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Tuesday, August 24, 2010

“रक्षाबन्धन” (चर्चा मंच-255)

images (4) एक बरस में एक बार ही, आता राखी का त्योहार।
भरा हुआ धागे-धागे में,भाई-बहिन का निश्छल-प्यार।। 
आइए आज के चर्चा मंच को सजाते हैं-
देखिए राखी से सम्बन्धित कुछ पोस्ट-
पर्व राखी पूर्णिमा का
सुबीर संवाद सेवा
रक्षा बंधन का ये पावन त्‍यौहार, इस त्‍यौहार के दिन तो केवल और केवल बहनों की ही बात होनी चाहिये । तो आज की तरही में भी आ रही हैं बहनें ही । - देखते ही देखते साल बीत जाता है । और फिर से सारे त्‍यौहार आ जाते हैं । अभी पिछला साल बीता ही है कि नया आ गया । फिर से राखी आ गई । राखी, एक छोटा सा धागा, ज..
शब्द-शिखर

अटूट विश्वास का बन्धन है राखी - भारतीय परम्परा में विश्वास का बन्धन ही मूल है और रक्षाबन्धन इसी अटूट विश्वास के बन्धन की अभिव्यक्ति है। रक्षा-सूत्र के रूप में राखी बाँधकर सिर्फ रक्षा का व...
किस से कहें ?

"ये याद है ..." : एक बेमानी से ख़याल - बहुत दिनों पहले ..... शायद साल .. दो साल ...... डायरी में कुछ लिख गया था .......... ख़ुद ब ख़ुद ......... एक बेकार, बेमतलब, बेमानी सा ख़याल ........
सप्तरंगी प्रेम

हसरत-ए-मंजिल - 'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती सुमन 'मीत' जी की एक कविता 'हसरत-ए-मंजिल'. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा... न मैं बदला न...
मनोज 
लघुकथा -- दोष किसका..... ? - दोष किसका..... ? लघुकथा -- सत्येन्द्र झा युवावस्था में प्रेम-विवाह के आन्दोलनकारी समर्थक। प्रेम-विवाह किये। माँ-बाप से अनबन और घोर निराशा। वक़्त-बेवक...
मसि-कागद

राखी पर्व पर शुभकामनाएं..-------->>>दीपक मशाल - आज राखी के पावन पर्व पर अपनी प्यारी छोटी बहिन रानी(गार्गी) और सृष्टि के अलावा सारी बड़ी बहिनों(दीदियों) अदा दी, रश्मि रवीजा दी, लता हया दी और शिखा वार्...

आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ!



काव्य मंजूषा

मेरी बिटिया... -
आज का ही दिन था मुझे मिली थी .. मुट्ठी में गुनगुनी धूप, चाँदनी में नहाई, सोंधी ख़ुशबू में लिपटी नूर की नमी लिए एक नयी आशा, एक नया रिश्ता, मेरे अपने से च...
अपनी बात...

रक्षा सूत्र... कैसे-कैसे.... -
कई दिनों से सोच रही हूँ, कुछ लिखूं, आज लिखने बैठी तो रक्षा बंधन के लिए! क्या लिखूं उस त्यौहार पर, जिसे मैंने कभी महसूस ही नहीं किया? बहन का भाई के प्रति या ...
Fulbagiya

मुनमुन चुहिया ने बिल्ले को राखी बांधी - एक गांव के किनारे एक खेत था। खेत में चूहों के कई परिवार रहते थे। सारे चूहे चुहिया रात में अपनी बिलों से निकलते और घूम घूम कर अनाज खाते।।दिन में ...
कबीरा खडा़ बाज़ार में 
सुधीर राघव: राखी का संदेशा#links -

राखी का संदेशा
इस बार की राखी भाइयो फिर संदेशा लाई,
बांध प्रेम का धागा, कर लो मजबूत कलाई।

--------
अब तो हाथ बढ़ाओ साथी लो बांध प्रेम का धागा,
दुनिया नतमस्तक होगी, जब लहू हिन्दुस्तानी जागा।
समीरलाल “समीर” जी !
यह सफ़हा ही जीवन का फलसफ़हा है! 
ड़न तश्तरी ....

