चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Wednesday, November 03, 2010

''जिंदगी क्या है?'' (चर्चा मंच-327)

नमस्कार ! 
मैं हूँ शिखा कौशिक और मै लेकर आई हूँ आज बुधवार को चर्चा मंच पर एक नयी चर्चा.आप सबका स्वागत है!
आज की चर्चा ''जिंदगी क्या है?'' में.अगर मै कहूँ क़ि जिंदगी है ''ख़ुशी के दो चार पल [विख्यात-जिन्दगी क्या है?] तो क्या आप सहमत नहीं है?
चलिए मंच पर मौजूद दीपाली जी से ही पूछते है क़ि आखिर जिन्दगी क्या है?............वाह क्या खूब कहा--उबाऊ थकी सड़ी गली  सी जिन्दगी [मासूम लम्हे] पर ये क्या आप तो इनसे भी सहमत नहीं लगते.
चलिए दीपाली जी से असहमत अर्चना धनवानी जी से ही पूछते है क़ि उनकी नज़र में जिन्दगी क्या है ?......... बहुत ही आशा से युक्त उदगार प्रकट किये है--''ये जिन्दगी'   कितना खूबसूरत सफ़र है जिन्दगी क़ा;कुछ अजनबी चेहरे अपने बना देती है.[
इधर संगीता जी भी कुछ कह रही है ...क्या तुलना क़ि है! 'साप -सीढ़ी ' बचपन में खेलकर सांप -सीढ़ी क़ा खेल सीख लिया जिन्दगी क़ा फलसफा
अरे  भाई संजय भास्कर जी भी कुछ कह रहे है उनकी भी सुनिए ......'.क्या चीज है ये जिन्दगी'......''जिस राह से भी गुजरे एक नाम सुना जिन्दगी''  बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति .क्या नहीं?
चलते -चलते अनुपमा जी भी मेरा हाथ पकड़कर धीरे से कुछ कह रही हैं ......यही क़ि .....''बीत जाती है जब तब पता चलता है जिन्दगी क्या चीज है?   
अब कुछ अद्यतन लिंक भी देख लीजिए!  
पल में विधि ने सब बदल दिया, ये कैसी सौगात हुई ?
अच्छा अब अनुमति दीजिये.जिन्दगी के सफ़र में फिर मुलाकात होगी किसी न किसी मोड़ पर.दीपोत्सव की अग्रिम शुभकामनायें !

28 comments:

  1. जिंदगी के राज खोलती अच्छी लिंक्स |एक अच्छी चर्चा के लिए बधाई
    आशा

    ReplyDelete
  2. monika ji;suman ji asha ji-sabhi ko dhaywad.charcha-manch par prastuti ka avsar pradan karne;snehil sahyog;samyochit sujhav v chacha ko vyavasthit karne me aadarniy ''shastri ji '' ka aasheesh agar n milta to yah sambhav hi nahi tha.

    ReplyDelete
  3. नमस्कार,

    बहुत अच्छी चर्च. कुछ कहने -सुनने को मिला सुबह - सुबह. मै भी जाने अनजाने भाग लेने दे अपने को रोक नहीं पाया.जिंदगी जीने की कला है, लेकिन यह किसी को आती नहीं. सभी लोग जी रहे है जिंदगी अपनी-अपनी अपनी तरह से, कुश भी है और प्रसन्ना भी लेकिन फिर भी दूंधे जा रहे है. नए -नए रास्ते, आखिर क्यों? क्योकि संतुष्टि और शांति नहीं है. पुनश जीवाम रूक जाने का भी नाम नहीं है, यह गतिशीलता है, गति का रूक जाना तो जीवन कि हार है. फिर वही प्रश्न- जिंदगी क्या है? यह जीवन का सर्वाधिक जटिल प्रश्न है जो सरलता से जीवन का अंग बन कर तलाश रहा है उत्तर. सच को सच कि तरह कहने का साहस और सच को सच कि तरह सुनने कि कला में, उचित सामंजास्य ही जिंदगी है. लेकिन स्सव्धान - सामंजस्य का अर्थ समझौता नहीं है - सामंजस्य का अर्थ विवेल्पूर्ण जीवन है जिसमे सत्य के रूप तो बदलते रहते है -जल - वशो और प्ले कि तरह लेकिन उसका रासायनिक सूत्र नहीं बदल्स्त. वह सतत (H2O) ही रहता है

    ReplyDelete
  4. अच्छे लिन्क्स , अच्छी चर्चा , धन्यवाद।

    ReplyDelete
  5. बहोत ही अच्छी चर्चा

    ReplyDelete
  6. काबिल ए तारीफ पोस्ट !

