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Saturday, January 30, 2010

“गांधी जी कहते हे राम!” (चर्चा मंच)

"चर्चा मंच" अंक-46

चर्चाकारः डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"

आइए आज के
"चर्चा मंच" को सजाते हैं-

सबसे पहले चर्चा करते हैं

“राष्ट्र-पिता महात्मा गांधी जी” की पुण्य-तिथि पर लगीं

कुछ पोस्टों की-

“ताऊ” गांधी जी को भूल जाये ऐसा तो सम्भव ही नही है-


ताऊ पहेली - 59
Saturday, January 30, 2010 at 8:00 AM Posted by ताऊ रामपुरिया

Taau.in
ताऊ पहेली - 59 का हिंट



साबरमती के संत तूने सच में कर दिया कमाल..



आज महात्‍मा गांधी की पुण्‍यतिथि है, सर्वप्रथम श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूँ।
कल दैनिक जागरण मे साबरमती के संत गीत के सम्‍बन्‍ध मे एक लेख था और आज के संस्‍करण मे उसी से सम्‍बन्‍ध चर्चा पढ़ने को मिली।
महात्मा गांधी के सम्मान में गाए जाने वाले गीत..दे दी आजादी हमें खड्ग, बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल.. आज के समय मे कितना उचित है यह जानना जरूरी है ?
महात्‍मा गांधी जी ने देश की आजादी मे अहम योगदान दिया इसे अस्‍वीकार करना असम्‍भव है पर यह गीत वास्‍तव मे देश की आजादी मे अपना बलिदान देने वाले लोगो को कमतर बताता है।
आज स्‍वयंआकालन करने की जरूरत है कि क्‍या आजादी हमें खड्ग, बिना ढाल के ही मिली है ? …..


मेरा फोटो
Sanjay Sharma

"दिव्य दृष्टि "

"माय दिव्य दृष्टि"

अंदाज़

गाँधी को रोज गोली दागने वाले आज शोक मना रहे हैं। रघुपति राघव राजा राम .......  ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥  
आप टेन्शन मत लीजिये बापू ! हमारे यहाँ लोकतन्त्र में कोई ऊंच नीच नहीं है, सब नीच ही नीच है
मेरी भावना का लोकतन्त्र वह हैजिसमें छोटे से छोटे व्यक्ति की आवाज़ को भीउतना ही महत्व मिले जितना एक समूह की आवाज़ को- महात्मा गांधीहाय बापू !पुण्यतिथि का वार्षिक यानी औपचारिक प्रणाम ।समाचार ये है कि आपको कोई टेन्शन लेने की ज़रूरत नहीं है ।आप वहां आराम से………  ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥   साझा-संसा
गाँधी, गांधीवाद और गांधीगिरी
आज महात्मा गांधी की पुण्यतिथि है ,गांधी जयंती पहले गुजर चुकी है। गाँधी प्रतिमाओं और उनकी तस्वीरों को पिछली जयंती के बाद धोने-पोंछने का यह पहला अवसर आया है। प्रत्येक वर्ष ऐसा ही होता है, जयंती और पुण्यतिथि के बीच की अवधि में गाँधीजी के साथ कोई नहीं होता…….

मनोज

अपनी भावनाएं, और विचार बांट सकूं।


बापू का बलिदान
बापू का बलिदान --- --- मनोज कुमार जनवरी का महीना नये साल की शुभकामनाओं, आशा, उल्लास, बधाइयां आदि से शुरु होता है, पर जाते-जाते दे जाता है एक दुख, उदासी, उस महापुरुष की अनुपस्थिति का अहसास जिनके बारे मे महा कवि पंत ने कहा था तुम मांसहीन, तुम रक्त हीन, हे
नई बात


अनिल चमड़िया जी, आप डटे रहिये।
परसों रात साढ़े ग्यारह बजे हिसार के मिड सिटी होटल में चेक-इन कर रहा था जब चन्द्रिका का फोन आया। उसके मार्फत यह खबर मिली कि अनिल चमड़िया को महात्मा गान्धी अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय से निकाल दिया गया। इस कुकर्म को चाहे जो नाम दिया जाये, इसके पक्ष में जो………
कार्टून :- नेता की मूंछ vs. कुत्ते की पूंछ...

लो क सं घ र्ष !: संघ का हिंदुत्व

By Suman
    सर्वश्री जमुना प्रसाद त्रिपाठी, चन्दन मिश्र, मनीष मेहरोत्रा व नगर पुरोहित भाल चन्द्र मिश्रा
बाराबंकी में सैकड़ों साल पुराना ठाकुरद्वारा का मंदिर शहर के बीच में स्थित है ठाकुरद्वारा ट्रस्ट के पदाधिकारी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के आदि पुरुष गण हैं ।…..

