चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Tuesday, July 12, 2011

'दुबारा हँसके' (चर्चा मंच-573)

चर्चा मंच के सभी पाठकों को चन्द्र भूषण मिश्रग़ाफ़िल का आदाब!
दोस्तों! आज मैं पहली दफ़ा आप लोगों से मुख़ातिब हूँ और प्रस्तुत कर रहा हूँ एक लघु चर्चा। अपना परिचय मैं ख़ुद क्या दूँ बस एक इल्तिज़ा है आपसे कि-
याँ पे तो बिन बुलाये चले आइये ज़नाब! ख़ुश होइए भी और ख़ुशी लुटाइए ज़नाब! अब ही गये मेरे अंजुमन में तो रुकिए! जाना है तो चुपके से चले जाइए ज़नाब! बन तो गया हूँ बुत मैं भले संगेमरमरी, अब छोड़िये भी और बनाइए ज़नाब! ‘ग़ाफ़िलहूँ मेरी बात हंसी में उड़ाइए!  ख़ुद पे यक़ीन हो तो मुस्कुराइए ज़नाब!
आज की चर्चा में मैंने कुछ ऐसे नये ब्लॉगरों को भी शामिल करने की कोशिश की है जो प्रोत्साहन के आभाव में नयी रचनाएं या तो लिख नहीं पा रहे हैं या कभी कभार लिख दे रहे हैं अन्यमनस्क से। यद्यापि उनकी रचनाएं बेहद उम्दा होती हैं ऐसी ही एक हस्ती हैं-
-------------------------------------------
जिन्होंने अपने ब्लॉग ''शालिनी की कलम से'' पर लगभग दो महीने पहले बताईं थीं कि भारत में बौद्ध धर्म के विकास और ह्रास का क्या कारण रहा है लेकिन उसके बाद कुछ नहीं बताईं शायद उनको प्रोत्साहित नहीं किया गया इसलिए। देखिए ‘‘शालिनी की कलम से’’ ब्लॉग पर उनकी शोधपरक रचना बौद्ध धर्म का विकास और ह्रास: भारत के विशेष सन्दर्भ में
----------------------------------------
बरसात का मौसम ऐसे में प्रत्येक प्राणी कुछ अपने रास-रंग में तथा कुछ जीवन-रक्षण के उद्योग में तत्पर हो जाते हैं। इस मौसम में सबसे ज्यादा ख़तरा सांपों से होता है ऐसी स्थिति से निपटने के लिए अरविन्द मिश्र जी ‘‘सर्प संसार’’ ब्लॉग पर लेकर आये हैं सर्प दंश का वियाग्रा फार्मूला!’
सूरते-हाल पर क़ाबिले-आज़माइश है।
----------------------------------------
राजीव तनेजा जी ''हंसते रहो'' ब्लॉग पर कह रहे हैं 'इन्तिहां हो गयी...हर बात की' हाल ही में हिन्दी ब्लॉगजगत में घटित एक सच्ची घटना एवं कल्पना का ये समिश्रण
----------------------------------------
वय में बड़े पर ब्लॉग-संसार में नवजात एक विशिष्ट कवि डॉ0 विजय कुमार शुक्ल 'विजय' के 'अन्तर्द्वन्द्व' को देखिए! उनके ब्लॉग ''तिमिर-रश्मि'' पर केवल देखिए ही नहीं इस कविता की समालोचना भी प्रस्तुत करिए! यह रचना समालोचना के लिए प्रस्तुत है 
---------------------------------------
इन्तज़ार कर रहा है "रजनीश का ब्लॉग" 'सुबह की चाय' पर आइए हम सब इसका आनन्द लें
 -----------------------------------------
 प्रस्तुत है मनोज जी के "विचार" ब्लॉग पर उनकी ज्ञानवर्द्धक प्रस्तुति पक्षियों का संसार

'प्रवास-यात्रा पर हवा का प्रभाव'

------------------------------------------

 अन्जू जी "अपनो का साथ" पर 'मैं' शीर्षक में अपने को व्याख्यायित कर रही हैं

 ---------------------------------------

गिरिजा कुलश्रेष्ठ जी "कथा-कहानी" ब्लॉग पर लेकर आई हैं अपनी सुन्दर कहानी 'मन्दबुद्धि' 

------------------------------------------

सुरेन्द्र सिंह 'झंझट' जी "झंझट के झटके" पर 'इंसान और राक्षस' की वृत्तियों का पर्दाफ़ाश कर रहे हैं

----------------------------------------

रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' जी अपने ब्लॉग "सहज साहित्य" पर सबको बुला रहे हैं 'गुलमोहर की छाँव में'

