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को ही चर्चा होगी।

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Tuesday, February 08, 2011

"आज बसन्त पञ्चमी है." (चर्चा मंच-423)


 मित्रों!
आज बसन्त पञ्चमी है।
 माँ सरस्वती की पूजा अर्चना करने का दिन है।
पं. सूर्यकान्त त्रिपाठी "निराला", 
नजीर "अकबराबादी" का जन्मदिन भी 
आज के ही दिन हुआ था।
अतः बिना किसी भूमिका के चर्चा को प्रारम्भ करता हूँ-

गुरुत्व ज्योतिष पत्रिका के विद्या प्राप्ति विशोषांक में माँ वीणापाणि के विषय में एक आलेख छपा है। गुरुत्व ज्योतिष पत्रिका से साभार मैं इस लेख को आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहा हूँ।
 माघ शुक्ल पंचमी को वसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता हऐ, जो हिन्दू संस्कृति के प्रमुख त्योहारो में से एक त्योहार है, वसंत पंचमी के दिन विद्या देवी सरस्वती क पूजा क जाती है।
पूरातन काल मे भारत में ऋतुओं को छह भाग में बाँटा जाता था। उनमें से एक भाग है वसंत ऋतु, वसंत में तरह-तरह के फूलों पर बहार आ जाती हैखेतों में फसलें चमकने लगती हैं, आम के पेड़ों पर बौर आने लग जाते हैं।
इसलिये वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए शुक्ल पंचमी के दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता है, जिसमें विष्णु और कामदेव कविधिवत् पूजा होती है। शासत्रों में बसंतपंचमी को ऋषिपंचमी, श्रीपंचमी इत्यादि नामो से उल्लेखित किया गया है। Į श्रीकृष्ण ने स्वयं गीता में कहा है कि बसंत ऋतु के रूप में भगवान कृष्ण प्रत्यक्ष रूप से
प्रकट होते हैं।
या कुन्देन्दु तुषार हार-धवला, या शुभ्र-वस्त्रावृता
या वीणा-वर-दण्ड-मंडितकरा या श्वेत पद्मासना
या ब्रह्माच्युत शंकर प्रभ्रृतिभिर देवै-सदा वन्दिता
सा माम पातु सरस्वती भगवती नि:शेष जाड्यापहा.॥१॥
........चिंतन जोशी
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हिंदी अनुवाद:
जो चन्द्रमा समान मुखमंडल लिए, हिम जैसे श्वेत कुंद फूलों के हार और शुभ्र वस्त्रों से अलंकृत हैं| जो हाथों में श्रेष्ठ वीणा लिए श्वेत कमल पर विराजमान हैं||
ब्रह्मा, विष्णु और महेश आदि देवगण भी जिनकी सदैव स्तुति करते हैं|
हे मां भगवती सरस्वती, आप मेरी सारी मानसिक जड़ता को दूर करो||
हे सर्वत्र-विद्यमान विद्या देवी, आपको मेरा बार-बार नमस्कार||
एक दिन ब्रह्मा जी समस्त लोकों का अवलोकन करते हुए भूलोक आये। ब्रह्मा जी ने भूलोक पर समस्त प्राणी-जंतुओं को मौन, उदास और क्रियाहीन अवस्था में देखा। जीवलोक क यह दशा देखकर ब्रह्मा जी अधिक चिंतित हो गये और सोचने लगे इन जीवो के कल्याण के लिये क्या उपाय किये जाएँ?
जिससे सभी  प्राणी एवं जीव आनंद और प्रसन्न होकर झूमने लगें।
मन में इस विषय में चिंतन-मनन करते हुए उन्होंने कमल पुष्पों पर जल छिड़का तो, उसमें से देवी सरस्वती प्रकट हुई। देवी सफेद वस्त्र धारण किए, गले में कमलों माला धारण किये, हाथों में वीणा एवं पुस्तक धारण किए हुए थी।
भगवान ब्रह्मा जी ने देवी से कहा, आप समस्त प्राणियों के कण्ठ में निवास कर उन्हें वाणी प्रदान करो। आज से सभी को जीव को चैतन्य एवं प्रसन्न करना आपका काम होगा और विश्व में आप भगवती सरस्वती के नाम से प्रसिद्ध होंगी।
आपके द्वारा इस लोक का कल्याण किये जाने के कारण विद्वत समाज आपका आदर एवं पूजन करेगा।
वंसत पंचमी के दिन ज्ञान और विद्या की देवी सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। देवी सरस्वती की आराधना से विद्या आती है, विद्या से विनम्रता, विनम्रता से पात्रता, पात्रता से धन और धन से सुख प्राप्त होता है।

मन-मस्तिष्क सितार हो गए
–कविता श्यामनारायण मिश्र

हर मौसम वसंत का मौसम
             रात चांदनी रात हो गई.
कांटों के जंगल में जैसे
            फूलों की बरसात हो गई.
जब से छेड़ दिया है तुमने
      मन-मस्तिष्क सितार हो गए.
तुमने नेह-नज़र से देखा
    सब अभाव अभिसार हो गए.
मनु के एकाकी जीवन में 
    श्रद्धा के अवतार हो गए...........
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"दीप जलाएँ" 

माता की आरती उतारें,
स्वर भरकर अर्चना उचारें,
ज्ञान-रश्मियों को फैलाएँ।
मन मन्दिर में दीप जलाएँ।।
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जग की जननी हे माँ शारदे तुम,
मेरी पूजा को स्वीकार करना ।
मुझको आता नहीं फूल चुनना, मुझको आता न शृंगार करना ॥
जग की जननी.......... !!
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*प्रकृति छटा * *सुशोभित अनंत है, 
आ गया फिर * *ऋतुराज वसंत है ! 
*कोंपल कुसुम * *सुगंधित वन है, 
समीर सृजन * *शीतल पवन है ! 
मंद-सुगंध सृजित *...
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कवि की वाणी के सौरभ से सुरभित युग-युग के हैं कण-कण, 
कवि की कविता से हरे भरे रहते जन-जन के तन मन धन ! 
कवि भाव सुमन यों पुन्ज-पुन्ज खिल उठे कल्पना लतिका में, ...
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जाह्नवी हूँ .........