    धन तेरस की असीम शुभकामनाएं !

    ReplyDelete
  7. शिखा जी,
    आज की चर्चा पर मुझे एक पुराना फ़िल्मी गाना याद आ रहा है. गाना है:-
    ज़िन्दगी क्या है,
    ग़म का दरिया है.
    न जीना यहाँ बस में,
    न मरना यहाँ बस में
    अजब दुनिया है .

    कुँवर कुसुमेश
    ब्लॉग:kunwarkusumesh.blogspot.com

    ReplyDelete
  8. shikha ji,
    charcha manch par aapki upasthiti aahladit kar gayee.zindgi to hai hi aisee ki her kisi ke uske vishay me vichar alag hi rahte hain.ek kya kai filmi gano me bhi zindgi par vichar vyakt kiye gaye hain...
    1-zindgi kaisee hai paheli hay kabhi to hasaye kabhi ye roolaye....
    2-ye zindgi ke mele ye zindgi ke mele duniya me kam na honge afsos ham na honge....
    3-a!zindgi gale laga le...etc...

    ReplyDelete
  9. बहुत ही सुन्दर और सार्थक चर्चा …………………आपका चर्चा का ये अन्दाज़ बहुत पसन्द आया।

    ReplyDelete
  10. शिखा कौशिक जी ,

    चर्चा मंच पर आपका हार्दिक स्वागत है .
    आपने अलग अंदाज़ में चर्चा की है ..एक विषय को लेकर कुछ रचनाओं का चयन एक अच्छा प्रयास है ...उसके लिए आभार ...
    नए लिंक्स का चुनाव उत्तम है ...बस नयी पोस्ट के कुछ ज्यादा लिंक्स देने की कृपा करें ...

    एक बार फिर अच्छी चर्चा के लिए बधाई और शुक्रिया

    ReplyDelete
  11. आपने अलग अंदाज़ में चर्चा की है! रचनाओं का चयन उम्दा है। लिंक्स का चुनाव उत्तम है!! अच्छी चर्चा के लिए बधाई!!!

    ReplyDelete
  12. चर्चा हेतु अच्छे लिंक्स का संकलन किया आपने.....अन्दाज भी भाया!
    आभार्!

    ReplyDelete
  13. अच्छी चर्चा के लिए धन्यवाद।

    ReplyDelete
  14. acche links acchi charcha!!!
    regards and best wishes!!

    ReplyDelete
  15. बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है!
    राजभाषा हिन्दी पर – कविता में बिम्ब!

    ReplyDelete
  16. बहुत सुन्दर चर्चा सजी है :) मुझे स्थान देने का आभार.

    ReplyDelete
  17. अच्छे लिन्क्स , अच्छी चर्चा !!!

    ReplyDelete
  18. शिखा कौशिक जी चर्चा मंच पर चर्चाकार के रूप में आपका स्वागत करता हूँ!
    --
    आपका शुभागमन अच्छा रहा!

    ReplyDelete
  19. बहुत सुन्दर प्रस्तुति, सार्थक चर्चा. बढ़िया लिंक्स देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद.
    सादर,
    डोरोथी.

    ReplyDelete
  20. बहुत सुन्दर चर्चा की शिखा जी ने और लिंक्स भी सुन्दर थे.. धन्यवाद

    ReplyDelete
  21. meri pratham prastuti ki sarahna karne v protsahit karne ke liye aap sabhi ka hardik dhaywad

    ReplyDelete
  22. सुन्दर चर्चा...



    सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
    दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
    खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
    दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!

    -समीर लाल 'समीर'

    ReplyDelete
  23. वाह! सभी बेहतरीन लिनक्स.....

    सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं!

    ReplyDelete
  24. bahut acha likha h aapne shikha ji....sath hi sabhi ko diwali ki bahut bahut shubkamnaye....

    ReplyDelete
  25. शिखा जी आपने अच्छी चर्चा कराई , बधाई हो बधाई ।

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin