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Monday, February 22, 2010

“…..का खुला निमन्त्रण” (चर्चा मंच)

"चर्चा मंच" अंक-71
चर्चाकारः डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
आइए आज का
"चर्चा मंच" सजाते हैं- 
देखिए आज के कुछ लिंक्स-
उड़न तश्तरी ....


ओ!! तुम्हें सम्मान दिला दूँ!! - अरे साहब, आज की इस भागती दौड़ती जिन्दगी में सुकून कहाँ? समय ही नहीं मिल पाता. आजकल यह जुमला बड़ा आम हो गया है और सभी को *अपनी नाकामियों और गल्तियों को छु...
Albelakhatri.com

समीरलाल, शेफाली पाण्डे, राजीव तनेजा, अविनाश वाचस्पति और सतीश पंचम को गुंजन म्यूजिक कम्पनी का खुला निमन्त्रण -हिन्दी में हास्य व्यंग्य लिखने वालों के लिए एक खुशखबर है कि समीरलाल, शेफाली पाण्डे, राजीव तनेजा, अविनाश वाचस्पति और सतीश पंचम समेत समस्त हिन्दी ब्लोगर्स को...
अंतर्मंथन

दिल्ली के गार्डन ऑफ़ फाइव सेंसिज में, आनंद लीजिये गार्डन टूरिस्म फेस्टिवल का --- - दिल्ली में डेढ़ महीने की सर्दी के बाद कुछ दिनों से मौसम बदल सा गया है। हवा में ठंडक कम और उष्मा बढ़ने लगी है। नर्म सुहानी धूप खिली है। बसंत ऋतू अपने पूरे ज...
ललितडॉटकॉम

बेटी मारने वाले बेटों को थाली में सजा कर घूम रहे हैं-शादी से लौट कर (ललित शर्मा) - *इ*स समय 16 फ़रवरी को बहुत ही ज्यादा शादियाँ थी, इतने निमंत्रण थे कि कहाँ ज़ाएं कहाँ ना जाएं, पेश-ओ-पेश की घड़ी थी। कुछ विवाह तो परिवार मे ही थे। एक आदमी
नन्हा मन

बाघ बचाओ अभियान - नन्ही बच्ची आशी के विचार - नमस्कार बच्चो , आपको तो पता ही है कि आजकल बाघ बचाओ अभियान पूरे भारत-वर्ष में बडे जोर-शोर से चलाया जा रहा है ताकि हम इस जाति को समाप्त होने से बचा सकें । हम..
अंधड़ !

नजारा ! - *छवि गूगल से साभार **कभी-कभी, घर की ऊपरी मंजिल की खिडकी से, परदा हटाकर बाहर झांकना भी, मन को मिश्रित अनुभूति देता है। दो ही विकल्प सामने होते है, या तो चक्छ...
नवगीत की पाठशाला

८- कुछ तो कहीं हुआ है - कुछ तो कहीं हुआ है भाई, कुछ तो कहीं हुआ है झमझम बारिश है बसंत में सावन में पछुआ है कुछ तो कहीं हुआ है हुई कूक कोयल की गायब बौर लदी अमराई गायब सरसों फू...
नीरज

भलाई किये जा इबादत समझ कर - गुरुदेव *पंकज सुबीर *जी के ब्लॉग पर तरही मुशायरा हुआ था जो बहुत चर्चित और लोकप्रिय रहा. उसी तरही में मैंने भी अपनी एक ग़ज़ल भेजी थी जिसे वहां पाठकों ने पढ..
हिंदी ब्लॉगरों के जनम  दिन

आज मंसूर अली हाशमी का जनमदिन है - आज, 22 फरवरी को आत्म मंथन , अदब नवाज़ वाले मंसूर अली हाशमी का जनमदिन है। इनका ईमेल पता mansoor1948@gmail.com है। बधाई व शुभकामनाएँ *आने वाले **जनमदिन आद..
नुक्कड़

नक्सलवादी, आतंकवादी और भगत सिंह - राजीव रंजन प्रसाद - कुहु बिटिया अब हाथी-घोडे की कहानियों से आगे आ गयी है, क्यों न हो वह अब कक्षा दूसरी में जो जाने वाली है। आज मैंने भगत सिंह से उसका परिचय कराया। “बेटा भगत स...
नन्हें सुमन

‘‘मेरी गैया’’ - *मेरी गैया बड़ी निराली,* *सीधी-सादी, भोली-भाली।* * * *सुबह हुई काली रम्भाई,* *मेरा दूध निकालो भाई।** * *हरी घास खाने को लाना,* *उसमें भूसा नही मिलाना।* ...
उच्चारण
“चलो होली खेलेंगे” - * आई बसन्त-बहार, चलो होली खेलेंगे!! रंगों का है त्यौहार, चलो होली खेलेंगे!! बागों में कुहु-कुहु बोले कोयलिया, धरती ने धारी है, धानी चुनरिया, पहने हैं ..
गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष
 मन , बुद्धि और आत्‍मा हमारी परिस्थितियों से कैसे प्रभावित होती है ?? - अन्‍य पशुओं की तरह ही गर्भ में भ्रूण के रूप में ही प्रतिदिन हमारा शारीरिक विकास आरंभ हो जाता है और वह जन्‍म के बाद भी पूरे जीवन जारी रहता है, पर जन्‍म के कुछ..
वीर बहुटी
सच्ची साधना [कहानी] - सच्ची साधना {कहानी} बस से उतर कर शिवदास को समझ नहीं आ रहा था कि उसके गांव को कौन सा रास्ता मुड़ता है । पच्चीस वर्ष बाद वह अपने गाँव आ रहा था । जीवन के इतने..
कर्मनाशा

जोगीड़ा सारा रारा ... - *लीं साहेब 'सुरु' हो गयल फ़गुआ ...* *गाईं , बजाईं चाहे खाली सुनीं आ राग ताल पर माथा धूनीं ॥* *फगुआ त ह..* यह होली गीत या फगुआ भोजपुरी इलाके में कई रूपों मे..
ईश्वर की पहचान
ऐसे थे …विश्व नायक - *विश्व नायक मुहम्मद सल्ल0* ने कभी किसी खाने में ऐब नहीं लगाया, इच्छा होती तो खाते वरना छोड़ देते। *विश्व नायक मुहम्मद सल्ल0* मिलने वाले को सब से पहले सलाम क...
ताऊ डॉट इन

ताऊ पहेली - 62 : विजेता : श्री ललित शर्मा - प्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको घणी रामराम ! हम आपकी सेवा में हाजिर हैं ताऊ पहेली -62 का जवाब लेकर. कल की ताऊ पहेली का सही उत्तर है थिकसे ...
साहित्य योग
सकरी गली - उठक पठक से भरी जिंदगी सकरी गली में उल्झी जिंदगी रोटी कपडा तक सिमटी जिंदगी छोटे में बड़ा पाने की जिंदगी एक तरफ कूड़े का कचरा तो दूसरी तरफ कटता बकरा थो...
An Indian in Pittsburgh - पिट्सबर्ग में एक भारतीय
उठ दीवार बन - नरक के रस्ते से काफी बचना चाहा लेकिन फिर भी कुछ कहे बिना रहा न गया. स्वप्न-जगत से एक छोटा से ब्रेक ले रहा हूँ. तब तक गिरिजेश राव के "नरक के रस्ते" से प्रेरित...
Rhythm of words...

शायद - तेरे लिये रात गुजारने को खाली करके पलकों के कोने रखता ॥ गर मालूम होता तुम आओगे मैं ख्वाबों के बिछोने रखता ॥ रह जाता चाहे खुद भूखा देता तुम्हे जरुर रुखा-सूख...
Bikhare sitare...!
बिखरे सितारे: ८जाना कहाँ ना जानू.. - .(पूर्व भाग:सुबह तक पूजा नही संभल पाई... केतकी कुछ बेहतर थी..पूजाने लाख कहा: " आप दोनों निकल जाएँ...मै कल परसों बिटिया को लेके ट्रेन से बंगलौर लौट जाउँगी...
सरस पायस

श्रम करने से मिले सफलता : डॉ. रूपचंद्र शास्त्री "मयंक" - बालगीत : परीक्षा सिर पर आई के लिए "सरस पायस" को आशीष के रूप में मिला डॉ. रूपचंद्र शास्त्री "मयंक" का बालगीत इतना अच्छा है कि मैं उसे पोस्ट के रूप में प्र..
हास्यफुहार
वरमाला - *वरमाला*** श्रीमान और श्रीमती जी टी.वी पर रामायण सीरियल देख रहे थे। प्रसंग था सीता स्वयंवर का। श्रीरामजी ने धनुष तोड़ा। करतल ध्वनी हुई। सीताजी आई। रामज..
Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून
कार्टून:- एक बेचारे ब्लागर की कड़क धमकी ...
एक तकनिकी सूचना जां हित मे जारी
एक तकनिकी सूचना उनके लिए जो लोग अपनी वेबसाइट बनवा रहे हैं , या अपना ब्लॉग , निज कि साईट पर शिफ्ट कर रहे हैं और किसी साईट बनाने और होस्ट करने वाली कंपनी से सहायता या सर्विस ले रहे हैंवो ध्यान दे कि आप उस कम्पनी से अपनी वेबसाइट का पासवर्ड अवश्य ले ले और
नारी  रचना

लो क सं घ र्ष !: मरगे आशिक पर फ़रिश्ता मौत का बदनाम था
देश-विदेश में भौतिक विकास तो हुआ, लोग शिक्षित भी हुए, सुख-सुविधायें बढ़ी परन्तु मानवता न जाने कहाँ सो गई, इधर तबड़तोड़ कई हृदय-विदारक घटनायें घट गई, डेढ़ सौ वर्ष पूर्व की गालिब की यह पंक्ति अब भी फरयाद कर रही है:- आदमी को भी मयस्सर नहीं इनसां होना ?अब घटनाओं
लोक वेब मीडिया
Suman

कार्टून- इस बार तो गिरा ही देना...

 shekhar

कार्टून : पैसा पैसा करती हमारी होकी टीम

बामुलाहिजा > > cartoon by Kirtish bhatt

रात चुप है मगर चाँद ख़ामोश ...
रात चुप है मगर चाँद ख़ामोश नहीं, कैसे कहूँ आज मुझे फिर होश नहीं, ऐसे डूबे हैं हम उनकी यादों में, रात गुज़र गयी हमें एहसास तक नहीं !

अब आज की चर्चा को देता हूँ विराम! सबको राम-राम!!

15 comments:

  1. बढ़िया चर्चा शास्त्री जी, काजल जी का मजेदार कार्टून देखने से छूट गया था यहाँ देख लिया, शुक्रिया !

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  2. हमेशा की तरह सुन्दर चर्चा...आभार!

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  3. हमेशा की तरह बेहतरीन और विशद चर्चा.

    रामराम.

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  4. सुन्दर चर्चा...आभार!

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  5. bahut khoob !

    sundar aur vistrit charcha ke liye abhinandan !

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  6. हमेशा की तरह सुन्दर चर्चा...आभार!

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  7. बढिया चर्चा शास्त्री जी,
    आभार

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  8. आपकी मेहनत साफ़ दिखती है ...
    बहुत बढ़िया चिटठा चर्चा ...!!

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"लाचार हुआ सारा समाज" (चर्चा अंक-2820)

मित्रों! रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...