चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Monday, August 30, 2010

नया सफ़र्……………चर्चा मंच-262

 दोस्तों,
लीजिये हाजिर हूँ सोमवार की चर्चा के साथ्…………उम्मीद है ये अन्दाज़ भी पसन्द आयेगा।

कविता का सफ़र चल निकला 
और हम भी साथ चल पडे .

पूरक हो तुम -------------  
वो तो हैं ही , एक के बिना दूजे का जीवन अधूरा ही तो है .

पुरुष वेश्याएं , आधुनिकता की नयी उपज--------मिथिलेश दुबे--------------
अब इतना मोल तो आधुनिक बनने का चुकाना ही पडेगा ना ?

अगर कहो तो ना छूयें?

प्रेम किससे? मुझसे या

पता नही जी, सबसे मुश्किल सवाल?

कभी कभी शब्द ही नहीं होते आभार प्रकट करे के

तो क्या हुआ------दिल मे तो है ना वो ही काफ़ी है.

मुझको जला के खुशबु की वो बारिश सा कर गया

अब ये तो हद हो गयी!

जरूर किया गया होगा आखिर इंद्रधनुष के रंग जो ठहरे.

हकलाहट : दिल पे मत ले यार . . . ! 

बिल्कुल नही लेंगे जनाब!

कोई साथ नहीं देगा 

ये तो बिल्कुल पक्की बात है.

अवधिया जी, आखिर रहोगे आप पुरातनपंथी ही

और क्या अपना पंथ नही छोड्ना चाहिये.

मैनें एक परी को मित्र बनाया

जरूर बनाना चाहिये.

वाह! क्या कहने

बेलफास्ट कवि सम्मलेन के कुछ वीडिओ क्लिप 

आपके आदेश पर------>>>दीपक मशाल

बडे फ़रमाबरदार हो…………शुक्रिया।

भगवाधारी या खादीधारी ...>>> संजय कुमार

पता नही जी ---------आजकल तो सभी लूट्धारी दिखाई देते हैं।
हमे तो पता नहीं…………देखे जो नहीं

इन शहरो में

क्या है?

अब आप क्या कहेंगे?

ऐसी हिमाकत हम कैसे कर सकते हैं?

प्रकृति से पंगा?

अंजाम के लिये तैयार रहो फिर……………
ये नकाबपोश लड़कियाँ !---आखिर कब सुधरेंगी ?
कभी नहीं-----------ये कैसे हो सकता है?

यही तो मुश्किल है………बच के रहिये।

पत्थर हो गयी हूँ ......  क्यों…………क्या हुआ?

सबकी उम्र जानने के लिए हम आज एक मजेदार ट्रिक लेकर आए हैं !!



बताइये बताइये जल्दी से…………

 मेरा देश महान्………वीरांगनाओं को नमन

चलिये दोस्तों अब आज्ञा दीजिये। अगले हफ़्ते फिर मिलती हूँ नये- नये अन्दाज़ लेकर्।
अब आप अपनी प्रतिक्रियाओं से अवगत करा कर होसला अफ़ज़ाई कीजियेगा।

32 comments:

  1. अच्छा है ये अंदाज़ भी अच्छा है.

    ReplyDelete
  2. चर्चा का यह अंदाज निराला है |यहाँ रचना का महत्व
    है ,जिसे पढ़ कर ही रचनाकार को जाना जा सकता है |केवल सतही तौर से नाम देख कर कमेन्ट
    नहीं किये जा सकते | बहुत अच्छी चर्चा ,बधाई |
    मुझे आपने ब्लॉग में स्थान दे कर जो प्रसन्नता दी है
    मैं आपकी बहुत आभारी हूं |
    आशा

    ReplyDelete
  3. अच्छे लिंक से सुसज्जित चर्चा ,आभार ।

    ReplyDelete
  4. आज की चर्चा का यह अन्दाज बहुत ही बढ़िया है!
    क्योंकि -
    1- कम स्थान में ही इसमें चर्चा के विस्तार की बहुत सम्भावनाएं हैं!
    2- टिप्पणीकार को टिप्पणी करने के लिए प्रत्येक लिंक को खोलना आवश्यक हो जाता है!
    --
    बहुत-बहुत बधाई!

    ReplyDelete
  5. हर पाठक को,इन लिंक्स में से अपनी पसंद का कोई न कोई पोस्ट मिलना तय है। देखने में ये महज लिंक प्रतीत होते हैं,मगर इन्हें जुटाने के लिए आपने घंटों सर्फिंग की होगी। आभार।

    ReplyDelete
  6. बहुत बढिया अंदाज में की गयी है आज की चर्चा .. बधाई आपको !!

    ReplyDelete
  7. चर्चा का यह अंदाज निराला है ...!
    आभार...!

    ReplyDelete
  8. स्वीट और कॉम्पैकट. नया और निराला अंदाज़. एक अच्छी बात कि पोस्ट पढना जरूरी है कमेंट्स के लिए. बहुत बढ़िया लगा पोस्ट का चुनाव भी अच्छा लगा. आपकी मेहनत ne पाठकों को बहुत suvidha pradan क़ी है aapko बहुत dher shubkamnayen.

