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Tuesday, March 22, 2011

बधाई …बधाई और बधाई ..साप्ताहिक काव्यमंच – 39 , चर्चा मंच 462…

नमस्कार , आइये चलते हैं आज की साप्ताहिक काव्य मंच की चर्चा पर …होली बीत चुकी है  लेकिन अभी भी होली की फगुनाहट कहीं कहीं दिखाई दे रही है …होली के इस  उत्सव में हमारे कुछ ब्लॉगर साथी मस्त थे तो कुछ त्रस्त थे .. खैर  यही जीवन है कहीं गम है तो खुशी ….आज मैं इस मंच से एक खुशखबरी देना चाहती हूँ …. सुश्री शिखा वार्ष्णेय  जिनका ब्लॉग है स्पंदन उनके हिंदी के प्रति किये कार्यों को देख तथा उनके संस्मरण के लिए भारतीय  उच्चायोग लन्दन  द्वारा “ लक्ष्मी मल्ल सिंघवी यू के “ अनुदान सम्मान दिया गया है ,उन्हें 250£ की धनराशि और मान पत्र प्रदान किया गया …. हमारी तरफ से शिखा जी को बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें ….  लीजिए एक झलक चित्रों की भी देख लें …
  award to shikha
मानपत्र ग्रहण करते हुए 
                                   
maanpatr
रश्मि प्रभा जी ने कितनी गहनता से प्रेम को अभिव्यक्त किया है कि आखिर क्या है  प्रेम”
जोड़े थे दिन उँगलियों पर मेरा फोटो
बड़ी ऐंठन हुई थी अन्दर
फिर धीरे धीरे मान लिया था मैंने
प्यार एक इबादत है
ज़रूरी नहीं कि इबादत करने पर
खुदा आँखें खोल ही दे !
IMG_0867
मनोज कुमार जी आज की परिस्थितियों के आगे  कह रहे हैं --हार गया मन
महँगाई के डर से
        आशाएँ दुबक गईं
                गहरे अंधकूप में।
 मेरा फोटोहोली का रंग उतरा नहीं कि वंदना गुप्ता जी बहुत ही निर्विकार भाव से कह रही हैं कि -उदास  हूँ मैं ... चलिए देखते हैं आखिर क्या हुआ है ..

अब न तुम्हारी याद  /तुम्हारा ख्याल  /और ना ही तुम
कोई नही होता  /आस पास / मगर फिर भी  /उदास हूँ मैं……
 My Photoएम० वर्मा जी होली के तीन दृश्य दिखा रहे हैं --बदरंग हो गए रंग

सारी उमर तमन्ना मे बीती
रंग लगाने की उसको
बदरंग हो गये रंग अब सारे
..क्यों  भला ? इसका खुलासा करिये ब्लॉग पढ़ कर
Indian-motifs-26राजभाषा हिंदी पर पढ़िए श्याम नारायण मिश्र का नवगीत महकी फागुन की भोर

पोर-पोर महकी
फागुन की भोर,
        पिया बांसुरी बजाओ।
My Photoराकेश खंडेलवाल जी ने ऋतुओं का खूबसूरत चित्रण किया है ---चैतिया सारंगियां अब लग गईं बजने
हवा में गन्ध आकर कोई मोहक लग गई घुलने
क्षितिज पर बादलों के बन्द द्वारे लग गये खुलने
धरा ने श्वेत परदों को हटा कर खिड़कियाँ खोलीं
गमकती ओस से पाटल कली के लग गये धुलने
My Photoशिखा दीपक जी की एक गज़ल दुआएं

हो जाएँगी जिन्दा सभी वीरान महफ़िलें
जो तेरे नाम के साथ एक मेरा भी जिक्र चले
मेरा फोटोआशा जी बता रही हैं रिश्तों का दर्द ..वही जानता है जिसने रिश्तों को पाला और निभाया होता है ..पढ़िए उनकी रचना दरकते रिश्ते
My Photoसत्यम शिवम जी अपने भाई के जन्मदिन पर दुआ कर रहे हैं मेरी इच्छा के बन दीप
इतनी शक्ति दे ईश्वर,
एक दिन जाओ दुनिया को जीत।
मेरी इच्छा के बन दीप।
मेरा फोटोराजेश उत्साही जी  गौरैया दिवस पर लाये हैं एक खूबसूरत कविता --मासूम चिड़िया
वह
एक मासूम चिडि़या
मेरी तस्‍वीर पर
अपना घोंसला
बनाना चाहती है
My Photoवंदना महतो क्या कह रहीं हैं -"तुम " से ..

जैसे कुछ पन्ने उड़ कर
कभी वापस आते नहीं,
तुम भी किस्तों में
उड़ जाते तो अच्छा रहता.
आपका साथ, साथ फूलों का
इस ब्लॉग की देख रेख कर रही हैं अपर्णा मनोज और इस बार लायी हैं अर्पिता श्रीवास्तव की चुनी हुई रचनाएँ --

दिल
दिल का
एक छोटा सा हिस्सा
रोशन धूप से
भीगा जल से
पसीजा ओस से
सहेजा स्नेह से…
             
और भी बहुत कुछ ब्लॉग पर जा कर पढ़ें
मेरा फोटोरचना दीक्षित जी ले आयीं हैं पिटारा  भर कर इन्द्रधनुषी रंग .
रंगों का अजब फुहारा हूँ मैं.
खुशिओं का पिटारा हूँ मैं.
रह जाऊं अन्दर तो गुमसुम. बिखर जाऊं तो नज़ारा हूँ मैं.
 मेरा फोटोअरुण सी० राय इस बार क्षणिकाओं में विस्तार ले कर आये हैं --प्रिय ! रंग देना इस होली

बनियान /जिसमे हो गए हैं /असंख्य छेद /पीठ पर उगे /समय के  काँटों से /उलझ कर, /रंग देना उसे प्रिये /
My Photoबबुशा इतिहास के पन्नों से चुन कर लायी हैं विषय , जिसको आज के सन्दर्भ में देख रही हैं ..मैं क्रोधित हूँ तुम पर भीष्म ,सोचने पर विवश करती रचना …बहुतों के मन में प्रश्न उठा होगा लेकिन इनकी लेखनी ने इस प्रश्न को शब्द दिए हैं ..
My Photo
कितना सुखद है    / कुछ नहीं सुनना
बहरापन .... / सन्नाटा   / नीरवता  / शून्य!
यह मैं नहीं कह रही …आनंद द्विवेदी जी लाये हैं अकेलापन
 मेरा फोटोअरुण साथी  व्यंग लिखने में माहिर हैं …उनकी एक रचना पढ़िएब्लॉगरिया

ब्लॉगिंग करने की बिमारी,
संक्रामक है बड़ी भारी।
जिसको होता इसका इंफेक्शन,
काम नहीं आता कोई इंजेक्शन।
 My Photoसार्थक सन्देश देती  श्री जे० पी० तिवारी  जी की रचना पढ़िए ..प्रकृति का रोष या मानव का दोष
कैसा आया यह भयंकर भूकंप
भीषण लाया कहर निज संग.
देखो! ये लाया संग है सुनामी,
जन-जीवन की कठिन कहानी.
My Photoअजय कुमार जी होली के सुरूर में केतना बड़ा सच लिख दिए हैं ज़रा इहाँ  देखें --अरे ई  होली का है सुरूर ज़खीरा ब्लॉग पर पढ़िए आरज़ू लखनवी की गज़ल --किसने भीगे  बालों से ये झटका पानी
 दिगंबर नासवा जी अपनी खूबसूरत गज़ल में ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं , क्या प्रार्थना है वो आप पढ़िए ---  इस तरह परिणय न हो
कष्ट में भी हास्य की संभावना बाकी रहे
प्रेम का बंधन रहे सदभावना बाकी रहे
Mukesh Mishraमुकेश मिश्रा जी गौरैया दिवस पर बहुत प्यारी रचना ले कर आये हैं ..एक प्रश्न के साथ -
कहाँ गयी वो प्यारी फुदकन
मेरा फोटोयोगेश शर्मा जी अपनी रचना के माध्यम से कह रहे हैं की हर जगह उदासी है गम है  पर फिर भी उजाले की नींव हमें स्वयं ही तो रखनी होगी ..
 मेरा फोटोअनीता निहलानी जी ने जब यह जाने का प्रयास किया कि कैसे होती है -महाप्रलय  … उनको क्या पता चला , यह जानिये उनकी रचना पढ़ कर …
कैसी होती है महाप्रलय  /झांका जब मैंने ग्रंथों में,  /जहाँ पुकार-पुकार कह रहे  /कवि-ऋषि अति स्पष्ट शब्दों में |
My Photoनीरज बसलियाल जी एक खूबसूरत गज़ल पेश है --
 रोली पाठक  होली दहन के तरीके को बताते हुए सार्थक सन्देश दे रही हैं ..यदि इस बार  ध्यान न रक्खा हो तो अगले वर्ष ख़याल रखियेगा --आज है होलिका दहन
 My Photoकभी सघन  / कभी विरल / कभी सुनहरा / कभी बदरंग  /कभी स्याह /कभी सतरंग …. डा० नीरव रंगों की नहीं बात कर रहे हैं …बात हो रही है --समय .... समय ... समय की
My Photoअशोक  व्यास लाये हैं  क्षणिकाओं में आनंद रसधार
श्वेत शिखर
निर्मल विस्तार
जैसे मुस्कुराता
सीमारहित प्यार
मेरा फोटोज्ञानचंद मर्मज्ञ जी आज के सामाजिक और राजनैतिक वातावरण से क्षुब्ध हो कह उठे हैं ..
जाने कैसी ये होली है

