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Monday, December 13, 2010

एक सफ़र अन्ज़ाना सा -------------(चर्चा मंच)

चलिए दोस्तों आज के सफ़र पर 
देखें किस किस को मंजिल नसीब हुई 
और कौन कोशिश में लगा है 
और किस के हाथ से आसमां 
फिसल  रहा है 
और कौन एक बूँद के लिए 
तरस रहा है 
पेश -ए-खिदमत है 
 आज का चर्चा मंच 



तो आईने जानिए चाटुकारिता के फंडे
 विचार-८४ :: चापलूस! चाटुकार!! चमचे!!!
जो हर दिल को भाते हैं
"सबके मन को बहलाते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
मगर फिर भी मौसम बदल जाते हैं
बेमौसम , बेरहम, बेमतलब बादल !
दिल को बहुत जलाते हैं
तब लगता है यूँ
ऐसा लगा हम चंद्रलोक पर आ पहुंचे हों-इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय एअरपोर्ट नई दिल्ली टर्मिनल तीन का नजारा
और वहाँ मैं पहली बार लुत्फ़ उठा रहा हूँ
मेरी पहली मार्निंग वॉकिंग.....व्यंग्यात्मक संस्मरण का
अब कैसी रही शिकायत 
छोटे छोटे लम्हात -- अजब जहां है ये , सब कुछ मिलता
और फिर एक अहसास
Beyond Time......A new एक्सपेरिमेंट
है हर कहानी का
सुखान्त दुखान्त ---2
कब तक बचोगे 
यह आग की बात है ,तूने यह बात सुनाई है
और फिर एक बार  
ये कहता है   
हर नयी   
के साथ   
भी उगा करते हैं   
बने मुक्ति का द्वार हैं  
यही सौंदर्य के प्रतिमान हैं  
आसान हो जायेगा 
मगर  
फिर भी एक अफसोस ! 
रह जायेगा

कैसे आन्तरिक भावों से

पुरुष
बच पायेगा  

प्रेरक प्रसंग-

            दरियादिली    
उस वक्त काम आयेंगे
आखिर किसको बदलना चाहते हैं आप - राजीव कुमार थेपड़ा
पहले खुद को तो बदल लो 
और नए रंग में
piya-preysi 
के ढाल लो  फिर देखो
समारोह का आनंद भी लीजिये 




लो जी हो गया आज का सफ़र पूरा ...............अब देखिये किसे क्या मिला और हम तो चले ............बस प्रतीक्षारत हैं आपके कीमती विचारों के ...............


चर्चाकारा :वन्दना गुप्ता

29 comments:

  1. अच्छा संकलन -पढ़ रहा हूँ -आभार !

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  2. चर्चामंच का यह सफर आनन्ददायक पहा!
    आभार!

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  3. Thank you so much for including my post on your list! .... Thanks a lot !!

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  4. चर्चा मंच में भले ही कम ब्लॉग की चर्चा हो पर उस पोस्ट के बारे में कम से कम इतना लिखा हो कि पाठक उसे पढ़ने या न पढ़ने का फैसला ले सके।

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  5. bahut khoobsurat prastutikaran charcha manch mein shaamil charchaaon kee. charcha manch mein meri rachna ko shaamil kar aapne mujhe maan diya dil se aabhari hun. lekhan ke sabhi vishay ko shaamil kiya hai, kai charcha padhi, bahut achha laga. saabhar dhanyawaad vandana ji.

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  6. आज का सफ़र आपकी रहबरी में अच्छा रहा , थकान कम लगी , मंज़िल के पूर्व जो माइल स्टोन नज़र आये सब चमकदार लगे, पेट पौधों की हरियाली पूरे रस्ते, मन को लुभाती रही । धन्य्वाद।

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  7. @ देवेन्द्र पाण्डेय जी
    आज कल जब लोगो को पढने के लिए अच्छी पोस्टो को खोजने में दिक्कत आ रही है ऐसे में कोई भी चर्चाकार यदि कुछ लिंक्स आप तक पहुंचा रहा है तो क्या इतना बहुत नहीं है ... यकीन जानियेगा आप तक १० पोस्टो को लाने के लिए उसने कम से कम ३० - ४० तो जरूर पढ़ी ही होंगी ... यह निजी अनुभव से बता रहा हूँ ! थोड़ी जहेमत आप भी उठा लीजिये जनाब ! हम लोगो पर महेरबानी होगी !