ॐ जय चिटठा चर्चा.....

समीर जी और 

ज्ञानदत्त पाण्डेय जी 

आपको समर्पित है..



महामहिम  समीर लाल जी  की आरती पढ़ी मानसिक हलचल पर ..मन अति प्रसन्न हुआ ..सोचा  इसको थोड़ा और बढाया जाए... एक दो दिन में पक्की बात है गाकर डालूंगी...फिलहाल आप गुनगुना कर काम चलाइये...
आदरणीय समीर जी और आदरणीय ज्ञानदत्त पाण्डेय जी आपको समर्पित है मेरी यह रचना...

ॐ जय चिट्ठाचर्चा
स्वामी जय चिट्ठाचर्चा
तुम्हरे कारण अपना
तुम्हरे कारण अपना
नहीं बंद हुआ चर्चा
ॐ जय चिटठा चर्चा......(वाह..! बहुत खूब!!  ये समर्पण बहुत अच्छा रहा!)

लिखाडी़

अशोक मधुप

कृपया बतांए सही क्या है
क्या क्रोंच पछी एवं सारस एक ही है जिंदगी में मुझे पहली बार सारस देखने को मिलें। आदमी के बराबर का पछी देखकर आश्चर्य हुआं। एक जोडे के साथ दो बच्चे भी थे: रूक कर कुछ फोटीं खींचे। नेट पर पक्षी के बारे में जानकारी खोजनी शुरू कीं । कुछ जगह मिला कि क्रोच एवं सारस…………..
वेदिका

Vedika
कि आये छोड़ सब हम, साथ तुम खड़े क्यों ना गये पीछे नहीं हम, तुम मगर बढ़े क्यों ना मै तो हूँ साथ बगल में भी तुमने देखा था कि मेरे वास्ते फिर जहाँ से लड़े क्यों ना ना बुलाया, ना कुछ………..

ये पोस्ट निकालना क्या होता है ज्ञानदत्त जी? ... एक प्रश्न समीर जी से भी

:-)
अच्छा हुआ, आपने एक पोस्ट निकाल ली!
अब मैं ठहरा मन्दबुद्धि प्राणी। इस टिप्पणी का अर्थ ही नहीं समझ पाया।
मेरे हिसाब से तो मैंने कुछ हास्य जैसी कोई चीज नहीं लिखी थी फिर :-)
(हँसने वाला इमोशन) का क्या मतलब हुआ? लगता है कि भूलवश
मैंने कुछ भौंडी बात लिख दिया रहा होगा जिससे हँसी आ गई होगी।
और यह पोस्ट निकालनायेक्या बला है?
मैं तो पोस्ट लिखता हूँ, कभी कभी पोस्ट बन जाती है पर
पोस्ट निकालने जैसी किसी प्रक्रिया से बिल्कुल ही अन्जान हूँ।......

देशनामा

मुंबई का भीखू म्हात्रे कौन...खुशदीप
आपने राम गोपाल वर्मा की फिल्म सत्या देखी होगी...अगर हां, तो आपको मनोज वाजपेयी का निभाया भीखू म्हात्रे का किरदार भी याद होगा...भीखू म्हात्रे फिल्म के एक दृश्य में एक चट्टान पर चढ़कर चिल्लाता है मुंबई का किंग कौन....है कोई भीखू म्हात्रे का मुकाबला करने
Kavymanjusha

ननिहाल की यादें (बाल गीत)
हेलो हेलो ज़रा फ़ोन लगानाहेलो हेलो ज़रा फ़ोन लगाना याद मुझे आते है नाना नानी, मामा और है भैया छोटे से गावं ठौड़ की छैया हेलो हेलो ज़रा फ़ोन लगाना याद मुझे आते है नाना ...मेले में जो झूले आए मामाजी ने खुब झूलाए खैल खिलोने , गली महल्ला पकड़म पाटी, हल्ला…….

एक आलसी का चिठ्ठा

... गई भैंस गड्ढे में


नगरपालिका, जल संस्थान वगैरह के गड्ढों को मैं इस देश की छाती के नासूर मानता हूँ। ये गड्ढे भारत के प्रशासन को चलाते लोगों की सम्वेदनहीनता के मवाद सँजोते हैं और गन्धाते रहते हैं। ये गड्ढे आम नागरिक की सहिष्णुता और कष्टसह्य प्रकृति को उजागर करते हैं। हमारे उन्नत राष्ट्र होने की गाड़ी इन्हीं में फँसी पड़ी है।.......
(वाह भई वाह...! भैंस को को तो जाना ही था गड्ढे में! 
क्योंकि भैंस को गड्ढा ही ज्यादा पसन्द है)


हँसते रहो Hanste Raho

ईब्ब मैं के करूँ?...कित्त जाऊँ?
***राजीव तनेजा*** नोट:इस कहानी का विषय और विषयवस्तु कुछ वयस्क टाइप की है...अत: बाद में ये ना कहना कि पहले चेताया नहीं था "गजब का टैम आ ग्या ईब्ब तो...गजब का"..."क्या हो गया ताऊ जी?"..."इस सुसरी...हराम की जणी नै ना जीण जोगा छोड़ेया ओर ना ही मरण जोगा……….
TechTOUCH

कहीं आपकी ब्लॉग सामग्री किसी ने चुराई तो नहीं ..अगर चुराई तो आयो पता करें कि किसने चुराई ???
आप मेहनत करके अपने ब्लॉग या साईट पर बढ़िया से बढ़िया सामग्री लाते है | और सोचे अगर कोई बिना मेहनत करे, आपकी सामग्री का अपनी साईट पर इस्तेमाल करके वाहवाही लूटे, तो कैसा लगता है ??? वैसे हिंदी में इसे साहित्यिक चोरी (Plagiarism) के नाम से पहले से ही जानते…..

काव्य मंजूषा

सृष्टि मेरी गोद में ...


जब भी मेरी गोद में


मेरा शिशु होता है


तुम नगण्य हो जाते हो


कहाँ नज़र आते हो तुम मुझे ??……..
तेताला

चिट्ठी चर्चा सुण ल्यो लाला-नई चिट्ठी लाया तेताला (ललित शर्मा)
चिट्ठी चर्चा से पहले सुण ल्यो, अपणी चर्चा में हैं दो करेक्टर पहला म्हारा ताऊ और दूसरा रमलू. आपके चिट्ठों की चर्चा ये दोनों ही करेंगे. अब सीन समझा देता हूँ. ताऊ ने अपणी बैठक में खाट डाल रखी है और हुक्का सिलगा रखा है. ताई पीछे झरोखे से घूँघट निकाले देख रही……..
कल्पतरु

क्या खोया क्या पाया अपनी अभी तक की जिंदगी में…. अपना खुद का निजी हिसाब किताब..
आज ऐसे ही अपनी बीती हुई जिंदगी का मतलब निजी हिसाब किताब कर रहे थे। तो हमने पाया कि बहुत कुछ हमने खोया है और बहुत कुछ पाया है। और शायद जो खोया है अब हमें मिल भी नहीं सकता है और जो हमने पाया है कभी भी हमसे छिन सकता है या खो सकता है, शायद यह सभी के साथ होता………
खेलगढ़

महिला खिलाडिय़ों को आगे लाने जागरूकता जरूरी
भारत में कहने को भले आज महिला खिलाड़ी हर खेल में अपने जौहार दिखा रही हैं, लेकिन इसके बाद भी स्थिति यह है कि महिलाएं खेलों में काफी पीछे हैं। अपने देश में खिलाडिय़ों के साथ प्रशिक्षकों को मिलने वाले खेल पुरस्कार भी यह बताते हैं कि महिलाओं की तुलना में….
Dr. Smt. ajit gupta
परिवारवाद बनाम केरियरवाद - आज समाचार पत्रों में एक समाचार प्रकाशित हुआ, बी.बी.सी. ने एक सर्वे कराया कि सात मानवीय दुर्गुण यथा लोभ, ईर्ष्‍या, आलस्‍य, पेटूपन, वासना, क्रोध और अभिमान कि..
आलोक स्तम्भ
प्रार्थना कोई यांत्रिक वस्तु नहीं है - अहंकार को शून्य करने में प्रार्थना मदद दे सकती है। प्रार्थना कोई यांत्रिक वस्तु नहीं है, वह हृदय की क्रिया है । भगवान की प्रार्थना में सारे भेदों ...
मुझे शिकायत हे. Mujhe Sikayaat Hay.
टक टक घडी का जबाब जी - किसी भी पहेली को पुछना तो बहुत आसान है, लेकिन फ़िर उस का जबाब ओर विजेता घोषित करना बहुत कठिन होता है... तो लिये कल की पहेली का जबाब... ओर इस के साथ ही मै कु..
पराया देश
अभी अभी निपटा कर हटा हुं.... - बाप रे पुरे २ घंटे लगे तब जा कर भी शांति नही हुयी, पता नही किस ने मेरे ब्लांग " मुझे शिकायत है" पर तावड तोड टिपण्णियां दे दी मेरी पुरानी पोस्टो पर, मुझे त..
"सच में! "
मुगाल्ते - मै नहीं मेरा अक्स होगा, जिस्म नही कोई शक्स होगा. ख्वाहिशें बेकार की है, पानी पे उभरा अक्स होगा. ज़िन्दगी अब और क्या हो, आंखों में तेरा नक्श होगा. गल्तियां..
झा जी कहिन
चढते हैं मोटकार, कभी सायकल भी चढा कीजीए, अरे कभी कभी तो अलानी फ़लानी चर्चा भी पढा कीजीए - चलिए भाई , माना कि अपना कोई ब्रांड नहीं है , माना कि अपना दर्ज़ा भी शायद दोयम-तीयम या पता नहीं कौन कौन सा यम है , मगर अब जो है सो तो है ही , उसे जैसे का त..
हास्यफुहार
सबसे पहले क्‍या करोगे? - * * *सबसे पहले क्‍या करोगे?*** * * *फाटक बाबू खदेरन से **–** **“**अगर तुम मेरी जगह मालिक बन जाओ और मैं तुम्‍हारी जगह नौकर बन जाऊं तो **तुम** सबसे पहले ...
स्वप्नलोक
कहना होगा टर्र - यह कहानी उस कुएं की है जो काफी पुराना था । कुएं में पानी की कोई कमी न थी । जितना पानी खींचा जाता उतना ही धरती उसमें भर देती । कुएं में मेंढक भी काफी संख...
बर्ग वार्ता - Burgh Vaartaa
अग्नि समर्पण - बड़े दिनों के बाद सूरज इतना तेज़ चमका था। सब कुछ ठीक-ठाक था। सही मुहूर्त में बिस्मिल्लाह किया था। और गाडी वास्तुशास्त्र के हिसाब से एकदम सही दिशा में दौड़ने ...
कबाड़खाना
तुम कनक किरन - जयशंकर प्रसाद - आज से ठीक एक सौ इक्कीस साल पहले यानी ३० जनवरी १८८९ को ’कामायनी’ जैसी कालजयी रचना करने वाले महाकवि जयशंकर प्रसाद का जन्म हुआ था. सो इस अवसर पर पढ़िये उनकी एक क..
प्रेम का दरिया
अनुभवों का महामेला - जयपुर में पांच साल से होने वाला अंतर्राष्ट्रीय साहित्य उत्सव अब नई उंचाइयां छूने लगा है और जयपुर के पर्यटन उद्योग के साथ कदमताल करते हुए जयपुर की नई पहचान...
मानसिक हलचल
रीडर्स डाइजेस्ट के बहाने बातचीत - कई दशकों पुराने रीडर्स डाइजेस्ट के अंक पड़े हैं मेरे पास। अभी भी बहुत आकर्षण है इस पत्रिका का। कुछ दिन पहले इसका नया कलेक्टर्स एडीशन आया था। पचहत्तर रुपये...
कस्‍बा qasba
मूर्ति पूजा का खंडित पक्ष - आरा से यह तस्वीर सहकर्मी दीपक कुमार के सौजन्य से प्राप्त हुई है। जयप्रकाश नारायण की मूर्ति है। जन्मशति के मौके पर उनके अनुयायी आस्था व्यक्त कर रहे हैं।..
एक हिंदुस्तानी की डायरी
ला रहा हूं अर्थकाम, सहयोग जरूरी है - दोस्तों, एक नई वेबसाइट शुरू करने जा रहा हूं। जीवन को सुंदर बनाने की कोशिश का हिस्सा है यह वेबसाइट - अर्थकाम। यह अभी बनने की प्रक्रिया में है। मकसद है 42 कर..
Darvaar दरवार
कौन कहता है भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है ? -
कौन कहता है भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है ? अगर होता तो राष्ट्रपति भवन के स्तम्भ पर यह क्रास क्या कर रहा है शायद क्रास एक धर्म का निशान ..
तीसरा खंबा
व्यवस्था ने न्याय देने से अपने हाथ ऊँचे कर दिए हैं -देश भर की अदालतों में मुकदमे बहुत इकट्ठे हो गए हैं। निर्णय बहुत-बहुत देरी से आ रहे हैं, पूरी की पूरी पीढ़ी मुकदमों में खप रही है..
कछु ह‍मरी सुनि लीजै
विकासशील पेट का कुम्‍भ - विकास के कई आयाम हैं। विकसित होना और अविकसित होना इसके दो ध्रुवान्‍त हैं तो अर्द्धविकसित होना मध्‍यबिन्‍दु है। अर्द्धविकसित होने में एक स्थिरता का भाव है...
चोखेर बाली
एक कविता - अचानक से एक बच्चा रखता है तीन पत्थर और कहता है– यह मेरा घर है।” मैं नहीं चाहता मेरे बच्चे भी कभी रखे –तीन पत्थर त्रैमासिक द्विभाषी पत्रिका प्रतिलिपि के दिस..
घुघूतीबासूती
आज है इकतालिसवाँ दिन!.....................घुघूती बासूती -


कबसे मन गा रहा था.... वो सुबह कभी तो आएगी

जब प्लास्टर उतारा जाएगा जब बाँह को धोया जाएगा।

चालीस दिन से हर रात दिनों की गिनती करते बीती है।

कितने बीत गए, कितन...
“गांधी जी कहते हे राम!”
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)
राष्ट्र-पिता महात्मा गांधी जी पर तो बहुत ही कम पोस्ट आई हैं!
आज की चर्चा को विराम!
सबको राम-राम!!

