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Sunday, July 31, 2011

रविवासरीय (31.07.2011) चर्चा

नमस्कार मित्रों!

मैं मनोज कुमार एक बार फिर से हाज़िर हूं रविवासरीय चर्चा के साथ।

आज महान साहित्यकार प्रेमचंद जी का जन्मदिन है। उन्हें नमन करते हुए आज की चर्चा शुरु करते हैं।

                               

--बीस-

तसल्ली

kavita verma

clip_image001 अरे बेटा यहाँ आ भैया को चोट लग जायेगी. कहते हुए मांजी ने मिनी को अपनी गोद मे खींच लिया. मम्मी के पास भैया है ना ,थोडे दिनो मे वो मिनी के पास आ जायेगा,उसके साथ खेलेगा, मिनी उसे राखी बान्धेगी . मांजी के स्वर मे पोते के आने की आस छ्लक रही थी.नेहा को भी बस उसी दिन का इन्त्जार था.

आपने भारतीय परिवेश व मानसिकता को बड़े ख़ूबसूरत और संतुलित रूप से पन्ने पर उतारा है।

                               

 


                               --उन्नीस


एक गहरा वजूद - असीमा भट्ट

रश्मि प्रभा...

clip_image002 जिंदगी से मुझे कोई शिकायत - नहीं . कुछ भी नहीं . I love it. My life is beautifull.

बहुत कुछ खोया है .... बहुत कुछ पाया है . अब तो बात जिद्द पे आ गई है - अब तो जिंदगी से सूद समेत वापस लेना है और उसे भी देना पड़ेगा .

ब्लॉगर से मिलवाने का यह एक अच्छा प्रयास है और उनके द्वारा व्यक्त विचार भी बहुत अच्छे हैं।


                             --अट्ठारह


स्वार्थी दुनिया

दीप्ति शर्मा

clip_image003पंक्षियो की कौतुहल आवाज़ से मेरी आँख खुली | मौसम सुहावना था | पवन की मंद महक दिवाना बना रही थी | बाहर लॉन मै कई पंक्षी चहक रहे थे मौसम का आनंद लेने के लिए मैने एक चाय बनायीं और पीने लगी |

प्रेरक प्रसंग!


                              --सत्तरह


Safe Mode काम नहीं कर रहा? ठीक कीजिये आसानी से

नवीन प्रकाश

clip_image004 Safe Mode एक जरुरी और उपयोगी विकल्प है विंडोज में, इसमें आपका कंप्यूटर सीमित सुविधाओं के साथ शुरू होता है पर आपको आपके कंप्यूटर की समस्याओं के समाधान के लिए एक सुरक्षित तरीके से शुरू करने देता है ।

नवीन जी हमेशा काम की जानकारी देते रहते हैं।

                       
                                --सोलह—

आत्मग्लानि.......

Suresh Kumar

clip_image005 समय तेरी उपयोगिता को, कभी मैं आंक ना पाया,

तू मेरे घर में बैठा था, तुझे मैं झाँक ना पाया,

मेरे जीवन में तेरा मुल्य, समझ ये आ गया मुझको,

तू इश्वर है, विधाता है, मन में रख लिया तुझको,

ये जीवन तुझपे अर्पण हो, अब मैने ठानी है,

ये मेरी आत्मग्लानि है,ये मेरी आत्मग्लानि है...

कवि --- सरल और सहज मुहावरे में इस कठिन समय को कविता में साधते हैं।


                                 --पन्द्रह


अंग्रेजी के वर्चस्व पर लगेगी लगाम

शिक्षामित्र

संघ लोक सेवा आयोग की यह पहल उल्लेखनीय है कि भारतीय प्रशासनिक सेवाओं में चयन की उम्मीद रखने वाले प्रतिभागी अब अपनी मातृभाषा में मौखिक साक्षात्कार देने के लिए स्वतंत्र हैं। अब तक यूपीएससी की नियमावली की बाध्यता के चलते जरूरी था कि यदि परीक्षार्थी ने मुख्य परीक्षा का माध्यम अंग्रेजी रखा है तो साक्षात्कार भी अंग्रेजी में देना होगा। जाहिर है, आयोग के इस फैसले से ऐसे प्रतिभागियों को राहत मिलेगी जो अंग्रेजी तो अच्छी जानते हैं लेकिन इसके संवाद संप्रेषण व उच्चारण में उतने परिपक्व नहीं होते, जितने महंगे और उच्च दज्रे के कॉन्वेंट स्कूलों से निकलकर आए बच्चे होते हैं।

बहुत अच्छी खबर है।


                              --चौदह


बिजली फूँकते चलो, ज्ञान बाटते चलो

प्रवीण पाण्डेय

सूर्य पृथ्वी के ऊर्जा-चक्र का स्रोत है, हमारी गतिशीलता का मूल कहीं न कहीं सूर्य से प्राप्त ऊष्मा में ही छिपा है, इस तथ्य से परिचित पूर्वज अपने पोषण का श्रेय सूर्य को देते हुये उसे देवतातुल्य मानते थे, संस्कृतियों की श्रंखलायें इसका प्रमाण प्रस्तुत करती हैं।

ऊर्जा संरक्षण पर प्रेरक आलेख।


                                 --तेरह


बाम-इस्लाम और समोसा कूटनीति !

पी.सी.गोदियाल "परचेत"

clip_image007 जब मानव समाज में नगण्य कर्मावलम्बी परजीवी प्राणी क्रूरता, धृष्टता, झूठ और छल-कपट के बल पर अपनी आजीविका चलाने हेतु अज्ञान और अचिंतन के अन्धकार से भ्रमित निर्धन, शोषित और बौद्धिक कंगाल वर्ग के समक्ष खुद को उसका हितैषी और ठेकेदार प्रदर्शित कर, भय एवं ईश्वर के नाम से दिग्भ्रमित करने हेतु नए- नए तरीके खोजता है

एक विचारोत्तेजक आलेख।


                              --बारह


दिखा देता अँधेरे से कोई लड़ता दिया उसको

कुँवर कुसुमेश

clip_image008 भटकने लग गया जों आदमी राहे-मुहब्बत से.

अदब की रोशनी शायद दिखा दे रास्ता उसको.

'कुँवर'ख़ुद पर भरोसा और मौला पर भरोसा रख,

भरोसा जिसको मौला पर है मौला देखता उसको.

जिंदगी की सूक्ष्म सच्चाइयां ग़ज़ल में खूबसूरती से बयां हो रही है।


                                --ग्यारह


महिला अपराधों की राजधानी दिल्ली और दबंग अपराधी

अभिषेक मिश्र

clip_image009 निःसंदेह हम 100% अपराध तो नहीं रोक सकते मगर कम से कम इस शौकिया कवायद को रोकने की 1% सार्थक कोशिश तो कर ही सकते हैं, अन्यथा 'वीकेंड स्पेशल' ये खबरें मीडिया की हेडलाइंस और 'ब्रेकिंग न्यूज' ही बनती रहेंगीं.

सशक्त, विचारोत्तेजक आलेख।


                                 --दस

अन्ना को मना है.

Kirtish Bhatt,

clip_image010

तीखा कटाक्ष!


                                  --नौ


सुक्खू चाचा की अंतिम थाली

Nirmesh

clip_image011 सुन सुक्खू चचा को लगा कि जैसे

काठ मार गया

गिरते गिरते उन्होंने दीवाल थाम लिया

बोले सहूईन एहे त दू चार घर बचा रहा

जेकर हमका असरा रहा

जिनगी हत गयल ई पिसे वाली मशिनिया से

कै
से जियल जाई हमअन से

इस कविता में जीवन के विरल दुख की तस्‍वीर है, इसमें समाई पीड़ा पारंपरिक कारीगरों की दुख-तकलीफ है।


                                  --आठ


मनचाहे सपनों को

डा० व्योम

मनचाहे सपनों को
कोख में दबा
बंजारे दिन
हो गए हवा

नवगीत अभिधेयात्मक एवं व्यंजनात्मक शक्तियों को लिए हुए है।


                                 --सात

clip_image012

एक्सपॉयर दवाईयों को आप कैसे फैंकते हैं?

