चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Saturday, March 12, 2011

"बंदे बस बंदगी की रवायत में मिला करते हैं" (चर्चा मंच-453)


मित्रों!
आज इं.सत्यम् शिवम जी बंगलुरु  गये हैं 
और शनिवार की चर्चा का जिम्मा मुझ पर है।
देखते हैं कि आज क्या हलचल रही ब्लॉगिस्तान में!
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सबसे पहले देखिए

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अह देखिए इन simte lamhen सिमटे लम्हों को-


ना खुदाने सताया
ना मौतने रुलाया
रुलाया तो ज़िन्दगीने
मारा भी उसीने..
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विषय पर ब्लॉगिंग के पुरोधाओं के विचार
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लो क सं घ र्ष  पर छपी है इस पुस्तक की समीक्षा-



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Unmanaa पर लेकर आईं है

श्रीमती साधना वैद्य अपनी माता जी की


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विचारों की शृंखला में आज है यह आलेख-


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और माधव तो हमारे ही इलाके में घूम रहे हैं-


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३० अप्रैल को हिंदी भवन दिल्ली में ब्लॉगर कुंभ 
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कोलकाता से मनोज कुमार जी प्रस्तुत कर रहे हैं
*आचार्य परशुराम राय* जी का


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नीरज जाट जी


प्रस्तुत कर रहे हैं

एक कुमाऊंनी गाँव- भागादयूनी का यात्रा वृत्तांत

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आप बी गुनगुनाइए न!

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दीपक मशाल जी कह रहे हैं-
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मानो परिंदे निकले हैं तिनको कि तलाश में 
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जाने-माने ब्लॉगर --- ललित शर्मा बता रहे हैं-
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पता नही क्या हो रहा था? 
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*उजाले आजकल तुम* *कहां खो गये हो* 
*मुंह छुपा कर अपना* *किन वादियों में सो गये हो।



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बंद नयनों से भी - दृष्टिगोचर होता है अब ...!! 
बिना आहट के भी - श्रुतिपूर्ण है सब ..!! 
अनाहत नाद सा या - भीतर चिर शोभायमान - ज्योति पुंज सा ..!

कार्टून कुछ बोलता है- नए सीवीसी की तलाश जारी है !!






कार्टून: मनमोहन सिंह ...रन आउट !!!!!

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Cartoon by Kirtish Bhatt (www.bamulahija.com)
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" मेरी कहानी"----मेरी जुबानी...
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अब तो दस साल के बच्चे को भी बच्चा न समझ कुँवर कुसुमेश क़ाबिले-ग़ौर है हर बात शगूफ़ा न समझ, 
दौरे-हाज़िर को मेरे यार तमाशा न समझ. ..........
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आगत की आशंका जब मन में छिपा हुआ सत्य अप्रत्याशित रूप से सामने आ जाता है, तब न कुछ बोलते बनता है और न कहीं देखते बनता है। बस अपनी चोरी पर मुस्करा कर.........
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.......घटनाएं होती हैं...खबर बनती हैं .........
ख़बरें छपती हैं.....ख़बरें पढ़ी जाती हैं....
खबर देखी जाती हैं...ख़बरें अंततः बीत जाती हैं...... 
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Laviza

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बंदे बस बंदगी की रवायत में मिला करते हैं
आज के लिए बस इतना ही!

21 comments:

  1. बढ़िया लिंक मिल गये....

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  2. बढ़िया लिनक्स मिले ...सुंदर चर्चा .....धन्यवाद आपका

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  3. This comment has been removed by the author.

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  4. बहुत सुन्दर लिनक्स से भरपूर चर्चा.आभार..

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  5. अच्छी लिंक्स के लिए आभार
    आशा

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  6. मेरी कविता चर्चा मंच पर लेने के लिए आभार -
    बहुत बढ़िया लिंक्स हैं ..!

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  7. bahut sarthak charcha .meree rachna ''jinke maa nahi hoti '' ko charcha me sthan dene ke liye hardik dhanywad .

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  8. सुन्दर चर्चाएँ .
    मुझे स्थान दिया,आभारी हूँ.

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  9. सुन्दर चर्चा के लिए आभार शाश्त्री जी !

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  10. विस्तृत चर्चा ..
    चर्चा में शामिल किये जाने का बहुत आभार !

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  11. उत्तम लिंक चयन... आभार !

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  12. बहुत ही सुन्दर लिंक्स संजोये है……………और काफ़ी शानदार चर्चा की है……………आभार्।

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  13. विस्तृत और सुन्दर चर्चा ....आभार

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  14. आज सत्यम जी यात्रा पर है.. सुखद यात्रा .. शास्त्री जी आपने बहुत सुन्दर चर्चा की ..

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  15. सभी लिनक्स बहुत अच्छे हैं ..ज्ञानवर्धक

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  16. achche-achche links padhne ko mile.
    dhanybad.

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  17. उत्तम लिंक का संयोजन।

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  18. बहुत उम्दा चर्चा

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  19. आभार भी स्वीकारिये

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  20. चर्चा मंच पर मंथन के लिए साहित्य की लगभग प्रत्येक विधा की मौजूदगी प्रसन्नता दायक है। आपका परिश्रम सहज रूप से झलकता है और नव लेखन के लिए प्रेरित भी करता है। साधुवाद ।

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