्रतिज्ञा बिना नही देखो होत...


नन्हा मन

राष्ट्र प्रहरी - राष्ट्र के प्रहरी सजग सतत सीमा पर सजग हाथ में हथियार है वार को तैयार है । शत्रु पर आँखें टिकी सांस आहट पर रुकी सीमा न लांघ पाये दुश्मन न भाग पाये । ठंड ह..

मयंक

"गणतन्त्र दिवस अमर रहे!" - *गणतन्त्र दिवस अमर रहे! * हमारी एकता जिन्दाबाद! [image: WaqifMosqueDaytime copy] नया वर्ष स्वागत करता है,पहन नया परिधान ।..


देशनामा

गणतंत्र बना सीनियर सिटीजन...खुशदीप - साठ साल का हो गया हमारा गणतंत्र...साठ साल की उम्र में नौकरीपेशा इंसान रिटायर हो जाता है...लेकिन हमारा गणतंत्र तो अभी सही ढंग से जवान भी नहीं हुआ...26 जनवरी..

सफ़ेद घर

देश की तिकोनी चौकोनी कटी दरारों के बीच की बरफी पर गदहे घूम रहे हैं, बकरीयां उछल-कूद कर रही हैं। कौए सीपियों में खाना ढूँढ रहे हैं। - अब वे दिन सपने हुए हैं कि जब सुबह पहर दिन चढे तक ..

चिंतन मेरे मन का

मेरी आँखो मे बसते है सपने - मेरी आँखो मे बसते है सपने कब तक सच होंगे मेरे सपने सभी कहते है सब मेरे अपने बताते है वो ये पराये ये अपने लगते हैं इस देश में सब पराये जीने मरने का भेद ..


मानसी

मां-बाबा- आज तुम्हारे लिये- रवीन्द्र संगीत - एक पूरी ज़िंदगी के कुछ लम्हों को जी लेना ही कितना मुश्किल होता है, वहीं आज एक बहुत प्यारे जोड़े ने ऐसे कई सुनहरे लम्हों को साथ गुज़ारते हुये *अपनी सुनहरी वर्ष...

खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी (183) : आयोजक उडनतश्तरी
बहनों और भाईयों, मैं उडनतश्तरी इस फ़र्रुखाबादी खेल में आप सबका आयोजक के बतौर हार्दिक स्वागत करता हूं.

नीचे का चित्र देखिये और बताईये कि ये क्या है?

अनुनाद

व्योमेश शुक्ल की एक कविता - *राजदूत* थकी हुई और चुप उपेक्षा के बरामदे में वह खड़ी है अपने रोज़ मद्धिम होते कालेपन में जैसे कहती हुई बहुत साथ दिया तुम्हारा अब बस मुझे यहीं खड़े-खड़े पुर्जा..

अज़दक

रोज़ का किस्‍सा.. - *खुद से बचाकर* रोज़ लिखोगी फिर वही नाम, रोज़ मिटाओगी.* मुझसे कहोगी* का सवाल कहां उठेगा जब खुदी से इतना छिपाओगी. मैं अचानक पुरानी फटी कमीज़-सा फड़फड़ाऊंगा...

अमीर धरती गरीब लोग

खून की नदियां बहाना डेमोक्रेटिक और उनके समर्थकों का विरोध करने वाले अनडेमोक्रेटिक,वाट ए क्लासीफ़िकेशन सर जी! - कल एक फ़ोन आया।उधर जो विद्वान थे उन्होने बिना किसी औपचारिकता के रायपुर प्रेस कलब को अनडेमोक्रेटिक ठहरा ..

आवारा बंजारा

कथन: विनीत, राजकुमार ग्वालानी, अनूप शुक्ल और झा जी के - आइए कुछ बात करें अब छत्तीसगढ़ ब्लॉगर मीट की रपट पर मिली टिप्पणियों पर। इनमें सबसे खास ध्यान देने लायक हैं ...


मोहल्ला

गणतंत्र : जानना चाहेंगे तो चले आइए यहां - गणतंत्र की मिसाल देखनी हो तो राजस्थान के झुंझुनूं जिले में चले आइए। जयपुर से 146 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बलवंतपुरा-चैलासी रेलवे स्टेशन। यह स्टेशन जन प्रय...

अनवरत

एक गीत, तीन रंग .... - आम तौर पर संगीत सुनने का कम ही समय मिलता है। आते जाते कार में जब प्लेयर बजता है तो सुनाई देता है, या फिर देर रात को काम करते हुए कंप्यूटर पर। मुझे सभी तरह ...

Darvaar दरवार

६० साल के संविधान में ९४ पैबंद - *६० साल के संविधान में ९४ पैबंद . यानी कपड़ा तार तार हो चुका लेकिनपैबंद से गणतंत्र ढका सा है .समय समय पर अपने हिसाब से तोड़ मरोड़ कर संविधान का मज़ाक सा ब...

लिखो यहाँ वहां

उनकी टोपी इनके सिर - ** *अरविंद शेखर * कहते हैं संस्कृति की कोई सरहद नहीं होती। सच भी है, क्योंकि हिमाचल के किन्नौर की हरी पट्टी वाली किन्नौरी टोपी अब उत्तराखंड के लोगों क...

काजल कुमार के कार्टून
कार्टून: आज कमांडो होने का मतलब...





तिरंगा फहरा दिया ... देशभक्ति वाले गाने बजा दिया ... क्या यही है गणतन्त्रदिवस मनाना?
जब से होश सम्भाला है तब से देखते आ रहा हूँ कि हर साल 26 जनवरी के दिन स्कूलों, शासकीय कार्यालयों, गली मुहल्लों में तिरंगा फहराया जाता है, जन गण मन गाया जाता है और देशभक्ति वाले फिल्मी गाने बजाये जाते हैं। क्या यही है गणतन्त्र दिवस मनाना? यदि कोई पूछ ले कि….

चिट्ठी चर्चा : हमारा गणतंत्र अमर रहें...गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाये और बधाई
आज गणतंत्र दिवस के पावन पुनीत अवसर पर मै महेंद्र मिश्र आप सभी का सादर अभिवादन करते हुए समयचक्र के चिट्ठी चर्चा मंच में आप सभी का हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ….
लो जी! हो गया गणतन्त्र सीनियर-सिटीजन!
कल फिर मिलेंगे……!!

7 comments:

  1. बेहतरीन। लाजवाब।

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  2. गणतंत्र दिवस की शानदार चर्चा के लिए आपका आभार व्यक्त करता हूँ।

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  3. विस्तृत चर्चा..मेहनती चर्चा..सार्थक चर्चा.

    बधाई एवं शुभकामनाएँ.

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  4. बहुत अच्छी चर्चा आभार्

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  5. bahut hi nayab charcha........gantantra diwas ki shubhkamnayein.

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  6. बहुत ही लाजवाब चर्चा!!!
    बीते गणतन्त्र दिवस की शुभकामनाऎँ!!!!

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