डा प्रवीण चोपड़ा

clip_image013कुछ दिन पहले की बात है मेरे बेटे ने मेरे से अचानक पूछा कि पापा, आप इस्तेमाल किये हुये ब्लेडों का क्या करते हो, उस का कारण का मतलब था कि उन को आप फैंकते कहां हो? …मैं समझ गया... मैं उस को कोई सटीक सा जवाब दे नहीं पाया....लेकिन मुझे इतना पता है कि वह भी इन्हें घर के कचरेदान में कभी फैकना नहीं चाहेगा।

एक उपयोगी पोस्ट – अवश्य पढ़ें।


                                   --छह


पढ़ाई और फिटनेस

कुमार राधारमण

जंक फूड के चलन ने सभी युवाओं की सेहत प्रभावित की है लेकिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स कुछ ज्यादा हैं। दूसरे शहरों से आए युवा इसका शिकार और ज्यादा होते हैं।

एक काम की बात बताती उपयोगी पोस्ट।

                                 --पांच

११ साल का मेहंदीवाला

अरुण चन्द्र रॉय

clip_image014 व्यस्त रहता है

उत्सवो, तीज त्योहारों पर

सावन के सोमवार को

राखी से पहले

धनतेरस के दिन

करवा चौथ पर रहती है

उसकी भारी पूछ

इस कविता में जीवन के जटिल यथार्थ को बहुत सहजता के साथ प्रस्तुत किया गया है। इस कविता में न तो जनवादी तेवर है और न प्रबल कलावादी आग्रह।


                                  --चार


सार्वजनिक स्थान पर हम भारतीय यूँ ही नहीं थूकतें हैं ...

veerubhai

clip_image015 भारतीय द्वारा थूकना गंदगी को बढ़ाना नहीं हैं ,थूकना सफाई का दर्शन हैं ,वह अन्दर की सुवास को बनाये रखने के लिए बाहर की ओर थूकता है ।थूक एक प्रतिकिर्या है बाहर फैली गंदगी के प्रति .भारत में चारों तरफ़ धूल मिटटी और गंदगी का डेरा है .बाहर के मुल्कों में (विकसितदेशों में) पर्यावरण और आपके आस पास का माहौल एक दम से साफ़ सुथरा रहता है इसलियें भारतीय वहाँ थूक नहीं पाते .यह कहना है

व्यंग्यकार ने थूक के माध्यम से मन की उमंगे, जीवट, जोश के साथ-साथ सामाजिक विद्रूपदाओं, विसंगतियों एवं विवशताओं तथा मानव-मानव में भेद की भावनाओं पर खुलकर कलम चलाई है।


                                    --तीन


सुना है आँखों से निःसृत शंखनाद को

रश्मि प्रभा...

clip_image016चाँद के गांव से

किरणों के पाजेब डाल

जब सूरज निकलता है

तब चिड़ियों के कलरव से

मैं मौन आरती करती हूँ

बिम्बों का अद्भुत प्रयोग! कवयित्री अपना ही पुराना प्रतिमान तोड़ते नजर आती हैं। यह कविता लोक जीवन के यथार्थ-चित्रण के कारण महत्‍वपूर्ण है।


                                   --दो


'बहादुर कलारीन' - बिखरी हुई, भटकी हुई.

समीक्षक- मुन्ना कुमार पांडे

हबीब साहब के रंगकर्म को नजदीक से जाने वाले यह बखूबी जानते हैं कि बहादुर कलारिन भले ही चरणदास चोर जितना मशहूर न हुआ हो पर यह नाटक हबीब तनवीर के दिल के काफी करीब था |

एक बेहतरीन समीक्षा!


                                 --एक--

दक्षिणी सूडान की स्वतंत्रता और स्त्री शक्ति

डॉ. शरद सिंह

clip_image017 आंधी-तूफान के बाद खिलने वाली सुनहरी धूप की भांति दक्षिणी सूडान कीस्वतंत्रता एक लंबे गृहयुद्ध के बाद हासिल हुई है। गृहयुद्ध के दौरान पुरुषों ने बढ़-चढ़ कर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ी और बड़ी संख्या में हताहत हुए। इसका सबसे अधिक दुष्परिणाम झेला स्त्रियों ने। अपनों के मारे जाने का दुख और शेष रह गए जीवितों के प्रति जिम्मेदारी का संघर्ष। इन सबके बीच अनेक स्त्रियों को बलात्कार जैसी मर्मांतक पीड़ा से भी गुजरना पड़ा।

गहन विचारों से परिपूर्ण शोधपूर्ण आलेख। आलेख के बारिक विश्‍लेषण गहरे प्रभावित करते हैं। स्त्री-शक्ति के महत्व और ताकत का आपने बहुत सुंदर उदाहरण पेश किया है।


आज बस इतना ही!



अगले हफ़्ते फिर मिलेंगे।


तब तक के लिए हैप्पी ब्लॉगिंग!!

Saturday, July 30, 2011

"यह इश्क नहीं आसान बस इतना समझ लीजे" (चर्चा मंच-591)

चर्चाकार :यह ब्लॉगजगत एस एम् मासूम के नाम से जानता है और अमन के पैग़ाम के नाम से पहचानता भी है. अक्सर लोगों को मेरा सामाजिक सरोकारों से जुड़ कर लिखना पसंद नहीं आता. लेकिन मैं भी जानता हूं यह इश्क नहीं आसान बस इतना समझ लीजे, एक आग का दरिया है और तैर के जाना है. मेरा सवाल है है. क्या हम सेक्स जनित विसंगतियों पर काबू पा सकते हैं? वोट देने की प्रक्टिस यहाँ जा के करें Picture 043

अखबार में खबर है: हर व्यक्ति ने दी दो हजार की रिश्वत। सर जी मैंने ज्यादा दी। उसका जिक्र नहीं है रिपोर्ट में। बीते एक दशक में 1555 हजार करोड़ रुपये भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गएरिश्वत है तो देश का विकास है

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20 वर्षीय छात्रा प्रियंका की, जिसे नहीं पता था जिससे वो प्यार कर(रोहित राज) रही है वो उसकी मौत का कारण बनेगा|रिश्तों के मायने इतने बौने क्यों?
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दुखियारा होने का दुख
(व्यंग्य) बयान करते हुए सुमित यादव की एक बेहतरीन अंदाज़ मैं
खुशदीप जी कहते हैं सवालों के जरिए किसी का भी आईक्यू जाना जा सकता है...आईक्यू बोले तो इंटेलीजेंस क्योशेंट...बुद्धिमत्ता का पैमाना. image
आज निर्मला कपिला जी की एक ग़ज़ल को शामिल कर रहा हूं और यकीनना इसके अलफ़ाज़ इतने दमदार हैं की कोई भी इसे पसंद करेगा. आप भी इस ग़ज़ल को पढ़ें images (2)
इस चिट्ठी में, महाबालिपुरम में, मूनरेकर में दोपहर के खाने और टाइगरकेव की चर्चा है।

टाइगरकेव – देवी दुर्गा का पुण्य स्थल

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भारतीय नारी ने ब्लॉगजगत मैं अपने पैर ज़माने शुरू कर दिए हैं और यह एक अच्छी शुरोआत है. देखिये आज अमृता प्रीतम जी के बारे मैं कुछ . बर्तनों पर लगी हिन्दू और मुसलमान की मोहर और बालिका अमृता ! भाग 1
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उबलते पानी कि ताक़त के बारे मैं बताते हुए मनोज बिहारी जी ने खबर दी है अब आप कर सकते हैं उबलते हुए पानी से अपना मोबाइल चार्ज 
जानिए: इनकम टैक्स रिटर्न भरने का तरीका और इसकी एबीसी  . एक ऐसा लेख जिस से आप का ज्ञान अवश्य बढेगा यह वादा है मेरा.
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अन्ना हजारे ने अपने अनशन की घोषणा कर दी है। वे 16 अगस्त से अनशन पर बैठेंगे। असल में इस अनशन का कोई अर्थ नहीं है।
कारपोरेट मीडिया का अन्ना ऑब्शेसन
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सुशील बाकलीवाल साहब कविता सुना रहे हैं और ऐसा सत्य बता रहे हैं जिसे जानते सब हैं लेकिन मानते कम हैं. युवा सुदर स्त्री का घर से निरंतर बाहर रह कर पुरुष के अधीन काम करना और फिर भी चरित्र का भ्रष्ट ना होना असंभव तो नहीं लेकिन बड़ा कठिन है. image
भारतेन्दु युग-१ मैं मनोज कुमार जी पेश कर रहे हैं  भारतेन्दु जी की नाट्य दृष्टि  image
अब अंत  मैं कुछ राजनीती से डॉ कविता वाचकनवी बता रही हैं वेद प्रताप जी के लेख द्वारा
दारुल उलूम के वस्तान्वी जी को हटाने के वास्तविक कारणों के बारे मैं
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Friday, July 29, 2011