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  8. वंदना जी, आपका बहुत बहुत आभार इस उम्दा ब्लॉग चर्चा के लिए !

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  9. चर्चामंच में प्रस्तुत चयन नूतन व ज्ञानवर्द्धक जानकारियों का अनेकता में एकता के सिद्धांत को रेखांकित करता रोचक संग्रह दिखाई दे रहा है ।
    मेरे संस्मरण "प्रेरक प्रसंग- दरियादिली" को इसमें स्थान देने क् लिये आपका आभार.
    पल-पल हर पल में निर्विघ्न रजिस्ट्रेशन ब्लाग्स का नहीं हो पा रहा है ।

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  10. सुंदर सार-संकलन.दिलचस्प प्रस्तुति. मेरे आलेख पर भी आपका ध्यान गया . बहुत-बहुत आभार .

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  11. सुन्दर पोस्टें पढ़ने को मिलीं

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  12. अच्छी लग रही है आज की चर्चा. सबसे पहले आपका आभार व्यक्त कर दूँ मेरी पोस्ट को स्थान देने के लिए.अब पूरा मंच पढ़ने का अब मूड बना रही हूँ

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  13. बढ़िया चर्चा है.. पोस्टों का संकलन विविधतापूर्ण है.. जो चर्चा मनोज जी के ब्लॉग 'विचार' से हो वह चर्चा सार्थक तो होगी ही...

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  14. sarthak charcha.meri rachna ''piya-preysi'' ko charcha me sthan dene ke liye shukria! devendra ji ne jo baat ki hai uspar main yahi kahna chahungi ki kyo na sabhi blog lekhak apni kavita ,kahani etc. ke sath kuch sandarbh roop me rachna ka parichay likh de ? isse charcha me shamil karne par charchakar ko khud bhi suvidha hogi .

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  15. बहुत खूब ...शुक्रिया आपका

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  16. Vandna ji,Bhut achi hai aaj ki charcha..bhut hi ache se sajaya aapne..yuhi humesa naye naye links se awagat karati rahe..thnks

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  17. arey rey bas stop bhi aa gaya aur ab utarna padega....????? ye baat acchhi nahi lagi kahan to chandrlok ki sair kara di aur ab ye kah kar ki prithvi par bhi chalnaa aasaan ho gaya hai...kah man behla rahe hain hamara...itni bhi kya jaldi thi ji...thoda aur bhi safar zari rahta to kittaaaaa maza aata.

    fabulous journey. :)

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  18. आसमां को थाम कर चल दिए हैं सफर पर ..मंजिल मिल ही जायेगी ....और रही बूँद की बात ...


    आज इतनी भी मयस्सर नहीं है मयखाने में ..
    जितनी कि छोड़ दिया करते थे कभी पैमाने में ...हा हा हा ...
    बढ़िया चर्चा ...आभार .

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  19. बहुत कुछ मिला ... इस चर्चा से ...

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  20. बहुत खूब ...शुक्रिया आपका

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  21. बढ़िया चर्चा !

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  22. वंदना जी, बहुत सुन्दर गुलदस्ता ! रोचक संकलन .
    आपने हमारी कविता को यहाँ स्थान दिया , आभार!

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  23. श्र्द्धेय वंदना जी बहुत बहुत आभार, मेरी रचना को स्थान देने के लिये एवं अन्य श्रेष्ठ रचनाओं से परिचय करवाने का ।

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  24. बढ़िया चर्चा ! बहुत कुछ मिला ... इस चर्चा से .शुक्रिया..

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