एक सफ़हा - कुछ जरुरत से ज्यादा व्यस्तताओं ने घेर रखा है. बस, दो दिन और फिर सब पूर्ववत!! कुछ उधड़े कुछ जुड़े रिश्ते चन्द पोशीदा से ज़ज्बात धुँध...
बहिन कविता किरण ने तो आज तक
चर्चा मंच की ओर झाँका तक भी नहीं है-
डॉ.कविता'किरण'( कवयित्री) Dr.kavita'kiran' (poetess)

रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर *********** -
आकांक्षा और क्षितिज रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर आज के इस व्यवसायिक और सवेदन्हीन युग में, मेरा मन कर रहा है यहाँ अपनी भावनाएं अभिव्यक्त करने को. एक बहन वास्तव ...
अगले हफ्ते जन्मेगा, पता ठिकाना भी मिलेगा! 
एक प्रयास  
उसका पता मिलता नहीं -
अपना पता भूलती नहीं उसका पता मिलता नहीं नगरी नगरी , द्वारे द्वारे खोजती फिरूँ प्यारे को पर उसका ठिकाना मिलता नहीं कमली बन कर डोलूँ मन के वृन्दावन में ...

मेरी बातें

बैंगलोर, दिल्ली , पटना...राखी

वैसे तो राखी हर भाई के लिए बड़ा ही महत्वपूर्ण त्यौहार होता है..जो भाई घर से दूर दूसरे शहरों में रह रहे हैं, वो हर मुमकिन कोशिश करते हैं की राखी का त्यौहार बहनों के साथ मनाया जाए.पिछले कुछ हफ़्तों से मैं भी इसी कोशिश में लगा हुआ था की कैसे रक्षाबंधन के मौके पे घर जा सकूँ. कुछ मित्र भी राखी के मौके पे पटना आने वाले थे, तो सोचा चलो राखी बंधवाने के साथ साथ दोस्तों से भी मुलाकात हो जायेगी. …..
और यह रही रानीविशाल की राखी की पोस्ट-
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मेरे भैया .....रानीविशाल
आज जब देश के हर घर में बहनें भाइयों की कलाई पर अपने प्यार और विश्वास को
रेशम के खुबसूरत धागे में संजो कर बाँध रही हैं
और भाई भी पुरे आत्मप्रेम और निष्ठा के साथ
आस्था के इस अटूट बंधन को अपनी कलाइयों पर सजा कर अभिभूत हो रहे हैं....
.वहीँ कुछ और हम जैसे भाई बहन भी है जो आज के दिन भी दूर हैं
लेकिन हम सभी जानते हैं की यह दूरी सिर्फ भौगोलिक दूरी ही हैं।
भावनाएँ कभी दूरियों की मोहताज नहीं रही ...
फिर भी आज के दिन जब इस दूरी का ख्याल मन में आया तो मन द्रवित हो गया ......
आँखों से बहते प्रेम के साथ जो भाव बहने लगे उन्होंने कविता का रूप लिया .....
आज होगी सुनी तुम्हारी कलाई
जब यह याद मुझे आई
दिल को जाने क्या हुआ
मेरी आँख भर आई
दिल से निकली ये दुआ
चाहे दूर रहो तुम
या मेरे पास रहो
जहाँ भी रहो न उदास रहो
चाँद तारों सी रोशन हो दुनिया तुम्हारी
वो मंज़िल मिले जो तुमको हो प्यारी
न संघर्ष मिले, ना आए मुश्किलें
तरसे सफलता तुम्हारे लिए ....
ये उम्मीदों की डोर
जनम का बंधन हैं
जिसका मोल न कोई
गहना, साड़ी या कंगन हैं
याद तो तुम्हे भी आरहे होंगे
दिन वो सुहाने
ढेरों शरारते और बीसों बहने
वो हँसना, वो रोना, वो झगड़ा पुराना
जो मेरे आँसू बहे तो कोहराम मचाना
ओ भैया मेरे तुम हो
ज़माने भर की खुशियों से प्यारें
सदा जगमगाते रहें मेरे आँखों के तारे ....
चलते चलते इस पवित्र प्रेम को बखूबी बयां करता यह गीत जो हमेशा से मैं अपने तीनो भैया को याद कर गुनगुनाया करती हूँ .....सच कहूँ तो मैं क्या दुनिया की सभी बहने अपने भाइयों के लिए यही सोचती हैं ।
आप सभी को रक्षाबंधन की ढेरों शुभकामनाएँ !!
लीजिए इस पोस्ट में तो हमारा जिक्र
और हमारी भतीजी का स्वर भी है-

कविता में केलंग और केलंग की कविता - ** टिप्पणी ( २३ अगस्त २०१० / ३.५८ बजे / दोपहर बाद ) : यह पोस्ट परसों रात को लगाई थी। सुबह - सुबह मयंक जी के मेल / फोन से पता चला कि इस पूरी पोस्ट का पा...
 
