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Friday, August 06, 2010

अनामिका की सदायें ...(चर्चा मंच - 237)


लीजिए जी हाज़िर है आज की चटपटी..ताज़ा ताज़ा..मसालेदार चर्चा...अरे अरे गोल-गप्पा या आलू की टिक्की नहीं है...चर्चा है .....बस एक एक लिंक उठाते जाइए और जायका लेते जाइए..




कुछ दिल को छूती कवितायें...ग़ज़लें....




Sameer Lal
ये हैं हमारे समीर लाल जी और हाँ इनके यूँ सिर झुके और आँखों पर चढ़े काले चश्में के अंदाज़ पर ना जाइये, इनकी चश्में के पीछे छिपी आँखे ना जाने क्या क्या देख लेती हैं और क्या क्या कह देती हैं और पता है जो भी कहती हैं सीधी दिल से निकलती हैं और सीधी दिल पर ही लगती हैं क्युकी ये इतनी संवेदनशीलता से जो लिखते हैं...अब आप खुद ही देखिये ना इनकी लघुत्तम कथा और कविता के कुछ शब्द. .......
कोई
हत्या महज हत्या नहीं होती!!
कुछ
मानसिक रुग्णता
यानी कि
विद्वेष, नफ़रत
और
बदले की भावना से जनित





My Photo

अब आप बताइए इन ' संगीता स्वरुप ' जी की मंद मंद मुस्कान को कैसे भूल सकते हैं जो हैं हम सब की आदरणीय और जो अपने नए नए चमत्कारों से हमें भी प्रोत्साहित करती हैं कुछ नया कर दिखाने के लिए....और पता है जब ये अपनी गागर ले कर चलती हैं तो पूरा समुद्र भर लाती हैं अपनी रचनाओं में....देखिये इनकी गागर में सागर का एक उदाहरण...
ख़्वाबों से
मिट्ठी करके
फिर सजा लिया है
मैंने उनको
अपनी .....,

ख़्वाबों से मिट्ठी .....




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चितचोर हैं इनके नैना
ना पड़ना इनके फेर में..
बातें करती गोल गोल
कहते हैं इनको ' अदा '
कलम की मल्लिका अदा जी के लिए कुछ कहना छोटा मुंह बड़ी बात होगी और ये खुद ही कहती हैं कि तुम हमें यूँ भुला ना पाओगे...पढ़िए इनकी गज़ल जो ऐसा ही कुछ हाल-ऐ-दिल बयान कर रही है...

बिछ गईं हज़ार आँखें, तेरी रहगुज़र में
मिलूँगी मैं वहीं तुम्हें, जिधर जाओगे तुम
और अब आगे पढ़िए...यहाँ से...
मिलूँगी मैं वहीं तुम्हें, जिधर जाओगे तुम ...
http://swapnamanjusha.blogspot.com/2010/08/blog-post_05.html


मेरा फोटो
शास्त्री जी जिनका नाम मोहताज़ नहीं किसी परिचय के लिए...जिनकी कलम बिखेरती है इंद्र-धनुषी रंग चहुँ ओर ...स्वभाव से हैं ये बहुत नरम....और बच्चों के लिए है इनका दिल प्यार से लबालब .....आज देखिये इनका मन फूलों के भाग्य की चिंता कर रहा है..
खिल रहे हैं चमन में हजारों सुमन,

भाग्य कब जाने किस का बदल जायेगा!

कोई यौवन में भरकर हँसेगा कहीं,
कोई खिलने से पहले ही ढल जायेगा!








मेरा फोटो
इन हस्ती को भी आप सभी जानते हैं जिनका नाम है वंदना गुप्ता जिनकी कलम हर विषय पर चाहे वो प्रेम पर हो, भक्ति पर हो या देश में होने वाली कोई हलचल ..अति कुशलता से चलती है...लीजिए आज ये सुनामी पर अपनी कलम के मोती बिखेर रही हैं...
सुनामी में

सभी संचार
के माध्यमो को
नेस्तनाबूद कर
विनाश पर
अट्टहास करते हैं
और चहुँ ओर
फैली वीभत्स
नीरवता
एक शून्य
छोड़ जाती है

विनाश के चिन्ह यादो की धरोहर बन जाते हैं




मेरा फोटो
इन्हें कौन नहीं जानता... इनका नाम तो बताने की जरूरत ही नहीं...जो खुद ही रौशनी की किरण हैं, तो समझे आप ये हैं रश्मि प्रभा जी और क्या गज़ब लिखती हैं ये ...दिमाग सोचते सोचते थक जाता है कि इतना अच्छा आखिर कैसे लिख लेती हैं ये...और इनके होंठों की ये जादुई मुस्कान इस राज़ को और गहरा कर देती है...लीजिए पढ़िए इनकी कलम से एक दम ताज़ा ताज़ा निकली नज़्म....


उसने कहा
- तुम्हारे सपने अपने से लगते हैं
और मैं जान गई
उसके सपनों की पोटली भी फटी हुई है
मेरी पोटली की तरह ...
मैंने गौर से उसे देखा
कहीं कोई उलझन नहीं उसके चेहरे पर
बिल्कुल मेरी तरह





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राकेश खंडेलवाल जी जब खुद ही अपने बारे में यूँ कहते हैं कि ....कौन हूँ मैं ये मैं भी नहीं जानता आईने का कोई अक्स बतलायेगा असलियत क्या मेरी, मैं नहीं मानता.. तो जी बताइए अब हम कैसे बताएं ये कौन हैं और क्या हैं लेकिन ज़िन्दगी को अपने शब्दों में यूँ बयाँ करते हैं अपने ब्लॉग
गीत कलश पर
ज़िन्दगी
ज़िन्दगी एक चादर मिली श्वेत सी
बूटियाँ नित नई काढ़ते हम रहे
छोर को एक,छूकर चली जो हवा
साथ उसके किनारी चढ़े हम बहे




मैं ये सोचता हूँ (मानस भारद्वाज)
की रचना पढ़िए और जानिये इन्हें भी

तेताला

पर ..
मैं ये सोचता हूँ कि‍ कुछ लिखूँ

क्या लिखूँ ये समझ नहीं आता है

जो समझ आता है वो लिख नहीं पाता
जो लिख पाता हूँ वो समझ नहीं आता है








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राजीव जी कलम के धनी जो जिंदगी के हर पहलू पर अपनी कलम चलाते हैं . आज पढ़िए वो लिख रहे हैं पानी पर ....पानी की भावनाएं देखिये जो चला जा रहा है अकेला...कूदता फांदता और देखो कहाँ जा पहुंचा है...
पानी
गोरी की गागरों में
प्यासों की प्यास बुझा
कहीं मीठा नमकीन बना
जिससे मिला वैसा बना
कर नालो को भरा भरा
नदिया में वो लहर उठा
चला चला मै यू चला






मेरा फोटो
उत्तर प्रदेश, लखनऊ की अर्चना तिवारी जी की लेखनी से आज कौन वाकिफ नहीं है..सब उनकी शमशीर के मुरीद बन चुके हैं....धीरे-धीरे इनकी गजलों में इनका लहजा इनकी पहचान बनाता जा रहा है....और किसी रचनाकार के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि है...तो लीजिए जी पेश है इनकी एक और धार दार गज़ल...



घुटन है, पीर है, कुंठा है, यातनाएं हैं
मुहब्बतें हैं कहाँ, अब तो वासनाएं हैं
जमाना जब भी कोई धुन बजाने लगता है
थिरकने लगतीं उसी ताल पर फिजाएं हैं

और अब इससे आगे पढ़ने के लिए यहाँ भ्रमण करें..

मुहब्बतें हैं कहाँ, अब तो वासनाएं हैं
http://kuchhlamhedilse.blogspot.com/2010/08/blog-post.html



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ये हैं हमारे युवा ब्लोग्गर अभिषेक जी और कहते हैं हम अपनी कलम से इन्कलाब लायेंगे..और देश के हालातों पर नज़र डालते हुए समझा रहे हैं कि कैसे लड़ा जाए मुश्किलों से......
अगर मनाते हो तुम आज जश्न
फिर कर लो आज तुम एक प्रण
जात-पात को ठुकराओगे
भ्रस्टाचार को जड़ से मिटाओगे
कलम को तुम्हे अपनाना है
जन-जन को शिक्षित बनाना है
आतंकवाद को गर मिटाना है
तुम्हे मिलकर कदम उठाना है
ना लड़ोगे धर्म के नाम पे तुम
अब आगे जनाब इनके लिंक पर जाकर ही पढ़ लीजिए ना...
फिर से लानी आज़ादी है






लीजिए जी जिसकी भगवान में आस्था ना हो बस वो ही पढ़े इस लिंक को....और अगर सदस्य बनना चाहते हैं ऐसे किसी ब्लॉग के तो बस आपका नास्तिक होना एकमात्र योग्यता है. तो लीजिए देर किस बात की आपका इस ब्लॉग में स्वागत है. यह ब्लॉग भारतीय दर्शन की उस परम्परा को सामने रखने का विनम्र प्रयास है जिसे "लोकायत " कहते हैं. इस दार्शनिक परम्परा के अनुयायी ईश्वर की सत्ता पर विश्वाश नही करते थे. उनका मानना था की क्रमबद्ध व्यवस्था ही विश्व के होने का एकमात्र कारण है, एवं इसमें किसी अन्य बाहरी शक्ति का कोई हस्तक्षेप नही है. .......... इस ब्लॉग के माध्यम से इनका प्रयास मानवतावादी दृष्टि कोण को उभारने का रहेगा जो किसी संप्रदाय अथवा धर्म (religion) के हस्तक्षेप से मुक्त हो. अगर आप ईश्वर की सत्ता में अविश्वाश रखते हैं, मानव को स्वयं का नियंता समझते हैं इस ब्लॉग में आपका स्वागत है...और अब लीजिए ऐसी ही एक नज़्म....
मैं तुम्हें नहीं मानता
जाओ कर लो
जो बन पड़े
होगे तुम सर्वशक्तिमान
तुम्हारी मूर्तियां
मुझे कला के तौर पर
तो लुभाती हैं
पर लगवा नहीं पाई
कभी पूजा पाठ में ध्यान
तो तैयार हैं आप नास्तिक बननें के लिए ????? तो लीजिए आगे का लिंक...
नास्तिकों का ब्लॉग: होगे तुम भगवान..
होगे तुम भगवान...





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अरे ये तो कमाल हो गया सच में आज वकील साहब दिनेश राय द्विवेदी जी भी कविता कह रहे हैं..जिनकी कलम को आज तक मैंने कानूनी दांव पेचों पर ही चलते देखा है...और देखिये तो सही, मानना पड़ेगा की कविता लिखने में भी इनको महारथ हांसिल है...नहीं विश्वास तो आप खुद ही देख लीजिए...
बहुत तपी है

प्रिया तुम्हारी
और तनिक भी
मत तरसाओ


अनवरत: गोल बनाओ फिर से जाओ





इन्हें पहचानिये ....ये हैं लखनऊ की लेखिका राजवंत राज जी...जिनकी कलम के शब्दों की चमक देखते ही बस वाह वाह ही निकलती है....लीजिए इनकी ताज़ा नज़्म आज की महेंगाई पर..
सवाल फिर वहीं का वहीं है एक ओर
जन्म स्थल यानि अस्पतालों का पलंग महंगा हो गया है
तो दूसरी ओर शमशान की लकड़ियों का किराया भी बढ़ गया है
अब आगे आप खुद ही क्लिक करिये ना इस लिंक पर..

महंगाई




मेरा फोटो
इनसे मिलिए ये हैं शारदा अरोड़ा जी जो बताती हैं खुद को होम मेकर लेकिन आप जब इनके ब्लोग्स पढेंगे तो पाएंगे ये होम मेकर से ज्यादा जिंदगी मेकर हैं जो अपने भिन्न भिन्न ब्लोग्स से जिंदगी के सफर को, जिंदगी के रंगों को और जिंदगी के अवसादों को अपने दोस्तों का साथ पाकर अपना रास्ता स्वयं आलोकित कर लेती हैं....तो लीजिए आज इनकी कलम बता रही है....