“या इलाही ये माजरा क्या है?” (चर्चा मंच)

"चर्चा मंच" अंक-45

चर्चाकारः डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"

आइए आज के
"चर्चा मंच" को सजाते हैं-


अपने पुराने रंग और ढंग के साथ।

चर्चित पोस्टों पर टिप्पणी करना आपका काम है।

हमारा काम तो केवल आप तक उनकी पोस्ट पहुँचाना है।

[IMG0079A.jpg]


gandhi-death
भक्ति-भाव से मिलकर बोलो,
रघुपति राघव राजा राम।

दीन दुखी के रक्षक गा्ंधी,
तुमको शत्-शत् मेरा प्रणाम।
श्रद्धा-सुमन समर्पित तुमको,
जग में अमर तुम्हारा नाम।।
आत्म-संयमी, व्रतधारी की,
महिमा को हम गाते हैं।
राजनीति-पटु,महा-आत्मा को,
हम शीश नवाते हैं।।
तन-मन में रमे हुए गांधी,
जैसे काशी और काबा हैं।
भारत के जन,गण,मन में,
रचते-बसते गांधी बाबा हैं।।
शस्त्र अहिंसा का लेकर,
तुमने अंग्रेज भगाया था।
शान्ति प्रेम की लाठी से,
भारत आजाद कराया था।।
छुआ-छूत का भूत भगा,
चरखे का चक्र चलाया था।
सत्यमेव जयते का सबको,
पावन पाठ पढ़ाया था।।
आदर और श्रद्धा से लेते,
हम बापू-गांधी का नाम।
भक्ति-भाव से मिलकर बोलो,
रघुपति राघव राजा राम।।


या इलाही ये माजरा क्या है? -सलीम ख़ान

ज्यादा दिन नहीं हुए। बस चार दिन पहले की बात है, जब मियाँ ठंड के कारण गिनती के तीन बने जा रहे थे। तब जिसे देखो वही यही दुआ मनाता फिर रहा था कि जल्दी से इस सर्दी को विदा करो। अब तो इसने सचमुच नाक में दम कर दिया। लेकिन पिछले दो दिनों में ऐसा पासा पलटा कि अब रहा नहीं जा रहा है। सूरज इतनी तेज़ चिन्गारी छोड़ने लगा है, जिसे बर्दाश्त करना दूभर हो रहा है। लेकिन क्या आपको पता है कि अगर यही हालात बने रहे, तो सन 2030 तक इतनी गर्मी पड़ेगी कि आदमी जिसे सहना असहनीय हो जाएगा। कैसे? बता रहे हैं ब्लॉगर सलीम खान

मानव द्वारा की जा रही अप्राकृतिक गतिविधियों के कारण बढ़ते जल प्रदुषण से जल निकायों (नदियों, झीलों, समुद्रों और भूगर्भीय जल) पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है और अगर इंसान इसी तरह अपने नितांत निजी फ़ायदों और सिर्फ़ वर्तमान लाभों की पूर्ति हेतु अपना यह दुष्कृत्य करता रहेगा तो वह दिन दूर नहीं जब इस पृथ्वी पर पेय जल के प्राकृतिक स्रोत अपना मूलभूत अस्तित्व खो देंगे! ज़रा सोचिये………………

मेरा फोटो

Udan Tashtari
एजेक्स (Ajax), ओंटारियो (ontario), Canada

papa1

साधना के पापा-

स्व.श्री के.एन. सिन्हा

(२९ जनवरी, २००५)

उड़न तश्तरी ....

कहते हैं मेरी माँ की ५वीं पुण्य तिथि है आज!!

mummy

आज फिर

रोज की तरह

माँ याद आई!!.....

आदरणीया माता जी!
एवं श्रीमती साधना के पिता जी!
को श्रद्धाञ्जलि!

कुछ औरों की , कुछ अपनी ...

'' खिला गुलाब हँसाता है तेरी यादों को /
हँसी के जिस्म में अफ़सोस ढल गया ,
जानां ! '' ......
फोन-कॉल पे/से
क्या कोई जगता है !
कौन जगता है ! ..
बस एक बच्चा 'बौखियाता' है ..!..
मैं तो बौखियाया ही ..
लीजिये आप भी
बौखियप्पन को
देखिये……….

मुक्ताकाश....

जब आचार्य द्विवेदी रो पड़े... : 'मुक्त'

[पंडित प्रफुल्लचंद्र ओझा 'मुक्त' जी के संस्मरण-संग्रह 'अतीतजीवी' से उद्धृत]

बहुत छोटी उम्र से निरंतर पिताजी के साथ रहने के कारण मुझे एक लाभ हुआ था, तो एक हानि भी हुई थी। हानि गौण थी। मुझे अपनी उम्र के बच्चों के साथ मिलने-जुलने, खेलने-कूदने का अवकाश नहीं मिला था। आज मैं अपने जीवन के पचासी वर्ष पूरे कर चुका हूँ,…………


Khoj Hai . . .

इन सबके पीछे थी कहीं दौलत की ज़रूरत !
कश्ती को भँवर में फँसते हुए देखा,जिंदगी को कई मोड़ पे रुकते हुए देखा,अब तक के सफ़र में कई ऐसे भी दौर हैं,जब खुद को सरेआम शर्मिंदा होते हुए देखा, कभी कपड़ों, कभी सूरत, तो कभी सीरत ने दी ज़िल्लत,कभी जूतों के उखड़े सोल ने दिलाई हमें ज़िल्लत,इन सबके पीछे थी……..

नन्ही कोपल

मुम्बई बहुत ही खूबसूरत जगह है
हम बहुत दिनों से मुम्बई घूमने का प्रोग्राम बना रहे थे । हमारी पहचान नेट पर श्वेता चाची से हुई हम लोग मेल मित्र बने और उन्होने हमें मुम्बई आने के लिए आमंत्रित किया । मुम्बई जैसी जगह पर किसी का अपने घर आमंत्रित करना बहुत बड़ी होती है । 23 दिसंबर को सुबह…..

डॉ. चन्द्रकुमार जैन

मत बनाओ....गाँव को अपना निशान
रहने दोगज भर जमीन रहने दोमाटी के घेरेरहने दोखुले सपने थोड़े तेरे-थोड़े मेरे मत बांधो-सौंधी महकमत बांधो पगडंडी के घेरे कहाँ मिलेगा-फिर खुला दालान अतृप्त नयनपायेंगे कहाँ खुला आसमान मत वाली बारिश किन प्रेमी युगलों का करायेगी स्नान यौवन की धड़कन कहाँ दौड़…….

भारत ब्रिगेड

डा० गणेश दत्त सारस्वत नहीं रहे
डा० गणेश दत्त सारस्वत नहीं रहे (१० दिसम्बर १९३६--२६ जनवरी २०१०) हिन्दी साहित्य के पुरोधा विद्वता व विनम्रता की प्रतिमूर्ति सरस्वतीपुत्र, डा० गणेश दत्त सारस्वत २६ जनवरी २०१० को हमारे बीच नहीं रहे। शिक्षा : एम ए, हिन्दी तथा संस्कृत में पी० एच० डी० प्राप्त…….

हमारा खत्री समाज

सारी दुनिया भारत की गोत्र व्‍यवस्‍था को देखकर चकित होती रही हैं !!
हमारी मूल गोत्र व्‍यवस्‍था , जो कालांतर में विकसित हुई और इसी का उल्‍लेख 'सेक्रेड बुक ऑफ द ईस्‍ट' नामक प्रसिद्ध अंग्रेजी ग्रंथ में किया गया है। उसी प्राचीन काल में वेदोक्‍त वैज्ञानिक नियम के कारण ऋषियों ने एक ही वंश में उत्‍पन्‍न लोगों का आपस में विवाह………….

स म य च क्र

चिट्ठी चर्चा - पप्पू कांट डांस साला ...
मै महेंद्र मिश्र आप सभी का सादर अभिवादन करते हुए एक छोटी सी चिट्ठी लेकर आपके समक्ष उपस्थित हूँ . आज समय मिलने पर ब्लागर भाई बहिनों की पोस्टे पढ़ने का मौका मिला जिनका समावेश इस चिट्ठी में कर रहा हूँ . ठण्ड में थोड़ी कमी आई है और कम्प्यूटर पर उंगली चलाने की….

स्वप्नदर्शी


बुरांश

करीने लगी कोई क्यारीया सहेजा हुआ बाग़ नहीं होगा ये दिलजब भी होगा बुरांश का घना दहकता जंगल ही होगाफिर घेरेगा ताप,मनो बोझ से फिर भारी होंगी पलकेमुश्किल होगा लेना सांसमैं कहूंगी नहीं सुहाता बुरांश मुझे,नहीं चाहिए पराग....भागती हूँ, बाहर-बाहर,एक छोर से दूसरी……

एक पद्म पुरस्कार जो मुझे मिलते-मिलते रह गया!
जैसे ही मुझे पता चला कि मेरा नाम भी इस वर्ष दिए जाने वाले पद्म पुरस्कारों की सूची में है, मेरे पैरों तले धरती खिसक गई. दिल बैठ गया. वल्लाह! ये क्या हादसा होने जा रहा है मेरे साथ? क्या……

Albelakhatri.com

Hindi Hasya kavi Albela Khatri's blog


हो सकता है सूरत की जेल में बन्द कोई कैदी निर्दोष हो, लेकिन जेलर तो पूर्णतः दोषी हैं

जी हाँ ! ये सच है कि सूरत की जेल के जेलर दोषी हैं .सूरत की सब जेल में हज़ारों कैदी हैं और उन कैदियों पर जेल मेंजिनकी हुकूमत चलती है वे वहाँ के जेलर हैं । जेलर का सरनेमदोषी है इसलिए जब मैंने उनसे कहा कि जेलर साहेब, हो सकता हैआपकी जेल में बन्द कोई कैदी…..

मेरी दुनिया मेरे सपने


लखनऊ की पहली औपचारिक चिट्ठाकार भिड़ण्त में आप सादर आमंत्रित हैं।
न-न, कन्फ्यूजियाइए नहीं। ई महफूज़ भाई इस्टाइल भिड़ण्त नहीं, सिम्पल ब्लॉगर मीट है, जो लखनऊ ब्लॉगर्स एसोसिएशन और साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन द्वारा आयोजित की जा रही है, जहाँ पर लखनवी चिट्ठाकार आई मीन ब्लॉगर आपस में भिड़ण्त यानी मुक्कालात सॉरी मुलाकात करेंगे।…….

खेलगढ़
एमजीएम स्कूल के राष्ट्रीय खिलाडिय़ों का सम्मान

एमजीएसम स्कूल के राष्ट्रीय खिलाडिय़ों का स्कूल में

सम्मान किया गया।

यह जानकारी देते हुए स्कूल के खेल शिक्षिक

अखिलेश दुबे ने बताया कि स्कूल सबसे ज्यादा

जंप रोप के खिलाड़ी सम्मानित हुए।

इसमें राजदीप सिंह, सुमन जोशी, पूनम नायर,

प्रभाजोत कौर, ओम कारेश्वरी,………


महाराष्ट्र में इन्टरनेट के जरिये दर्ज होगी

प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज


आज एक खबर पढ़ी कि महाराष्ट्र में ई-कम्प्लेंट दर्ज होगी.

अब व्यक्ति के लिए थाने जाने की आवश्यकता नहीं होगी,

इन्टरनेट के जरिये ही प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज हो जायेगी

तथा उसकी एक प्रतिलिपि मोबाइल पर उपलब्ध होगी.

डीसीपी स्तर का अधिकारी शिकायत की जांच करेगा ....

जख्म

क्षणिकाएं
तुम मानो या ना मानो मुझे पता है प्यार करती हो मुझे तुम स्वीकारो या ना स्वीकारो मुझे पता है तुम्हारा हूँ मैं अश्क भी आते नही दर्द भी होता नही तू पास होकर भी अब पास होता नही इक आती सांस के साथ तेरे आने की आस बँधी और जाती सांस के साथ हर आस टूट गयी तेरी पुकार में ही दम ना…….

नन्हा मन

राष्ट्रीय प्रतीक - नमस्कार बच्चो , आप सबने गणतंत्रता दिवस धूम-धाम से मनाया । आप इतना तो जान ही गए होंगे कि गणतंत्रता दिवस २६ जनवरी को मनाया जाता है और इस दिन हमारा संविधान लाग...

GULDASTE - E - SHAYARI

- न दरिया वफ़ाओं का कभी रुकता, न इंसान मोहब्बत में कभी झुकता, ख़ामोश हैं हम किसीकी ख़ुशी के लिए, पर उन्हें लगता है हमारा दिल नहीं दुखता ! * *

नव-सृजन

ब्लागर- साहित्यकार-प्रशासक के.के. यादव के निदेशक बनने पर अभिनन्दन व विदाई - ब्लागिंग और साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय तथा भारतीय डाक सेवा के अधिकारी कृष्ण कुमार यादव को निदेशक पद पर प्रोन्नति के उपलक्ष्य में आयोजित एक समारोह में भा...

कर्मनाशा

वसन्त का कोई शीर्षक नहीं - *सुन रहा हूँ कि वसन्त आ गया है! आज कुछ यूँ ही लिख दिया है कविता की तरह..इस यकीन के साथ कि यदि निज व निकट के जीवन प्रसंगों में कहीं नहीं दिखता है वसन्त तो क...

नुक्कड़

डॉ० डंडा लखनवी का व्यंग्य : लाइम लाइट - * लाइम लाइट* * * कविवर रहीम ने शताब्दियों पूर्व पानी एवं मनुष्य, मोती और चूने के बीच के अंतःसंबंधों को भली-भाँति..

मसि-कागद

एक बच्चे के जन्मदिन में...>>>>>>>> दीपक मशाल - कल एक बच्चे के जन्मदिन में गया था मैं, बड़ा अच्छा मौका लगा मुझे अपने बचपन में वापस जाने का... हमेशा यूं नदिया बने रहना भी ठीक नहीं, कभी झील बनना भी अच्छ...

Rhythm of words...

बंजारे! - चल ऐ मन बंजारे इस दुनिया का भी भरम देखे कहीं सुलगते से दिल में ही जीवन जैसा कुछ नम देखे ! कुछ गोल गोल टुकड़े देखे रूखे सूखे चाँद से चूल्हे में जलता सूरज देखे...

सरस पायस

पल्लवी की किताब - पल्लवी की किताब पल्लवी की किताब पल्लवी ने जब अपने आप बनाई एक किताब, तो उसका दिल ख़ुशी से झूम उठा! उसने अपनी किताब को मनचाहे रंग भरकर सुंदर चित्रों से सजाय...

ज़िंदगी के मेले

अरे दीवानों मुझे पहचानो!!! - मैंने सोचा आज मैं भी जरा मौज ले लूँ! ना तो राजीव तनेजा जैसा कुछ कर रहा हूँ न ही कार्टूनिस्ट सुरेश शर्मा जैसा और न ही रचना सिंह जैसा आप तो बस इस ब्लॉगर को ..

शिल्पकार के मुख से

इसे अवश्य पढिए-अच्छे लोग किनारे हो गए!!!- कल रात की बात है, हम कुछ लिख रहे थे तभी चैट पर हमारे बड़े भाई

*गिरीश पंकज जी * का आगमन हुआ और

उन्होंने पूछा "फौजी भाई क्या हाल चाल है"

हमने कहा नमस्ते भैया ..

*हालत पे मेरी न दिल उनके पसीजे ,
न शरमाया उन्हें मेरे इस फटे-हाल ने !
सिद्दत से बड़ी हमने संजो के रखे है ,
जो कुछ गुल खिलाये थे गए साल ने !!
यादों की गठरी क...

हिन्दी साहित्य मंच

स्वर्ग-नर्क के बँटवारे की समस्या - व्यंग्य

-स्वर्ग-नर्क के बँटवारे की समस्या --------------------------------------------

महाराज कुछ चिन्ता की मुद्रा में बैठे थे। सिर हाथ के हवाले था और हाथ कोहनी के..

chavanni chap (चवन्नी चैप)

फिल्‍म समीक्षा : रण - मध्यवर्गीय मूल्यों की जीत है रण -अजय ब्रह्मात्‍मज राम गोपाल वर्मा उर्फ रामू की रण एक साथ पश्चाताप और तमाचे की तरह है, जो मीडिया केएक जिम्मेदार माध्यम की..

अंकित सफ़र की कलम से

ग़ज़ल टहनियों पे नयी सोच खिल के - वैसे आज जिस ग़ज़ल से आप मुखातिब हो रहे हैं वो आपके लिए नयी नहीं है, गुरु जी के ब्लॉग पे चल रहे तरही मुशायेरे में आप इससे रूबरू भी हो चुके होंगे मगर इसमें एक ...

शब्दों का सफर

पहले से फौलादी हैं हम… - [image: qutabminar09] पश्चिम मध्य एशिया में तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान के पुरातत्व स्थलों पर मिले लोहे से बने उपकरणों के आधार पर पश्चिमी विशेषज्ञ भ..

ताऊजी डॉट कॉम

टोटल टाइम पास


खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी (186) : आयोजक उडनतश्तरी

नीचे का चित्र देखिये और बताईये कि ये क्या है?

कार्टून : सरकारी समझदारी (Committee on Telangana)


बामुलाहिजा >> Cartoon by Kirtish Bhatt

देखें कार्टून.:---कटी पतंग.....

प्रस्तुतकर्ता cartoonist ABHISHEK

आरंभ Aarambha

काहिरा में महफ़ूज़ और तिल्दा का चांवल
पिछले दिनों ब्लाग जगत में अदा जी के घर के चित्रों को ब्लाग में प्रस्तुत करने के संबंध में प्रकाशित एक पोस्ट पर सबने दांतो तले उंगली दबा ली थी और जिस प्रकार पाबला जी ने कनाडा यात्रा की वैसी यात्रा करने के लिए अनेक ब्लागर उत्सुक थे. कल पाबला जी हमारे पास….



अब आज की

चर्चा को

विराम देता हूँ!

"सब कुछ अभी ही लिख देगा क्या" (चर्चा अंक-2819)

मित्रों! शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...