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Sunday, January 09, 2011

रविवासरीय (०९.०१.२०११) चर्चा

 

नमस्कार मित्रों!
मैं मनोज कुमार एक बार फिर हाज़िर हूं रविवासरीय चर्चा में अपनी पसंद की कुछ पोस्ट एवं एक लाइना के साथ!


नए साल में ठंड अपनी ऊंचाई छू रही है, मंहगाई से होड़ लगी है उसकी। पर मालूम है हमें मंहगाई ही जीतेगी। है ना?
My Photo१. 

बिहारःअंगरेजी पढ़ाने के गुर सीख रहे गुरु जी बता रहे हैं शिक्षामित्र :: प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को बताया जायेगा कि अंगरेजी के सरल भाषा का प्रयोग कैसे किया जा सकता है.

मेरा फोटो२. एक अच्छी ख़बर -

शीघ्र ही ठंड से छुटकारा मिलने की उम्‍मीद ... संगीता पुरी ::

12 जनवरी के बाद  मौसम में काफी तेजी से सुधार होगा। ठंड से परेशान लोगों के लिए यह राहत वाली बात है।

My Photo३. Avinash Chandra की कलम से जब निकलेगा वह होगा …

श्रेयस्कर.. ::

अब चीर के सप्त वितानों को, औ तोड़ के प्रति प्रतानों को।


पथ में जो शूल हैं, धेले हैं, पर्याप्त हैं विहस उठाने को।


My Photo४. गिरीन्द्र नाथ झा कहते हैं,

रवीश आपने पर्दा गिराया नहीं उठाया है... :: इसी रपट से जान सका कि कोई दो रुपये के लिए भी आठ घंटा काम कर सकता है।
My Photo५. हरकीरत ' हीर' की प्रस्तुति -

ज़र्द पत्ते ...... ::

पिछले वर्ष भी देखा था इनकी डरी-सहमी आँखों में रौंदे जाने का खौफ़ ....

shesh narayan singh६. शेष नारायण सिंह का प्रश्न

ये नेता महिलाओं को इस्तेमाल की चीज क्यों मानते हैं? :: ऐसी स्थिति पैदा की जानी चाहिए कि नेताओं की हिम्मत ही न पड़े कि वे किसी लड़की का यौन शोषण करने के बारे में सोच भी सकें।
७. शोभना चौरे का २८० लाख करोड़ का सवाल है ....... ::

ये रकम
इतनी है कि भारत का आने वाले 30 सालों का बजट बिना टैक्स के बनाया जा सकता है.
My Photo८. यशवन्त माथुर की

यादें ::

बहुत खामोशी से दिल को झकझोर देती हैं!!
My Photo९.Sachin Kumar Gurjar लाए हैं

इतिहास के पन्नो से :: क्योंकि अरसे बाद, आज रविवार की उन्नीदी सुबह में कुछ फुर्सत के पल मिले है |
मेरा फोटो१०. रेखा श्रीवास्तव की मिड-लाइफ क्राइसिस ! :: एक सामान्य व्यक्ति अपने पारिवारिक जीवन में ही सारी खुशियाँ खोजता है और अगर संतुष्ट नहीं तो खुद को और गतिविधियों में व्यस्त कर लेता है.
११. शहरोज़ बता रहे हैं शहीदों का गांव, आज भी बदहाल :: ओरमांझी प्रखंड के कुटे बाजार से जब दायीं ओर सर्पीली सड़क मुड़ती है, तो आजादी के बाद हुए विकास की कलई खुल जाती है।
१२. डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर कहते हैं आक्रोशित जनमानस की आवाज़ को भी सुनना होगा :: आने वाले समय में राज्य की शक्ति और कानून की शक्ति को आमजन अपने हाथों में लेकर ही राज्य सत्ता का फैसला करेंगे।
My Photo१३. mahendra verma की मानिए तो ज़िदगी से सुर मिलाना चाहिए :: अब अंधेरे को डराना चाहिए। फिर कोई सूरज उगाना चाहिए। झींगुरों को गुनगुनाना चाहिए। वक़्त से दामन बचाना चाहिए।
रामेश्वर काम्बोज \१४. रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ के जगे अलाव ::

बतियाते ही रहे

पुराने घाव ।

बूढ़ा मौसम

लपेटे  है कम्बल

घनी धुंध का!
My Photo१५.

वही सबकुछ...डा श्याम गुप्त की कविता... ::

वही हैं खोमचे रेहडी , वही होटल वही हल चल। वही आना वही जाना, लोग दुःख दर्द के मारे |


My Photo१६. ZEAL का पूछना है

संयुक्त परिवार क्यूँ बिखर रहे हैं. -- Joint and Nuclear family ! :: इस विषय पर आपके क्या विचार हैं , क्या सुझाव हैं और आप किसका समर्थन करते हैं- संयुक्त या फिरएकल परिवार ?
मेरा फोटो१७. ये तो है दर्पण साह की

डिवाइन कॉन्सपिरेसी ::

हम सबसे पहले जान लेना चाहते थे धूप उगाना, पर हमें सबसे पहले ये बताया गया कि धूप, आसमान में ही उग सकती है. एक नामुमकिन सी जगह.
मेरा फोटो१८. संतोष कुमार सिंह की आवाज़

इस बेपनाह अंधेरे को सुबह कैसे कहूं इन नजारो का मैं अंधा तमाशवीन नही :: सुशासन और विकास के नाम पर बिहारी समाज का एक बड़ा तबका इस मामले को सही साबित करने मे लगा है।
१९. नीलेश माथुर... का – मुक्तिदाता ::

एकांत पथ पर चला जा रहा था
हर तरफ कोहरे का साम्राज्य…!
My Photo२०. कुमार राधारमण की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ::

दिल्लीःगर्भवती महिलाओं की मधुमेह जांच जरूरी :: बीमारी के बारे में जागरूकता लाने के लिए दिल्ली सरकार विशेष अभियान चलाएगी। बड़े पैमाने पर डायबीटीज एजुकेटर तैयार किए जाएंगे।

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