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Thursday, August 19, 2010

चर्चा मंच 251 (अनामिका की सदायें )...

आप सब को अनामिका का नमस्कार, लीजिए फिर आ गया है शुक्रवार और हम हाज़िर हो गए हैं अपनी चर्चाओं का पिटारा लेकर इस चर्चा मंच के दरबार में ….स्वागत है आप सबका और शुरू करते हैं आज की चर्चा...और हाँ किसी भी लिंक तक पहुँचने के लिए आप इन खूबसूरत चित्रों पर भी क्लिक कर सकते हैं …लिंक्स तो हैं ही… लिंक्स तक आपका पहुंचना और आपकी अभिव्यक्ति का हम तक पहुंचना हमारा मनोबल बढाता है...तो प्लीईईईईईज़ कंजूसी मत करियेगा... :) :)


यहाँ हैं कविताओं की पोटली...


मेरा फोटो

रश्मि प्रभा जी की लेखनी का कोई सानी नहीं ..
हर बार बेजुबान तो कर ही देती हैं..और इस बार तो लेखनी की सीमाएं भी तोड़ने पर अमादा हैं ...क्युकी ये अपने ब्लॉग मेरी भावनायें. पर कहती हैं...लिखो कुछ मनचाहा..

अभी भी मेरे पास खाली स्लेट है

और कुछ खल्लियाँ

और कुछ मनचाही इबारतें

वक़्त भी है -

तो लिखो कुछ मनचाहा


My Photo

आलोक खरे जी का व्यंग्य पढ़ आप कहीं सोच में मत पड जाइयेगा ... क्यूंकि ये सफलता के नुस्खे बता रहे हैं सेटिंग या जुगाड़ अपने ब्लॉग mere-ehsaas पर ..

सेटिंग या जुगाड़
ये शब्द जितना छोटा हे
उतन ही प्रभावशाली हे
बिना जुगाड़ के आप सफल हो
बहुत ही कम होता हे,
एक दिन वाइफ ने कहा
आप सेट्टिंग क्यूँ नही करते
हमने गुस्सा दिखाया
वाइफ को धमकाया.....




सप्तरंगी प्रेम ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती नीलम पुरी जी की एक ग़ज़ल.....सपना सपना ही रहने दो पर आपका इंतज़ार है...इनकी गज़ल की चंद पंक्तियाँ यहाँ पढ़ सकते हैं...

तुम्हें मुबारक हो घर अपना
दीवारों से मुझको लिपटा रहने दो,

खामोश हैं लब मेरे तो कोई बात नहीं ,
कहते है कहानी आँखों के अश्क उन्हें कहने दो,



मेरा फोटो

यह उम्र बढ़ती जा रही है
घट रहा है हमारे भीतर आवेग
मिट रही हैं स्मृतियाँ उसी गति में
मेरी व्याकुलता
जैसे लड़ाई के दिनों में एक सैनिक का
परिवार को लिखा पत्र
और उसके लक्ष्य तक नहीं पहुँच पाने की पीड़ा में घुला जीवन!

sandhya gupta जी की कविता नींद पढ़िए ...



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संगीता स्वरुप जी के थोड़े लिखे को बहुत जानिये जी क्युकी चंद शब्दों में गहरी बात कह देना इनका हुनर है...तो लीजिए इनकी तरो - ताज़ा रचना गम के घुंघरू इनके ब्लॉग बिखरे मोती पर..


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राखी का त्यौहार आने ही वाला है जब हर बहन अपने भाइयों की खट्टी मिट्ठी बचपन की यादों के साथ खो जाती हैं लेकिन कभी कभी इन रिश्तों में वक्त कुछ दरारें डाल देता है ऐसी ही Emotion's... के साथ Sunita Sharma अपनी एक कविता पेश कर रही हैं..
टूटे रिश्तों की खनक........

खत्म होते रिश्ते को जिन्दा कैसे करू
जो रूठा है उसे कैसे मना पाउ
कहुं कैसे तू कितना अजीज है
सबका दुलारा प्यारा भाई है

मेरा फोटो

मुकेश कुमार तिवारी जी जो अपने बारे में बताते हैं कि जिंदगी को करीब से लगभग सभी रंगों में देखा है जहाँ अभावो ने हौसला बढ़ाया कि हांसिल करने को और भी मुकाम हैं...आज लिखते हैं एक कविता : रात नही होती तो...

मुझे,

यह लगता है की
रात नहीं होती तो...
मैं ,
दिन को खींच कर
लंबा कर देता...




लड़कियां जब हो जाती हैं
अचानक से चुप ...
उन्हें कुरेदना
ठीक नहीं समझती हूं मैं
डरती हूं मैं
कि वो बोल देंगी तो
कोइ आस ना खो जाये
कहीं मेरा विश्वास
धूमिल ना हो जाये ...
मैं जो लगी हूं
रिश्तों के पुल बनाने में
उन रिश्तों से कहीं
खुद मेरा ही
विश्वास ना उठ जाये ...

ये सोच पढ़िए वाणी गीत जी के ब्लॉग "गीत मेरे .........पर "लड़कियां जो हो जाती हों अचानक से चुप ....
याद रहेंगे हम भी जवां थे कभी।। चलो, इक तस्वीर जड़ कर लगा दें अभी।।

अमिताभ जी के ब्लॉग पर पढ़िए सलीके से रखे हैं मेरे दिन-रात जिन्हें ये वरका वरका उलट पलट कर देख रहे हैं और खोये जाते हैं यादों के झुरमुट में...लीजिए आप भी इन पन्नों को पढ़ खो मत जाइयेगा ...

लगभग खंडहर होते जा रहे
इस शरीर के स्टोर रूम को
साल में महज़ एक बार खोलता हूं।
जब भी दरवाजा खोल कर मैं अन्दर घुसता हूं
रैक में सलीके से जमाये गये
दिन और रातों का
हिसाब रखते रजीस्टर के पन्ने
फडफडा कर उडने लगते हैं।
मुझे अच्छा लगता है क्योंकि
वे इस दिन खिलखिलाने लगते हैं।



मेरा फोटो

खा रहे हैं देश की, गा रहे विदेश की,
खिल्लियाँ उड़ा रहे हैं, भारतीय वेश की,
संभल रही है दासता, पिघल रही स्वतन्त्रता।
छल रही है देश को, देश की स्वतन्त्रता।।

ये पंक्तियाँ हैं शास्त्री जी की नयी पोस्ट “देश की स्वतन्त्रता” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”..) की..उनके ब्लॉग उच्चारण पर जो आजकल धूम मचा रहे हैं अपने दोहा स्टाइल से...पता है आजकल शास्त्री जी बात भी दोहा शैली में ही करते हैं....पता नहीं क्या हो गया है ????? ०)


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रंजू भाटिया जी के ब्लॉग कुछ मेरी कलम से kuch meri kalam se ** पर इनकी नयी रचना गीत की जुबान पढ़िए कैसे यादो की राख से शब्द सृजन कर अपनी रचनाओं में जान फूंक देती हैं ये..

और तब यूं ही बहती हवा
ले जाती है उस रिश्ते की राख को
उन आखरों तक ...
जो दुनिया की नज़र में
आज तेरे मेरे लिखे
गीत की जुबान कहे जाते हैं !!

मैंने कहा तुम चाँद हो;
कोयल हो;
बारिश की फुहार हो;
और भी बहुत कुछ...
तुम्हारी उनीदीं आखें सिकुडीं;
कुन्मुनायीं;
भौहें तनीं ;
सुशील जी को पढ़िए उनके ब्लॉग

हम तो कागज़ मुडे हुए हैं . पर ..

.....चाँद और रकीब




ये हैं आप सब के प्रिय ब्लोग्गर दिगम्बर नासवा जी जो अपने ब्लॉग

स्वप्न मेरे................ पर अपनी नयी रचना मैं नही चाहता .. के साथ काफी दिनों के बाद आये हैं...और अपनों से दूर होने के दर्द को अपनी इन पंक्तियों में बयान कर रहे हैं...

नही मैं नही चाहता
नीले आकाश को छूना
नयी बुलंदी को पाना
उस गगनचुंबी इमारत में बैठना
जहाँ धुएं का विस्तार खुद को समेटने नही देता
जहाँ हर दूसरा तारा




मेरे भाव ब्लॉग के लेखक जो अपना नाम गुप्त रखते हैं लेकिन इनकी कविताओं में लिखा एक एक शब्द मन को भीतर तक झिंझोड जाता है..लीजिए इस बार की इनकी कविता आंसू की कुछ ये पंक्तियाँ पढ़िए...आप खुद ही जान जायेंगे.. और आगे के लिए तो ब्लॉग देखिये ..

भावों की
पतवार लिए
तिरते हैं ये
घड़ी - घड़ी
इन्हें यूं तनहा
मत छोडो
बिखर जायेंगे
कड़ी - कड़ी ।


चिट्ठाकार
अरे नहीं पहचाने इन्हें ये हैं हमारी स्वप्न मञ्जूषा जी ...अरे भयी नयी अदा ...नयी फोटो...नया स्टाईल....सच में पहचानी ही नहीं जा रही हैं...हेना ? इनके लेखन में भी पता है नए नए बदलाव आते रहते हैं...लीजिए पढ़िए ....
'मकाँ', 'घर' नहीं बनेगा....!! इनके ब्लॉग काव्य मंजूषा पर.

और इसी के साथ हमारा काव्य मंच समाप्त होता है और शुरू होता है नए नए लेखों का मंच...तो लीजिए पढ़िए कुछ ताज़ा लेख ....


लेखक / writer

धर्म - अधर्म क्या है ! पढ़िए उदय की दुनिया पर
श्याम कोरी उदय जी के इस लेख को पढ़ कर आप अपने जीवन को बदल सकते हैं...और जान सकते हैं धर्म -अधर्म में भेद...
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रंजना सिंह जी जो कलम की धनी हैं इस बार अपने ब्लॉग संवेदना संसार पर एक छोटी सी कहानी प्रस्तुत कर रही हैं ...जो सच में लाजवाब है . तो लीजिए पढ़िए उनकी कहानी आखिरी ख्वाहिश ...


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प्रवीण पाण्डेय जी का ब्लॉग आज कौन नहीं जानता न दैन्यं न पलायनम् - ये कुछ लिखे और ना पढ़ा जाये ऐसा हो ही नहीं सकता...अब क्या करें ये लिखते ही इतना अच्छा हैं की बिना पढ़े निकल ही नहीं सकते...इस बार इन्होने जब अपने ब्लॉग पर ही लाल बत्ती जला कर कहा की सर तो बिजी है तो हमने तो चेक करना था ना कि प्रवीण सर कहाँ बिजी हैं...लो आप भी देखिये...

आप सब को पता है वैदिक कर्मकांडो के अनुसार हमारे जीवन में कितने प्रकार के संस्कार बताये गए हैं....नहीं पता ???? तो लो जी आज आप को हम उन १६ संस्कारों के बारे में विस्तार से बताते हैं इस पोस्ट संस्कार के ज़रिये ...

http://omashishpal.blogspot.com/2010/08/blog-post_18.html




लीजिए जी आप सब को एक ऐसे ब्लॉग से रु-ब-रु करवाते हैं जिसे एक विश्वविद्यालय के विद्यार्थी मिल कर चला रहे हैं...

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय केदृश्य श्रव्य अध्ययन केन्द्र ( Centre for Audio Visual Studies ) के विद्यार्थियों द्वारा रचनात्मकता की दिशा में एक पहल के रूप में इस ब्लॉग का शुभारम्भ किया जा रहा है। इस ब्लॉग का प्रमुख लक्ष्य विद्यार्थियों के भीतर की रचनात्मकता और सृजन क्षमता एवं उनके अन्दर के पत्रकार को दुनिया के सामने लाना है।..तो लीजिए आज पढ़िए CAVS संचार... पर मयंक की प्रेमचंद सृजन श्रृंखला में आपके लिए एक शानदार कहानी इज्ज़त का ख़ून




ईस्ट इंडिया कम्पनी फिर से आ रही है!..............................घुघूती बासूती

अरे हैरान हो रहे हैं....जी हाँ, अगले साल के आरम्भ में भारत में ईस्ट इंडिया कम्पनी का पुनार्गमन होगा। सोचकर ही विचित्र लगता है ना! किन्तु इस बार ईस्ट इंडिया कम्पनी को यहाँ लाने वाले भी और इसके मालिक भी लंदन में बसे भारतीय मूल के गुजराती भाई संजीव मेहता हैं। इस १५० वर्ष से निष्क्रिय व बेकार पड़ी कम्पनी के द्वार इस १४ अगस्त को फिर से खोले गए।जी हाँ ये सच है... विश्वास नहीं होता तो पढ़िए इस ब्लॉग घुघूतीबासूती पर...



अरे पहचानने की कोशिश कर रहे हैं ??? चश्मा बार बार साफ़ करके देखने की जरुरत नहीं है...हम ही बताये देते हैं आपको ये हैं फोटो कुम्भ के बिछड़े भाई-बहिनों का मिलन..-----दीपक मशाल और शिखा वार्ष्णेय जी की. जी हाँ दीपक जी मिले हैं शिखा जी और उनके परिवार से और बता रहे हैं अपने मिलन का किस्सा....तो लीजिए जनाब आप भी लुत्फ़ उठाइये इस मिलन का..

इनके ब्लॉग मसि-कागद पर...




अरे ये कोई साधारण इंसान नहीं जो नाइ की दुकान पर अपनी हजामत के लिए बैठा हो...ये हैं इस दुकान के मालिक श्री राम भरोसे सेन जी जो पीढ़ियों से पेशे से नाई हैं लेकिन आप जानते हैं बाल कुतरते कुतरते इन्होने तीन उपन्यास लिख डाले.. विश्वास नहीं होता तो ललित शर्मा जी के ब्लॉग की ये पोस्ट उपन्यास लेखन और केश कर्तन साथ-साथ ----- ललित शर्मा पढ़िए
Read More:

http://lalitdotcom.blogspot.com/2010/08/blog-post_19.html
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“नयी कविता का तो लक्षण यही है कि वह अत्यंत जटिल अनुभवों को अत्यंत सहज और सर्वग्राह्य रूप में व्यक्त करती है और जटिलताओं को पचाकर उसमें सार्वजनीन सत्य का असल तत्व निकालती है।”

कविता के नए सोपान (भाग-2) :: “कविता जटिल संवेदनाओं की अभिव्यक्ति है।”

ये लेख प्रस्तुत है मनोज जी द्वारा आप सब के लिए राजभाषा हिंदी ब्लॉग पर.


और अब इसी के साथ अपना पिटारा समेटती हूँ और हाँ याद रखियेगा अपनी अभिव्यक्ति अभिव्यक्त करने में कंजूसी और संकोच करने के लिए डॉक्टर ने मना किया है....हा.हा.हा.
ओके, अब इजाज़त ....

नमस्कार
अनामिका

26 comments:

  1. देखते ही देखते चर्चा मंच ने २५१ चर्चा कर डालीं.. बहुत सुन्दर रहीं ये चर्चाएँ.. सभी एक से बढ़के एक.. आभार आपका एवं बधाई भी..

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  2. are!
    in madam ke charcha karne ki ada ke kya kahne...
    ajab hai ji gazab hai...!

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  3. is manch ke kahne.... vakai laajvaab hai....pure hindi blog jagat ki khaber rakhta hai ye apna payara manch....jayada na kahte huye itna hi kahunga....Gager me sager hai ye.

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  4. सुन्दर और शालीन है, चर्चा का यह ढंग!
    निखर गया है आज तो, गद्य-पद्य का रंग!!

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  5. सुंदर प्रस्तुति!
    राष्ट्रीय व्यवहार में हिन्दी को काम में लाना देश की शीघ्र उन्नति के लिए आवश्यक है।

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  6. aaj ka sanyojan bahut hi sunder.. jahan kavitayen eak se badhkar eak hain.. wahin lekh bhi achhe hain.. sahitiik lekh se samkaalin vishyon par lekhon ka sankalan achha laga.. maonj ji ke sahitya ki kashsha bahut hi badhiya hai.. jo padahi ke dauran nahi padha ya chhot gaya wo sab padhne ko mil raha hai.. sahi kaha aapne ki mere bhav ne apna naam gupt rakha hai lekin unki kavitayen achhi hoti hain.. aansoo bhi achhi kavita hai.. shirshath blogger jaise rashmi prabha ji, sangeeta ji, praveen ji, alok kahre ji, ranjana ji, shashtri ji aadi aadi se sjaj yah manch vakai charcha yogya hai... badhai...

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  7. अनामिका जी सबसे पहले धन्यवाद आपने मेरी रचना "टूटे रिश्तों की खनक" को चर्चा मंच पर लिया । सचमुच जब राखी का त्यौहार हो बचपन की यादें जीवतं हो उठती है कुछ इन्ही भावनाओं का नाम है टूटे रिश्तों की खनक ।

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  8. बहुत अच्छी प्रस्तुति।

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  9. चर्चा मंच की हर चर्चा में इसके सदस्यों की मेहनत साफ़ झलकती है ...
    चर्चा में शामिल करने ke लिए बहुत आभार ..!

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  10. भाव भीनी चर्चा |बधाई
    आशा

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  11. हमेशा की तरह अच्छी , विस्तृत और उपयोगी चर्चा ...सारे लिंक्स देख लिए हैं ...बहुत अच्छा चयन किया है ...आभार

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  12. बहुत ही सुन्दर चर्चा रहा! काफी लिंक मिले! धन्यवाद!

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  13. अति उत्तम चर्चा। हमारे पोस्ट को शामिल करने के लिए आभार।

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  14. आज की चर्चा भी बहुत बढिया रही……………अच्छे लिंक्स्…………आभार्।

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  15. अच्छी लगीं कविताएँ...आपका संकलन हमेशा की तरह बढ़िया है.

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  16. pitaare me^ itanee saaree rachanaaye..khazanaa hei yah/ aapka parishram..ek jagah kai saaree rachanaaye pradaan kartaa hei jo kaabiletaarif hei.ab padhhtaa hoo ek ek kar sabko..

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  17. ...आपकी चर्चा में पैनापन व सार्थकता परिलक्षित हो रही है, बधाई !!!

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  18. बहुत बढ़िया रही यह चर्चा शुक्रिया मेरे लिखे लिंक को लेने के लिए अनामिका जी

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  19. कितनी और सुन्दर रचनाओं से परिचय करा दिया।

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  20. आपके इस श्रम और आकर्षक प्रस्तुति ने मुझे बाध्य कर दिया कि इसके सभी लिंकों पर जाऊं....
    आपने ऐसे लाजवाब लिंक दिए हैं कि अपना पूरा कोटा आज यहाँ से मिल गया हमें...

    बहुत ही सुन्दर और सार्थक चर्चा की है आपने....सोच रही हूँ,कितना समय लगा होगा आपको इसे तैयार करने में...इस श्रमसाध्य सुन्दर प्रयास के लिए आपका बहुत बहुत आभार...

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  21. सुंदर चर्चा.

    रामराम

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  22. बेहद मनभावन रही ये चर्चा...
    आभार्!

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  23. आश्चर्यजनक परिश्रम और प्रयास है ये...शायद रोज़ इतनी रचनाएं छांटने की मेहनत मैं कभी न कर पाऊं....
    बधाई...

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  24. चर्चा बहुत लाजवाब रही ....
    आपका बहुत बहुत शुक्रिया मुझे भी शामिल करने का ....
    बहुत से नये लिंक हैं ....

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  25. अनामिका जी तुस्सी ग्रेट हो।

    साड्डी पोस्ट दी चर्चा लई
    तुहानु शुक्रिया आखदे हन।

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  26. अनामिका जी,

    चर्चामंच में शामिल करने का शुक्रिया.....चर्चा में शामिल पोस्टों को एकत्र करने में की गई मेहनत काबिलेतारीफ है....

    बेहतरीन पोस्टों तक जाने का रास्ता मिला...

    सादर,

    मुकेश कुमार तिवारी

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