 -----------------------------------------

 मृदुला हर्षवर्धन जी "अभिव्यक्ति" पर जो 'आकांक्षा' कर रही हैं आप स्वयं पढ़ लें

 ---------------------------------------

  इसी क्रम में देखिए   "अभिव्यक्ति" पर ही  मृदुला हर्षवर्धन जी की

एक और रचना "माँ

---------------------------------------
---------------------------------
-------------------------------------
 और चलते-चलते मुझ 'ग़ाफ़िल' की भी एक रचना चाहे देख लें "ग़ाफ़िल की अमानत" पर 'दुबारा हँसके'  
 ---------------------------------------
आज की चर्चा यहीं समाप्त करता हूँ क्योंकि एक तो मैं एकदम नौधुआ! दूजे आज जाने क्यों ब्लॉगर भी परेशान कर रहा है। आप लोग इस चर्चा पर अपनी राय अवश्य दीजिएगा और अच्छाइयों का सेहरा मेरे सर तथा कमियों की तोहमत माननीय शास्त्री जी के सर जिन्होंने इस ग़ाफ़िल को इतनी बड़ी जिम्मेदारी के काबिल समझा। 
शास्त्री जी को बहुत-बहुत आभार तथा आप सबको नमन!
-
चन्द्र भूषण मिश्रग़ाफ़िल’  

23 comments:

  1. लिंक्स देख कर तो नहीं लगा कि आप नए चर्चा कार हैं |अच्छी चर्चा |पहली चर्चा के लिए बधाई |
    आशा

    ReplyDelete
  2. नया नया इक साथी आया,
    आकर बड़ा धमाल मचाया |
    सुन्दर लिंक सहेजे न्यारे -
    नव-रचना-कारों को लाया ||

    ReplyDelete
  3. ग़ाफ़िल भाई, आपने तो पहली ही इनिन्ग में सेंचूरी मार दिया! बधाई हो।

    यह एक ऐसी चर्चा थी जो शुरु से अंत तक पढ़ने के दौरान एक रचना पढ़ने का-सा सुख देती रही।

    ReplyDelete
  4. चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’जी,
    पहली बार आप द्वारा तैयार किया गया ये चर्चामंच खूबसूरत है.बधाई.

    ReplyDelete
  5. बड़ी ही रोचक चर्चा।

    ReplyDelete
  6. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  7. Dear Gafil ji

    Thank you for the double treat (including my 2 creations back to back)

    Regards

    Naaz

    ReplyDelete
  8. बहुत अच्छी चर्चा गाफिल साहब .......अच्छे लिंक्स दिए हैं
    मेरी रचना भी शामिल करने का बहुत-बहुत आभार

    ReplyDelete
  9. चर्चा के लिए आप सबका आभार !

    ReplyDelete
  10. बड़ी ही रोचक चर्चा।

    ReplyDelete
  11. चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’जी,
    चर्चा के लिए आपका आभार

    ReplyDelete
  12. आप सभी सुधीजनो का बहुत-बहुत शुक्रिया जो ग़ाफ़िल के भी कारनामे की भी सराहना की इससे हमारा अतिउत्साह वर्द्धन हुआ है पुनः आप लोगों का आभार

    ReplyDelete
  13. ghail sir.. aaj kisi atyavashk kam se mujhe aanan fanan mein jaan pada..aur main charch manch ki abhi tak shamil na ho paya tha..aane ke baad rachnayein padhi..sachmuch aapka ye pahla prayas nahi lag raha hai..divya ji ke blog per likhi meri rachna ko aapne shamil kiya ..mujhe is kabil samjha .. hardi badhayiyi..ek sabse badhiya baat jo lagi wo ye hai ki aapne naye chehron ko charcha manch se joda..utsahi kiya..lekhan ke praati unki kalam ko jagrat kiya..iske liye aap badhyiyi ke patra hain..dher sari shubhkamnaon ke sath

    ReplyDelete
  14. चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’जी,!
    आपने चर्चा का बहुत अच्छा समन्वय प्रस्तुत किया है♥3
    आपका स्वागत और अभिनन्दन करता हूँ!

    ReplyDelete
  15. ग़ाफ़िल साहब आपनें बहुत संतुलित और सुन्दर लिंक दिया है और उसमें मरी भी रचना को शामिल किया है बहुत-बहुत धन्यवाद और बधाई

    ReplyDelete
  16. ग़ाफ़िल साहब आपनें बहुत संतुलित और सुन्दर लिंक दिया है बहुत-बहुत धन्यवाद और बधाई

    ReplyDelete
  17. बहुत अच्छी चर्चा बहुत-बहुत बधाई

    ReplyDelete
  18. मेरी कहानी को यहाँ उजाले में लाने का बहुत-बहुत धन्यवाद

    ReplyDelete
  19. बहुत बढ़िया चर्चा । मेरी कविता को भी स्थान मिला यहाँ , आभारी हूँ ।

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin