चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Saturday, December 11, 2010

श्श्श्श्श्श्श्श्श! किसी से न कहना! फिर कैसे कहते हो जिंदा है आदमी ? चर्चा – मंच – 365

नमस्कार , आज हाज़िर हूँ आपके सामने शनिवार की चर्चा ले कर …. कुछ विशेष कारण से आज की चर्चा करने का मुझसे आग्रह किया गया …..तो मैं तो ले आई हूँ आपके लिए अपने हिसाब से लिंक्स …अब झेल लीजियेगा आप …झेलने  के लिए आभार …
जनपक्ष पर रघुवीर सहाय  जी की कुछ कविताएँ पढ़ीं .औरत की ज़िंदगी  कई कोठरियाँ थीं कतार में ,उनमें किसी में एक औरत ले जाई गई,थोड़ी देर बाद उसका रोना सुनाई दिया ,उसी रोने से हमें जाननी थी एक पूरी कथाउसके बचपन से जवानी तक की कथा.
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जी ,  बहुत दम ख़म है हममें



मेरा फोटो
लेकिन शांति ही नहीं है ..न मन में न मस्तिष्क में

 ..

My Photo
एक नज़र क्यों ? भरपूर डालिए



मेरा फोटो
ओस, कुहरा और सर्दी की रात का एक झगडा
लो , अब ओस कुहरा भी झगड लिए ?



 मेरा फोटो
खेल -खेल में ज़िंदगी पार



मेरा फोटो
सोच के दीप जला कर देखो
मन में उजाला ला कर देखो 





 मेरा फोटो
अजी मर मर कर कहते हैं …



मेरा फोटो
मुँह छिपाना पड़ता है!
अरे ऐसी भी क्या लाचारी है ?




 मेरा परिचय यहाँ भी है!
"गइया और बछड़ा"
इनकी भी सुनिए ज़रा व्यथा कथा ..


My Photo
आशा की अग्निशिखा………….जलती  रहनी चाहिए





ब्‍लॉग गायब हो रहे हैं, सावधानी बरतें : फिर मत कहियेगा खबर न हुई
सावधानी बरत   ही लें …|

 


 My Photo
यह तो बिलकुल सही है ...




मेरा फोटो

नोट वोट का पर्याय है .सत्ता है टकसाल
खूब नोट कमा रहे हर नेता हर साल





श्श्श्श्श्श्श्श्श! किसी से न कहना!
ओह्ह बिलकुल नहीं कहेंगे जी ..



अनुपस्थिति से भाव
उपस्थित हो कर पढ़ें




 Hamzabaan हमज़बान ھمز با ن
हौसले की उड़ान : तस्लीम ! राहत की कहकशां
हौसला बुलंद हो तो कदमों में होगा जहाँ




My Photo
सारे राज़ खुल जाते हैं ,
अपने ही चेहरे बदल से जाते हैं ..



तू छोड़ दे जन्नत मेरे ख़ुदा..
हाँ एक बार ज़रा धरती पर आ कर तो देख …



अकेले किशोर होते हैं खराब सेहत का शिकार

आज कल किशोर अकेले होते ही कहाँ हैं ?


 मेरा फोटो

तुम्हारा कहा क्या टाला मैंने.

ज़रा टाल कर देखो ….



My Photo
डोर------------------ उलझने न दीजिए |



My Photo
शायद.. ……………अरे !  नहीं पक्का …


 

 

My Photo

आज कल तो दोस्त ही   मुसीबत पैदा करते हैं ….

मेरा फोटो


इसे मैं क्या कहूँ ?

चुप ही रहें….कह भी क्या सकते हैं ?


My Photo

देश बड़ा या नेता

ज़रा  सोच कर बताइए ...



My Photo

हम तो जी हैं रहने वाले, अब बेनाम जज़ीरों के

तोड़ दीजिए सारी जंजीरें



अगहन में …..चुटकी भर धूप की तमाखू, बीड़े भर दुपहर का पान, दोहरे भर तीसरा प्रहर, दाँतों में दाबे दिनमान……………



 My Photo

प्रेग्नेंसी में मोबाइल से दूर ही रहना अच्छा...खुशदीप

दुनिया में आने वाले बच्चे पर उतना ही बड़ा एहसान रहेगा...


