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Thursday, July 21, 2011

"दिल तो मिलने को आतुर है" (चर्चा मंच-582)

आज की चर्चा में आप सबका हार्दिक स्वागत है 
                                      चलते हैं सीधे चर्चा की और 
सबसे पहले गद्य रचनाएं 
  • रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी महान कवि तो हैं ही , वे 

महान गणितज्ञ भी थे,देखिए ब्लॉग सच पर .

अब बात करते हैं पद्य रचनाओं की 

  • बच्चा समझ के न तुम आँख दिखाना रे ------- ये गीत तो याद ही होगा ,अब विशाल चर्चित जी बता रहे हैं कैसे हैं आजकल के बच्चे .
  • आज के बच्चे ही नवयुग लाएंगे --- नवगीत विधा में कह रहे हैं कवि योगेन्द्र वर्मा 
  • तुम अगर गाओ गीत मेरे ---- कह रही हैं डॉ.वर्षा सिंह 
  • एक कसक दबी हुई है सत्यम शिवम के दिल में. 
  • सावन का महीना है भीगिए तांका रुपी बूंदों से .
  • बादल का संदेश है सदा ब्लॉग पर --पढिएगा  
  • अन्याय की बारिश में संघर्ष के बीज बोना चाह रही हैं संध्या शर्मा जी .
  • बेवफा से उम्मीद ही क्या की जा सकती है --- कुछ ऐसा ही कह रही है डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" जी की गजल.
  • एक नहीं , दो नहीं , पढ़िए छः गज़लें सुनहरी कलम से .
  • मनोरमा पर दिल तो मिलने को आतुर है --- पढ़िए सुमन जी को .
  • मोहब्बत जख्म देती है --- कुछ ऐसा ही कह रहे हैं अनिश जी.
  • जिंदगियां नियम नहीं मानती ----ऐसा ही कुछ कह जा रहा है नीरज हृदय ब्लॉग पर .
  • बुढापा क्या है ?----- बता रही हैं रंजना जी .
  • अब पढिए एक बाल कविता पापा हमको डॉगी ला दो.
                                   आज की चर्चा में बस इतना ही .
                                              धन्यवाद 
                दिलबाग विर्क 

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