"सफ़र ज़ारी है..." (चर्चा-मंच 590)




My Photo
शालिनी : शब्दों का व्यापार, पेशा होने के नाते 
उसी में रमी रहती हूँ, मूल्यांकन आप विज्ञजनों के जिम्में.
                                               उनकी ये जुल्फ- घनेरे बादल हैं

World's Longest Hair (3)
हाथी की सूंड बने
कभी तूफ़ान – कहर ढाते हैं


उनकी मुस्कान – दांत है चपला
1097249980rpl7lk.jpg-teeth
बज्र सी चीर – कभी
दिल को —–चली जाती है

  

(भ्रमर)

                                                  

अभिव्यंजना

न, सम्पत्ति, सुख-सुविधा और कीर्ती  प्राप्त करनें के बाद भी जीवन में असंतोष की प्यास शेष रह जाती है। कारण कि जीवन में शान्ति नहीं सधती। और आत्म का हित शान्ति में स्थित है। आत्मिक दृष्टि से सदाचरण ही शान्ति का एक मात्र उपाय है।



मनी मैटर? नो टेंशन, स्कॉलरशिप है न ! -Sapna Kushwaha स्कूली शिक्षा के बाद छात्र उच्च शिक्षा के सपनों के ताने-बाने बुनने लगते हैं, लेकिन आर्थिक तंगी उनके सपनों को उड़ान नहीं भरने देती। पर अब उनकी मदद के लिए अ...

सफ़र ज़ारी आहे मेरी बिटिया 8 साल की है, सप्ताह में दो दिन चित्रकला सीखने जाती है, रंगों के अद्भुत संसार में बहुत रमता है उसका मन, पढ़ाई से भले ही कभी जी चुरा ले पर चित्रकला के प्रति उसकी उत्सुकता देखते ही बनती है। पहले तो लगता था कि मौलिक रंगों के परे नहीं होगी उसकी समझ पर जब चित्रों की गूढ़ता में उसे उतरते देखा तो अपना विचार बदलना पड़ा।



My Photo

My Unveil Emotions

मेरे अतीत ने, मुझको वापस, अपनी गोद में बुलाया है" |  अशोक 'अकेला'

(29)

भारतीय नारी

अहो पूज्य भारत महिलागण ;
अहो आर्य कुल प्यारी , 
अहो आर्य गृहलक्ष्मी सरस्वती 
आर्य लोक उजियारी ! 
[श्रीधर पाठक ]
[अगस्त माह २०११ में '' भारतीय नारी'' ब्लॉग पर चर्चा का विषय मुख्य रूप से रहेगा ''मेरी बहन '' .आप सभी सम्मानित योगदानकर्ताओं से आग्रह है की अगस्त माह में ''मेरी बहन ''विषय पर अपनी प्रस्तुति प्रदान करने की अनुकम्पा करे . आप सबके सहयोग की आकांक्षी - शिखा कौशिक ]

व्यवस्थापक

व्यवस्थापक
(30)
हम तुम और ईश्वर ‘सज्जन’
मेरा फोटो
बहुत रुलाते हैं आतंक का शिकार हुओं के
     परिवार वालों के आँसू
 (32)
तिमिर-रश्मि

 (33)

एक अनदेखा क्षण! जीवन चलता रहता है और किसी क्षण चुपके से... साँसे थम जाती हैं! ......
(35)
क्या स्त्रियों की आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ते तलाक का कारण है ?
कई बार सुनने को मिलता है की स्त्रियों की आर्थिक स्वतंत्रता घरों को तोड़ रही है । आखिर कैसे ? यदि पुरुषों की आर्थिक स्वतंत्रता घरों को नहीं तोड़ रही तो स्त्रियों की आर्थिक स्वतंत्रता परिवारों को कैसे तोड़ सकती है भला ?

मैंने तो आज तक यही देखा और सुना है की स्त्री परिवारों को सदैव जोडती है और रिश्तों को बनाए रखने में अहम् भूमिका निभाती है । फिर वह परिवारों के टूटने का सबब कैसे हो सकती है ?
स्त्रियाँ यदि नौकरी करती हैं तो पति आर्थिक जिम्मेदारियों को भी साझा करती हैं , जिससे पति पर अनावश्यक बोझ नहीं रहता ।

Thursday, July 28, 2011

चर्चा मंच - 589

आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है 
मित्रों! आवागमन प्रकृति का शाश्वत चक्र है, जो निरंतर चलता रहता है। नये आते रहते हैं और पुराने जाते रहते हैं! किन्तु हम नये हों या पुराने हमारा मकसद इस मंच को आगे बढ़ते देखना है ! 
यह चर्चा मंच की लोकप्रियता ही है कि इसका ग्राफ निरंतर बढ़ता जा रहा है! जिसका उदाहरण आप सबके सामने  है और इसके समर्थकों की संख्या का आँकड़ा 600 को पार कर गया है!  
आशा करता हूँ कि आपका प्यार चर्चा मंच को सदैव मिलता रहेगा!
अब चलते हैं चर्चा की ओर ...
सबसे पहले पद्य रचनाएं 
अब देखते हैं कुछ गद्य रचनाएं 
अंत में देखिए ये कार्टून 

                             आज की चर्चा में बस इतना ही .
                                        धन्यवाद!
                                                दिलबाग विर्क 

Wednesday, July 27, 2011

"आदमी को क्या दिया?" (चर्चा मंच-588)

मित्रों बुधवासरीय चर्चा में आपका स्वागत है। 
झंझावात के बाद फ़िर एक बार खुशनुमा माहौल है । 
ऐसे खुशनुमा माहौल मे सबसे पहले बधाई संजय भास्कर जी को जिनके 300 फोलोवर .....  हो चुके हैं । 
इसके बाद बधाई तनेजा जी सहित ब्लाग जगत के सभी भाईयों को इलेक्ट्रानिक मीडिया भी मजबूर होकर हमारी उपस्थिति hindi bloggers on ND T V  दर्शा रहा है । खैर  साहब आज बहुत ही निराशा हुई चर्चा के लिए लिंक तलाशे तो देखा आज के हालात में  भी लोग प्रेम में उलाहना में  नफ़रत में उलझे हुए थे । 
खैर साहब मेरी इच्छा थी कि ब्लाग जगत आज धार सरकार पर रखे  खैर साहब मन्नू ------- राजा बोला अब तेरा क्या होगा से बात शुरू हुआ तो अनिल पुसदकर जी कहने लगे  ये काली सूची क्या है? गलती की है तो सीधे काल-कोठरी 
तभी शेखावत जी ने कहा भाई सरकार की गलतियों को छोटा करो गुणवत्ता बरकरार रखते हुए चित्र का आकार छोटा करें]  तभी गिरिजेश कुमार कह उठे भाई  चलते -चलते...: उदारीकरण ने आम आदमी को क्या दिया?    खैर साहब जहाजों का आसमान में झप्पी पाना आसान है । कहानी कहते कहते कह दिया मैं भरता ही रहा हुंकारा, पर तुम मूक हो गईं सहसा  कहते ही महिला स्वर गूंजा आज स्त्री बस वासना की पूर्ति भर है क्या?  हमने कही भाई  मियाँ लाल बुझक्कड़.  बाबा के  ब्वाय फ़्रेंड को  नेपाल यात्रा  में भेज दो और भगवान के लिए सेना को बख्श दो...   खैर साहब जब देश ही सोया है तो नयी आस जगने दो घर-आँगन गूँज उठी किलकारी!  उस नये शहजादे को खिलने दो । खैर साहब  इससे अच्छा है प्रकृति की गोद में तीन दिन  बिताएँ और   मेरे मन की: बादल की कहानी ......  की कहानी सुनाइगा और  एक नयी पहल छ: दिन और एक सीएमएस वेब साईट   सिखाइगा । 

