चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

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Wednesday, November 17, 2010

"कविता क्या कर सकती है? (चर्चा मंच-341)

चर्चा मंच पर आपका हार्दिक स्वागत है ! आज कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी है ; जिसे हम ''देव उठान एकादशी'' के नाम से भी जानते है .ऐसी मान्यता है क़ि भगवान श्री नारायण चार मास की ''योग-निद्रा ' से आज ही जागते है.इसके पश्चात् शुभ-कामों क़ा प्रारंभ होता है .हम भी आज सबसे पहले प्रभु से यही प्रार्थना  करते है क़ि ''हे प्रभु ! जाग जाइये ! मिटा दीजिये अज्ञान-तम ;जीव-जगत को बना दीजिये सुन्दरतम''
कर्मशील भारती जी ने लिखा है क़ि ''कविता क्या कर सकती है ? इसी को आधार बना कर हम लाये है कुछ ऐसी भावाभिव्यक्तिया जो इसका उत्तर स्वयं दे देती है......अजब हैं लोग थोड़ी सी परेशानी से डरते हैं...............
**प्रीति टेलर जी  को है ''एक फ़िक्र .....एक पतले कांचका गिलास था'' हम दोनों के दरमियाँ......उस पर आप इस पर हम......''


**शिकागो से राम त्यागी लिख रहे है--"शोध का सोच और आत्मनिर्भरता पर प्रभाव "
**शालिनी जी ढूढ़ रही है अपनी कविता में इस प्रश्न क़ा उत्तर 
 '' मन मछली क्यों तैरती है हवा में?'मन क्या करे ?"


**अब आते है कुछ और भावों पर ---यशवंत एक छोटे से सन्देश में बता रहे है क़ि ''क्या यही है हमारी आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा ?

एक प्रश्न ......क्या यही है हमारी  आधुनिक और रोजगार परक शिक्षा ?



**राहुल प्रताप सिंह बता रहे क़ि ''अपने मनपसंद एप्लीकेशन;कही भी रन करो;बिना डाऊनलोड ; बिना इंस्टाल किये....वो भी ब्राउजर से.........''इण्टरनेट से बिल्कुल फ्री विज्ञापन एस.एम.एस."**
अंत में हरदीप जी क़ा ''बाल-दिवस में पढ़िए ''उसने बोर्ड पर एक अंग्रेज़ी का शब्द Nature  लिख दिया । बच्चों को शब्द पढ़ने के लिए कहा । बच्चे बोले, '' लो सर यह भी कोई मुश्किल सवाल है.....आपने तो 'नटुरे ' लिखा है । आपको माने तो तब अगर आप खुशिये के सवाल का उत्तर बता दें ।''''
   अब आज्ञा  दीजिये ! चिंतारहित  रहे-शहंशाह  बने --
                चाह गई;चिंता  मिटी; मनुआ बेपरवाह ;
              जिसको कछु न चाहिए ;ते ही शहंशाह.

आप सभी को ईद की बधाईयां

12 comments:

  1. kavita hi vah madhyam hai jo man ke udgaron ko sahaj roop me pragat karti hai.prayas uttam-uttam links.badhai....

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  2. ाच्छे लिंक्स , अच्छी चर्चा, आभार व बधाई।

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  3. सुन्दर संक्षिप्त चर्चा.. बधाई .

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  4. अच्छे लिंक्स के साथ एक संक्षिप्त चर्चा!मेरी पोस्ट को स्थान देने के लिए धन्यवाद.

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  5. संक्षिप्त मगर सुन्दर चर्चा…………आभार्।

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  6. अच्छी चर्चा के लिए बधाई |
    आशा

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  7. सुंदर और संक्षिप्त चर्चा .... सभी लिनक्स अच्छे हैं....

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  8. Sir,
    Mera mood off ho gaya hai.Mujhse kuchh galti ho gai hai jiske chalte 03-11-2010 ko post kiya gaya SANSAMARAN THODI SI JAGAH BLOG SE NIKAL GAYA HAI.ANURODH HAI PHIR SE ISE BLOG PAR LANE KE LIYE KUCHH KAREN.ABHARI RAHOONGA.

    Meri drishti mein KAVITA MURDON MEIN BHI JAAN DAL DETI HAI,JISE CHHU LE USE MARMAHAT KARANE KE SATH- SATH KABHI PAGAL BHI BANA DETI HAI.CHARCHA SARTHAK LAGA. DHANYAVAD.

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  9. बहुत अच्छा लगता है यहा रच्नाये पढ़ना,,

    ह्म्म्म्म्म मैने भी एक मन कि अभिव्यक्ति लिखी थी "मेरी प्यारी सखी तेरे विरह कि पाती
    " पर सयद वो चर्चा मंच के स्तर को छू ना सकी इसलिए उसे चर्चा में जगह नही मिल पायी.. खैर मेरे मन कि अभिव्यक्ति मेरे दिल तक पहुँच गयी यही क्या कं है...
    http://svatantravichar.blogspot.com/2010/11/blog-post_17.html

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  10. अच्छी चर्चा-- आभार !

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