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Sunday, July 04, 2010

रविवासरीय (०४.०७.२०१०) चर्चा

नमस्कार मित्रों।

कल जो टूटे थे रिश्ते आज वो लगते झूठे हैं ....

My Photoकाव्य मंजूषा पर 'अदा' जी की ग़ज़ल

                                                            

कल जो टूटे थे रिश्ते आज वो लगते झूठे हैं                                                  

प्रीत डगर के काँटों से मेरे पाँव के छाले फूटे हैं                                           

शिकवों का दस्तूर नहीं ना है गिलों का कोई रिवाज़                                              

नेह की वो सारी कोंपल बस कागज़ के गुल-बूटे हैं

त्रासदियाँ

प्रवीण पाण्डेय जी की प्रस्तुति।

साल-2018...जगह-लखनऊ से 58 किलोमीटर दूर हसनपुर में अमेरिकन न्युक्लियर पावर प्लांट। एक तेज़ धमाका। फिर कुछ और धमाके। उसके बाद क्या, कहां, कैसे, क्यूं जैसे कुछ बेमानी से सवाल...अमेरिकन कंपनी पर 500 करोड़ का जुर्माना। और हां, 40 हज़ार इंसानी मौतें और खरबों की संपत्ति मिट्टी के हवाले। लेकिन, इस बारे में बात करने का कोई फ़ायदा नहीं क्यूंकि इस जान-माल के बदले मिल तो गया 500 करोड़। और क्या चाहते हैं। न्यूक्लियर लायबिलिटी बिल में यही तय हुआ था न।

झूठ पकड़ने वाला रोबॉट

बस यूँ ही निट्ठल्ला पर डा. अमर कुमार

जब मैं छोटा बच्चा था, कभी शरारत नहीं करता था.. ढँग की जब कोई बात सुने ना, फिर मैं दँगा करता था आज मेरा मन निट्ठल्ला डीप-रेस्ट है, मैंनें दू-दुगो पोस्ट लिक्खड्डाली.. और एक सब्सक्राइबर तक झाँकने न आया...

अनन्त आखाश--

My Photo

वीर बहुटी पर निर्मला कपिला दीदी की

कहानी

अनन्त आकाश--  भाग- 1 पढिए।

मेरे देखते ही बना था ये घोंसला, मेरे आँगन मे आम के पेड पर---चिडिया कितनी खुश रहती थी और चिडा तो हर वक्त जैसी उस पर जाँनिस्सार हुया जाता था। कितना प्यार था दोनो मे! जब भी वो इक्कठे बैठते ,मै उन को गौर से देखती और उनकी चीँ चीँ से बात ,उनके जज़्बात समझने की कोशिश करती।--
"चीँ--चीँ चीँ---ाजी सुनते हो? खुश हो क्या?"
"चीँ चीँ चेँ-- बहुत खुश देखो रानी अब हमारा गुलशन महकेगा जब हमारे नन्हें नन्हें बच्चे चहचहायेंगे।"" चिडा चिडिया की चोंच से चोंच मिला कर कहता ।

ऐसे सीखा बूढ़े तोते ने राम राम कहना!

My Photoधान के देश में! : Hindi Blog पर जी.के. अवधिया बता रहे हैं

बूढ़ा तोता राम राम कहना नहीं सीख सकता"। अब हम भी तो बूढ़े हो गये हैं याने कि अब हम भी कुछ सीख नहीं सकते। पर कोशिश करने में क्या हर्ज है; आखिर कम्प्यूटर चलाना, वर्ड, एक्सेल, पॉवरपाइंट, पेजमेकर आदि हमने सन् 1996 में खुद का कम्प्यूटर खरीदने के बाद ही, याने कि छियालीस साल की उम्र के बाद ही, तो सीखा है, और वह सब भी खुद ही कोशिश करके। बस फोटोशॉप ही तो सीख नहीं पाये क्योंकि उसे सीखने की कभी प्रबल इच्छा ही नहीं हुई हमारी। और अब जब इसे सीखने की इच्छा हो रही है तो लगता है कि कहीं "सिर तो नहीं फिर गया है" हमारा। पर हमने भी ठान लिया कि सीखेंगे और जरूर सीखेंगे। आखिर जब ललित शर्माजी हमारा हेडर बना सकते हैं तो हम खुद क्यों नहीं?

गैरजरूरी प्रार्थनाएं

My Photo बिगुल पर राजकुमार सोनी जी समझा रहें कि कैसी प्रार्थनाएं करनी चहिए।          

आकाश और धरती में
विराजमान करोड़ो देवताओं से
मां करती है प्रार्थना
हे प्रभु टिमटिमाता रहे
लाल तारा माथे पर
सुहाग अमर रहे मेरा

कौव्वे की कांव कांव , जाग उठा सारा गांव

My Photoगठरी पर अजय कुमार कहते हैं

गांव में सुबह से ही हलचल शुरु हो जाती है ।लोग अपने काम में लग जाते हैं । यहां मुम्बई में भी लोग भोर में चहल पहल शुरू कर देते हैं और नौकरी अर्थात दूसरे के काम में लग जाते हैं ।हां तो बात का रुख बदले इससे पहले बता दूं कि आज भी गांव में ग्रामीण-अलार्म की व्यवस्था काम कर रही है । नहीं समझे , अरे भाई ग्रामीण-अलार्म माने काग भुसुण्डी जी । काग भुसुण्डी भी नहीं जानते !!! अच्छा--- कौवा (Crow ) तो समझेंगे । याद आया सुबह की कांव कांव ,बिला नागा सही समय पर ।

गाँव....गोपन.....चाँद की गठरी.....खोज- खुलिहार ...और भरी दुपहरी.......सतीश पंचम

My Photoसफ़ेद घर पर सतीश पंचम की प्रस्तुति।

   गाँवों में कई कहाँनिया...कई बातें....कई गोपन छिपे होते हैं.....आराम कर रहे होते हैं.....जिन्हें यदि खुलिहार दिया जाय तो ढेर सारी बातें उघड़कर सामने आ जांय ..... मानों वह बातें खुलिहारे ( छेड़े) जाने का ही इंतजार कर रही हों।

“.. ..कुछ-कुछ होता है!” (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मेरा फोटोउच्चारण पर डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक घोषणा कर रहे हैं कि उनके                        

दिल में कुछ-कुछ होता है,
जब याद किसी की आती है।
मन सब सुध-बुध खोता है,
जब याद किसी की आती है।
गुलशन वीराना लगता है,
पागल परवाना लगता है,
भँवरा दीवाना लगता है,
दिल में कुछ-कुछ होता है,
जब याद किसी की आती है।

वो खिड़की उदास रहती है

My PhotoLamhe .... पर Ravi yadav की अभिव्यक्ति।                                                  

वो खिड़की,
जो मेरी खिड़की से दिखती है ,
जिसमे अक्सर तुम दिखते थे ,
अब वो खिड़की उदास रहती है,
ना जाने कब सोती है,
ना जाने कब जगती है,

पहली बारिश और हम तुम....

My Photoकुछ कहानियाँ,कुछ नज्में पर Sonal Rastogi का अहसास।                             

सिमटे सिमटे
सीले सीले
आधे सूखे
आधे गीले
पहली  बारिश
और हम तुम
सुलगे सुलगे
दहके दहके
थोड़े संभले
थोड़े बहके

दोस्तों पर्यावरण पर कुछ विज्ञापन कॉपी

मेरा फोटोstreet light पर RAVINDRA SWAPNIL PRAJAPATI कहते हैं

दोस्तों पर्यावरण पर कुछ विज्ञापन कॉपी
वे आप भी पढियेगा
...
तुमने हमारा पानी छीना
हमारे जंगल जमीन छीनी
ओ मनुष्य तुम सोचते हो
बोलो हम तुमसे क्या कहें

मंजिल के लिए

मेरा फोटोमेरी भावनायें... पर रश्मि प्रभा... की कविता।                                                  

कहीं कोई अंतर ही नहीं,                                                                           

सारे रास्ते दर्द के                                                                                 

तुमने भी सहे                                                                                       

हमने भी सहे                                                                                      

तुमको एक तलाश रही                                                                               

मेरे साथ विश्वास रहा

क्षणिकाएँ...

My Photo.....मेरी कलम से..... पर Avinash Chandra की प्रस्तुति।                          

परी..माँ...
कहती थी बेशकीमती,
होते हैं पँख,
आसमानी परियों के.
और एक साड़ी में,
निकाल देती थी,
वो पूरा साल.

तेरी अनुकंपा से

मनोज पर मनोज कुमार

12012010004---मनोज कुमार

ज़िन्दगी में हमारी चाहत बहुत कुछ-न-कुछ पाने की होती है। हम कुछ पाते हैं कुछ नहीं भी पाते। जो नहीं मिलता उससे मन में असंतोष उपजता है। हमें अपने है और नहीं है के बीच एक संतुलन बिठाने की जरूरत है। यानि संतोष और असंतोष के बीच संतुलन। इससे हमारी जिंदगी के बीच फर्क पड़ेगा। सबसे पहले हमारे पास जो है, उसके लिए संतोष का भाव होना चाहिए, और जो नहीं उसके लिए कोशिश होनी चाहिए । सिर्फ असंतुष्‍ट रहने का कोई मतलब नहीं है।

मान गए मम्‍मी की एस्‍ट्रोलोजी को !!