मै नदी हूँ .............
पहाड़ो से निकली 
नदों से मिलती 
कठिन धरातल पर              
उफनती उछलती 
प्रवाह तरंगिनी हूँ .........
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"प्रकृति हमारी है ही न्यारी "

नित नूतन उल्लास से विकसित,

नित जीवन को करे आल्हादित.

नित कलियों को कर प्रस्फुटित ,
 

 लहलहाती बगिया की क्यारी.

प्रकृति     हमारी     है     ही     न्यारी.........

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बीज  ऊसर  में बोया गया 
दर्द  में  दिल  डुबोया गया 
प्यास चुभने लगी कंठ में 
फूल पर भी न सोया गया .....
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स्वर मेरा अब दबने लगा है, 
कंठ से राग ना फूटे, 
अं
तरमन में ज्योत जला दो, 
कही ये आश ना टूटे। 
तु प्रकाशित ज्ञान का सूरज, 
मै हूँ अज्ञानता का तिमीर, 
ज्ञानप्रदाता,व..
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सूर्य सम है इसमें तेज़ प्रबल 
तू इसको निस्तेज न कर 
कलम रही सदा निश्छल 
तू इससे छल छद्म न कर 
कलम से निकली जो शब्द सरिता 
वही काव्य का रूप हुई उद्वेलित,.
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उस मंजिल की महक तो होगी सुन्दर.. 
जहा चलना हो हाथ पकड़कर .. 
राह अलग न ख्वाब जुदा है.. 
हर कदम गर साथ सदा है.. 
मै तेरा प्रिय तू प्रियतम है.. 
मेरे अधरों से निकल...
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बच्चा जब बोलना शुरू करता है तो सबसे पहले माँ ही बोलता है | प्रकृति ऐसा इसलिए कराती है क्योंकि उसके स्पंदन का आभास सबसे पहले माँ को ही होता है | माँ और उसके बच्चे की दुनिया एकदम सिर्फ उनकी अपनी ही होती है |..........
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सच जबां से फिसला हरबार,
उसे पत्थरों से टकराने का शौक बहुत है।....
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मेरे  घर  में  नहीं  है,  चिरागों   की    महफ़िल  ,
घर    सितारों    से    मेरा  ,  बहुत     दूर    है  -----
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मंद-मंद वासंती बयार
नव किसलय करते सिंगार
नए पुराने वृक्षों का
हुआ संकेत वसंत आगमन का |
हरी भरी सारी धरती
रंगीन तितलियाँ विचरण करतीं
पुष्पों पर यहाँ वहाँ
रस रंग में डूबीं वे
मन को कर देतीं विभोर |.....
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खुशी अपने लिए सोचते हैं सब
करते हैं कोशिश
दुसरे की भावनाओं को
ठेस लगाकर , खुद खुश होने की
पर....
किसी की भावनाओं को समझकर
खुद खुश होना ,कितना मुश्किल है.........
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(गीत) हत्यारे घूम रहे झूम-झूम !

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                                                                 -  स्वराज्य करुण
कातिलों के हाथों  कैदी बन गया पहाड़ ,
 हरेली  का  चीर-हरण कर रहा है कौन ?
           
     डरे हुए पंछियों का  
     उड़ना दुश्वार हुआ ,
         सपनों का घर उनका  
        आज  तार-तार हुआ !........
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माँ शारदे का आशीष सबको मिले!
इसी कामना के साथ 
आज का चर्चा मंच 
समाप्त करने की आज्ञा दीजिए!
कल फिर यहीं मिलूँगा।

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12 comments:

  1. वासंती रंग से ओतप्रोत बहुत सुन्दर चर्चा |बसंत पंचमी की कथा बहुत अच्छी लगी |अच्छे लिंक्स के लिए और मेरी रचना को शामिल केने के लिए आभार |
    आशा

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  2. bahut hi sundar .vasanti charcha se aapne vasant ka sabhi aur ullas bhar diya.badhai..

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  3. vasant panchmi par aapki prastuti ne vasant ka ullas hriday me poorn roop se bhar diya.meri kavita ko sthan dene ke liye hardik dhanyawad.sabhi links ullekhniy.vasant panchmi ki sabhi ko bahut bahut badhai...

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  4. वासंतिक रंगो मे सजी चर्चा बेहद खूबसूरत लगी।बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  5. Vasant panchmi ki hardik subhkaamnayen sabhi ko aur dhanyawaad ki aaj ke is paawan din bhi meri rachna ko is manch par sthan diya gaya aabhar

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  6. Namaskar shastri ji..vasant panchmi ki hardik shubhkamnaye..bhut hi sundar vasanti rango me saji aaj ki charcha..

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  7. आदरणीय शास्त्री जी
    नमस्कार
    आज की चर्चा में मेरी रचना शामिल करने के लिए आपका आभार ...आप यूँ ही प्रोत्साहित करते रहें ....बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनायें

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  8. अच्छे लिंक्स के लिए आभार |

    बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  9. आभार डाक्टर साहब तमाम लिंकों के लिए।

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  10. बसंत पंचमी पर बासंती चर्चा... उम्दा ...
    आप सभी को बसंतपंचमी पर हार्दिक शुभकामना...

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  11. माँ शारदा की कृपा बनी रहे सब पर !
    अच्छी चर्चा !

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