आँसू   में  रंग  घुला  बैठे  जाने  कैसी  ये  होली  है
उम्मीदों  को  बहला  बैठे जाने  कैसी  ये   होली  है
 मेरा फोटोअब यह गज़ल है या नज़्म  मैं नहीं जानती  पर इसके रचयिता दीपक मशाल जी का यह दावा है कि -
ये जो भी है आपके दिल को छुएगी  ज़रूर

अलग-अलग जो बरसा छाया तो साथ था
अरे काफिला-ए-बादल आया तो साथ था
मेरा फोटोराजेन्द्र तेला “निरंतर" कह रहे हैं कि -सीप में बंद मोती किस काम का
सीप में बंद
मोती किस काम का
बिना बांटे
ज्ञान किस काम का
 कवि हृदय किस तरह दर्द से प्रभावित होता है यह जानना है तो पढ़िए गिरधारी खंकरियाल जी की रचना ..दम तोड़ रही है
यमुना !  /वृद्धाकार ! /तटबंधों पर रेत के टीले !
और उन पर उगते / सफ़ेद कांस केश ! /रुग्णित, विक्लांत !
 My Photoसरकारी गतिविधियों से हैरान परेशान गिरिजा कुलश्रेष्ठ जी की होली  कैसे हुई  आप स्वयं जाने --
कैसी होली , कैसा फाग

कैसी होली , कैसा फाग ।
रिश्तों में जंजीर नही है
काँटा तो है पीर नही है
जहाँ भी देखो, जिसे भी देखो
हंगामा और भागमभाग ।
कैसी होली कैसा फाग ।
My Photoहोली तो बीत चुकी है , लेकिन फिर भी मंजुला जी ने जो कहा है उस पर एक नज़र डाली जा सकती है --एक संकल्प इस होली में
शहरों की होली  कैसे इतनी बेरंग होती है जानिये घुघूती बासूती जी से ..
बसंत तो आया नहीं , होली तुम क्या आ पाओगी
 images (22) उमा जी लाती हैं मन के  मनके ----पढ़िए उनकी खूबसूरत रचना -मुक्तिबोध तक ... जाना है
पथरीली- पगडंडी पर, पीडाओं को ढोकर
चल--आसुओं से भीगी घास की चादर पर
क्लान्त-भ्रान्त,मन की रेतीली घाटी में
चुके भविष्य की फसल उगानी है
मेरा फोटोविवेक मिश्र जी कह रहे हैं कि आज कल आंसुओं का मूल्य समझने वाले नहीं मिलते , इसलिए रोको अपने अश्रु नयन में
रोको अपने अश्रु नयन में , भूले से बाहर ना ढलके ।
My Photoमहेंद्र वर्मा जी इस बार  बहुत खूबसूरत नवगीत ले कर आये हैं -

पंछी के कोटर में 
सपनों के जाले।
चुगती है संध्या भी
नेह के निवाले।
मेरा परिचयचर्चा के समापन की ओर बढते हुए  डा० रूपचन्द्र शास्त्री जी की सरस्वती वंदना पढ़ाना चाहूंगी , ऐसे सुन्दर भाव सबके मन में वास करें यही कामना है --कुछ शब्द  सरल  भर दो -
माँ मेरी रचना में, कुछ शब्द सरल भर दो।

गीतों के सागर से, सब दूर गरल कर दो।।

 My Photoचर्चा का समापन  स्वप्न मंजूषा जी की गज़ल से करना चाहूंगी जिसमें वो बहुत संज़ीदगी से कह रही हैं कि रिश्तों से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए …. चेहरे ..

ताल्लुक़ से खिलवाड़ न कर, रिश्ते बिगड़ जाते हैं
आँख में होकर भी चेहरे, दिल से उतर जाते हैं 
आज की चर्चा यहीं समाप्त करती हूँ ….आशा है लिंक्स आपको पसंद आयेंगे …आपके सुझावों का इंतज़ार है आपकी प्रतिक्रिया हमारा मनोबल बढ़ाने में सहायक होती है …फिर मिलते हैं अगले मंगलवार को नयी चर्चा के साथ …नमस्कार ….संगीता स्वरुप

37 comments:

  1. सुश्री शिखा वार्ष्णेय जिनका ब्लॉग है “स्पंदन” उनके हिंदी के प्रति किये कार्यों को देख तथा उनके संस्मरण के लिए भारतीय उच्चायोग लन्दन द्वारा “ लक्ष्मी मल्ल सिंघवी यू के “ अनुदान सम्मान दिया गया है ,उन्हें 250£ की धनराशि और मान पत्र प्रदान किया गया …. हमारी तरफ से शिखा जी को बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें ….
    --
    इस उपलब्धि के लिए शुखा वार्ष्णेय जी क बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!
    --
    संगीता जी!
    आपकी बहुत पैनी नजर है!
    आज की चरचा बहुत बढ़िया रही!

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  2. संगीता जी चर्चा मंच का जबाब नहीं। एक से बढ़कर एक चिठठे को शामिल किया गया है। ब्लॉग के भुख्खारों को यहां अच्छी खुराक मिल जाती है।
    आपके परिश्रम का फल ही है यह बधाई।

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  3. संगीता जी
    आप की आज की इस बसंती वाटिका में फू;ऑन की सुंगंध के साथ इसका मधर मिठास भी है. और यह मिठास है इस सूचना में- 'सुश्री शिखा वार्ष्णेय जिनका ब्लॉग है “स्पंदन” उनके हिंदी के प्रति किये कार्यों को देख तथा उनके संस्मरण के लिए भारतीय उच्चायोग लन्दन द्वारा “ लक्ष्मी मल्ल सिंघवी यू के “ अनुदान सम्मान दिया गया है '. प्रतिभा और लगन को सम्मान मिलना ही चाहिए. रचनाकर सम्मान का भूखा नहीं होता, यह सही है लेकिन सही यह भी है की यह मान-सम्मान ही हैं जो गति की बढ़ा देते हैं और प्रेरणा को बल प्रदान करते है. उन्हें बधाई.

    इसक्र अतिरिक्त ढेर सारे संचयन है आपकी बगिया में. अभी एक-एक दो- दो लेने ही देख पाया हूँ. चाय पिने के बाद विधिवत पढूंगा. मेरी रचना को भी इनके साथ सम्मिलित करने हेतु आभार.

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  4. शिखा जी को सम्मान मिलना ब्लॉग जगत के लिए ख़ुशी का सबब है . उनकी लेखनी में निर्भीकता, देशप्रेम, और कविताओ में भावनाओ के ज्वार भाटा पाठको को हिंडोले देते रहते है . उनको मेरी शुभकामनाये . आप की चर्चा के बारे में कुछ कहना सूरज को दीपक दिखाना है .

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  5. शिखा
    जी के लिए मन प्रसन्नता से भर गया |
    उन्हे इस सम्मान के लिए हार्दिक शुभ कामनाएं
    और बहुत बहुत बधाई |संगीता जी आज की बहुरंगी चर्चा बहुत अच्छी लगी |आपकी महनत की जितनी प्रशंसा की जाए कम है |मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |
    आशा

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  6. शिखा को इस सम्मान के लिए बहुत बधाई व शुभकामनायें ...
    इस गुलदस्ते के सभी फूल बहुत ही खूबसूरत हैं ...चुनते हैं अभी बारी- बारी !

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  7. अच्छा संग्रह ,आभार मुझे भी इस चर्चा में स्थान देने का ।

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  8. सुश्री शिखा वार्ष्णेय “ लक्ष्मी मल्ल सिंघवी यू के “ अनुदान सम्मान प्राप्ति पर बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएँ.











































    बेहतरीन चर्चा के लिए संगीता जी को बधाई.

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  9. सुंदर, रंगीन, काव्यमय चर्चा।
    शिखा जी को बधाई।

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  10. शिखा जी को बधाई और सुन्दर लिंक्स सजाने के लिए आप का आभार

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  11. शिखा वार्ष्णेय जी को इस बहुमूल्य उपलब्धि पर बहुत-बहुत बधाई!

    संगीता जी, एक साथ इतने सारे अच्छे लिंक देखे... पढ़ कर आनंद आ गया... बहुत-बहुत धन्यवाद!

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  12. शिखा जी को हिंदी की सेवा के लिए सम्मानित किये जाने पर बधाई !
    चर्चा मंच के गुलदस्ते को आज आपने काव्य विधा का हर रंग के फूलों से सजाकर बड़े ही सलीके से प्रस्तुत किया है ,धन्यवाद !
    मेरी रचना को इस सार्थक मंच पर स्थान देने के लिए आभार !

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  13. आभारी हूं आपने अपनी चर्चा में जगह दी। आपने इस चर्चा के लिए जो पोस्‍ट चुनी हैं,वे भी अच्‍छी हैं।

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  14. सुश्री शिखा वार्ष्णेय को इस विशिष्ट सम्मान की बधाईयां । चर्चामंच की बेहतरीन लिंक्स के लिये आपका आभार...

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  15. मुझे चर्चा में स्थान देने हेतु धन्यवाद, अरुण जी का व्यंग्य पसंद आया और आपको भी होली कि शुभकामनाए

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  16. आज तो मन को रंग दिया अपने खूबसूरत रंगों सुगंधों से.शिखा वार्ष्णेय जी को शुभकामनायें व बधाई.मेरी कविता का मान बढ़ाने के लिए अभार.

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  17. शिखा जी को बधाई...

    चर्चा में जगह देने का आभार

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  18. खूबसूरत चयन, काव्य ने मन तृप्त कर दिया।

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  19. सबसे पहले शिखा जी को बहुत बहुत बधाई.......
    संगीता जी...नमस्कार....मुझे हमेशा आपकी चर्चा का इंतजार होता है..बेसब्री से..बहुत ही खुबसुरती से आप चर्चा सजाती है..लाजवाब..बहुत कुछ सीखने को मिलता है..आपसे.......आज के चर्चा में "मेरे छोटे भाई के जन्मदिवस पर" मेरे द्वारा दी गयी कविता लेने हेतु...आभार......बस अपना आशीर्वाद बनाये रखे....धन्यवाद।

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  20. चर्चा मंच पर मुझे स्थान देना के लिए दिल से आभारी हूँ. संगीता जी ने इया मंच के द्वारा जो आशीर्वादों का पिटारा मेरे लिए खोला है उसके आभार के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं.
    आप सभी का आपके बहमूल्य शब्दों और शुभकामनाओं के लिए बहुत बहुत शुक्रिया.
    और चर्चा के तो क्या कहने.

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  21. सुंदर लिंक्स, बेहतर रचनाओं का चुनाव

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  22. शिखा जी को बधाइयां.

    सारे links अभी सरसरी तौर पर देख पाए हूँ. दुपहरिया को आराम से चख चख के मज़ा लिया जाएगा. मेरी रचना को स्थान दिया, अनुगृहीत हूँ.

    संगीता जी को दूर की कौड़ी खोजने में महारत है, ये मैंने बहुत कम समय में जान लिया. आप लोगों के सानिध्य में कुछ पाठ सीख सकूँ. ऐसी आकांक्षा है. सभी को प्रणाम !

    - बाबुषा

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  23. सबसे पहले शिखा जी को हार्दिक बधाई और शुभकामनायें…………वे इसी तरह नित नयी ऊंचाइयां छूती रहें और दुनिया मे अपना और देश का नाम रौशन करती रहें।
    आज की चर्चा तो बहुत ही शानदार है ……………काफ़ी नये लिंक्स मिले…………आभार्।

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  24. आपने आज मेरी रचना "अकेलापन" http://anandkdwivedi.blogspot.com/2011/03/blog-post_15.html को यहाँ स्थान देकर मुझ जैसे नए रचनाकर को जो प्रोत्साहन दिया है मैं उसके लिए ह्रदय से आभारी हूँ !!

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  25. ek se badhkar ek rachnaayen..charcha manch aur aadarniya Sangita Di ka aabhaar jinke athak pryaas se itni sundar aur bhaav poorn rachnayen padhne ko mil saki..

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  26. वा जी बल्ले बल्ले

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  27. संगीताजी आजकी मन भावनी चर्चा भी विविध रंगों को समेटे है, बधाई एवं आभार !

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  28. चर्चा ए ख़ास , सबको लिया साथ ....
    शिखा को इस सम्मान के लिए बहुत बधाई व शुभकामनायें ..

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  29. शिखा जी को सम्मानित किए जाने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
    चर्चामंच के माध्यम से अच्छा साहित्य पढ़ने को मिला।
    मेरी रचना सम्मिलित करने के लिए आभार।

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  30. शिखा जी को बधाई
    आप जिस अन्दाज से चर्चा करती है निराला है

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  31. sunder aur upyogi rachnao ki charcha ke liye badhayi.

    shikha ji ke jeewan ki is avismarneey uplabdhi ke liye bahut bahut badhayi.

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  32. सुश्री शिखा वार्ष्णेय जी खॊ "लक्ष्मी मल्ल सिंघवी यू के" अनुदान सम्मान प्राप्ति पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ.

    रामराम

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  33. आपके मंच के माध्यम से शिखा जी का हार्दिक अभिनन्दन करना चाहती हूँ ! अपनी इस विशिष्ट उपलब्धि के लिये उन्हें हार्दिक बधाइयाँ ! साप्ताहिक काव्य मंच की जितनी प्रशंसा करूँ कम ही होगी ! आपके दिए बहुमूल्य लिंक्स सहेज लिये हैं उन्हें धीरे धीरे पढना होगा ! इतनी बेहतरीन चर्चा के लिये आभार एवं शुभकामनायें !

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  34. हिन्दी के लिये जब किसी को सम्मान मिलता है अच्छा लगता है । शिखा जी को बधाई ।चर्चामंच में मेरी रचना को शामिल किया इसके लिये शुक्रिया ।इस मंच में बहुत सारी रचनाएं हैं । अधिकांश पढ लीं हैं । अच्छी हैं ।

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  35. ITNA VIVIDHTAPURN, BAHUAYAMEE
    KAVITA MANCH SAJAANE KE LIYE
    SAGEETAJEE KO BADHAEEYAN AUR SHUBHKAAMNAYEN

    ReplyDelete
  36. ITNA VIVIDHTAPURN, BAHUAYAMEE
    KAVITA MANCH SAJAANE KE LIYE
    SAGEETAJEE KO BADHAEEYAN AUR SHUBHKAAMNAYEN

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  37. बहुत दिनों के बाद इस चर्चा मंच पर आई हूँ. शिखा जी को बधाई तो पहले भी दिया था, यहाँ भी उनके लिए शुभकामना ही रहेगी, उनकी यह उपलब्धि हम सबके लिए एक मिसाल की तरह है. पुरे लिंक्स तो नहीं पढ़े है अभी तक. नए ब्लॉगर में बाबुषा जी के ब्लॉग पर पहली बार गयी थी, उनकी रचना भी काफी अच्छी लगी. बाकि सब तो दिग्गज लोग है, उनके ब्लोग्स पर जाना एक सुखद अनुभूति तो अवश्य देता है, साथ ही प्रोत्साहन भी.

    चर्चा मंच में मेरी पोस्ट को भी जगह देने के लिए बहुत धन्यवाद!

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