My Photoगत्‍यात्‍मक चिंतन पर संगीता पुरी की प्रस्तुति।

बात मेरे बेटे के बचपन की है , हमने कभी इस बात पर ध्‍यान नहीं दिया था कि अक्‍सर भविष्‍य की घटनाओं के बारे में लोगों और मेरी बातचीत को वह गौर से सुना करता है। उसे समझ में नहीं आता कि मैं होनेवाली घटनाओं की चर्चा किस प्रकार करती हूं। लोगों से सुना करता कि मम्‍मी ने 'एस्‍ट्रोलोजी' पढा है , इसलिए उसे बाद में घटनेवाली घटनाओं का पता चल जाता है। यह सुनकर उसके बाल मस्तिष्‍क में क्‍या प्रतिक्रिया होती थी , वो तो वही जान सकता है , क्‍यूंकि उसने कभी भी इस बारे में हमसे कुछ नहीं कहा। पर एक दिन वह अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं कर सका , जब उसे अहसास हुआ कि मेरी मम्‍मी वास्‍तव में बाद में होने वाली घटनाओं को पहले देख पाती है। जबकि वो बात सामान्‍य से अनुमान के आधार पर कही गयी थी और उसका ज्‍योतिष से दूर दूर तक कोई लेना देना न था।

बस।

25 comments:

  1. धन्यवाद. कुछ और बेहतरीन पोस्टों के लिंक भी मिले.

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  2. मान गए आपकी चर्चा करने की क्षमता को...
    बेहतरीन..
    आज तो बस कमाल की चर्चा हुई है....
    सारे लिंक्स बेजोड़ लगे हैं...
    बहुत बहुत धन्यवाद...

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  3. सुंदर चर्चा ,बेहतरीन पोस्टों के लिये धन्यवाद...

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  4. बहुत सुन्दर चर्चा!
    --
    अच्छे लिंक मिल गये पढ़ने के लिए!

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  5. कुछ लिंक छूट गये थे, पढ़ आये ।

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  6. बहुत बहुत धन्यवाद। सुन्दर चर्चा

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  7. बहुत बढ़िया चर्चा...अच्छे लिंक्स मिले

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  8. चर्चित रचनाओं में खुद को देखना सुखद होता है

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  9. मान गए आपको भी ..
    बहुत ही बढिया प्रस्‍तुति !!

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  10. सुव्यवस्थित ,और विस्तार से चर्चा के लिये आभार।

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  11. मैंने भी कुछ कड़ियों पर जाकर देखा!
    अच्छी रचनाओं की चर्चा की गई है!

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  12. बहुत ही बढिया और सुन्दर चर्चा………………आभार्।

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  13. dhanyawaad, is sundar charcha ke liye

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  14. मनभावन चर्चा. अच्छे लिंक्स मिले.

    आभार.

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  15. मनोजजी
    आपका शुक्रिया।
    यह अच्छी बात है कि चर्चा मंच में चर्चा करने वाले तमाम ब्लागर इस बात की सूचना भी देते हैं कि आपकी पोस्ट शामिल की गई है। जाहिर सी बात है मन में अपनी पोस्ट को देखने की जिज्ञासा तो बनी रहती है। ठीक वैसे ही जैसे लेखक अपनी पहली किताब के लिए लालायित रहता है।
    आपने मेरी पोस्ट को चर्चा के लायक समझा इस बाबत् आपका धन्यवाद।

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  16. मनभावन चर्चा मनोज जी!
    आभार्!

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  17. बहुत सुन्दर चर्चा!

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  18. वाह वाह इंद्रधनुषी छटा बिखेरती चर्चा । बहुत ही सुंदर मनोज भाई , एकदम मनभावन चर्चा

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  19. मनोज भाई !
    बहुत मुश्किल है सैकड़ों ब्लाग्स में से चर्चा के लिए कुछ ब्लाग को अपना मनपसंद बताते हुए उनके बारे में लिख पाना !

    आप लोगों की मेहनत से बड़ी हिम्मत अफजाई होती है ! शुभकामनायें

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  20. बहुत ही अच्छी चर्चा!

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  21. अनुगृहीत हूँ, और क्या कहें..
    मेरे उपेक्षित पोस्ट की सुध लेने के लिये धन्यवाद श्रीमन !

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"लाचार हुआ सारा समाज" (चर्चा अंक-2820)

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