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Wednesday, May 11, 2011

"निष्पक्ष हिसाब" (चर्चा मंच-511)


मित्रों!
आज बुधवार है!
चर्चा मंच पर पढ़िए!
कछ अद्यतन पोस्टों को!
लेकिन उससे पहले मैं आपको परिचित कराना चाहूँगा!
शुक्रवार की हमारी नई चर्चाकार
श्रीमती दर्शन कौर धनोए जी से
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 मुंबई ( वसई ) : महाराष्ट्र  की रहने वाली 
श्रीमती दर्शन कौर धनोए जी अपने बारे में लिखती हैं!
मेरे मन मै जो भी अरमान है उन्हें पूरा करने कि कोशिश करती हु..मन से बहुत भावुक हूँ ..खुश रहती हु इसलिए चाहती हु की सब खुश रहे .. मेरा जन्म मध्य प्रदेश के इंदौर शहर मे २८मार्च को हुआ , शिक्षा मनासा और मंदसोर मे हुई ..फिलहाल बॉम्बे मे रहती हु ..बचपन से धुमने का शोक है ..पहाडो पर मेरा दिल बसता है ..वही बसने का अरमान है ...न जाने कब पूरा होगा ..सपने बहुत है ....?
इनके मुख्य ब्लॉग हैं-
चर्चा मंच पर आपका बहुत-बहुत स्वागत और अभिनन्दन है!

 सबसे पहले चर्चा में लेता हूँ!
मेरी भावनायें...में प्रकाशित
पर रची गई इस रचना को!

 कीचड़ के मध्य कमल 
न कीचड़ का सौभाग्य न कमल का 
कमल निर्विकार अपने सौन्दर्य के साथ 
एक मिसाल बनता है 
कीचड़ अपने होने का दंभ भरता है...
बाबुषा लेकर आईँ हैं!

सांस लेती है ; 
तुम्हारी किताबों वाली 'शेल्फ' ; 
पहले की तरह ही ! 
तुम्हारे पीछे ; 
यहाँ - कुछ ख़त मिले हैं ! 
क़िताबों में फंसे से - 
धडकते हुए ख़त ;... 
*न तुम मुस्कुराते न ये बात होती,* 
*न मिलती निगाहे न हालत ये होती,* 
* मुहब्बत भी कैसी अजब चीज़ है ये,*
 *न छाती घटाए न बरसात होती,... 
यही तो है "चाहत..." 



इसी से मिलती-जुलती एक पोस्ट प्यार , इश्क , मुहब्बत 
अंतर्मंथन पर भी है!

मौसम भी गर्म है और माहौल भी । 
गर्मी को गर्मी से मारने के लिए आज प्रस्तुत हैं कुछ क्षणिकाएं , 
जो रोमांस पर आधारित हैं । 
इसे नौजवान पढेंगे तो खुश होंगे । ...  
इन तीनों ब्लॉग पर यही पोस्ट लगी है!
प्रगतिशील ब्लॉग लेखक संघ


यह देखिए!
आशा जी Akanksha पर लेकर आईं हैं!


 माँ है धरती और पिता 
नीलाम्बर दूर क्षितिज में मिलते दौनों सृष्टि उपजी है दौनों से | 
धरा पालती जीवों को पालन पोषण उनका करती खुद दुखों तले दबी रहती... 

अलबेला जी खुलासा कर रहे हैं इस साजिश का!

आज इंटरनेट पर अचानक मुझे कुछ ऐसा दिखाई दिया 
जिसमे नाम तो मेरा है पर काम मेरा नहीं है, 
ये पता नहीं क्या है और मेरा नाम यहाँ कैसे छपा है 
क्या कोई बता सकता है?...  
प्रतिदिन ब्लॉग लिखने वाली
श्रीमती वन्दना गुप्ता 

एक प्रयास पर लेकर आयी है यह रचना!

 मोह का छोटा सा अंकुर भी 
कैसे झुलसा जाता है रे मन ! 
तू इतना सा भी ना समझ पाता है 
तेरे वर्षों के तप को खंडित कर जाता है 
फिर दूर बैठा मुस्काता है रे मन ! ... 
एक सुन्दर क्षणिका लेकर आयी हैं
श्रीमती संगीता स्वरूप जी
बिखरे मोती ब्लॉग पर!

इसके बारे में तो इतना ही कहना चाहूँगा कि-
हरसिंगार के फूल से, बिखर जाएँ जब ख्वाब।
आगत का स्वागत करो, थोड़े दिन की आब।।   


समीर लाल "समीर"
उड़न तश्तरी .... पर लेकर आये हैं!


कभी-कभी गुस्सा दिखलाते।
लेकिन गाँठ न मन में रखते,
फिर संगी-साथी बन जाते।
बस्ता-तख्ती लेकर जातीं,
संग में मेरे मुन्नी-माला।

बचपन होता बहुत निराला।।
----------
Rhythm of words... पर पारुल जी लाई हैं!
छिपा गए थे एक कोने में 
फिर मैले से चाँद को 
देख लिया था फिर भी मैंने 
पानी पर फैले चाँद को 
गुपचुप से थे 
सारे खिलोने लगे थे 
तुम न जाने क्या बोने दबा रहे थे ... 

गीत मेरे ........पर देखिए!

 मुझे चाय बहुत भाती है ...
 हर रंग में हर रूप में कभी यूँ ही काली कडवी से कभी उस काली चाय में नीम्बू, कभी बर्फ , कभी दूध डाली चाय तो कभी उसमे ढेर सारे मसाले... 
 मनोज कुमार जी कोलकाता से
मनोज ब्लॉग पर प्रस्तुत कर रहे हैं!
जितेन्द्र त्रिवेदी को

 अभिनव सृजन पर डॉ. नागेश पांडेय 'संजय जी लेकर आये हैं

चिलचिल गर्मी की एक*बाल कविता : 
 सहज साहित्य पढ़िए 
रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु जी की यह ध्वन्यात्मक रचना

 *नील कुवलय -से *** *तुम्हारे*** *ये अधमुँदे नयन*** 
*कितने पावन*** *बुनते सपन** ।***... 
 kaushal में
आज कुछ ब्लोग्स पर ''शिखा कौशिक जी''द्वारा प्रस्तुत है...

आओ विचारें आज मिलकर ये समस्याएं सभी. 
 सरस पायस पर छपा है


MY~LIFE~SCAN में-
 डॉ नूतन गैरोला जी लेकर आई हैं

 निरामिष पर देखिए!

* भले ही आप कहें आहार हमारा व्यक्तिगत मामला है, जो इच्छा हो खाएँ। 
पर हम मानते है, आहार मात्र व्यक्तिगत मामला नहीं है... 
 स्पंदन SPANDAN में रची-बसी है

-कल रात किवाड़ के पीछे लगी खूंटी पर टंगी 
तेरी उस कमीज पर नजर पड़ी 
जिसे तूने ना जाने कब यह कह कर टांग दिया था 
कि अब यह पुरानी हो गई है. 
और तब से कई सारी...
 अह देखिए "पल-पल! हर पल!!"
से कुछ हलचल! 


बेटा हो या बेटी । 
संस्कार अच्छे होने चाहिये ।

Author: RAJEEV KUMAR KULSHRESTHA | Source: परमात्मा/ OH MY GOD/WHERE ARE YOU  


जो जनता की सोचेगा अब वही राज करेगा

चौबे जी की चौपाल (दैनिक जनसंदेश टाइम्स/०८ मई २०११ )   

गहरी और अनन्य भक्ति

Author: vinay bihari singh | Source: divya prakash  

माँ बिन बालक ...

मात - स्नेह - वंचन से आहत , मात - स्नेह की अविरल चाहत , 
पाले.. मन में नन्हां बालक , तड़प रहा जीवन में नाहक   

सफर अब भी वह जारी है अगर दिल में मुहब्बत हो जहाँ जन्नत की क्यारी है सुकूं तारी सदा रहता यह ऐसी बेकरारी है I तेरी नजरों से जब देखा यह दुनिया भा गयी मुझको तेरे पीछे चले थे हम सफर अब भी वह जारी है I मेरे दिल का हर इक कोना भरा है तेरी यादों से जहाँ न साथ तेरा हो ऐसा इक पल भी भारी है I जमाने की निगाहों से सदा जिसने बचाया है गमों की धूप में वह नी .. 

शेखावाटी का जन स्वास्थ्य और बकरी का धीणा

           आप सोच रहे होंगे कि जिस शब्द का मतलब हिन्दी भाषी लोग नहीं जानते उस शब्द का प्रयोग मैंने क्यों किया इसका कारण ये है कि ये शब्द यंहा शेखावाटी में बोलचाल में बहुत प्रयोग किया जाता है | धीणा शब्द का अर्थ है दुधारू पशुधन | बचपन में जब मै इधर उधर रिश्तेदारी में जाता था तब वंहा मुझसे कुछ कोमन से प्रश्न किये जाते थे जिनका क्रम इस प्रकार से र ...  
 अब कुछ लिंक "ब्लॉग मंच" से! 