    Rachana

    ReplyDelete
  9. Vandan ji bahut hi acchi rahi aapki charcha. Majedar tippaniyon ke sath ye link aur bhi wazandar ban jate hain.
    aur aapka bahut dhanywad ki aapne meri post ko bhi charcha me shamil karne ke kabil samjha.
    Dhanywad
    Roshani

    ReplyDelete
  10. बहुत बढ़िया और विस्तृत चर्चा ....अच्छे लिंक्स मिले ..कुछ देख लिए कुछ अभी बाकी हैं ...आभार

    ReplyDelete
  11. charchamanch nirantar pad rahi hoon...
    nischit roop se yah andaz nirala hai.. rachna ki link ke saath ek ek pankti mein aapne jo likha hai ..wah link khol padhne ko badhya karta hai...
    vastutah har rachna ko naye aayam mile hain is charcha mein shamil ho kar...
    still reading the gems that u have collected...:)thanks for including me too:)
    subhkamnayen!!!!
    prastuti prashansniya hai!

    ReplyDelete
  12. आज की चर्चा का यह अन्दाज बहुत ही बढ़िया है!
    बहुत-बहुत बधाई!

    ReplyDelete
  13. वंदना जी,

    बहुत अच्छी चर्चा रही, एक अलग ही अंदाज़ में।
    बढ़िया लिंक्स मिले। कुछ पोस्टों पर जा चुकी, कुछ पर जाना बाकि है।

    आपका आभार ।

    ReplyDelete
  14. वंदना जी
    बहुत बहुत धन्यवाद इतनी खुबसूरत चर्चा के लिए |सबसे सुखद पहलू है की आपने संक्षिप्त किन्तु सार्थक जवाब देकर बिना नाम दिए सबसे परिचय करवाया है |आभार
    mujhe is chrcha me sthan dene ka bahut bahut dhnywad

    ReplyDelete
  15. बहुत पसंद आया अंदाज़, और चर्चा भी।

    ReplyDelete
  16. बहुत ही ख़ूबसूरत लिंक्स...चर्चा के नए अंदाज़ के साथ...शुक्रिया

    ReplyDelete
  17. चर्चा का ये अन्दाज भी खूब भाया!
    आभार्!

    ReplyDelete
  18. वन्दना दीदी नमस्कार! आपका चर्चा करने का अंदाज अनूठा है। चर्चा पढ़ कर लगता है जैसे ब्लोग की बगिया से सुगन्धित फूलोँ को चुनकर चर्चामंच पर सजा दिया हैँ। बधाई! -: VISIT MY BLOG :- गमोँ की झलक से जो डर जाते है।..........गजल को पढ़कर अपने विचार व्यक्त करने के लिए आप सादर आमंत्रित है। आप इस लिँक पर क्लिक कर सकती है।

    ReplyDelete
  19. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  20. vandana ji meri kavita shamil karne ke liye abhaar . aapka ye naya andaaz bahut hi vicharpurn hai .

    ReplyDelete
  21. अच्छी लगी चर्चा शैली..बढ़िया.

    ReplyDelete
  22. बहुत ही ख़ूबसूरत लिंक्स...चर्चा के नए अंदाज़ के साथ...शुक्रिया

    http://sanjaykuamr.blogspot.com/

    ReplyDelete
  23. अच्छी लगी आपकी ये चर्चा कई अच्छे लिंक मिले और मेरे ब्लॉग को अपनी इस चर्चा में शामिल करने के लिए आपका आभार !

    ReplyDelete
  24. Very witty annotations and commendable collection of links.
    Thanks

    ReplyDelete
  25. वंदना जी ,

    मेरी पोस्ट को चर्चा के लिए चुनने के लिए बहुत बहुत आभार. वैसे मैं समझती हूँ कि हमारे इतिहास को भी कभी विषय बनाना अच्छा होता है. बहुत सी बातों से हम वाकिफ नहीं होते तो पढ़ कर अच्छा लगताहै.

    ReplyDelete
  26. दिलचस्प अंदाज़ में पेश की गई चर्चा, लिंक्स पर जाने की उत्सुकता जगाती हुई.

    ReplyDelete
  27. वंदना जी आप को इस सार्थक पहल के लिए बार बार धन्यवाद.

    ReplyDelete
  28. अच्छा लगा च्रर्चा का ये अंदाज भी ।

    ReplyDelete
  29. बहुत सुन्दर चर्चा वन्दना जी ! चर्चा का यह स्वरुप बहुत ही सार्थक और न्यायपूर्ण है ! बहुत प्रसन्नता हुई इसे देख कर ! मेरी बधाई एवं अभिनन्दन स्वीकार करें !

    ReplyDelete
  30. चुनिन्दा लिंक लगाने के लिए शुक्रिया मैम..

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin