चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Thursday, February 18, 2010

“एकल चर्चा और कुछ लिंक्स…” (चर्चा मंच)

"चर्चा मंच" अंक-68
चर्चाकारः डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
लीजिए आज का "चर्चा मंच" लेकर हाजिर हूँ-

सबसे पहले जाल-जगत की नई ब्लॉगारा रानीविशाल का परिचय-
मेरा फोटो

Rani Vishal

मेरे बारे में

I am MBA in Human Resource Management. But I would like to known myself as a good poet so I am here,to share my Poems with you. These are my own poems no one can use or publish this without permission.

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टीम सदस्य

काव्य तरंग

   Friday, February 12, 2010


सार्वजनिक सूचना

ब्लॉग जगत में पदार्पण का मेरा सिर्फ एक ही उद्देश्य है, वो ये की मैं अपना साहित्य आप सभी पाठक गण तकपंहुचा सकू । चूकी मैं बचपन से ही आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी के साहित्य से अत्यधिक प्रभावित हूँ इसीलिए मैंने अपने ब्लॉग का नाम उनकी ही एक अत्यधिक लोकप्रिय पुस्तक काव्यमंजूषा के ही नाम पर रखा था। हालाकि इस नाम से एक और ब्लॉग (अदा दीदी ) का है।किंतु ब्लॉग लिखने के पहले मैं ब्लोगिंग में उतना सक्रियनहीं थी, तो मुझे इसका अंदेशा न था । होता भी कैसे आज से कुछ तीन साल पहले अचानक कही रवी रतलामी जीका हिंदी ब्लॉग देखा और मैंने भी अपना ब्लॉग कव्यमंजूषा बना दिया । किंतु समय के अभाव के कारण मैं उसेलाइव नहीं कर पाई। पोस्ट लिखने का टाइम ही नहीं होता था । फिर आचानक से किसी दिन लेखन का जो ज्वारमेरे भीतर से फूटा की मैंने समय पाते ही ब्लॉग लाइव किया और पोस्ट करना शुरू कर दिया । अब तो मैं अच्छासमय ब्लोगिंग को दे भी पाती हूँ । किंतु अदा दीदी की यह मंशा है, और मैं भी ठीक समझती हूँ की पाठको को दोनोंब्लॉग में गफलत ना हो । इसी लिए मैं आज से अपने ब्लॉग के नाम को काव्यमंजूषा से काव्य तरंग कर रही हूँ ।मञ्जूषा की जगह तरंग की प्रेरणा भी आचार्यजी की तरंगिणी से ही ली है ।

"मेरा सोभाग्य तो वही होगा की आप सब मुझे मेरे ब्लॉग के नाम से नहीं बल्कि मेरी कविताओ से पहचाने" किंतुसंवाद की शुरुआत तो किसी नाम से ही हो पाती है । इसीलिए काव्य तरंग अपने नए स्वरुप में आप सबके समक्षप्रस्तुत है ........कविता की नई नई तरंगे लेकर !!

सादर

रानीविशाल

ये है इनकी प्रथम पोस्ट-

Friday, January 8, 2010


Shri Ganeshay Namah



हे गजानन गणपति, बुद्धिविनायक बलधाम !
निशदिन सुमिरे तुमको हो ऐसी मति और पूरण होवे काम !!




और ये रही इनकी अद्यतन पोस्ट-

Wednesday, February 17, 2010


अपना खून (कहानी)
शाम ढलने को है... मीनाक्षी का दिल बैठा जारहा है । शोभना .....भाभी आपफीक्र ना करो रिपोर्ट ठीक ही आएगी । मीनाक्षी .....जैसे तुम कह रही हो वहीहोगा, ना जाने क्या कहा होगा मूए डाक्टर ने । इतने में ही सुधीर आ पहुचता हैमुरझाया चहरा कापते हाथो से रिपोर्ट मीनाक्षी को देते हुए तखत पर लेट जाता है। रिपोर्ट में तो साफ लिखा है.. मीनाक्षी को यूट्रस केंसर हुआ है ।पड़ते ही मीनाक्षीकी आँखों से अश्रु धाराए बहने लगाती है । शोभना... अरे भाभी आप क्यों दिलछोटा करती है, आप ही तो कहती है ना कि मैं ही आपकी संतान हूँ । हा रे तोमैंने कब ना कहा ? मुझे तो डर अब इतना है की तुम्हारे भैया ना मानेंगे । वोअगर समझ भी गए तो माताजी के आगे उनकी एक न चलेगी ...! चिंता में डूबीरोते रोते मीनाक्षी आपने काम में लग जाती है ।
इधर श्रीमती विमला देवी मीनाक्षी की सासू माँ मंदिर से घर को लोटती है! घर कासन्नाटा उन्हें सब कुछ कह देता है । रिपोर्ट जानने की तो जरुरत ही नहीं उन्हें .....सुधीर मैं कह देती हूँ तुझे,अब तेरी एक न चलने दूंगी । मीनाक्षी का ओपरेशन होते ही मेघना के पिताजी को पत्र लिख दूंगी तेरे दुसरे ब्याहके लिए हम भी राज़ी है ।
मीनाक्षी सूजी आँखों से आथ में पानी का ग्लास लिए माताजी को तक रही है .....की शायद वो उसके ह्रदय का रोदन सुन पाए । किंतु दकियानुसी मान्यताओको दिलो दिमाग पर सवार किये विमला देवी को ये सब नहीं दिखता ।
ये सब देखती, शोभना सोच रही है.... "भाभी ने किसी संतान को जन्म ना दियामगर उनके दिल में भरी ममता दो बच्चो की माँ को नहीं दिखाई दे रही ये कैसीविडम्बना है" !
जैसे कल ही की तो बात है, मीनाक्षी सुधीर के ही कालेज में पढाया करती थी!एका एक दोनों में प्यार हुआ और सहर्ष विमला देवी मीनाक्षी को बहूँ बना आपनेघर ले आई । देखते देखते १0 साल बीत गए । इन १0 सालो में विमला देवी ने कहाँ कहाँ न जाने कौन कौनसे देवी देवताओ से आपना पोता माँगा, किंतु मीनाक्षी की गोद ना भरी । इधर मीनाक्षी को भी मातृत्व का सुखबहुत ललचाता था, किंतु अपनी १७ साल की ननद शोभना को माँ के जैसा ही स्नेह देती थी वो । और शोभना केलिए भी भाभी से बड़ कर कोई न था । इस बिच मीनाक्षी ने अपनी कालेज की नोकरी छोड़ बच्चो के स्कूल मेंनोकरी कर ली । छोटे छोटे बच्चो को पढाना उन्हें दुलारना उसे बहुत ख़ुशी देता था । औरत चाहे माँ ना बने परममता तो उसमे कूट कूट कर भरी होती है, और इसी ममता को वह दुनिया भर में लुटाती रहती है । किंतु पुरुषप्रधान दकयानुसी समाज के ठेकेदारों को ये बात कहा हजम होती है ....."मदर टेरेसा ने भी तो किसी बच्चे कोजन्म नहीं दिया, फिर भी उनकी ममता के सैलाब ने उन्हें सारे विश्व की माँ बना दिया" !
जैसे तेसे रात कटती है । सुबह मीनाक्षी को अस्पताल में दाखिल करा दिया जाता है। उसकी यूट्रस ओपरेशन करनिकालना बहुत जरुरी है... वर्ना उसकी जान भी जा सकती है । मीनाक्षी आशा भरी नज़रो से सुधीर को एकटूक देख रही है। सारी रात वो सुधीर से यही मिन्नत करती रही की ओपरेशन के बाद वो दोनों एक बच्चा गोदले लेंगे किंतु सुधीर का अभिमान उसे एक झूठा दिलासा भी न दे सका !
ओपरेशन थिएटर के दरवाज़े बंद हो जाते है । सुधीर बेंच पर बैठा गहरी सोच में डूबा है । वो अपने अन्दर केअपराधी को क्षमा तो नहीं कर पा रहा कितु प्राश्चित भी उसे गवारा नहीं । वह अच्छी तरह से जनता है.. कीकई साल पहले ही उसे डाक्टर ने स्पष्ट शब्दों में बता दिया था कि कमी सुधीर में है मीनाक्षी में नहीं, किंतुउसने यह बात सबसे छुपाई । उसकी इसी हरकत के कारण मीनाक्षी को उसकी माताजी की कई प्रतारणाए औरसमाज से बाँझ होने का ताना भी मिला किंतु सुधीर चुप चाप इतने सालो से यह तमाशा देखता रहा । मीनाक्षीसे प्यार करते हुए भी ना वो अपनी माताजी को उसकी दूसरी शादी के प्रयासों से रोक पाया न नीम हाकिमो कीउल्टी सीधी दवाए उन्हें मीनाक्षी को खिलाने से रोक सका । वो अच्छी तरह जानता है की इन हकीमी नुस्खो कीही वजह से आज मीनाक्षी की यह दशा हुई है । जिंदगी से भरी चंचल सदा खुश रहने वाली वो लड़की दिल मेंगहरे घाव लिए...आज जिंदगी के लिए लड़ रही है ।
शोभना ...भैया आप भाभी को झूट ही कह दीजिये ना की आप दूसरी शादी नहीं कर रहे, आप लोग एक बच्चागोद लेलेंगे । शोभना दूसरी शादी मैं भी नहीं करना चाहता पर माँ के आगे मेरी चलती नहीं किंतु बच्चा गोदलेने का झूट मुझसे नहीं कहा जाएगा .."मैं कैसे किसी और की औलाद को आपना नाम दे कर आपना लू ,जोकि मेरा खून ही नहीं" ये मुझसे नहीं होगा ।
शोभना भारी दिल से चुप चाप बैठ जाती है, सोच रही है... एक नारी एक इंसान उसके परिवार को अपना साराजीवन समर्पित करती है । उसके अपनो को ऐसे अपना लेती है कि अपने पराए का फर्क ही ना दिखे । एक भाभी,बहू के रूप में अपना स्नेह लुटाते उसने तो कभी ये नहीं सोचा की ये मेरा खून नहीं है । फिर एक पुरुष ऐसीतुच्छ सोच कैसे रख सकता है । बिचारी अपने ही घर में भाभी से हो रहे व्यवहार को देख ससुराल की कल्पनामात्र से सिहर उठती है ।
ओपरेशन थिएटर के दरवाज़े खुल जाते है ...डॉक्टर सुधीर को बताते है की ओपरेशन तो ठीक से हो गया किंतुउस दोरान सदमे की वजह से मीनाक्षी को माइनर हार्ट अटेक आगया है । अब सभी को उसका ख़ास ख्यालरखना है ।
बेहोश पड़ी मीनाक्षी की दशा देख शोभना सिसक सिसक कर रो रही है ....अचानक विमला देवी उस पर नाराज़होती है । एक तेरी ही भाभी हुई दुनिया में, अरि रोती क्यों है ?? तुझे तो खुश होना चाहिए उसकी जान बच गईऔर अब तेरे भैया की दूसरी शादी की भी तो तैयारियाँ करनी है न ! शोभना के तो होश ही उड़ जाते है माताजीतो अब भी अपने इरादों पर जस की तस है ।
इधर सुधीर पत्थर की मूरत बना सब सुन रहा था ..या यू कहिये प्यार और इंसानियत को अपने पेरो तले कुचलरहा था । कुछ घंटो में मीनाक्षी को होश आजाता है । नर्स कहती है वो अपने पति को याद कर रही है.. आपउनसे मिल लीजिये ।नर्स ....पेशंट की हालत ज्यादा ठीक नहीं है, आप बहुत बाते न करियेगा । इतना कह करनर्स वहा से चली जाती है ।
इधर मीनाक्षी अपने साँसों की माला पर सुधीर का नाम जप रही है ....सुधीर तुम कहा हो ? सुधीर, सुधीर ।
सुधीर ....मीनाक्षी मैं तो यही हू तुम्हारे पास, तुम आराम करो, तुम्हे नींद की बहुत जरुरत है ।
सुधीर तुम बस एक वादा करो फिर मैं चैन से सो जाउंगी ......हम जल्द ही बच्चा गोद लेंगे ना ?
सुधीर फिरसे पाषाण की तरह खड़ा खड़ा उसे तक रहा था ....प्लीज सुधीर हा कहो मेरा दिल दहल रहा है, हाकहो ना सुधीर ।
तुम आराम क्यों नहीं कराती मीनाक्षी, बार बार यही बाते ले बैठती हो । पहले तुम ठीक हो जाओ ये सब बाद मेंसोचेंगे । नहीं सुधीर माताजी के विचार मैं जानती हूँ तुम मुझे वचन दो ...अभी वचन दो । सुधीर थर्राते हुए ..क्या वचन दू मीनाक्षी ?? तुम्हे अनाथ आश्रम में जाकर जीतनी ममता लुटाना है लुटाना । मैं मना नहीं करूँगा। लेकिन किसी और की संतान को अपना नाम देना ..जोकि मेरा खून नहीं है । ये मुझसे नहीं होगा मीनाक्षी ।सुधीर मीनाक्षी का हाथ निचे रख अपने हाथो उसके आसूँ पोछते हुए कहता है, तुम ये सब कुछ मत सोचो तुम्हेतो रिकवर होना है न ? हम दोनों ही एक दुसरे के लिए काफी है । मीनाक्षी आँखे बंद कर सो जाती है । सुधीरकमरे के बहार आजाता है। मीनाक्षी अच्छी तरह से ये जान चुकी थी कि सुधीर का इतना कह देना काफी नहींथा ।
सुबह होते हि शोभना भाभी के लिए चाय लेकर अस्पताल आती है । भाभी अब कैसी हो ? थोड़ी चाय पी करफिर आराम करना । मीनाक्षी का निष्प्राण शरीर समस्त कष्टों से मुक्त बिस्तर पर पड़ा था । कई बार उठानेपर भी जब मीनाक्षी ना जगी शोभना को अनर्थ की आशंका हुई । रोती हुई शोभना कमरे से बहार आती हैउसकी आवाज़ सुन डाक्टर नर्स सभी दोड़ पड़ते है । सुधीर भी माताजी के साथ पहुच चूका है । हड़ बड़ाते हुएसुधीर डॉक्टर के पास पंहुचा .....
हमें बहुत अफ़सोस है मिस्टर सुधीर, लेकिन इनकी मृत्यु हुए ८ घंटे होगए । शोभना के चहरे से हवाइया उढ़ जाती है । सुधीर हारा सा दुखीमन लेकर खड़ा है .....माताजी भी विलाप कर रही है । ममता की देवीअपना स्नेह भरा विशालह्रदय लिए निष्प्राण पड़ी है । उसकी म्रत्यु हो गई? जी नहीं "अपने खून" का राग अलापने वाले कलंकित समाज के इनकलंको ने उसका खून कर दिया । अचानक मोबाईल की घंटी बजती है,सुधीर दुःख में अपने हाथ से फोन माताजी को देता है। माताजी रोते हुएही ....कौन दुबेजी (मेघना के पिताजी ), क्या कहू बड़ा दुःख आन पड़ाहै... मेरी प्यारी मीनाक्षी चल बसी । मैं अभी बहुत दुखी हूँ १३ दिन बादआपसे चर्चा करती हूँ ।
अब देखिए आज की कुछ और पोस्टों को-

उड़न तश्तरी ....

सहेजने का महत्व: विल्स कार्ड भाग ९ - पहले की तरह ही, पिछले दिनों विल्स कार्ड भाग १ , भाग २ , भाग ३ ,भाग ४ , भाग ५ भाग ६ भाग ७ और भाग ८ को सभी पाठकों का बहुत स्नेह मिला और बहुतों की फरमाईश ...
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फ़र्रुखाबादी विजेता (193) : श्री दिगंबर नासवा - नमस्कार बहनों और भाईयो. रामप्यारी पहेली कमेटी की तरफ़ से मैं समीरलाल "समीर" यानि कि "उडनतश्तरी" फ़र्रुखाबादी सवाल का जवाब देने के लिये आचार्यश्री यानि कि ह...
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सांप- नेताः किसको किससे ख़तरा - बीजेपी का इंदौर में राष्ट्रीय अधिवेशन हो रहा है। अधिवेशन स्थल पर नाना प्रकार के सांप पाए जाने की ख़बर से नेता परेशान हैं। नेताओं पर सांपों का ख़तरा है। न...
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स्वप्न मेरे................
गुबार - कुछ अनसुलझे सवाल कुछ हसीन लम्हे जिस्म में उगी आवारा ख्वाबों की भटकती नागफनी कितना कुछ एक ही साँस में कहने को भटकते शब्द डिक्शनरी के पन्नों की फड़फड़ाहट क..
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संघ की एक 'वृहत हिन्दू मंच' के तहत पिछड़ी दलित-दमित जातियों को साथ लेकर चलने की नई मुहीम कहीं हमारे कुछ समाज विज्ञानियों के पेट-दर्द का सबब न बन जाए। - डिस्क्लेमर: मैं संघ का किसी भी तरह का सदस्य नहीं हूँ ! *इस देश में कुछ वो जयचंद वंशीय स्वार्थी तत्व जिन्हें सिर्फ और सिर्फ समाज को बांटे रखकर अपना उल्लू सी..
एक प्रयास
ऐसा आखिर कब तक -----------अंतिम भाग - दीप्ति से अलग होने के बाद , उसे किये वादे की लाज रखने और उसके त्याग को सम्पूर्णता प्रदान करने के लिए तथा अपना बेटा होने का कर्त्तव्य पूरा करने के लिए आकाश ..
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An Indian in Pittsburgh - पिट्सबर्ग में एक भारतीय
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इसीलिए सिर्फ प्रेम करना चाहिए..: महफूज़
अन्नपूर्णा कूड़ा फेंकने घर के बाहर आई तो देखा कि तीन बूढ़े व्यक्ति घर के बाहर वाले चबूतरे पर बैठे हैं. अन्नपूर्णा ने उन्हें नहीं पहचानते हुए कहा " वैसे तो मैं आप लोगों को नहीं जानतीं, फिर भी घर के अन्दर आईये और कुछ भोजन ग्रहण कीजिये."
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"नहीं" अन्नपूर्णा ने कहा. "वे बाहर गए हैं."….
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विष्‍णु खरे की नई कविता - *{ मानव के नैतिक ह्रास के कारण अपरिहार्य, सृष्टि के अंत के लक्षणों और पूर्वसंकेतों का जैसा वर्णन और भविष्यवचन प्राचीन भारतीय परम्परा में है, वैसा शायद और ...
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सुन्न शिखर का मुसाफिर - वहां अब शब्द नहीं हैं ध्वनियां हैं फकत...और भागती हुई तस्वीरें कुछ धुंधले अर्थों के गिर्द मंडराती हुई खिंचे चेहरे और ऐंठी जीभ से निकला एक सवाल मुझ तक पहुंचत..
अज़दक
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नारी
मुक्ति के लिए जवाब ! - इसका जवाब देना एक कमेन्ट में संभव न था , इसलिए इस पोस्ट की जरूरत पड़ गयी. इस समस्या का जिम्मेदार कोई भी नहीं है. यह तो काल और देश क..
क्वचिदन्यतोअपि..........!
भक्तजनों आज का प्रसंग है राम -रावण युद्ध -प्रवचन- अभी अभी कुल जमा २ भक्तजनों ने रामचरित मानस का राम रावण प्रसंग सुना .भक्तजनों की क्या कहिये, वैसे ही कलि काल है उनकी संख्या घटती बढ़ती रहती है मगर आज तो बहु..
आज के लिए इतना ही---!

16 comments:

  1. shastri ji,
    bahut sundar charcha..
    Raani Vishal ke baare mein jaankar padh kar bahut accha laga..any chithey bhi anupam hain...
    ek chhoti si truti hai aape post mein Rani Vishal ke blog ka naam ab "KAVYA TARANG" hai 'KAVYA MANJUSHA' nahi ...
    kripa karke ise sudhaar lijiye..
    dhnaywaad..

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  2. अदा जी!
    शायद आपने ध्यानपूर्वक पोस्ट नही पढ़ी है!

    देखिए-

    मेरे ब्‍लॉग
    टीम सदस्य
    काव्य तरंग

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  3. आदरणीय ,
    वेसे तो चर्चा का आपका हर अंदाज़ निराला है , किन्तु आज आपने अपने स्नेह से मुझे कृतार्थ कर दिया ! नई ब्लोगेर होने के कारण ब्लॉग जगत के अधिकतर मनिनीय पाठक गण मुझसे अनभिज्ञ है ! सभी से मेरा परिचय करा मेरी रचनाए सब तक पहुचाने के लिए ह्रदय से आभार !हमेशा की तरह यह चर्चा भी अपने आप में बहुत ही अच्छी रचनाओ का संकलन है !
    सादर
    रानीविशाल

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  4. कुछ दिनों से रानी विशाल जी को पढ रही हूं .. अच्‍छे अच्‍छे चिट्ठों की चर्चा की आपने .. बढिया लगा!!

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  5. बहुत सुंदर चर्चा.

    रामराम.

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  6. Shastri ji,
    maine padh kar hi kaha tha jahan aapne unki 'apna khoon' ka prichay diya hai wahan par aane 'KAVYA MNAJUSHA' hi likha hai ...main uski baat kar rahi hun..

    aabhar..

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  7. सुंदर संकलन व परिचय. आभार.

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  8. आभार रानी विशाल जी के परिचय का और साथ ही उम्दा चर्चा प्रस्तुत की है.

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  9. रानी विशाल जी से परिचय कराने का धन्यवाद...ओर चर्चा तो हमेशा की तरह लाजवाब है ही !!

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  10. अदा जी!
    आपका कहना सही था!
    अब भूल सुधार दी गई है!

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  11. Rani ji se punah parichay karane ke liye aabhar..
    is charcha ka jawab nahin..

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  12. bahut hi sundar charcha aur rani vishal ji ki bare mein bahut hi badhiya jankari di..........kafi kuch samet liya ek hi post mein.

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