मन्दिर-मस्जिद भी गए , वो बोलता ही नहीं




ज़माने में मगर उसका करम जिन्दा है
कहाँ से लाऊँ बुतों की बस्ती में खुदा
तलाश जारी है , ख्याल जिन्दा है
ख्याल जिन्दा है




लीजिए आई लेखों की बारी.....




लेखों में जो सबसे पहला लिंक उठा रही हूँ उसके लिए आप सब को पहले ही आगाह कर देती हूँ कि इसे ना पढ़े...और अगर पढ़े तो इस लिंक में दिए गए शो में भाग ना लें....अरे भइ पूरा पूरा इंतजाम किया है यहाँ ऐसे पुरुषों को पीटने का जो पतित्व प्राप्त कर चुके हैं....राम...राम....राम..मैं तो कतई नहीं कहूँगी कि आप इस प्रतियोगिता में भाग लें.....वर्ना पता है भारी भारी लट्ठों और हथोडो से पिटवाने का प्रोग्राम है वो भी लड़कियों और महिलाओं से....विश्वास नहीं होता तो आप खुद ही पढ़ लीजिए..
जो महिला दो मिनट में २० लठ्ठ मार सकती हो, कृपया वही आवेदन करे. अगर दो मिनट में इससे ज्यादा लठ्ठ चला सकती हो तो यहअतिरिक्त योग्यता मानी जायेगी. बदलाव के लिये अगर महिला प्रतियोगी चाहे तो लठ्ठ की जगह चार किलो वजन का हथोडा भी पुरुष प्रतियोगी के सर पर मार सकती है....................पुरुष प्रतियोगी हाऊस के अंदर महिलाओं को नही पीट सकता. वह सिर्फ़ पिट सकता है.

अब आगे पढ़ना है तो जी लीजिए लिंक दिए देती हूँ...अब आपकी मर्जी...


ताऊ टीवी का "पति पीटो रियलिटी शो"





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क्या कहा आपने....??? आप नहीं जानते इन्हें ? क्या बात करते हैं जनाब....भला कोई विषय बिचारा बच पाया है बिना इनकी मुस्कान को छूते हुए और इनकी कलम के नीचे से गुजरने से...अब देखिये ना इन्होने महाविद्वानों को भी नहीं बख्शा ...अब वो बात अलग है कि वो महाविद्वान बेशक हों कूप के मेंडक ही...पढ़िए क्या कहते हैं ये उनको...
पारब्रह्म परमेश्वर के गुण गाते ये ब्लाग ज्ञानी -सतीश सक्सेना



ललित शर्मा

अरे अरे डरिये मत ये हमारे मशहूर ब्लोग्गर ललित जी हैं...और डरना हो तो बस इनके शब्दों से डरिये जनाब ना जाने कहाँ कहाँ बिन तलवार के वार कर देते हैं....कहाँ कटाक्ष लिख देते हैं . अब कल की बात लीजिए कहाँ तो कल फूंकनी चिमटे पर व्यंग्य था लेकिन आज ये दुखी हैं की ये अब कलम चलाना ही भूल गए हैं...
अब तो इन्हें कलम के सपने आते हैं बस ,वास्तविक रुप से तो देखने को ही नहीं मिलते। कुछ लोगों ने अभी तक कलम को संभाल कर रखा है। एक पुरानी यादों के रुप में...लीजिए पढ़िए इनकी चिंता...






इनकी सूरत से पहचान गए होंगे आप सब ये कौन हैं...मैं नाम बताऊँ या ना बताऊँ कोई फर्क नहीं पड़ता.. और ये लेकिन कह रहे हैं कैसे नहीं फर्क पड़ता जी...आखिर हम सब के बीच से हमारी प्यारी ब्लोग्वानी जिसे हमारे जानने वालो ने और यहाँ तक की इनकी श्रीमती जी ने भी ..extra marital affairs तक घोषित कर दिया था ...वो रातों-रात गायब हो गयी तो फर्क पड़ता है ना...

तो जी ये भी कह रहे हैं कि

कैसे कह दूं यार .....कि कोई फ़र्क नहीं पडता
http://ajaykumarjha1973.blogspot.com/2010/08/blog-post_04.html







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ये हैं क्षमा जी..
क्षमा जी के संवेदनशील मन का पता चलता है उनकी रचनाओं से..इंसान तो क्या पंछियों से भी उनके ये रिश्ते बन जाते हैं...नहीं विश्वास तो पढ़िए उनकी ये कहानी..उन्हीं की जुबानी...
मेरे घर रुकना ज़िंदगी...!






http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/6253212.cms

इंटरनेट की लत का शिकार बन चुके किशोरों में डिप्रेशन का खतरा दोगुने से भी ज्यादा होता है। एक स्टडी में पहली बार दावा किया गया कि इसकी वजह से किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती है



गालियाँ चरित्रहनन आत्मस्वीकृतियाँ कलंकित होती स्त्रियाँ


- (डॉ.) कविता वाचक्नवी
पूछ रही हैं ....उस समाज पर आप क्या कहिएगा जिसकी सारी गालियाँ स्त्री के लिए सुरक्षित हैं व सारी आशीर्वाद पुरुष के लिए ..........गालियाँ स्त्री-केन्द्रित ही क्यों हों, लैंगिक ही क्यों हों ?
गालियों का निहितार्थ ही यह है कि एक पक्ष दूसरे पक्ष की स्त्रियों के प्रति कुत्साभाव से ग्रस्त है व सब से `ईज़ी टार्गेट' (अर्थात् स्त्री) को निशाना बनाकर, अपमानित कर के अपने क्रोध को शांत करना चाहते हैं
http://streevimarsh.blogspot.com/2010/08/blog-post.html




समवेत स्वर - Samvet Swar


नीलम शर्मा 'अंशु' जी दिखा रही हैं हमारे एक हरफनमौला, मस्तमौला कलाकार आभास कुमार गांगुली उर्फ़ किशोर कुमार जी की जिंदगी की कुछ झलकियाँ। जिन किशोर कुमार जी की आवाज़ लगभग महीना भर रोते रहने के कारण अचानक कर्कश से सुरीली हो गयी । तो आइये पढते हैं किशोर कुमार जी की जिन्गदी के कुछ छुपे हुए राज यहाँ.... http://samvetswar.blogspot.com/2010/08/blog-post_03.html
हम लौट आएंगे तुम यूं ही बुलाते रहना



प. अनिल जी शर्मा सहारनपुर वाले आगाह कर रहे हैं आपको ...कि

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दान देने से पहले जरा सोच लें.
दान देने से पहले जरा सोच लें...कहीं अहित ना हो जाय ? दान करना हमारे समाज में अति शुभ माना गया है लेकिन कई बार यह दान दुःख का कारण भी बन जाता है.हमारे आसपास ऐसे कई व्यक्ति है जो कि ज्यादा दान या ज्यादा धर्म में लीन रहते है. फिर भी कष्ट उनका व उनके परिवार का पीछा नहीं छोड़ता.....
http://anilastrologer.blogspot.com/2010/08/blog-post_04.html





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ये हैं हमारे आपके हेल्थ ऐडवाइसर रामबाबू सिंह दिल्ली से...जो आज चर्चा करने जा रहे हैं एक ऐसी महत्वपूर्ण बनौषधि की जिसमे सारे रोगों को दूर करने की शक्ति है,जो की ठंढी प्रकृति का है तथा इसकी विशेषता यह है की सूखने पर भी इसके गुण नष्ट नहीं होते | इसे आप हरा या सुखा किसी भी रूप में खाकर इसके सामान गुण का लाभ उठा सकते है | जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ आयुर्वेद में मशहूर बनौषधि जिसका नाम है " आँवला"




पी.के.सिंह जी विवेकानंद जी के जीवन का एक प्रेरक प्रसंग प्रस्तुत कर रहे हैं..पढ़िए..
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ये हैं हमारे ब्लॉग के पंडित जी श्री डी. के. शर्मा ' वत्स ' जी जो ज्योतिष के ज्ञाता हैं. पढ़िए इनकी तारो ताज़ा पोस्ट सात वचन---सुखी जीवन के सात आधार स्तम्भ.. पर इसे वही पढ़े जो अभी कुंवारे हों....अरे भाई ये शादी के सात वचनों की जानकारी दे रहे हैं और कह रहे हैं...विवाह समय पति द्वारा पत्नि को दिए जाने वाले सात वचनों के महत्व को देखते हुए यहाँ उन वचनों के बारे में कुछ जानकारी देने का प्रयास कर रहा हूँ. यदि आज भी इनके महत्व को समझ लिया जाता है तो दाम्पत्य सम्बन्धों में उत्पन अनेक समस्यायों का समाधान स्वत: ही हो जाएगा.
http://blog.panditastro.com/2010/08/blog-post_05.html



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अरे चेहरा नहीं दिख रहा...चलो मैं बता देती हूँ...ये हैं हमारे स्मार्ट इन्डियन श्री अनुराग शर्मा...इनका लेखन आप सब ने पढ़ा ही होगा.. ये कहते हैं अपने बारे में की ज़्यादा कुछ नहीं है अपने बारे में बताने को. पिट्सबर्ग में बैठकर हिन्दी में रोज़मर्रा की बातें लिखता हूँ. शायद उनमें से कुछ आपके काम आयेंगी और कुछ आपका दिन सार्थक करेंगी.

और आज एक लघु कथा पेश कर रहे हैं...आपके समक्ष 'सम्बन्ध'.. तो लीजिए पढ़िए इनकी लघु कथा
..
सम्बन्ध - लघुकथा
http://pittpat.blogspot.com/2010/08/blog-post.html



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ये जनाब हैं राज कुमार सोनी जी जो हरफनमौला हैं कलम के. कुछ इनकी आँखों के सामने से निकल जाए और इनकी लेखनी चुप्पी साध जाये....ऐसा नहीं हो सकता....ये सोनी साहब बहुत दिनों से गायब थे...और बहुत दिनों बाद अपने घर में घुसे हैं तो एक झोला जो इनकी ही राह देख रहा था....बस जी इनकी नज़र पड़ी तो झोला....झोला ना रहा...इनकी कलम का वजीर बन गया...नहीं समझ आई मेरी बात तो लो पढ़िए इनका एक लेख ....

बेटियों की आड़ में




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ये हैं श्री अखिलेश शर्मा जी जो बताते हैं अपने बारे में की मैं पेशे से पत्रकार हूँ. टीवी पत्रकार. बीच-बीच में लिखने की धुन सवार हो जाती है. इसलिए ब्लॉग पर अपने निजी विचार रख देता हूं. और आज ये जो लिख रहे हैं वो सोचने को मजबूर करता है....और सही भी...
ये लिखते हैं......


मुझे तो लगता है कि गेम्स होने चाहिएं और बिल्कुल कामयाब भी होने चाहिएं.
मैं अय्यर की बातों से इत्तफाक नहीं रखता. बल्कि मुझे तो लगता है कि यूपीए-1 में बतौर खेल मंत्री खुद अय्यर ने गेम्स को कामयाब बनाने के लिेए कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और इसी का नतीजा है कि आज सबके मन में शंका है कि आखिर ये गेम्स कामयाब हो पाएंगे या नहीं.
सुरेश कलमाड़ी और उनके गुर्गों के भ्रष्टाचार की कहानियां तो गेम्स खत्म होने के बाद भी चलती रहेंगी.
लेकिन अभी सबकी जिम्मेदारी ये है कि गेम्स को कामयाब बनाने के लिए जी-तोड़ मेहनत करें.


अब आगे पढ़िए...
इस खेल को कामयाब करो
http://merikahee.blogspot.com/2010/08/blog-post.html



लीजिए जी अब आप इस जायके दार चर्चा के बारे में बताएं ...आप सब को ये कोशिश कैसी लगी..हमें इंतज़ार रहेगा बेसब्री से आपकी टिप्पणियों का...

अब चाहूंगी इजाज़त ...

नमस्कार..

अनामिका



31 comments:

  1. पहली टिप्पणी के रूप में मेरी ओर से धन्यवाद; मेरे लेख तक आने व उसे सम्मिलित करने के लिए।

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  2. अच्छा जी...
    तो हम गोल गोल बातें करते हैं....
    रुक जान..अनामिका की बच्ची...छोडूंगी नहीं...
    हाँ नहीं तो...!!

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  3. अच्छा जी...
    तो हम गोल गोल बातें करते हैं....
    रुक जा ..अनामिका की बच्ची...छोडूंगी नहीं...
    हाँ नहीं तो...!!

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  4. कविता की यहाँ चर्चा करने के लिए धन्यवाद!
    कविता लिखने का अभ्यासी नहीं हूँ। पर कभी कोई बात होती है जब कविता अनायास ही फूट पड़ती है। लेकिन उसे अंतिम रूप देने के लिए प्रयास तो करने ही होते हैं।

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  5. अनामिका की बात में, कोई नही प्रपंच!
    अभिनव चर्चा से सजा, सुन्दर चर्चा मंच!!

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  6. आज तो बहुत छांट कर कविताओं का चयन किया है
    कई जानी मानी हस्तियों से रूबरू करवाया है |
    सुंदर चर्चा के इये बहुत बहुत बधाई |
    आशा

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  7. बहुत अच्‍छी चर्चा .. बहुत सारे लिंक्स मिले !!

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  8. अनामिका जी,
    मेरी पोस्ट का लिंक देने के लिए शुक्रिया
    वैसे भी"भावभीनी बिदाई"के बाद आना ठीक नहीं था। लेकिन आपके आग्रह को टाल न सका।
    ढेर सारी शुभकामनाएं आपको।

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  9. यहाँ आकर और अच्छे अच्छे रचनाकारों के रचनाओं का पढने का अवसर मिला..
    मेरी रचना को सम्मिलित करने के लिए आपका आभार अनामिका जी...
    मुझे और भी बेहतर लिखने की प्रेरणा मिलेगी..

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  10. अनामिका जी ,
    मुझे लगता है आज की चर्चा सर्वश्रेष्ठ और सर्वाधिक मौलिक है , गीत और लेख को अलग खंड देना, रचनाकारों का परिचय अनामिका के अंदाज़ में देना और रचना पर संक्षिप्त व प्रभावशाली प्रतिक्रिया ने इस ब्लाग चर्चा को एक सम्पूर्ण लेख का दर्ज़ा दिया है ! मुझे विश्वास है कि आप नए आयाम कायम करेंगी ! हार्दिक शुभकामनायें !

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  11. mobail no. our e mail id ke bavjood ye sukhad our aprtyashit tohfa ,wah! anamika thank you very very much . hr bar ki trha is bar bhi aapne jo pthneey vicharneey sngrhneey samgri prosi hai usse dil dimag ki bhookh to shant hui hi sath hi is apnepn pr aankhe bhr aai .ek bar fir is khoobsurat subh ke liye shukriya .

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  12. आज का चर्चा मंच बहुत अच्छे चुने हुए लिंक्स से सजा हुआ है ...हर रचनाकार का परिचय आपने अपने निराले अंदाज़ में दिया है...बेहतरीन प्रस्तुति ..खूबसूरत साज - सज्जा ....
    सतीश जी की बात से सहमत .....अब तक की सर्वश्रेष्ठ चर्चा ....अपनी चर्चा में मुझे शामिल करने के लिए आभार ...

