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Thursday, February 11, 2010

“सभी ब्लॉगर्स को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें!” (चर्चा मंच)

"चर्चा मंच" अंक-61
चर्चाकारः डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"


आइए आज का "चर्चा मंच" को सजाते हैं।


सभी ब्लॉगर्स को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें

तेताला

खट्टे और तीखे पर लगेंगे मीठे क्‍योंकि हैं ख़ास, भेज रहा हूं सब आपके पास ( प्रवीण पथिक)

आईये आप को आज फिर मिलाते है अपनी पसंद के ६ चिट्ठो से पिछली मेरी चिठ्ठा चर्चा बहुत ही सफल साबित हुयी आप सब ने खूब सराहा और उन चिट्ठो को खूब पढ़ा भी देखिये ६ चिट्ठे मेरी नजर से पढने के लिए चित्र पर……

गत्‍यात्‍मक चिंतन

आप ठंड के दिनों में भी ताजे और स्‍वादिष्‍ट दही का मजा ले सकते हैं !!

हमारे शरीर को जितने आवश्‍यक तत्‍वों की जरूरत होती है .. जल , चर्बी , प्रोटीन , शक्‍कर के साथ ही साथ नमक भी दूध से प्राप्‍त हो जाते हैं। इसलिए दूध को एक संपूर्ण आहार कहा गया है। गाय के अतिरिक्‍त भैंस , भेड , बकरी , रेन्डियर और ऊंट से भी दूध प्राप्‍त किया जाता है। दूध में जब थोडी मात्रा में दही डाल दिया जाता है , तो धीरे धीरे सारा दूध ही दही बन जाता है। दूध में मौजूद केसिन नामक प्रोटीन में मनुष्‍य के शरीर के लिए अमीनो अम्‍ल पर्याप्‍त मात्रा में मौजूद होता है। लैक्टिक अम्‍ल का बैक्‍टेरिया प्रोटीन के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया करता है , तो सारा दूध दही में बदल जाता है।

……..

लोक वेब मीडिया

जनभावना की निष्पक्ष आवाज


लो क सं घ र्ष !: ‘‘बहुमत का जुल्म’’

प्रजातंत्र भी आग के समान है जो अत्यंत उपयोगी है और अत्याधिक खतरनाक भी। लोकतंत्र हो, भीडतंत्र हो, सर्वसम्मति हो, या बहुमत हो, ये सभी उस समय व्यक्ति या समाज के लिये घातक बनते हैं जब इस अस्त्र का इस्तेमाल करने वाले मन में खोट होती है या स्वार्थ भावना के अन्तर्गत फैसले किये जाते हैं। आप देखते ही है कि सुरक्षा परिषद में बेटों और आम राय के बहाने पांच स्थायी सदस्य कैसे कैसे खेल खेलते हैं तथा जनरल असेम्बली मूक दर्शक ही बनी रहती है।
दिल्ली की संसद हो या यू0पी0 की विधायिका इनमें भी पहले भी स्वार्थवश फैसले लिये गये और अब भी यही हो रहा है जो जनता को कभी पंसद नहीं आता, लेकिन बेचारा आम आदमी कर ही क्या सकता है, मीडिया उसकी आवाज को धार देने की कोशिश करता है लेकिन कुछ ही दिन में वह आवाज भी दब जाती है।

……

TSALIIM

विज्ञान केन्द्रित विचारों और वैज्ञानिक पद्धतियों से परिचित कराने का एक विनम्र प्रयास।


दुनिया का सबसे बड़ा झूठ....

प्रस्तुतकर्ता : ज़ाकिर अली ‘रजनीश’

आप कितना झूठ बोलते हैं? सॉरी, मुझे ये पूछना चाहिए था कि क्या आप झूठ बोलते हैं? अब अगर आप ये कहते हैं कि हाँ, तो इसमें कोई नई बात नहीं होगी, क्योंकि झूठ तो वे भी नहीं बच पाए जो 'धर्मराज' कहे जाते थे। फिर आप और मैं तो साधारण मनुष्य ठहरे। इसलिए कभी-कभार का झूठ चलता है।

……..

मसिजीवी

भड़ास-मोहल्‍ला अब ( मौसेरे) भाई भाई

Written by मसिजीवी on 4:16 PM

यह पोस्टिका एक रहस्‍यपूर्ण सूचना बॉंटने भर के लिए है। आप में से कुछ को अवश्‍य हीमोहल्‍ला के विषय में याद होगा ऐसे ही भड़ास के भी। दोनों ही ब्‍लॉग रहे हैं और अब मीडिया समाचार पोर्टल बन गए हैं तथा एक मायने प्रतिस्‍पर्धी भी हैं। दोनों ही के संचालकों में विवादों, बलात्कार की कोशिश के आरोप जैसी कई चरित्रगत समानताएं भी बताई जाती हैं पर तब भी ये समानधर्मी पूर्व-ब्‍लॉगर विरोधी ही कहे जाते हैं या कम से कम पब्लिक ऐसा ही जानती है। इसलिए कल जब ब्‍लॉगवाणी पर ये दिखा तो हैरानी हुई-

ScreenHunter_01 Feb. 11 15.58

ये अविनाश भला क्‍यों यशवंत का प्रचार कर करने लगे।……..

अंधड़ !

नमस्कार, जय हिंद ! मेरी कहानियां, कविताएं,गजल एवं समसामयिक लेख


उस देश का यारों क्या कहना !!!!!!!!!!!!!!!!!

नेताओ की खुशामदगी की हद जहां ऐसी हो,
कि युवराज की चप्पल के लिए सरफरोशी हो,

जहां चमचों के मस्तिष्क में कूट-कूट समाई,
चाटुकारिता,जी हजूरी,गुलामी की मदहोशी हो,
जिस देश के महामहीम का ही खुद का पति,
गरीब-गुरबों की, जमीन हड़पने का दोषी हो,

…….
ज़िन्दगी…एक खामोश सफ़र

विरह दंश से
पीड़ित धड़कन
तेरे नाम से ही
धड़क जाती है
सोच ज़रा
क्या होगा
उस पल जब
युगों के चक्रव्यूह
में फँसी
जन्म -जन्मान्तरों
से भटकती रूहों
का मिलन होगा

…….

My Photo

श्रद्धा जैन
सिंगापुर, Singapore

क़दम-क़दम पे मिलेंगे, मेरी वफ़ा के चराग़

पलट के देखेगा माज़ी, तू जब उठा के चराग़
क़दम-क़दम पे मिलेंगे, मेरी वफ़ा के चराग़
नहीं है रोशनी उनके घरों में, जो दिन भर
सड़क पे बेच रहे थे, बना-बना के चराग़

……..
युवा सोच युवा खयालात
मिल्क नॉट फॉर सेल

आज गुरूवार को सुबह माताजी के दर्शनों के लिए अम्बाजी गया, वहाँ पर माता जी का बहुत विशाल मंदिर है, इस मंदिर में माता जी के दर्शनों के लिए दूर दूर से भक्त आते हैं। मातृदर्शन के बाद वापसी में जब मैं खेड़ब्रह्मा पहुंचा तो मेरी नजर सामने जा रहे एक दूध वाहन पर पड़ी, जिसके पीछे लिखा हुआ था "मिल्क नॉट फॉर सेल"। जिसका शायद हिन्दी में अर्थ दूध बेचने के लिए नहीं, कुछ ऐसा ही निकलता है। इस पंक्ति को पढ़ते ही जेब से मोबाइल निकाला और फोटो खींच डाली।

………

ज्योतिष की सार्थकता

झूठ को सच से पृथक् करने वाली जो विवेक बुद्धि है-उसी का नाम ज्ञान है


फलित ज्योतिष में विभिन्न राजयोगों की वास्तविकता (बद्धमूल धारणाओं के निराकरण का एक प्रयास)

एक व्यक्ति ताज्जीवन ज्योतिषियों को अपनी जन्मपत्री दिखाता रहा और प्रत्येक ज्योतिषी नें उसकी जन्मपत्री देखकर उसके बारे में यही फलकथन किया कि आपकी जन्मकुंडली में तो अलाना फलाना राजयोग है, आप जीवन में बहुत उन्नति करेंगें किन्तु फिर भी यह व्यक्ति आजीवन वनवासी तथा धनाभाव से त्रस्त रहा। यद्यपि ज्योतिषीय ग्रन्थों के अनुसार उसकी जन्मपत्री में राजयोग है तथापि यह व्यक्ति जीवनभर दुःख ही भोगता रहा। उसे पत्नी,संतान एवं समाज सबसे तिरस्कृत होना पड़ा। उस व्यक्ति को अपने इस जीवन में तो उस कथित राजयोग का कोई भी फल प्राप्त नहीं हुआ। आखिर ऎसा क्यूं हुआ?

……

स म य च क्र

चिट्ठी चर्चा : बड़ा बवाल मचा हुआ है. पूरे भारत में दस-पंद्रह शब्द गूँज रहे हैं. शाहरुख़ खान, बाल ठाकरे, आई पी एल, माफी, महाराष्ट्र, उत्तर भारतीय....

आज गुरूवार को मै महेंद्र मिश्र आपके समक्ष चिट्ठी लेकर उपस्थित हूँ . आज ब्लागर मित्रो की पोस्टो को पढ़ने का अवसर मिला . कुछ कविता कुछ लेख अच्छे लगे जिनका जिक्र इस चिट्ठी में कर रहा हूँ . कल महाशिवरात्रि का पर्व है फिर युवा दिलो की धड़कन कहा जाने वाला वैलेंटाइन डे आ रहा है . पिछली बार वैलेंटाइन डे पर मेरे युवा मित्र ने मुझ से मजाक में कहा भैय्या आज भाभीजी को कौन सा फूल देंगे तो वे बहुत खुश हो जायेंगी. मैंने उससे कहा भाई जिन्दगी के चालीस साल गुजर गए है फूल देते देते. फूल देखकर भाभी क्या ख़ाक खुश होंगी .

भाई मै उन्हें गोभी का फूल जाकर दे देता हूँ उसे देखकर तुम्हारी भाभीजी जरुर खुश हो जायेंगी क्योकि उसे गोभी की सब्जी बहुत पसंद है. चिट्ठी चर्चा करने के पहले एक जोग आपकी नजर प्रस्तुत कर रहा हूँ ...

मुसाफिर हूँ यारों

माता वैष्णों देवी दर्शन

प्रस्तुतकर्ता नीरज मुसाफिर जाट

जम्मू पहुँचे, कटरा पहुँचे, पर्ची कटाई, जयकारा लगाया और शुरू कर दी चढाई। चौदह किलोमीटर की पैदल चढाई। दो किलोमीटर के बाद बाणगंगा पुल है। यहाँ चेकपोस्ट भी है। सभी यात्रियों की गहन सुरक्षा जांच होती है। पर्ची की चेकिंग भी यहीं होती है। वैसे तो कटरा से बाणगंगा चेकपोस्ट तक टम्पू भी चलते हैं जो आजकल बीस रुपये प्रति सवारी के हिसाब से लेते हैं। चेकपोस्ट के पास से ही पोनी व पालकी उपलब्ध रहती है। पोनी व पालकी का किराया माता वैष्णों देवी श्राइन बोर्ड द्वारा निर्धारित है। पोनी व पालकी की सवारी शारीरिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को ही करनी चाहिये लेकिन भले चंगे लोग भी इनका सहारा ले लेते हैं।……..

(सामने है बाणगंगा चेकपोस्ट)

शिवकुमार मिश्र और ज्ञानदत्त पाण्डेय का ब्लॉग

शिवकुमार मिश्र और ज्ञानदत्त पाण्डेय, ब्लॉग-गीरी पर उतर आए हैं| विभिन्न विषयों पर बेलाग और प्रसन्नमन लिखेंगे| उन्होंने निश्चय किया है कि हल्का लिखकर हलके हो लेंगे| लेकिन कभी-कभी गम्भीर भी लिख दें तो बुरा न मनियेगा|
||Shivkumar Mishra Aur Gyandutt Pandey Kaa Blog||


......आप जल्द ही बोरियत गति को प्राप्त हों.

बड़ा बवाल मचा हुआ है. पूरे भारत में दस-पंद्रह शब्द गूँज रहे हैं. शाहरुख़ खान, बाल ठाकरे, आई पी एल, माफी, महाराष्ट्र, उत्तर भारतीय, टैक्सी ड्राइवर, कराची, मन्नत, माई नेम इज खान, राहुल गाँधी, जूता, लोकल ट्रेन, ए टी एम, शरद पवार, इज्जत, धूल, पाकिस्तानी क्रिकेटर्स, वगैरह-वगैरह.
जो भारतीय इन शब्दों से नहीं खेल रहा उसे लोग शक की निगाह से देख रहे हैं. साथ ही साथ उसके सामान्य ज्ञान पर टीका-टिप्पणी तक किया जा रहा है. कल ऐसा ही प्रयास मेरे साथ किया गया. मेरे एक मित्र ने कहा; "तुम इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोल रहे. ब्लॉग पर भी नहीं लिख रहे. सामान्य ज्ञान पर क्या अपर सर्किट लगा हुआ है?"…..

सच्चा शरणम्
मुझे मौन होना है

मुझे मौन होना है
तुम्हारे रूठने से नहीं,
तुम्हारे मचलने से नहीं,
अन्तर के कम्पनों से
सात्विक अनुराग के स्पन्दनों से ।
मेरा यह मौन
तुम्हारी पुण्यशाली वाक्-ज्योत्सना को
पीने का उपक्रम है,
स्वयं को अनन्त जीवन के भव्य प्रकाश में
लीन करने की आस है,
सुधि में प्रति-क्षण तल्लीन करने वाली
आसव-गंध है ।

……
नुक्कड़
आशीष कुमार अंशु से बतकही करना चाहेंगे (अविनाश वाचस्‍पति)
10 फरवरी से 16 फरवरी 2009 की यात्रा में हिन्‍दी ब्‍लॉगर मिलें


बतकही ब्‍लॉग है
आशीष कुमार 'अंशु' जी का
और वे बुधवार
को पहुंचे थे
उदयपुर
जहां से वे जायेंगे
रतलाम……

मेरी दुनिया मेरे सपने

संवाद सम्मान 2009 - श्रेणी नवोदित ब्लॉगर। .... आप ही बताइए कौन हो सकता है इस सम्मान का हकदार?


जी हाँ, देर आयद दुरूस्त आयद के सिद्धांत पर चलते हुए संवाद सम्मान 2009 के अन्तर्गत पहली श्रेणी 'नवोदित ब्लॉगर' की घोषणा करते हुए हमें प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है।
लेकिन रूकिए, नाम बताने के पहले एक-दो जरूरी बातें।
नवोदित ब्लॉगर कौन है? क्या वह, जो पिछले एक दो माह से ब्लॉग जगत में सक्रिय है? अथवा वह, जो एक-दो वर्षों से सक्रिय है? यह हमारे लिए दुविधा का प्रश्न रहा। इसीलिए इस श्रेणी के अन्तर्गत सिर्फ उन्हीं नामों पर विचार किया गया, जो नामांकन के द्वारा प्राप्त हुए थे।

….

घुघूतीबासूती

Ghughuti Basuti


कुछ बातें सही गलत की सब मर्यादाओं से बाहर की होती हैं !................घुघूती बासूती


जीवन में हम अधिकतर बातों को सही या गलत, काले या सफेद, अच्छे या बुरे के साँचे में डालने के यत्न में लगे रहते हैं। यह हमारे लिए सुविधाजनक होता है। इससे मस्तिष्क को कम से कम कष्ट होता है। सबसे बड़ा लाभ तो यह होता है कि हमें अधिक चिन्तन भी नहीं करना पड़ता । किसी अन्य के बनाए मूल्यों को हम जीवन भर अपना कहकर जीते चले जाते हैं, उनपर न विचार करते हैं, न प्रश्न करते हैं, न यह सोचते हैं कि क्या ये मूल्य हर समय, काल, स्थान व परिस्थिति में खरे ही उतरेंगे, या ये किसी विशेष स्थिति में गलत सिद्ध तो नहीं हो जाएँगे। यह लाभ भी होता है कि चिन्तन न करके हम अपनी उर्जा बचा लेते हैं

……..

मनोज

अपनी भावनाएं, और विचार बांट सकूं।


चौपाल : आंच पर ब्लेसिंग

-परशुराम राय

रचनाकार के अन्दर धधकती संवेदना को पाठक के पास और पाठक की अनुभूति की गरमी को रचनाकार के पास पहुँचाना आँच का उद्धेश्य है। आँच के इस अंक में लघुकथा विधा पर विचार किया गया है। आँच के इस अंक के लिए लिया गया है-मनोज कुमार की लघुकथा ब्लेसिंग

लघुकथा कथा-साहित्य की अर्वाचीनतम विधा है। लघुकथा का साहित्यशास्त्रीय विवेचन कम ही देखने को मिलता है। कहानी विधा के अंगों की तरह इसके भी अंग समान है, यथा कथावस्तु, पात्र, संवाद, संदेश आदि। इसकी कथावस्तु की भी चार अवस्थाएँ होती हैं- प्रारम्भ, विकास, चरमोत्कर्ष और अन्त। सीमित पात्रों की उपस्थिति, उनके चरित्र का मूल्यांकन या चरित्र-चित्रण कहानी की भाँति ही है। संवाद का पैनापन और संदेश की मुखरता आदि बिल्कुल कहानी-साहित्य की तरह ही हैं। तो अब विचारणीय प्रश्न यह है कि कहानी से लघुकथा को अलग कैसे किया जाय अथवा आधुनिकता के नाम का टीका लगाकर इति श्री कर दी जाय।

………….

KAVITARAWATBPL

सुस्वागतम. ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने व्यक्तिगत दायित्वों के निर्वहन के साथ-साथ सामाजिक दायित्व को भी समझकर कुछ अच्छा लिख सकूँ और उसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचा सकूँ, इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि की आकांक्षी हूँ. जो भी आप कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ.


महाशिवरात्रि : शिव-पार्वती-प्रसंग

सभी ब्लोग्गर्स को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें.

एक दिन पार्वतीजी शिवजी से बोली-
"भगवन! भूलोक पर आज लोग इतना कमर्काण्ड करते है
फिर भी वे क्यों इसके लाभ से वंचिंत रह जाते है?
प्रश्न सुन गंभीर होकर शिवजी बोले-…….

Alag sa

मेरा फोटो

श्रीरामजी को भी श्राप का सामना करना पडा था.

देवताओं ने सदा अपना हित साधा है। श्रीराम और सुग्रीव की मैत्री में सुग्रीव का सूर्य पुत्र होना एक बड़ा कारण था।
किस कारण या किस परिस्थितिवश प्रभू श्रीराम को किष्किंधा नरेश बाली का वध कर सुग्रीव को साथी बनाना पड़ा इसका न्यायोचित उत्तर नहीं मिलता।
बाली भी राम भक्त था पर उससे मिलने से पहले ही एक तरफा पक्ष रख, सुग्रीव के प्रति सहानुभुति का माहौल बना, उसे दीन-हीन दिखा श्री राम की उदारता का फायदा उठा लिया गया। जबकी सुग्रीव का निष्काषन उसके भीरूपन और समय पर उचित निर्णय ना ले सकने की क्षमता के कारण किया गया था। वह हर हाल में, चाहे युद्ध कला हो, चाहे चारित्रिक विशेषता, बाली से कमतर था।
तो ऐसा तो नहीं कि यह सब सोची समझी योजना के तहत किया गया हो। कुछ पहले की कथाओं को याद करें। हनुमानजी के बाल्यावस्था की घटना जब उन्होंने सूर्य देव से शिक्षा ग्रहण की थी। तब "सूर्यदेव ने गुरुदक्षिणा के रूप में अपने पुत्र सुग्रीव की रक्षा का वचन" उनसे लिया था। देवताओं ने सदा अपना स्वार्थ साधा है। यहां भी वही स्वार्थ श्रीराम और बाली के बैर का………..

"हे प्रभु यह तेरा-पथ"

"परिवार का निर्माण करना, अब हम सब के हाथ मैं, "हे प्रभु यह तेरापन्थ" अब आपके साथ मै

जैन:प्राचीन इतिहास-17

गतांक से आगे ......
दक्षिण भारत व लंका में जैन धर्म तथा राजवंशों से संबंध -
एक जैन परम्परानुसार मौर्यकाल में जैनमुनि भद्रबाहु ने चन्द्रगुप्त सम्राट् को प्रभावित किया था और वे राज्य त्याग कर, उन मुनिराज के साथ दक्षिण को गए थे। मैसूर प्रान्त के अन्तर्गत श्रवणबेलगोला में अब भी उन्हीं के नाम से एक पहाड़ी चन्द्रगिरि कहलाती है, और उस पर वह गुफा भी बतलाई जाती है, जिसमें भद्रबाहु ने तपस्या की थी, तथा राजा चन्द्रगुप्त उनके साथ अन्त तक रहे थे। इस प्रकार मौर्य सम्राट् चन्द्रगुप्त के काल में जैनधर्म का दक्षिणभारत में प्रवेश हुआ माना जाता है। किन्तु बौद्धों के पालि साहित्यान्तर्गत महावंश में जो लंका के राजवंशों का विवरण पाया जाता है, उसके अनुसार बुद्धनिर्वाण से १०६ वर्ष पश्चात् पांडुकाभय राजा का अभिषेक हुआ और उन्होंने अपने राज्य के प्रारंभ में ही अनुराधपुर की स्थापना की, जिसमें उन्होंने निर्ग्रन्थ श्रमणों के लिए अनेक निवासस्थान बनवाए। इस उल्लेख पर से स्पष्टतः प्रमाणित होता है कि बुद्ध निर्वाण सं. के १०६ वें वर्ष में भी लंका में …….

सारथी

हिन्दी, हिन्दुस्तान एवं ईसा के चरणसेवक शास्त्री फिलिप का बौद्धिक शास्त्रार्थ चिट्ठा!! (2008 का औसत: 500,000 हिटस प्रति महीने!!)


दुर्घटना: कौन जिम्मेदार है?

Motorcycle

मेरे घर के पास ही है राजमार्ग 47, जिस पर हर महीने मैं 1000 से 3000 किलोमीटर की सफारी करता हूँ. अधिकतर अपनी कार में, लेकिन कई बार गैरों की गाडी में. एक औसत यात्रा 100 से 400 किलोमीटर की होती है. 4-लेन के इस राजमार्ग पर यात्रा सामान्यतया सुखद होती है, लेकिन एक चीज मन को दुखी करती है और वह है दुर्घटनायें……..

युग क्रांति

.....एक सोच एक जज्बा..


सो मैं अब ब्लोगिंग से चलता हूँ

ब्लोगिंग एक नशा हैं
और नशा सेहत के लिए अच्छा नहीं होता
मैं किसी नशे की गिरफ्त में नहीं रहना चाहता
सो मैं अब ब्लोगिंग से चलता हूँ
स्नेह मिला सबसे सो आभारी हूँ सबका
एक ब्रेक की जरुरत हैं

पराया देश

कहां से शुरु करूं ओर कहा खत्म करूं बताना... आप सब का प्यार इतना मिला कि शव्दो मै बताना भी कम पड रहा है, ओर मेरी झोली भी छोटी पड गई.


नमस्कार . सलाम आप सब को,
मै ८/२ यानि सोमवार को शाम को अपने घर वापिस पहुच गया, फ़िर घर पर सब से पहले पिटारा खोला, कोन कोन सा समान लाया हुं, बेर, अमरुद, पान ओर फ़िर चटपटी चीजे,लेकिन मिठाई के डिब्बे लंडन मै मेरे हेंड बेग से निकाल् कर फ़ेंक दिये गये, क्यो कि दुध से बनी चीजे यहां लानी मना है…

…….

दिल के दरमियाँ - डॉ० भावना कुँअर

मेरा फोटो

BHAWNA KUNWAR
SYDNEY, AUSTRALIA

बस यूँ ही...

मित्रों काफी दिनों से आप लोगों से वार्तालाप नहीं हुई, व्यस्तता ही इतनी रही,लिखा तो इन दिनों बहुत पर पोस्ट नहीं कर पाई,किन्तु अब ऐसा नहीं होगा, जो लिखा सभी अब क्रम से पोस्ट किया जायेगा, आप सबका स्नेह और दुआएं ही मेरी प्रेरणा रहें हैं।

कल मेरा जन्मदिन है और मैं यहाँ (आस्ट्रेलिया-पर्थ) में अकेली हूँ बच्चे और प्रगीत आस्ट्रेलिया-सिडनी में हैं,सबको बहुत मिस कर रही हूँ, पहली बार ऐसा हुआ है कि मैं मम्मा,पापा यहाँ तक कि बच्चों,प्रगीत सभी से दूर हूँ, पर किया जाये जब काम करना है तो करना ही है उसमें ये सब दूरियाँ तो सहनी ही होंगी,ऐसे वक्त में बस यही कह सकती हूँ
आज मन
कुछ अनमना सा है...
सब कुछ होते हुए भी
कुछ कमी सी ...
मिल रहा है
मेरे सपनों कों
एक साकार रूप ...
जिन सपनों को
टूटते, बिखरते से
बचाया था मैंने
फिर दिया ...

Dubey

अब मैं ना हिम्मत हारूँगा---------------(मिथिलेश दुबे)

एक बार फिर हाजीर हूँ मैं, साधारण भाषा में इसे पूर्नजन्म भी कह सकते हैं । मेरा ब्लोगिंग को छोड़ने का फैसला गलत था इसका एहसास मुझे प्रतिक्रिया मिलने के बाद हुआ । ब्लोगिंग छोड़ने का फैसला लेना मेरे लिए बहुत मुश्किल था , लेकिन कभी-कभी भावुकता वश कुछ गैर जरुरी फैसले हो जाते हैं जो कि मैंने किया । इन दिंनो लिखना तो पूर्णतया बन्द था , लेकिन पढ़ना यथावत चलता रहा, शायद इसे आप ब्लोगिंग का नशा ही कह सकते है कि दूर रहकर भी पास था । इस दर्मीयान मुझे अपनो का बहुत प्यार मिला जिनका सदा-सदा आभारी रहूंगा , ये अपने को प्यार ही है कि मै दोबारा से वापस आ पाया हूँ । ब्लोगिंग छोड़ने पर मुझसे प्यार करने वालो ने कहा कि ये फैसला तुम्हारा किसी भी विधा से सही नहीं है , साथ डांट भी पड़ी । वहीं कुछ लोग खुश भी हुए होंगे कि चलो एक दुश्मन गया , लेकिन उन्हे पता नहीं कि जहाँ अपनो का प्यार होता है वहाँ बड़े-बड़े घूटनें टेक देंते है । उन सभी का शुक्रगुजार हूँ जिन्होनें मेरा लगातार मेरा साथ दिया और मुझे अपना फैसला बदलना पड़ा ।

…..

ITNI SI BAAT

Hi Friends. I am Irfan khan,an editorial cartoonist,based in New Delhi.For last 20 years I have worked for India's almost all leading newspapers and also have done my cartoons and talk shows on tv channels.


ठाकरे ने बताया बिग बी और किंग खान मैं फर्क !!

आज की चर्चा को विराम! सबको राम-राम!!

18 comments:

  1. Kuch bhi nahi bacha aaj sab kuch aapke is charcha me aa gaya...badhiya charcha...dhanywaad shastri ji

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  2. बहुत अच्‍छी चर्चा .. अच्‍छे अच्‍छे लिंक्‍स मिले !!

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  3. बहुत वृहद चर्चा,

    रामराम.

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  4. वाह! शास्त्री जी...हम तो अभी तक आपकी पहले वाली चर्चा ही बाँच रहे थे और आपने इधर नई चर्चा भी कर डाली...भई हम तो आपके द्वारा किए जा रहे इस अथक परिश्रम को देखकर ही दंग हैं।
    आभार्!

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  5. बहुत बेहतरीन चर्चा. मजा आ गया.

    महाशिवरात्री की बधाई एवं शुभकामनाएँ.

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  6. आपकि भी महाशिवरात्री की शुभकामनाएँ....अच्‍छी चर्चा!!
    सादर
    रानीविशाल

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  7. बेहतरीन चर्चा...
    महाशिवरात्री की बधाई एवं शुभकामनाएँ....

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  8. कई चिट्ठों को एक साथ समेटने की बेहतर कोशिश।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com

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  9. बेहद खूबसूरत चर्चा । आभार ।
    आपको महाशिवरात्रि की शुभकामनायें।

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  10. एक साथ कई पोस्ट पढ़ने मिल गए , आभार !! शिवरात्री की हार्दिक शुभकामनायें !!

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  11. पंडित जी
    प्रणाम
    बहुत सुन्दर चर्चा की . महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाये .

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  12. bahut hi sundar aur vistrit charcha..........shivratri ki hardik shubhkamnayein.

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  13. सादर अभिवादन! सदा की तरह आज का भी अंक बहुत अच्छा लगा।

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  14. puujaniya shastri sir,
    sabase pahale to mai aapki dil se aabhari hun jo aapne charcha manch par
    lakarmujhe apna aashish diya. aur meri lekhani ki isksha shakti ko aur badhava diya.sadar pranam.

    poonam

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  15. puujaniya shastri sir,
    sabase pahale to mai aapki dil se aabhari hun jo aapne charcha manch par
    lakarmujhe apna aashish diya. aur meri lekhani ki isksha shakti ko aur badhava diya.sadar pranam.

    poonam

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  16. ज़बर्दस्त चर्चा शास्त्री जी।हर हर महादेव।

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"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

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"लाचार हुआ सारा समाज" (चर्चा अंक-2820)

मित्रों! रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...