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Tuesday, July 26, 2011

उसका जीवन भी क्या जीवन (मंगलवारीय चर्चामंच-587)

मैं चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ फिर हाज़िर हूँ चर्चा मंच पर मंगलवारीय चर्चा लेकर इस चर्चा में आप सब का स्वागत और अभिनन्दन है। आज की चर्चा की शुरुआत करते हैं- 
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 1
राजभाषा हिंदी ब्लॉग पर मनोज कुमार द्वारा प्रस्तुत दुष्यंत कुमार त्यागी जी की मशहूर ग़ज़ल 'हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए'
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2
“पथ निखर ही जाएगा”  यह है डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' का "उच्चारण"
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3
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 4
"राहें जो अंजानी सी थी" पर रेखा जी पेश कर रही हैं 'एक अद्भुत प्रतिभा' सभी इस प्रतिभा से सबक ले सकते हैं
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5
"विचार" ब्लॉग पर मनोज कुमार द्वारा प्रस्तुत है पक्षियों का प्रवास-13 'प्रवास-यात्रा के दौरान व्यवहार'
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6
"निरंतर" की कलम से ब्लॉग पर देखिए डॉ. राजेन्द्र तेला 'निरंतर' द्वारा प्रस्तुत 'ज़िन्दगी फुटबाल का खेल'
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7
"आरंभन" ब्लॉग पर रवीश कुमार पाण्डेय की 'दिनचर्या' देख लें आप कहां तक सहमत हैं ज़ुरूर बताइएगा...
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 8
भाई उदयवीर सिंह "उन्नयन" पर कितने  **संजीदा **  हैं आप आप देखें!
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 9
प्रस्तुत है "सद्भावना दर्पण" पर गिरीश पंकज जी की ग़ज़ल 'शायद वो मेरा ख़्वाब था, शायद ख़याल था'
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10
कवि योगेन्द्र मौदगिल द्वारा 'भाई किलर झपाटा को सादर-सप्रेम...'
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11
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12
"सागर" ब्लॉग पर सागर कह रहे हें 'मै इक निर्जल सागर'
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13
"साहित्य सुरभि" पर दिलबाग विर्क जी की 'अग़ज़ल-22'
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भाई रविकर जी का कहना है- 'अब घर ३६- गढ़ हुआ-' "कुछ कहना है" ब्लॉग पर
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"उड़न तश्तरी..." पर समीरलाल समीर की 'चलती सांसों का सिलसिला...' देखें
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"My Unveil Emotions" से डॉ. आशुतोष मिश्र ‘आशू’ शिकायत दर्ज़ करा रहे हैं कि- 'यूँ न सावन में रुलाया होता'
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'ठाले बेठे' पर नवीन सी. चतुर्वेदी का कहना है कि 'गर है सच्चा प्यार-व्यक्त करिए जीते जी'
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20 
और चलते-चलते एक नज़र "ग़ाफ़िल की अमानत" पर भी डाल लीजिए- 'थे कभी पंखुड़ी गुलाब के से नाज़ुक लब' 
अब आप लोगों से अगले सोमवार यानी 01-08-2011 को मुख़ातिब होऊँगा, तब तक के लिए नमस्कार!

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