Followers

Sunday, April 10, 2011

रविवासरीय (10.04.2011) चर्चा

नमस्कार मित्रों!
मै मनोज कुमार एक बार फिर हाज़िर हूं रविवासरीय चर्चा के साथ। इस बार मन थोड़ा दुखी है। कुछ महीने पहले ही वयोवृद्ध साहित्यकार आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री जी से मिलकर आया था। कल अचानक खबर आई कि

आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री जी नहीं रहे। जब से उनके निधन का समाचार सुना रह-रह कर उनके कहे ये बोल कानों में गूंज रहे हैं।

“आपको देख कर कैसा लगता है – डेढ दो साल और खींच दूंगा। पच्‍चानवे साल का हो गया हूँ मैं। पता नहीं और कितने दिन और खीचूँगा।”

आज ‘फ़ुरसत में …’ उनके साथ बिताएं पलों की झांकी उनके शब्दों में और चित्रों में ‘मनोज’ ब्लॉग पर देखें। [069[3].jpg]आइए इस महाकवि को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए आज की चर्चा शुरु करते हैं।


My Photo१.

94..नाजि़म हिकमत की ' उम्‍मीद' मेरी भी है

from गुल्लक by राजेश उत्‍साही

मैं नज्‍़में लिखता हूं

वे
छप नहीं पातीं

लेकिन छपेंगी

मैं एक खुशखबरी वाले खत के इंतज़ार में हूं

मु


मकिन है वो मेरे मरने के दिन आए

लेकिन आएगा ज़रूर
*** कवि युग दृष्‍टा होता है। इस समय दुनिया भर में अवाम की ताकत से बदलाव की जो हल्‍की-सी किरण दिखाई दे रही है, हो सकता है उसे सूरज बनने में और पचास बरस लगें तो भी उम्‍मीद नहीं छोड़नी चाहिए।
My Photo२.

पढ़ने की सही तकनीक

from भाषा,शिक्षा और रोज़गार by शिक्षामित्र बता रहे हैं कि

जब हम पढ़ाई करते है तो कई बार कई विषय हमें कठिन लगते है। कभी किसी टॉपिक को समझने में दिक्कत आती है, कभी-कभी हम भूल जाते है, कभी हमारा पढ़ाई में मन नहीं लगता है, कभी हम परीक्षा में लिखकर तो आते हैं, लेकि‍न नंबर कम आते हैं, तो कभी-कभी हम तनाव में आ जाते है।

आखिर क्या करें, जिससे की हम हमारे ज्ञान को बढ़ा सके और सहजता के साथ, सरलता से पढ़ाई कर सके एवं अपने ज्ञान में वृद्वि कर सके।


*** हल्का संगीत सुनने, शास्त्रीय संगीत सुनने, वाद्य यंत्रों का संगीत सुने, अपनी श्वास-प्ररवास पर ध्यान देना। हम एकाग्रचि‍त्त महसूस करेंगे और अधिक ऊर्जा के साथ पढ़ाई कर सकेंगे।
मेरा फोटो३.

ये हैं जनांदोलन के मुद्दे : चुनिए आप अपने लिए

from आज का मुद्दा by अजय कुमार झा कहते हैं ये तो बस चंद वो मुद्दे हैं जो सामने हैं जिसके लिए आम जनता को किसी भी अनशन , किसी जनांदोलन और किसी जंतर मंतर की प्रतीक्षा करने की जरूरत नहीं है । इन मुद्दों पर लगातार काम होना चाहिए और हर स्तर पर होना चाहिए । अब आप खुद तय करिए कि आप इसमें से किसके साथ कैसे कब कहां जुड रहे हैं .
*** सही है, हमें इन मुद्दों का विरोध करते रहना चाहिए।
My Photo४.

घर और बाहर - लघुकथा

from An Indian in Pittsburgh - पिट्सबर्ग में एक भारतीय by Smart Indian - स्मार्ट इंडियन

.
" ... ऊंच-नीच से ऊपर उठे बिना क्रांति नहीं आयेगी। ... मैं और मेरा, यह सब पूंजीपतियों के चोन्चले हैं। ... धर्म अफीम है। ... शादी, विवाह, परिवार जैसी रस्में हमें बान्धने के लिये, हमारी सोच को कुंद करने के लिये पिछडे, धर्मभीरु समाजों ने बनाई थीं। ... अपना घर फूंककर हमारे साथ आइये।"
*** कथनी और करनी में फ़र्क़ को दर्शाती लघुकथा सटीक और सार्थक है।
५.

निशा का मनमोहक सौन्दर्य

from परावाणी : The Eternal Poetry by noreply@blogger.com (Aravind Pandey)

ललित रजनी का मृदु परिरंभ, 

ले रहे थे समोद शशकांत .


यथा नारी को भोग्या मान,

रमण करता है मानव, भ्रान्त.
मेरा फोटो६.

वो

from चिंतन by वंदना शुक्ला

नींद तो बिटवा को भी नहीं आई दो रोज से!

तुझे बेटे कि पडी है ,यहाँ देश अनशन कर रहा है चार दिनों से

रोटी तो हमने  भी नहीं खाई साब,  कई दिनों से.......

देश करवट ले रहा  है नहीं जानती क्या?
My Photo७.

सिक्को की लड़ाई !

from हास्य व्यंग ब्लोगर्स महासभा by रामपुरी सम्राट श्री राम लाल

एक रुपए के सिक्के,

और पाँच पैसे के सिक्के में,

लड़ाई हो गई,

पर्स के अंदर

हाथापाई हो गई।

जब पाँच का सिक्का

दनदना गया

तो रुपया झनझना गया
मेरा फोटो८.

खड़ा हो सामने इंसां , उसे ठोकर तो मत मारो

from शस्वरं by Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार

करो यह जिस्म छलनी , रूह के अंदर तो मत मारो

मेरे बन कर , मेरे दुश्मन से ही मिल कर तो मत मारो

मेरी भी है कोई इज़्ज़त , भरम रहने दो कुछ मेरा

चलो , घर में मुझे मारो ; मुझे बाहर तो मत मारो

गला मेरा दबादो , घौंपदो ख़ंजर या सीने में

मेरी
नाज़ुक रगें तुम रोज़ छू - छू'कर तो मत मारो
My Photo९.

दिल को सुकून ....

from 'विचार प्रवाह' by PRIYANKA RATHORE

स्वप्नलोक की इस नगरी में

रत्न जडित जोड़े में लिपटी

उस सुर्ख लाल आभा का तेज

उन खनकती रुनझुन में

तेरी हंसी की मिठास

तेरे नाम से जुड़े खुद के नाम में

वजूद के स्थायित्व का अहसास

दिल को सुकून देता है .....
My Photo१०.

दीवाना है दीवाना .......

from किस से कहें ? by अमिताभ मीत

कोई ज़रूर तो नहीं कि जब कभी भी मुझे
ख्वाब आयें तो उन में तेरा गुज़र भी हो ही
गोया तू मेरे ही इन ख़्वाबों की अमानत है
यूं है नहीं, मैं यूं ही सोच लिया करता हूँ
११.

तुम्हारे बिन ......

from varsha singh by Dr Varsha Singh
१२.

"लैपटॉप जीवन्त हो गया" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

from उच्चारण by डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)
१३.

तुम.....

from वटवृक्ष by रश्मि प्रभा...


१४.

सागर से सागर तक

from वटवृक्ष by रश्मि प्रभा...
१५.

मातृत्व कुल का मान

from मेरी भावनायें... by रश्मि प्रभा...
१६.

मुक्ति का बाना सी लो

from श्रद्धा सुमन by Anita
१७.

दृढ प्रतिज्ञता

from युग दृष्टि by ashish
१८.

थकना मना है

from " 21वीं सदी का इंद्रधनुष " by babanpandey
१९.

जीत का जश्न

from बेचैन आत्मा by देवेन्द्र पाण्डेय


२०.

