चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Thursday, December 02, 2010

"मुकम्मल जहाँ की चाहत मे…" (चर्चा मंच356)

दोस्तों


आज की चर्चा का जिम्मा मुझे मिला है क्योंकि शास्त्री जी के यहाँ नेट काम नही कर रहा है तो चलिये फिर देर किस बात की …………हाजिर है आज की चर्चा के रंग …………


सकारात्मक एवं आदर्श ब्लागिंग की दिशा में अग्रसर होना ब्लागर्स का दायित्त्व है : जबलपुर ब्लागिंग कार्यशाला पर विशेष.

यही तो ब्लोगिंग को दिशा प्रदान करेगा .

 

बूँद आख़िरी ख़त्म हुयी होंठो पर प्यास रही बाकी

तेरे मयखाने में कुछ तो शराब रहे बाकी 

अपनी कह जायेगा 

जग सोचता रह जायेगा

 

धरतीवासियों को चौंका सकती है नासा की यह खबर

क्यूँ ? क्या हुआ ?

 

यही तो हैं मेरे दिन रात.....

कभी दूर कभी पास 

 

बिखराव एक स्वप्न का

आखिर कब तक ?

 

पराया हो गया सूरज !

अरे ! कैसे ? कब ?

किसके आगोश में खो गया ? 

 

मुझमे मैं भी रहती हूँ.. !! ( Where am I ?)

बस एक बार जान ले तू 

यही तमन्ना करती हूँ  

 

शिखा दीपक: ये रिश्ते...........

कब किसके हुए अपने ?

 

क्षणिकाएं....केवल राम

ज़िन्दगी के फलसफे 

 

अंतर घट जो रिक्त करे

सब घट तेरा साईंयां

 

 बन्धन सांसों का

निर्बाध चलता है 

 

कुरकुरे , टकाटक ,चुलबुले और ......

और क्या ?

 

आकृति

खुद की पहचान 

 

हदों के पार तक फैला यहाँ बाज़ार हैं वाह!

यही इस ज़माने का चलन है 

 

 क्या बुढापा अब दूर की कौड़ी होगा

सच ! तब तो गज़ब होगा 

 

कब तक कहेगा अपनी



बहुत जरूरी है खुद को जानने के लिए ऐसे दोस्तों का होना 


दर्शन
एक बार करके तो देखो 



हाँ शायद

यही है ज़िन्दगी


खानाबदोश औरत - किरण अग्रवाल

एक बार मिलकर तो देखो इस औरत से


विचार-७७ :: मदिरा

कब किसकी हुई


लम्हे...

कैसे कैसे गुजर जाते हैं


नन्हा चाँद

ज़रा मिलना तो सही


वादे..!!

किसने पूरे किये और किस से  ?


"पहरा पलकों का"

कब तक बैठाकर रखोगे

आलोकिता कि कविता

एक बार अपनाया तो होता 
अपना बनाया तो होता


सिगरेट! अगर तू न होती

तो ज़िन्दगी होती

“उग रहे भवन भारी..”
एक दिन भूखों मरने की नौबत न आ जाए!


चलिए दोस्तों ............आज की चर्चा को यहीं विराम दे रही हूँ क्योंकि मुझे अभी शास्त्री जी ने चर्चा करने के लिए कहा तो वक्त की थोड़ी कमी थी अगर सुबह से पता होता तो ढंग से लगा पाती .............अब आप अपने विचारों से अवगत कराते रहिये !

45 comments:

  1. वन्दना जी!
    सुन्दर और विस्तृत चर्चा के लिए आभार!

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  2. अच्छे लिनक्स .... सुंदर चर्चा धन्यवाद

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  3. एक रिपोर्ट आई है
    उसने दिल लुभाया है
    बहुत कुछ सबने पाया है
    किसी किसी ने लुटाया है
    एक दिन की प्रेम कथा जो किसी के साथ कहीं भी घट सकती है

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  4. अचानक में भी खूबसूरत विस्तृत चर्चा ...
    आभार !

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  5. सुन्दर और बेहतरीन प्रस्तुति ,बधाई !

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  6. सुन्दर और बेहतरीन प्रस्तुति,सुन्दर और विस्तृत चर्चा के लिए आभार

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  7. सुन्दर और सार्थक चर्चा

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  8. आज बुधवार है
    चर्चा मंच पर लिंक्स की बहार है
    मेरी भी रचना है देखो
    वंदना जी का प्यार है....
    सुन्दर समायोजन
    धन्यवाद

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  9. सार्थक और सुन्दर चर्चा ...

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  10. अच्छी पोस्टें पढ़ने को मिलीं,वंदना जी.
    धन्यवाद

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  11. .

    सुन्दर, सार्थक चर्चा !
    आभार वंदना जी

    .

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  12. सुन्दर और विस्तृत चर्चा के लिए आभार, आपने बहुत अच्छे लिंक्स दिए है .

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  13. bahut kuch padne ko mila is charcha manch par maine pahli baar dekhi yah mahfil

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  14. चर्चा मंच ने अपने बंधन में हमको बाँध लिया ,
    वंदना जी ने मेरी रचना को सम्मान दिया |
    अभिभूत हुए ही हम भी इस पावन मंच पर आकर ,
    शक्रिया कि इतने अच्छे लिनक्स का आपने उपहार दिया ||

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  15. बहुत ही अच्छे लिंक्स.
    मेरी कविता शामिल करने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया.

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  16. चर्चा मंच पर सुन्दर,बेहतरीन और विस्तृत चर्चा के लिए धन्यवाद

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  17. "charcha manch" par post ki links dene ke kram me aap dwara 'chaurahe par khada kabeera '....meri rachna ko shamil karne ke liye aabhar !
    sarthak charcha...
    vandanaji dhanyvaad !

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  18. bahut mehnat kar rahe hain.dhanyawaad

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  19. This comment has been removed by the author.

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  20. बहुत सुन्दर चर्चा. अच्छे लिंक्स से परिचय कराने के लिए आभार..मेरी रचना चर्चा में शामिल करने के लिए धन्यवाद..

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  21. विविधता पूर्णता लिए हुए थी इसलिए आपके इस संकलन ने संतोष प्रदान किया।

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  22. कम समय में सार्थक चर्चा \
    आभार

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  23. वंदना जी मेरे लेख को यहाँ स्थान देने के लिए धन्यवाद , शेष सभी लिंक भी अच्छे हैं
    एक बार ज़रूर पढ़ें http://dabirnews.blogspot.com/2010/12/8846.html

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  24. अच्छे लिंक्स सार्थक चर्चा.

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  25. मेरी रचनाओं पर इतना समय और ध्यान देने के लिये बहुत बहुत शुक्रिया। चर्चा में शामिल कर आप मेरा हौसला तो बढ़ाती ही हैं,मुझे अपने से बेहतर लोगों को पढ़ने का भी अवसर मिलता है। संकलन बहुत ही अच्छा है।

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  26. बहुत अच्छे चर्चा... कुछ तो बहुत ही अच्छे रचनाएँ मिलीं पढने को...
    धन्यवाद...

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  27. main charcha manch par pehli baar aaya hun ..aakar achha laga...apne meri nazm ko apni baaton ka hissa banaya..shukriya.

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  28. बहुत अच्छी चर्चा, आभार.

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  29. स्वीट, क्रिस्प एंड टेस्टी चर्चा। आभार हमारे "विचार"को मंच पर सम्मान देने के लिए।

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  30. सुन्दर और विस्तृत चर्चा, वन्दना जी!

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  31. This comment has been removed by the author.

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  32. वंदना जी ,
    सादर चरण स्पर्श ...!

    यज्ञ

    मेरे ब्लॉग पर आप सभी विद्वानों एवं विदुषियों का स्वागत है ।
    www.ygdutt.blogspot.com

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  33. हमने सभी लिंक्स पढ़े , बहुत मजा आया पढ़ कर।
    कृपया ऐसी ही चर्चाएं लेकर आते रहिये इस हिंदी समाज में ।

    ~Yagya

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  34. Bandna ji
    Aapka bahut-bahut aabhar
    charcha ke sabhi links bahut achhe hain, Net Nahi tha aaj mere pass , ghar se bahar hoon do dino ke liye , pr fir bhi thoda sa waqt mila , or main yeh tippni kar paya,
    aapne meri post ko apni charcha main shamil kiya ,aapka shukrgujar hoon
    Dhanyavaad

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  35. वंदना जी.. बहुत सुन्दर चर्चामंच है.. हमें दुःख है कि अभी तक हम इस से अनजान थे.
    और हम आपके आभारी हैं कि आपने हमारी कविता को यहाँ चर्चा में स्थान दिया.. और इसी बहाने हमें भी इस चर्चा मंच तक पहुँचने का रास्ता मिला गया...
    आगे भी ऐसी ही सुन्दर चिट्ठा-चर्चा की अपेक्षा रहेगी..

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  36. जबलपुर ब्लागिंग कार्यशाला के बारे में जानकारी के लिए धन्यवाद!

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  37. ऐगनस रेपलियर ने कहा है कि ‘हम जिसके साथ हंस नहीं सकते, उसके साथ प्यार भी नहीं कर सकते।‘
    ठीक ही कहा है रेपलियर ने लेकिन रेपलियर ने यह नहीं बताया कि जहां प्यार न हो, वहां प्यार कैसे पैदा किया जाए ?
    वह आपको मैं बताऊंगा।
    ‘आप जिन लोगों से प्यार नहीं करते, उनके साथ हंसिए-बोलिए, प्यार पैदा हो जाएगा।‘

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  38. अच्छे लिंक्स । अच्छी चर्चा।

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  39. Vandana Ji, maine kuchh links padhe jo ki bahut pasand aaye. Dil se aabhaari hun ki is charchaa mein aapne meri nazm ko sthaan diya. Meri kaamnaa hai ki yah charchaa manch phale phoole..aur nayi se nayi jaankaari sahitya jagat ki humein yahan se prapt hoti rahein.
    Namaskaar,

    Gaurav Sharma

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