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  13. sabke baare me badee pyaari pyaari baaten bade dilkash andaaj me aapne likha hai ...... charchaa manch khoob saja hai

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  14. जवाब नहीं आपकी सदाओं का।

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  15. एक मँच हमें गूगल और ब्लोगवाणी...चिट्ठा जगत आदि ने दिया ...कुछ चुनिन्दा पोस्ट्स को एक ब्लॉग पर प्रकाशित कर एक मँच आपके चर्चा मँच ने दिया ...शुक्रिया । आज के चर्चा मँच पर अनामिका जी आपने बड़ी ख़ूबसूरती से लिखने वालों का परिचय भी दिया ..ये और भी अच्छा लगा ।

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  16. jabardast...hats wats off...bahut hi shaandaar...

    shabd khatm, aur kya bolun???

    aaj chha gayin aap...waise hamesha chha jaati hain..aaj kuchh jyada hi :)

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  17. जबर्दस्त्त चर्चा है आज की ..

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  18. अनामिका जी आज का अन्दाज़ तो सबसे हट्कर रहा ……कोई भी लिन्क पढे बिना आगे बढने का मन नही कर रहा था………………बेहद आकर्षक अन्दाज़ मे चर्चा की है जो पढने को मजबूर करती है और यही आपकी सफ़लता की सूचक है………………मेरी पोस्ट को जगह देने के लिये आभारी हूँ।

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  19. संग्रहणीय प्रस्तुति।
    सब बेहतरीन लोगो से और उनके रचना संसार से परिचय कराने का आभार।

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  20. इस चर्चा दा जवाब नहीं।

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  21. मसालेदार चर्चा है । अच्छे लिंक्स मिले ।

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  22. हां आपने सच में ही बिल्कुल सच कहा कि आज आपके लिए कुछ खास है । आज तो सचमुच ही सबके लिए खास है ये पोस्ट । एक बुकमार्क करने लायक चर्चा बहुत ही बेहतरीन प्रस्तुति , आपकी मेहनत का अंदाजा लगा रहा हूं ...शुभकामनाएं बहुत बहुत आपको

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  23. बहुत ही विशद चर्चा है. आपकी मेहनत के आगे नतमस्तक हूं, बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम

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  24. अनामिका जी, आपकी ये आज की चर्चा तो सचमुच कमाल की है...बेहद उम्दा तरीके से परिचयात्मक रूप में आपने इस चर्चा तो अंजाम दिया...
    आभार्!

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  25. शारदा की कृपा शब्द में ढल गई
    भाव आभूषणों से सजाते रहे
    हम उसी को धुनों में संवारा किये
    भोर से सांझ तक गुनगुनाते रहे
    गीत-संगीत, कविता कहानी सभी
    का सृजक एक ही है, कहीं व्योम में
    बैठ थिरकाता अपनी रहा उंगलियां
    इंगितों पर सभी झनझनाते रहे.

    सादर

    राकेश

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  26. बहुत शानदार चर्चा ! आपका चयन हमेशा बहुत बढ़िया होता है ! बहुत बहुत बधाई !

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  27. बहुत बहुत धन्यवाद, मेरी पोस्ट इस चर्चा में शामिल करने के लिए. "मैं अपने बारे में बताता हूं कि मैं पत्रकार हूं.." मेरा यकीन मानिए मैं वाकई पत्रकार हूं. एक हिंदी चैनल के लिए काम करता हूं और पिछले 17 साल से पत्रकारिता के पेशे में हूं. ब्लॉगिंग पिछले दो साल से कर रहा हूं और समाज को प्रभावित करने वाले कई विषयों पर अपनी बेबाक राय रखता हूं चाहे वो किसी को अच्छी लगे या फिर बुरी. आशा है आप आगे भी इसी तरह मेरी पोस्ट को अपनी चर्चाओं में शामिल करती रहेंगी. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद

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  28. किंचित कारणोंवश देर से आया और आपका स्नेह देख अभिभूत हुआ.

    बहुत आभार इस बेहतरीन चर्चा को देख. अति आभार और बधाई.

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"स्मृति उपवन का अभिमत" (चर्चा अंक-2814)

मित्रों! सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...