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चिड़िया इतनी सुन्दर है तो कविता कितनी सुन्दर होगी? Deendayal sharma

दीनदयाल शर्मा की कविता -
ओ चिड़िया ओ चिड़िया तुम कितनी प्यारी । साधारण-सी शक्ल तुम्हारी ।। चीं-चीं कर आँगन में आतीं । सब बच्चों के मन को भातीं ।।
भोली और लगतीं मासूम । जी करता तु...
लाइन लाइन से हुआ लाल-लाल अखबार,
मजेदार लगता बहुत कभी-कभी अखबार! 
बिगुल
  
अखबार लाइन की कुछ मजेदार बातें -
*मित्रों आज मैं आपको अखबार लाइन की कुछ मजेदार बातों के बारे में बताने जा रहा हूं। इन मजेदार बातों से आप अपना मनोरंजन तो कर सकते हैं लेकिन यह सोचने के लिए भ...
नारी मन की थाह को माप सका नही कोय!
किन्तु नारि की नारि से अधिक शत्रुता होय!!
गीत.......मेरी अनुभूतियाँ

नारी मन की थाह -
सदियों से करते आए हो खामोश तुम नारी को आज भी यही चाहत है खामोशी के सन्नाटे में बस तुम्हारी ही आवाज़ गुंजित रहे .. सुकून मिलता है तुम्हें दंभ अपना...
  
घुघूतीबासूती
   ई मेल व मोबाइल युग में भी बिछुड़ते सगे सम्बन्धी और आवश्यकता डाक-पते की.......................घुघूती बासूती - कभी कभी कोई बात हमें लम्बे समय से परेशान कर रही होती है, लगता है कि कुछ गलत है। फिर जब दो एक घटनाएँ हमारी चिन्ता के सही होने की पुष्टि कर देतीं हैं तो लगता...
Akanksha 
घुँघरू -
छोटी सी किंकिणी कमर में बंधी , पहने पैरों में पैजनिया , जब ठुमक ठुमक चलता है , ध्वनि घुंघरूओंकी , जब भी सुनाई देती है , चाहती हूं थामूं उंगली उसकी , कहीं चोट..
बिखरे मोती

सीला - सीला सा -
सहेज लिए मैंने तेरे आंसू सारे के सारे अपनी कमीज़ की जेब में अब हर पल मेरा दिल सीला - सीला सा रहता है….

मेरी आवाज
   न्यूयार्क – ४ : तुलसी इस संसार में भांति भांति के लोग … - बड़े बड़े शहरों में कुछ हो न हो, गगनचुम्बी अट्टालिकायें जरूर होती है जो कि सैकड़ो लोगों के लिए रोजगार के साधन के साथ साथ वहाँ के पर्यटन का भी एक आकर्षण बन ज..
लावण्यम्` ~अन्तर्मन्`

अमर युगल पात्र : प्रस्तुत है .........
षि वसिष्‍ठव ऋषि पत्नी देवी अरूंधती की उज्जवल जीवन गाथा -
*" अमर युगल पात्र " भारत के दम्पतियों पर आधारित श्रृंखला है कुछ पूर्व परिचित या सर्वथा नवीन ,* *स्त्री व पुरुष - द्वय के जीवन से आप परिचित होंगें -- * *उत्त...
कथा-सागर

कौन कहाँ से कहाँ ? (२) -
*डिनर से लौटते लौटते बहुत देर हो गयी. कालेज टाइम का दोस्त था उसका परिवार बस चुका था फिर भी ऐसा लगा नहीं कि मैं उससे बहुत दिनों के बाद मिल...

अन्त में उत्तराखण्ड के जनकवि
गिरीश तिवारी “गिर्दा” को श्रद्धांजलि-
प्रतिभा की दुनिया ...

अब 'गिर्दा' के गीत हमें जगाने आएंगे -
*- नवीन जोशी* इस दुनिया से सभी को एक दिन जाना होता है लेकिन 'गिर्दा' (गिरीश तिवारी) के चले जाने पर भयानक सन्नाटा सा छा गया है. जैसे सारी उम्मीदें ही टूट ...

शब्दों का दंगल
“अश्रुपूरित-श्रद्धाञ्जलि” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”) - *उत्तराखण्ड आन्दोलन के संवाहक * *गिरीश तिवारी "गिर्दा" नहीं रहे!*
*श्रद्धाञ्जलि में प्रस्तुत हैं-

आशा और निराशा के क्षण,
पग-पग पर मिलते हैं।

काँटों की पहरेदारी में,
ही गुलाब खिलते हैं।

जीवन कभी कठोर कठिन,
और कभी सरल सा है।
भोजन अमृततुल्य कभी,
तो कभी गरल सा है।

24 comments:

  1. आप सभी को श्रावणी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  2. piroyi gayi mala atyant sundar ban padi hai!
    sabon ko raksha bandhan ki subhkamnayen:)

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  3. बढ़िया चर्चा शास्त्री जी , आपको और इस मंच पर पधारने वाले सभी पाठकों को रक्षाबंधन पर्व की मंगलमय कामना !

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  4. साहित्य के क्षेत्र में डॉ. साहब आप बहुत सक्रिय हैं .....हमें आपसे प्रेरणा लेनी चाहिए...रक्षा बंधन पर्व पर हार्दिक शुभकामनायें.. मेरा ब्लॉग लिंक करने के आपका तहे दिल से आभार..

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  5. सुंदर चर्चा।
    रक्षा बंधन के अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई।

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  6. बहुत विस्‍तृत सुंदर चर्चा .. आप की पूरी टीम को रक्षाबंधन की बधाई और शुभकामनाएं !!

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  7. बहुत विस्‍तृत सुंदर चर्चा ..
    रक्षाबंधन की बधाई और शुभकामनाएं !!

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  8. बहुत अच्छे अच्छे लिंक्स लिए हैं सब एक से बढ़ कर एक.

    सब को रक्षाबंधन की बधाई और शुभकामनाएं !

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  9. रक्षा बंधन के पुनीत पर्व पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

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  10. रक्षाबंधन पर हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें!
    बढ़िया चर्चा शास्त्री जी !

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  11. रक्षाबंधन के पावन पर्व की ढेरों शुभकामनाएं

    http://rp-sara.blogspot.com/2010/08/blog-post_23.html#comment-form

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  12. बेहद खूबसूरत चर्चा मंच सजाया है……………काफ़ी लिंक्स मिल गये…………………आभार्।
    रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ.

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  13. रक्षाबन्धन के पावन पर्व की हार्दिक बधाई एवम् शुभकामनाएँ

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  14. बढ़िया चर्चा शास्त्री जी!!!
    सभी पाठकों को रक्षा बंधन पर्व पर हार्दिक शुभकामनायें!!!

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  15. बहुत बढ़िया और विस्तृत चर्चा ....

    रक्षाबंधन की शुभकामनायें

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  16. सुन्दर चर्चा!!
    आप सभी को रक्षाबंधन पर्व की शुभकामनाएं !!

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  17. सुंदर चर्चा।
    रक्षा बंधन के अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई।

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  18. यही मंच है जिसपर खड़े होकर दूर दूर तक बिखरे मोतियों से परिचय हो पता है, और इन मोतियों की माला जो आप हमें उपहार में देने के लिए परिश्रम करते हैं उसके लिए चर्चा मंच के सभी संचालक बधाई के पत्र हैं. जिसे शब्दों में नहीं कहसकती .

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  19. सुंदर चर्चा.रक्षाबंधन की सभी पोस्टों को जैसे पता ही बदल कर यहां आ गया.

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  20. सुंदर और विशद चर्चा, रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  21. सुंदर और विशद चर्चा, रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  22. रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ.

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  23. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    :: हंसना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है।

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  24. आपकी शिकायत जायज है शास्त्रीजी.आज चर्चा मंच पर राखी की शुभकामनाओं सहित उपस्थित हूँ अपना आशीर्वाद दें.चर्चा मंच पर स्थान देने के लिए धन्यवाद.

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