बीएड के बाद अब एमएड में विद्यार्थियों से अवैध फीस वसूली का प्रकरण सामने आया है। 
काशी विद्यापीठ से संबद्ध बलिया के एक महिला कालेज की छात्राओं ने आरोप लगाया   

 गैर-कामकाजी गर्भवती महिलाएं अपना और बच्चे का ख्याल अब और बेहतर ढंग से रख सकेंगी। 
केंद्र सरकार का सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय जल्द ही गर्भवती महिला... 

*सामने दिख रहे हैं रिटायर्ड सब इंजीनियर लोकेन्द्र सिंह ,पीछे सफ़ेद पैंट और* 
* ब्लू लाईनिंग शर्ट पहने हुए हैं जिला अधीक्षक जिन पर हमला हुआ । * *यह चित्र धटना ... 

बात बहुत कही…बहुत सही… कह-कह कर.. सही सह-सह कर.. कही जब सही .. 
ठीक कही जब कही .. कम सही कही बात... न सही सही बात ...
न कही रह गई सही - सही कही-कही भी रह... 

अँधेरे में इक दिया जलाता हूँ | 
मैं रौशनी के लिए खुद को मिटाता हूँ || 
जहां सारी उम्मीदें हताश हो आयी | 
वहां मैं, दुआ बन के काम आता हूँ || 
ग़मों से मुरझाई हुई...
 **** कोशिश कितनी भी करो छिप ना पाओगे निगाहों से हमारी बच ना सकोगे 
ख़्वाबों में तो आओगे मुलाक़ात करोगे जाना चाहोगे जा ना सकोगे इल्तजा हमारी ठुकरा ना ... 

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* बाल कविता :चन्द्रपाल सिंह यादव ' मयंक ' * 
अन्त में ये दो पोस्ट भी देख लीजिए!

सब छोड़ जायेंगे जब हमको 
तन्हा तन्हा हम रह जायेंगे, 
किसे बताएँगे ग़म औ खुशियाँ 
सदमा कैसे हम सह पायेंगे!....
------
जज़्बात में पढ़िए यह खूबसूरत ग़ज़ल!
जेबों में अपने हर सामान रखते हैं
----------------

आज के लिए बस इतना ही! 

13 comments:

  1. sabhi rachnaye bahut sundar hai ,is bagiya ke har phool khoobsurat hai .aapke is prayas ke liye badhai badhiya

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  2. बाल रचनाएँ बहुत अच्छी लगीं |अच्छी लिंक्स |नई चर्चा कार से मिलवाने के लिए धन्यवाद |
    मेरी पोस्ट को आज के चर्चा मंच पर शामिल करने के लिए आभार |
    आशा

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  3. सुन्दर संकलन ...
    चर्चा में शामिल करने के लिए बहुत आभार !

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  4. charcha manch ko sajane me aap koi kasar kabhi bhi nahi chhodte hain aaj bhi aap apne karya me poorntaya safal hue hain.mere blog ''kaushal''v post ''ham kaun the kya ho gaye aur kya honge abhi''ko charcha manch par sthan dene ke liye aabhar.

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  5. bahut sundar ,hardik badhai
    sadar
    laxmi narayan lahare

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  6. आज तो बहुत विस्तृत और सुन्दर लिंक्स से सजी चर्चा लगाई है……………बहुत सुन्दर संकलन्।

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  7. बहुत सुन्दर संकलन है ...आज की विस्तृत चर्चा पर अभी जाना बाकी है ... काफी कुछ एक साथ मिल गया है पढने को ... दर्शन जी का स्वागत है

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  8. उम्दा ब्लोग्स का चयन ..चर्चा भी बहुरंगी .. सादर

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  9. सुन्दर संकलन ...
    दर्शन जी का स्वागत है
    चर्चा में लिए बहुत आभार !

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  10. वाह ...विस्तृत सार्थक और सुन्दर चर्चा.
    दर्शन जी का स्वागत है.

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  11. आज की चर्चा मंच कुछ खास है क्योकि इसमें मुझे शामिल करके शास्त्री जी ने मेरे ऊपर जो जुम्मेदारी डाली है --कोशिश करुँगी की मै इसमें सफल रहूँ--आप सबका सहयोग जरूरी है ...धन्यवाद !

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  12. दर्शन जी का स्वागत ! सधी हुयी चर्चा !कुछ लिनक्स देखना बाकी है . 'कुछ पन्ने' शामिल करने के लिए आभार !

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