खैर साहब हिंद है  उड़ सपनों के पंख लगा और हम भी है देश का हित देखते हुए आज समय आन्दोलन का है सारे भावों को भूल कर बाकी आपकी इच्छा!

Tuesday, July 26, 2011

उसका जीवन भी क्या जीवन (मंगलवारीय चर्चामंच-587)

मैं चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ फिर हाज़िर हूँ चर्चा मंच पर मंगलवारीय चर्चा लेकर इस चर्चा में आप सब का स्वागत और अभिनन्दन है। आज की चर्चा की शुरुआत करते हैं- 
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 1
राजभाषा हिंदी ब्लॉग पर मनोज कुमार द्वारा प्रस्तुत दुष्यंत कुमार त्यागी जी की मशहूर ग़ज़ल 'हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए'
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2
“पथ निखर ही जाएगा”  यह है डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' का "उच्चारण"
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3
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 4
"राहें जो अंजानी सी थी" पर रेखा जी पेश कर रही हैं 'एक अद्भुत प्रतिभा' सभी इस प्रतिभा से सबक ले सकते हैं
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5
"विचार" ब्लॉग पर मनोज कुमार द्वारा प्रस्तुत है पक्षियों का प्रवास-13 'प्रवास-यात्रा के दौरान व्यवहार'
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6
"निरंतर" की कलम से ब्लॉग पर देखिए डॉ. राजेन्द्र तेला 'निरंतर' द्वारा प्रस्तुत 'ज़िन्दगी फुटबाल का खेल'
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7
"आरंभन" ब्लॉग पर रवीश कुमार पाण्डेय की 'दिनचर्या' देख लें आप कहां तक सहमत हैं ज़ुरूर बताइएगा...
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 8
भाई उदयवीर सिंह "उन्नयन" पर कितने  **संजीदा **  हैं आप आप देखें!
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 9
प्रस्तुत है "सद्भावना दर्पण" पर गिरीश पंकज जी की ग़ज़ल 'शायद वो मेरा ख़्वाब था, शायद ख़याल था'
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10
कवि योगेन्द्र मौदगिल द्वारा 'भाई किलर झपाटा को सादर-सप्रेम...'
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11
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12
"सागर" ब्लॉग पर सागर कह रहे हें 'मै इक निर्जल सागर'
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13
"साहित्य सुरभि" पर दिलबाग विर्क जी की 'अग़ज़ल-22'
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14
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15
भाई रविकर जी का कहना है- 'अब घर ३६- गढ़ हुआ-' "कुछ कहना है" ब्लॉग पर
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16
"उड़न तश्तरी..." पर समीरलाल समीर की 'चलती सांसों का सिलसिला...' देखें
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17
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18
"My Unveil Emotions" से डॉ. आशुतोष मिश्र ‘आशू’ शिकायत दर्ज़ करा रहे हैं कि- 'यूँ न सावन में रुलाया होता'
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 19
'ठाले बेठे' पर नवीन सी. चतुर्वेदी का कहना है कि 'गर है सच्चा प्यार-व्यक्त करिए जीते जी'
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20 
और चलते-चलते एक नज़र "ग़ाफ़िल की अमानत" पर भी डाल लीजिए- 'थे कभी पंखुड़ी गुलाब के से नाज़ुक लब' 
अब आप लोगों से अगले सोमवार यानी 01-08-2011 को मुख़ातिब होऊँगा, तब तक के लिए नमस्कार!

जानवर पैदा कर ; चर्चामंच 2815

गीत  "वो निष्ठुर उपवन देखे हैं"  (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')     उच्चारण किताबों की दुनिया -15...