 

My Photo
आग रिश्तों को लगा दो
अजी इतनी नाराज़गी भला क्यों ?




नदी अपने आईने में अक्स देखेगी

प्रदुषण के चलते इंसान तो देख नहीं पाता .






 My Photo
इस परेशानी से भारत कब परेशान होगा ?



My Photo
 एक उज्जवल लड़की……-----रंजना, उसकी प्रेयसी, उसकी मंगेतर दो दिन बाद आई थी। आते ही वह कुर्सी पर सिर झुका कर बैठ गई। इस तरह चुप-चाप बैठना उसके स्वभाव के विपरीत था




 My Photoआज की नारी ..-------------आज जहाँ देखो नारी के अधिकार की आवाज़ उठती है...लेकिन नारी इस अधिकार की आवाज़ में अपनी आत्मा की आवाज़ को खुद ही अनसुना किये जा रही है...तो लीजिए कुछ विचार पेश हैं नारी के विकास पर...आप सब पढ़ कर अपने विचारों से कृतार्थ करें ये निवेदन है....




कुछ इंडियन भी बचेगा ?




कहीं किसी एक कानन में, था सघन वृक्ष एक पला बढ़ा,
था उन्नत उसका अंग अंग, गर्वोन्नत भू पर अडिग अड़ा.
वहीँ पार्श्व में पनपी थी, कोमल तन सुन्दर एक लता.
नित निरख निरख तरु की दृढ़ता, हर्षित उसका चित था डोला.





 मेरा फोटोसर्दी का सुख--------ई जाड़ा का मौसम भी बहुते सुंदर होता है. चारों तरफ हरियरीछाया रहता है अऊर आदमी भी तंदरुस्त नजर आता है. छोटाछोटा बच्चा सब रंग बिरंगा सुईटर पहिने, एकदम रुई का गोलाजैसा लगता है.




 मेरा फोटो
आज कल ज़माना बुरा है ….डर कर रहना ही ठीक है




मेरा फोटो
आती है शाम , एक नयी सुबह लिए




Anupama सरलता की खोज!……… सरल है क्या ?



वाह क्या ख्वाहिश है


हम्म्म्म ……..चलिए बहुत हो गए लिंक्स अब …आशा है आपको पसंद आये होंगे ….फिर मिलते हैं एक ब्रेक के बाद ….मंगलवार की चर्चा के साथ ….नमस्कार …..

31 comments:

  1. चर्चा पर आपकी पूरी पकड़ है. सुन्दर लिंक्स और पढने को मसाला एक ही स्थान पर आपने उपलब्ध करा दिया.
    अन्दाज आपकी चर्चा का बहुत अच्छा

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  2. चर्चा मंच में मेरी रचना सम्मलित करने के लिए आभार , ऐसा तो सोचा ना था .

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  3. आज की चर्चा करने के लिए आभार!
    --
    आपने बहुत ही बढ़िया लिंक्स का चयन किया है!

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  4. संगीता दी!जहाँ जहाँ जाता हूँ ब्लॉग के गलियारे में, आपके पदचिह्न दिख जाते हैं... और आपकी इस चर्चा से तो यही लगता है कि
    कहाँ कहाँ न गए हम जुनूँ के आलम में
    कहीं कहीं तो फरिश्तों ने भी सलाम किया.
    सार्थक चर्चा ने दिन बना दिया!!

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  5. संगीता जी,
    मेरी रचना ’श्श्श्श्श्श्श किसी से न कहना’ को इस मंच पर प्रस्तुत करने के लिये ह्रदय से धन्यवाद!

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  6. मैंने विशेष करणवश अपने ब्लॉग को चर्चामंच में शामिल करने का आग्रह किया था..... खैर....
    मैंने अपना पुराना ब्लॉग खो दिया है..
    कृपया मेरे नए ब्लॉग को फोलो करें... मेरा नया बसेरा.......

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  7. पाठकों का आभार ...

    @@ शेखर सुमन जी ,

    मुझे आपके आग्रह का पाता नहीं था ...और मैं समझ सकती हूँ कि नया ब्लॉग बनाने कि वजह से काफी परेशानी हो रही होगी ...मैंने आपके ब्लॉग कि सूचना चर्चा मंच पर लगा दी है ....शुक्रिया

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  8. संगीता जी बहुत बहुत धन्यवाद....

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  9. चर्चा को बहुरंगी बनाने का प्रयास साफ नज़र आता है। आभार।
    भाषा,शिक्षा और रोज़गार ब्लॉग की पोस्ट लेने के लिए भी धन्यवाद।

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  10. चर्चा मंच में मेरी रचना सम्मलित करने के लिए आभार..!

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  11. अच्छी बौद्धिक तथा बावनात्मक खुराक के लिए धन्यवाद। इस तरह के उन्नत मधु संचय के लिए, धन्यवाद।

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  12. संगीताजी , बहुत ही सुन्दर गुलदस्ता बनाया आपने उपवन से अलग अलग रंग के फूलों को चुन कर . बहुत कुछ नया पढने को मिला . और इस सतरंगी गुलदस्ते में एक कोना आपने मेरी रचना को भी दिया उसके लिए आभारी हूँ .

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  13. सुन्दर चर्चा हमेशा की तरह . कई नए लिंक्स मिले .

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  14. जोरदार! असरदार!
    बेहतरीन! लजवाब!
    चर्चा।
    हमारे ब्लोग ‘विचार’ को स्थान देने के लिए आभार!

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  15. आज तो बहुत ही सुन्दर चर्चा लगाई है…………काफ़ी पढने को मिल गया और कुछ फ़ोलो भी कर लिये……………आभार्।

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  16. खूबसूरत लिंक के साथ मनोहारी फोटो, आपने सबको हीरो का दर्ज़ा दे दिया !

    आखिर तक ढूँढता रहा मेरा कहीं नहीं मिला,
    देख लूँगा आपको :-(

    हार्दिक शुभकामनायें संगीता जी

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  17. sangeeta ji,
    charcha manch par jagah dene keliye mann se aabhar. anya kuchh charchaaye bhi padhi, bahut achhi lagi. ye title bada achha laga... "श्श्श्श्श्श्श्श्श! किसी से न कहना! फिर कैसे कहते हो जिंदा है आदमी ? bahut shubhkaamnaayen charcha manch ki unnati keliye.

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  18. गज़ब के लिंक्स लगाये हैं ..उसपर आपकी टिप्पणियाँ तो माशाअल्लाह...
    खूबसूरत चर्चा.

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  19. चर्चा मंच पर आपकी मेहनत दिख रही है । बढ़िया अंदाज़ ।
    आभार ।

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  20. मेहनत का रंग लिये अच्छी चर्चा , बहुत सारे अच्छे लिंक्स। आभार।

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  21. संगीता जी, बहुत ही सुन्दर और रोचक ढंग से प्रस्तुत चर्चा ...
    रचना को शामिल करने के लिए शुक्रिया !

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  22. Adarniya Sangeet Di,

    aapka sneh aur vishvaas nirantar mujhe prapt hota raha hai. charcha munch men meri rachna shamil karne ke liye bahut bahut abhar..
    charcha munch to sahitya ki khaan hai. main chah kar bhi apni upastithi darz nahi karva pata iske liye kshamaprathi hun..
    punah abhar...

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  23. बहुत खूब आपकी मेहनत स्पष्ट दिख रही है संगीता जी । इस श्रम साध्य चर्चा के लिए बहुत बहुत साधुवाद आपको

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  24. बहुत सुंदर और विशद चर्चा, आभार.

    रामराम.

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  25. श्रम से किया गया हर काम अच्छा होता है जिसका उदाहरण आपकी चर्चा है.

    मेरे लेख को स्थान देने के लिए धन्यवाद.

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  26. संगीता दी……

    बहुत खूब महफ़िल सजायी है आपने ब्लॉग्स की…… कुछ बहुत उम्दा ब्लॉग मिले फिर से…

    साधुवाद आपको। और मेरे ब्लॉग को अपनी चर्चा में स्थान के लिये अशेष धन्यवाद ।

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  27. संगीता जी
    चर्चा मंच के लिए विषय तलाशने में आपका जवाब नहीं... एक जगह कई अच्छी तहरीरें पढ़ने को मिला जाती हैं... आज की चर्चा में आपने हमारी पोस्ट को शामिल किया, उसके लिए हम आपके शुक्रगुज़ार हैं...

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  28. संगीता जी,

    मेरे ब्लॉग की पोस्ट चर्चामंच पर लेने के लिए आपका आभार|

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