चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Friday, June 18, 2010

“चर्चा मंच-188” (अनामिका)

कवि तुलसी दास जी ने लिखा था ..
कवित विवेक एक नहीं मोरे,
सत्य कहहुं लिखी कागद कोरे ...
सो, मुझ में भी कुछ विवेचना करने और किसी भी ब्लॉग को अच्छा या बुरा कहने की शक्ति एवं विवेक नहीं है...और यही सत्य है ! मेरी कोशिश आप सब को पसंद आये और हमारा साथ यूँ ही बना रहे इसी आकांक्षा के साथ एक बार फिर आप सब के आगे प्रस्तुत है आज की मेरी ये चर्चा...

डा. सुभाष राय जी की लेखनी का कमाल देखिये ...
मुझे तो यह रचना बहुत पसंद आई...
उम्मीद करती हु आपको भी पसंद आएगी.
मेरे भीतर तुम, उपस्थित रहोगे


ओ मेरे पिता! तुम्हारा
अंश हूँ मैं सम्पूर्ण
मां के गर्भ में रचा
तुमने मुझे अपने लहू से

देखिये इन हब्शियो को कैसे एक छ हजार किलो के हाथी को चट कर गए...



और वो हाथी को चट कर गए..

शेफाली पाण्डेय जी दिखा रही हैं एक का कवि सम्मलेन का हाल..
मेरा फोटो
क्या आपने कभी देखा है ऐसा सम्मलेन
कविताओं में तालियाँ भी बहुत बजी | कवियों द्वारा यह भय दिखाया जा रहा था कि अगर इस समय तालियाँ ना बजाई तो अगले जनम में घर - घर में जाकर तालियाँ बजानी पड़ेंगी | कलयुग में इस धमकी का बहुत महात्म्य है |


शिशुपाल प्रजापति जी आज कल के हालातों का ब्यौरा देते हुए दे रहे हैं गीता का ज्ञान ..

जीवन-मरण, भाग्य और कर्म,
सब कुछ उसके हाथ.
शोर-शराबा मत कर बन्दे,
क्या जायेगा साथ.


जीवन-मरण, भाग्य और कर्म,सब कुछ उसके हाथ...



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रमणिका फाउनडेशन से रु-ब-रु कराते हुए आज आपको बता रहे हैं एक लेखक कि हमारी भाषा भी स्त्री विरोधी है...आइये पढ़िए ...जानिये..
हमारी भाषा भी स्त्री विरोधी है

इस ब्लॉग में लिखा हर एक शब्द बाड़मेर के पूर्व सांसद और श्री क्षत्रिय युवक संघ के संस्थापक स्व.श्री तन सिंह जी का लिखा हुआ है | स्व. तन सिंह जी को ज्यादातर लोग एक विधायक ,सांसद के तौर पर ही जानते है उन्हें लेखक के तौर पर नहीं , इसीलिए उनकी लेखनी से रूबरू कराने के उद्देश्य से उनकी रचनाएँ जो क्षत्रिय युवक संघ द्वारा प्रकाशित उनकी पुस्तकों से साभार लेकर यहाँ प्रस्तुत करने की कोशिश......


कौन थी आशा थी तुम्हारी

प्रस्तुत है दिगंबर नासवा जी की पहली व्यंग रचना जो जो हिन्दी-युग्म में भी प्रकाशित हो चुकी है ... आशा है आपको पसंद आएगी
शब्द-कथा
शब्दकोष से निकले कुछ शब्द
बूड़े बरगद के नीचे बतियाने लगे
इक दूजे को अपना दुखड़ा सुनाने लगे

श्री अरविन्द मिश्रा जी पूछते है की हम पत्नी को गृह लक्ष्मी क्यों कहते आये हैं ...'गृह सरस्वती' क्यूं नहीं ?

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गृह लक्ष्मी ही क्यों, 'गृह सरस्वती' क्यों नहीं ?

लायन्स क्लब्स इन्टरनेशनल में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद पर अभी तक हिन्दुस्तान से चार-छह महिलाएं ही चुनी गयीं हैं, इनमें से एक श्रीमती पुष्पा स्वरुप हैं....आइये जानते हैं इनके बारे में और पढ़िए इनका इंटरव्यू ..


चुनाव जीतने के बाद पुष्पा स्वरुप अपने पति श्री अविनाश स्वरुप के साथ


डिस्ट्रिक्ट गवर्नर लायन पुष्पा स्वरुप से विशेष मुलाकात

हमारे युवा ब्लोग्गर हरीश कुमार अपने प्रश्नों के ही maya जाल में फंस गए हैं...और खुद से सवाल करते हैं..

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मैं कौन हूँ कब जानूंगा ?, क्या केवल अपना ही नाम ?

मैं कौन हूँ कब जानूंगा ?, क्या केवल अपना ही नाम ?
जीवन आधा निकल गया पता न चला मुझे अपना काम,
जो देखा वोही सिखा नहीं पता था सही - गलत ज्ञान,
पहचान अभी भी थी अधूरी सही गलत थे मेरे काम,
अब कौन सिखाएगा मुझको ईश्वर तुम ही दो अब ज्ञान,

योगेश शर्मा जी की कलम आज जिन्दगी के लम्बे रास्तो को शब्दों में बाँधने की कोशिश कर रही है...देखिये आप भी..

मेरा फोटो
जीवन को जिया, कभी घूँट घूँट ,
कभी इसको पिया है, बूँद बूँद डरते डरते,

जीवन लंबा ,लम्बे रस्ते......

लीजिये जनाब आप की भी कोई फ़रियाद है तो चलिए ले चलते हैं आपको भारत-पाकिस्तान की सरहद पर बिंजौर गांव में जहाँ है एक मजार जो लैला मजनू की मजार से जानी जाती है यह मजार राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में है। पाकिस्तान की सीमा से यह महज दो किलोमीटर की दूरी पर है। और हर साल की १५ जून को यहाँ सैकड़ो लोग पहुचते हैं...

यहां पर लगती है अमर-प्रेम फरियाद


मनोज कुमार जी समझा रहे हैं कि देखिये निन्यानवे के चक्कर में पड़ने की कोनो जरुरत नहीं हैं...

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राम-राम ! अरे ई दुनिया का है ? वृथा मोह-माया है। आदमी भौतिक सुख-सुविधा के पाछे रन-रन करते रहता है। कौनो-कौनो आदमी के लिए तो धने संपत्ति सबस बड़का चीज होता है।
लालटेन बाबू समझाए, "कहती तो ठीक हो मगर 'पूत कपूत तो का धनसंचय' ? अरे जब बाल-बच्चा बिगदिये जाएगा तो जमीन-जायदाद और धन संपत्ति ले के का होगा ?

देसिल बयना - 34 : पूत सपूत तो का धन संचय...


दिलीप जी कहते हैं इसमें कुछ प्रश्न छिपे हैं जो कभी बचपन में उठा करते थे...फिर आज की एक सोच दिखानी चाही...प्रश्न अभी भी मन में है...इसलिए आपसे उत्तर की आशा रखता हूँ...

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मैं अच्छा कैसे बन जाऊं, मैं अच्छाई से डरता हूँ....



फिरदौस खान जी की गज़ल सुनिए ...


फूल तुमने जो कभी मुझको दिए थे ख़त में...फ़िरदौस ख़ान

चांदनी रात में कुछ भीगे ख्यालों की तरह
मैंने चाहा है तुम्हें दिन के उजालों की तरह
साथ तेरे जो गुज़ारे थे कभी कुछ लम्हें
मेरी यादों में चमकते हैं मशालों की तरह



पढ़िए आज की ताज़ा खबर खुशदीप जी लाये हैं एक ऐसा नुस्खा कि अब नारी-पुरुष को लेकर बहस की कोई गुंजाइश ही नहीं बचती.

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आज से नारी-पुरुष की बहस खत्म...खुशदीप

Women शब्द में Men समाहित होता है...
Mrs में Mr समाहित होता है....



अपनत्व जी कर रही हैं लज्जा शब्द की विवेचना अपने कलम की धार से..

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लज्जा

जब बड़प्पन

सभी मर्यादा लांघ

ओछेपन पर

उतर आता है .....




नवीन त्यागी जो इतिहास के विद्यार्थी रहे हैं और इतिहास का गहन अध्यन करते रहते हैं . इतिहास के जो पहलू इन्हें अच्छे लगते हैं, उन्हें हमारे साथ बाँटना चाहते हैं लेकिन सच्चाई के साथ...
ये है झांसी की रानी (jhansi ki rani)का असली चित्र.



शंकर फुलारा जी बता रहे हैं अपने बारे में..

कुछ वर्षो से अपने पास के तिराहे पर अपने हाथ से बना पोस्टर लगा कर यही कार्य कर रहा हूँ, जो काफी लोकप्रिय है। इसी का नाम है "टेंशन पॉइंट", अब आगे से यही टेंशन आपको इस ब्लॉग पर दूंगा। ज्वलंत मुद्दों के अनुसार यह अपडेट होता रहेगा। वैसे हमारा एक क्लब है, अंकल क्लब। मैं उसका संचालक भी हूँ। ....

और पेश कर रहे हैं अपनी एक रचना....

"क्योंकि मैं भारत हूँ"

मैं भारत हूँ,

वर्तमान में बहुत शर्मिंदा हूँ ।

फिर भी ….“मैं” जिन्दा हूँ ,

"क्योंकि; मैं भारत हूँ",

गिरता हूँ फिर उठता हूँ,

हर बार संभालता हूँ,



लीजिये जनाब अब १९ जून से केंसर का इलाज सस्ता हो गया है .. गरीबी रेखा से नीचे आने वालों का इन मशीनों से बिलकुल मुफ्त इलाज होगा। देश के महानगरों में लीनियर एक्सीलरेटर से कैंसर मरीजों की सिंकाई का कोर्स करने की फीस एक लाख से डेढ़ लाख तक ली जाती है। चैरिटी वाले अस्पतालों में भी 50-60 हजार रुपए फीस तय है।


रायपुर के आंबेडकर अस्पताल में 19 जून से लीनियर एक्सीलरेटर मशीन चालू होने जा रही है...पढ़िए..

छत्तीसगढ़ में कैंसर के इलाज की हाईटेक मशीन



डा. रूप चन्द्र शास्त्री जी कलम के सिपाही को जागृत करते हुए कहते हैं...


चमक और दमक में, कहीं खो न जाना!

कलम के मुसाफिर, कहीं सो न जाना!

“कहीं सो न जाना!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")




और अब दीजिये इजाज़त...और मैं अब करती हूँ आपकी टिप्पणियों का इंतज़ार .....इसी उम्मीद के साथ कि आपको मेरा यह प्रयास पसंद आएगा.... . आप सब को नमस्कार, सलाम, सत्श्रीअकाल....Have a nice time with good health & wealth..

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http://anamika7577.blogspot.com/

20 comments:

  1. आभार कुछ अच्छी सिफारिशों के लिए ...

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  2. bahut acchi prastuti...
    abhaar..!

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  3. सुंदर , सुसज्जित चर्चा ,आभार

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  4. good work is done bye you Anamika Ji

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  5. sundar charcha Anamika ji...meri rachna shaamil karne ke liye bahut bahut dhanywaad

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  6. अच्छे लिंक्स ...उम्दा चर्चा

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  7. बढ़िया चर्चा...

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  8. hamesha ki tarah, bahut achchhi charcha

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  9. विस्त्रात चर्चा .... मज़ा आ गया ,,, कई नये लिंक मिले ... मुझे भी शामिल करने का शुक्रिया .....

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  10. anamika ji ki dhanyavaad....achchhe charcha ke liye

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  11. Anamika ji bahut achछ्a laga. aap jis tarh ek saath itne lekhkon, rachnakaron ko praotsahit kar rahin hain, vah aur achछ्i rachnaon ke liye marg saph karega. dhanyvad.

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  12. बहुत सुंदर ढंग से पिरोए है आपने चर्चा मंच में रचनाओं के मोती |बधाई
    आशा

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  13. काफ़ी मेहनत की है………………बहुत ही सुन्दर चर्चा।

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  14. बेहतरीन। लाजवाब चर्चाऑ

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  15. फिरदौस जी की ग़ज़ल बहुत अच्छी थी.. चर्चा में आपने चीज़ों को बहुत सलीके से पिरोया है.. अपने इस मंच पर मुझे भी शामिल किया.. इसके लिए तहेदिल से शुक्रिया..

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  16. स्वास्थ्य-सबके लिए ब्लॉग के पोस्ट को इस चर्चा में शामिल करने के लिए हार्दिक आभार। कृपया सहयोग बनाए रखें। झांसी की रानी की असली तस्वीर देखना बेहद रोचक रहा।

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  17. interesting blog, i will visit ur blog very often, hope u go for this site to increase visitor.Happy Blogging!!!

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