चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Thursday, August 19, 2010

चर्चा मंच" (अंक - 250)




अभी-अभी सूचना मिली-

माननिय शाश्त्री जी
सादर अभिवादन

अभी रात्री को प. वत्स जी से फ़ोन द्वारा वार्तालाप हुआ था,
उनका नेट कनेक्शन का वायर टूटा है कहीं से, वह कल शाम
तक दुरूस्त हो सकेगा,

उन्होनें आपको यह संदेश देने के लिये कहा है कि वो कल
की चर्चा नही कर सकेंगे.

सादर    
ताऊ
इसलिए फटाफट चर्चा हाजिर है-
जानिए इन नये चिट्ठों को-



पहचान उन सभी का मंच है जो जिंदगी को जीते नहीं जीने का निर्वाह करते है .वे उन लोगो में नहीं है जिन्हें जीवन मिला है या जीने का मकसद उनके साथ रहता है .बस जीने और घिसटने के बीच दिल वालो की कलम से और दिल से जो निकल जाता है वही कविता है .पहली कविता भी तों आंसू से निकली थी .आंसू अपने दर्द के हो या समाज के ,वे निकलेंगे तों कविता भी निकलेगी और वही दिलवालो की ;पहचान ;है
चिट्ठाकार-
मेरा फोटो
Dr Chandra Prakash
हा मै हूँ और मेरी तन्हाई मेरे साथ है ,मेरे सपने मेरे साथ है .जिम्मेदारियों का अहसास भी साथ है जो मुझे हारने नहीं देते .अकेलापन ओढ़े हुए मै चल रहा हूँ लगातार की कोई तों मेरी भी मंजिल होगी जहाँ मै हूँगा और तन्हाई नहीं होगी .चलना ही जिंदगी है 

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पहचान 
सपने, सिद्धांत और संकल्प

"यादें"

ये कवि..

देश की राजकुमारी का स्वयंवर था रचा
नौजवां देश के कवियों में था कुछ शोर मचा
ये शर्त थी की जो कविता को वो पसंद करे
उसी कविता के रचयिता से वो शादी भी करे
और तारीफ जो पसंद उसे आई नहीं
कवि समझे की कभी ज़िन्दगी थी पायी नहीं
अपनी तारीफ को सुनने का ढंग निराला था
कई कवियों का आज उसने दम निकाला था
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"दीप फर्रूखाबादी"
New Delhi, Delhi, India
कुछ तो सोंचा होगा उसने "दीप" तेरे वास्ते यूँ हे बेमकसद किसी को ज़िन्दगी मिलती नहीं

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"यादें"

Apka apna

आग फैली तो ........................



अलीगढ और मथुरा में जो आग लगी है ये आग धमने वाली नहीं है ! क्यूकी आज हर कोई व्यापारी भाषा का प्रयोग करने लगा है !ये कहना तू गलत होगा के किसान ने जो धरना प्रदर्शन किया वो गलत है लेकिन किसान जिस मुआवजे की बात कर रहे है क्या वो रेट सही है ! खुद ही सोचिये चलो एक व्यापारी के नाते सोचो क्या जमीन के रेट पूरे देश में समान्तर है नहीं है और हो भी नहीं सकते !नोएडा और अलीगढ किस तरह से बराबर मुआवजे के हक़दार है ......

ankur tyagi

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    Apka apna



    यह ब्लॉग समर्पित है मेरे गुरु दिनेश ऋषि सर को.

    प्रथम चिटठा

    नमस्कार मित्रो. तकनिकी विश्लेषण एक ऐसा विषय है,जिसपर हिंदी भाषा में बहुत कम पाठ्य पुस्तके उपलब्ध है.हिंदीभाषी होने के कारण मुझे भी प्रारंभ में काफी दिक्कते आयी, इसी को ध्यान में रखते हुए मैंने नोनिफ्टी हिंदी ब्लॉग प्रारंभ किया है.इस ब्लॉग पर दिनेश ऋषि जी द्वारा निर्मित सार पर आधारित सौदों के बारे में बताया जायेगा ,आप अपने स्टॉक से सम्बन्धी प्रश्न भी मुझसे पूछ सकते है.मै यथा संभव उनका उत्तर देने का प्रयास करूंगा .दिनेश ऋषि सार विधि के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए कृपया www.bankniftytrading.in को देखे.

    niftylover


    Aakhiri Ghazal

    सुना है:अहमद फ़राज़

    सुना है:अहमद फ़राज़


    अहमद फ़राज़ नए दौर के उर्दू शायरों में मुझे सबसे अच्छे लगते हैं| क्यों? इसका जवाब ये ग़ज़ल पढ़ के ही मिल जाएगा| बताने की जरूरत नहीं. ये ग़ज़ल यू-ट्यूब पर खुद उनकी जुबानी भी सुन सकते हैं|

    सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं
    सो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैं

    सुना है रब्त है उसको ख़राब हालों से
    सो अपने आप को बरबाद करके देखते हैं..  ..
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    Bakhta Badnam
    New Delhi, Delhi, India
    "Humne ek sher mein galayee zindagee , log kahte hain gazal likhna aasan hai...."

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    Aakhiri Ghazal


    umesh shantikunj

    आजादी क्या है?

    १५ अगस्त २०१०
    आजादी क्या है?

    आजादी एक जश्न है.
    ख़ुशी है,उल्लास है,
    एक सुखद एहसास है.
    पुराना इतिहास है.
    पर बहुत ही खास है.
    फिर भी एक प्रश्न है?
    आजादी क्या जश्न है?

    umesh yadav

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    umesh shantikunj

    तेरे नैना
    जब भी देखूँ
    सोचूँ मैं ये
    कि कैसे कहूँ?
    सदा के लिए
    इन नैनों में ही
    मैं छुप के रहूँ...




    आज का चर्चा का यह अंक 
    यहीं पर समाप्त करता हूँ!
    राम-राम।।

    14 comments:

    1. फटाफट चर्चा से भी अच्छे लिंक्स मिले ..आभार

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    2. अंदाज एकदम न्या लगा और बहुत अच्छा

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    3. फटाफट चर्चा और इतनी खूबसूरत
      मयंक जी बहुत जी तोड़ मेहनत हुई है फिर तो...

      और ये पंक्तियाँ .....
      १...कुछ तो सोंचा होगा उसने "दीप" तेरे वास्ते
      यूँ हि बेमकसद किसी को ज़िन्दगी मिलती नहीं.......
      २.. हमने एक शेर में गा ली ये जिंदगी,
      लोग कहते हैं गजल लिखना आसान है ....
      इन २ लाइनों के सहारे तो उम्र गुजर जाये.......!!!!

      बहुत बहुत धन्यवाद ..

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    4. फ़टाफ़ट चर्चा मे भी 2 नये ब्लोग मिल गये और उन्हे ज्वाइन भी कर लिया ……………ये अन्दाज़ भी रास आया।

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    5. धन्यवाद शास्त्री जी...साथ में आपको सूचित करने के लिए ताऊ का भी धन्यवाद. अभी शाम को ही नैट ठीक हो पाया....
      जल्दबाजी में की गई चर्चा भी बहुत उम्दा बन पडी है..

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    6. फटाफट में भी यह जलवा ! आभार.

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    7. शास्त्री जी आप जैसे कुशल लोग ही कर सकते हैं ऐसी फटाफट और उत्तम चर्चा.

      बधाई.

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    8. आजकल हर चर्चा कुछ नया रंग जमा रही है.. आभार

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    9. सुंदर प्रस्तुति!
      राष्ट्रीय व्यवहार में हिन्दी को काम में लाना देश की शीघ्र उन्नति के लिए आवश्यक है।

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    10. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...बढ़िया लिंक मिले...

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