थैंक्यू अन्ना!

from सम्वेदना के स्वर by सम्वेदना के स्वर
२१.

कार्टून: मुंह खोलो मनमोहनसिंह !!

from Cartoon, Hindi Cartoon, Indian Cartoon, Cartoon on Indian Politcs: BAMULAHIJA by Kirtish Bhatt, Cartoonist
२२.

मोहब्बत है तुझसे

from दुनिया रंग रंगीली by Minakshi Pant
२३.

क्रोध - एक विश्लेषण

from जज़्बात, ज़िन्दगी और मैं by Indranil Bhattacharjee ........."सैल"
२४.

हमने भी देखा हैं गाँधी को- तारकेश्वर गिरी.

from काम की बातें by Tarkeshwar Giri
२५.

शोहरत की लालच में स्त्री की अस्मिता को शर्मसार करती पूनम पांडे.

from ZEAL by ZEAL
आज बस इतना ही। अगले हफ़्ते फिर मिलेंगे।

19 comments:

  1. श्रद्धेय जानकीवल्लभ शास्त्री जी को विनम्र श्रद्धांजलि ! आपके आलेखों के द्वारा उनसे परिचित होने का सौभाग्य मिला था ! ईश्वर उनकी पुण्यात्मा को शान्ति प्रदान करें यही कामना है !
    चर्चा विस्तृत है ! आज का दिन व्यस्त रहेगा ! आभार एवं धन्यवाद !

    ReplyDelete
  2. गहन विचारों से ओतप्रोत चर्चा |बधाई| और नमन स्वर्गीय श्रद्धेय जानकी वल्लभ शास्त्री जी को |
    आशा

    ReplyDelete
  3. बढ़िया चर्चा....

    ReplyDelete
  4. श्रधेय शास्त्री जी को विनम्र श्रद्धांजलि. अद्भुत लिंकों से सजी बेहतरीन चर्चा . आभार मेरी कविता को चर्चा मंच पर स्थान देने के लिए .

    ReplyDelete
  5. sarvprtham shastri ji ko vinamr srdhhanjali....gahan vicharo se paripurn charcha...isme meri post ko shamil krne ke liye bahut bahut dhanybad...aabhar

    ReplyDelete
  6. आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री जी को विनम्र श्रद्धांजलि …………चर्चा हमेशा की तरह उत्तम लिंक संयोजन के साथ प्रस्तुत की गयी है………………आभार्।

    ReplyDelete
  7. आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री जी को विनम्र श्रद्धांजलि!

    ReplyDelete
  8. ..........हमेशा की तरह उत्तम चर्चा

    ReplyDelete
  9. सुन्दर और मनबावन चर्चा के लिे बहुत-बहुत आभार।

    ReplyDelete
  10. अच्छी और सार्थक चर्चा ....जानकी बल्लभ शास्त्री जी को विनम्र श्रद्धांजलि

    ReplyDelete
  11. वयोवृद्ध साहित्यकार आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री जी को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि समर्पित करता हूँ।

    ReplyDelete
  12. बहुत ही सुंदर और व्यवस्थित चर्चा......

    जानकीवल्लभ शास्त्री जी को विनम्र श्रद्धांजलि

    ReplyDelete
  13. श्रद्धेय जानकीवल्लभ शास्त्री जी को विनम्र श्रद्धांजलि.
    चर्चा में काफी अच्छे लिंक्स मिले हैं आभार.

    ReplyDelete
  14. mithaai khane ke liye jaldi jaldi sabka naam liya aur bhaag gaye.... agli baar aisa nahi

    ReplyDelete
  15. जानकी बल्लभ जी को मेरी श्रद्धांजलि ... प्रभु घर वालों को इस शोक समय में बर्दास्त की सामर्थ्य दें ...

    चर्चा हमेशा की तरह सुन्दर ...

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

"स्मृति उपवन का अभिमत" (चर्चा अंक-2814)

मित्रों! सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...