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Wednesday, June 22, 2011

"प्यार हुआ आवारा" (चर्चा मंच-553)

मित्रों! आप सभी का बुधवासरीय चर्चा मे स्वागत है

 नुक्कड़ मे पहुँचते ही मैने घोषणा की भाई  लोकपाल बिल पर खांग्रेस की प्रसव पीड़ा  जग जाहिर है। अपनी इच्छा के खिलाफ़ क्या वह काम करेगी । इतना सुन श्याम कोरी जी  कड़ुआ सच  कहने लगे  कि... क्या भ्रष्टाचार मिटाने को बाबाजी तैयार हैं !!  मदन आर्यन जी नाराज हो गये बोले हम तो कहेंगे हमें नही कभी नहीं भूलेगी वो काली रात   इस दमन का कोई जवाब देता कि जनोक्ति ने पूछ लिया  कांग्रेस से सवाल : बाबा - अन्ना तानाशाह तो गाँधी क्या थे  सावधान....चमचों के साथ छुरी-कांटे भी होते हैं...!!    । तुम कितना खा रहे हो जो चमचों को बचा रहे हो इतने में ज्योतिष श्री सिद्धार्थ जी ने सोनिया का चित्र लहराया बोले  यह सब तो होना ही था क्योंकि यह ग्रहण और विद्रोहों का साल  है ।   शेखावत जी  सोनिया गांधी का चित्र देखते ही बोले बांका पग बाई पद्मा रा और उन्होंने एक रोचक प्राचीन कथा शक इसी पर है सुना दी । इतने में प्रमोद जोशी जी बोल उठे  कि भाई सपने ही सही, देखने में हर्ज क्या है?   होना-जाना कुछ नही चिल्लाते रहो ।  भारतीय नागरिक जी हँसने लगे बोले  अल्पसंख्यकों से भेदभाव करने वाले जाएँगे जेल   अब साहब पैसे वाले भ्रष्ट लोग नेता लोग ये लोग भी तो अल्पसंख्यक है इनको चोर लुटेरा डाकू कहने से पहले दस बार सोच लीजियेगा ।     इस पर निराश   स्वराज्य करूण जी कहते हैं  अब तो चवन्नी बराबर भी नहीं हमारी हैसियत !       मनोज जी  भी निराश थे   गिरमिटियों पर कर   वाली कहानी सुना बोले कि  मारिशस से आने वाले पैसे पर भी ऐसे ही कर लगाना चाहिये । इतने मे जील जी ने कहा निराशा से दूर हटॊ मित्रो लेखन की बेला.  है अपने लिये लिखो पाठकों और देश की बात बाद में है । अवधिया जी सोम का नाथ बनाये जाने से नाराज थे भड़क गये  बोले सीधे का मुँह तो कुत्ता भी चाट लेता है  जाग जाओ  भ्रष्टाचारियों को बोलो भाग जाओ । सुरेन्द्र सिंह झंझट जी आज  झंझट के मूड मे न थे बोले भाई भ्रष्टाचार रूक ही नहीं सकता नेता और अफ़सर बने ही हैं  इक दूजे के लिए   । इतने मे हास्य वाले रामपुरी सम्राट बोल पड़े हे नेताओ  क्या हमारे बापू ने हमें यही सिखाया ? था । इतना सुन मामला कुछ बदल गया  मौद्गिल जी का कहना था कि भाई नेताओ मोह-माया मिथ्या है कहीं गेरूआ, पीत कहीं................... सब जायेगा रीत यहीं इसलिये सदाचरण करो । वही । मलखान सिंह जी जमाने से अलग नारा लगा रहे थे   उनका  जोर धर्मनिरपेक्षता पर है वे कहते हैं ऐ धर्मांधों, बुल्‍ले शाह की भी सुन लो     ।  इतने मे जनता भड़की दुनाली को साईड रख पूछा कि भारत मे इतने बेईमान हो गये हैं कि सबके नाम से अलग अलग वेबसाईट भी नही बन पायेगी डॊमेन कम पड़ जायेंगे तभी अशोक बजाज जी ने ग्राम चौपाल पर बताया इंटरनेट डोमेन नामों की संख्या बढ़ेगी , अब हम डाट बेइमान के नाम से सबके लिये अलग बना सकते हैं ।

एक साहब कहने लगे भाई जनता का ब्लडप्रेशर लो है नेताओं का हाई है । उपाय क्या है तभी सलाह मिली जनता का ब्लड प्रेशर लो हो गया है तो उनको भेजो हिमालय आयुर्वैदिक दवाखाना कैंम्प - नेशनल हाईवे - 43 से -- ललित शर्मा    सरकार का हाई हो गया है तो बाकलीवाल जी के हाई ब्लड-प्रेशर (उच्च रक्तचाप) से बचाव के कुछ सरल उपाय.(2) बतला दो भाई । नुक्कड़ में इतना हंगामा सुन दिमाग खराब हो गया तो दायें बायें मुड़ देखा आदरणीय राहुल जी पक्षियो की सेवा   पंडुक-पंडुक   कर रहे थे मन खुश हो गया ।  विचार आया कुछ भी हो नये जीवन को प्रश्रय देना और कमजोरों की मदद करने से अच्छा धर्म तो क्या होगा । धर्म शब्द की व्याख्या ही मुश्किल है प्रेम की आसान है । कुटिल सिब्बल के तर्क तो अच्छे हैं पर उनकी नीयत मे खोट है यही मै सोचता हूं । बस इसीलिए तो प्यार हुआ आवारा!

धन्यवाद!

15 comments:

  1. पंडुक की एक ठांव यहां भी, धन्‍यवाद.

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  2. सुंदर चर्चा ,आभार

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  3. बढ़िया लिंक.... बेहतरीन प्रस्तुति.....

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  4. रोचक प्रस्तुतिकरण ...अच्छे लिंक्स का चयन ..अभी कुछ पर ही जाना हुआ है ...बाद में जाते हैं सब पर ..आभार

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  5. बहुत अच्छी और सटीक चर्चा
    आशा

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  6. सुन्दर लिंक्स से सजी सार्थक चर्चा।

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  7. अच्छे लिंक्स .अच्छी चर्चा.

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  8. सुन्दर लिंक्स से सजी सार्थक चर्चा।

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  9. सुंदर चर्चा ,आभार

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  10. बहुत रुचिकर और मजेदार चर्चा
    अच्छे लिंक्स.......................
    मेरी कविता भी शामिल किया....आभार

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  11. प्रस्तुति का बढियां अंदाज

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  12. सुंदर चर्चा ,आभार

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  13. लिन्क्स्मय कहानी उपयोगी लगी.. शुक्रिया

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