चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Tuesday, September 13, 2011

"थोड़ी मेहरबानी रख लूँ " (चर्चा मंच-636)

मित्रों! आज की चर्चा में
श्रीमती विद्या जी लिंक लगा ही रही थीं
लेकिन 
उनका नेट धोखा दे गया
और मुझे इसमें सहयोग करना पड़ा।

सबसे पहले देखिए विद्या जी के लगाए हुए कुछ लिंक!
लौट चलते हैं अपने गाँव... *******
मन उचट गया है शहर के सूनेपन से,
अब डर लगने लगा है भीड़ की बस्ती में अपने ठहरेपन से I
चलो लौट चलते हैं अपने गाँव, अपने घर ...


संस्कृत भाषा में ब्रह्म शब्द का अर्थ होता है

परमात्मा या सृष्टिकर्ता और चर्य का अर्थ है उसकी खोज।

यानी आत्मा के शोध का अर्थ है ब्रह्मचर्य। ...
रोटी का तर्क और गर्भपात
समय से जुड़े संदर्भ कभी खारिज नहीं होते। आप भले इन्हें भूलना

रोटी समझ चाँद को बच्चा मन ही मन ललचाए
आशा भरकर वो यह देखे माँ कब रोटी लाए
दशा देखकर उस बच्चे की कैसे मन मुस्काए | ....

"पाँच मुक्तक"

कैमरे की आँख और बोलतीं तस्वीरें - ---
*मुरादाबाद (रविवार):* हमारी आंख जो नहीं देख पाती,
उसे कैद कर लेती हैं कैमरे की आँखें अपने ढंग से और ये कैद की गयीं..

"निरंतर" की कलम से.....
क्यों हार से घबराता है ?
व्यथित हो कर रोता है
ये भी ता ध्यान कर सूर्य भी चमक अपनी खोता
शाम तक मंद होता फिर अस्त होता ...
"हासिल.. मोहब्बत-ए-दयार.. एहसां ता-उम्र.. ए हम-ज़लीस..!!!" ...

palash "पलाश"
कभी- कभी तन्हाई भी भाती है ..
कभी कभी अकेलेपन का ,साथ भी मन को भाता है ।
तन्हाई में ही तो मन ,दिल की कही सुन पाता है ॥
एकान्त में इक अलग से, सुकून का अनुभव होता है । ....

एयर इंडिया घोटाले पर फ़ुल्फ़ुल पटेल जी से चर्चा

नुक्क्ड़ पर हमने भाई सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी को घेरा-
" शर्मा जी ये एयर इंडिया घोटाला का क्या मामला है"

अब देखिए मेरी पसंद के कुछ लिंक

न्यू मीडिया , विशेष तौर पर हिंदी न्यू मीडिया जिसका सबसे लघु इकाई
एक ब्लॉग को कहा जा सकते, अब तक का सर्वाधिक उपेक्षित
और गैर-प्रभावी बता कर उपेक्षा की ...

*कितने हैं अरमान हृदय में,*
*मुझको लेकिन डर लगता है!*
*क्या तुम भी उन्मुक्त नहीं हो*
*क्या तुमको भी डर लगता है!!..

मिले राम-माया नहीं


(१)

आँखे - माखू   दूसता,  संघ - हाथ  बकवाद || 
अर्जुन का यह औपमिक, है औरस  औलाद |
है  औरस  औलाद,  कभी  बाबा  के  पीछे ,
अन्ना  की  हरबार, करे  यह  निंदा  छूछे |
सौ मिलियन का मद्य, नशे में अब भी राखे,
बड़का लीकर किंग, लाल रखता है आँखे ||

राघोगढ़ के राजा की निश्चय ही जनहित में साकिएत्रिक स्क्रीनिंग होनी चाहिए ताकि ज़रुरत के मुताबिक़ इनका समुचित इलाज़ किया जा सके .और यदि यह सब नाटक कर रहें हैं ...

कल सारी रात दर्द से निर्विकार ...
(जाने किसका दर्द था) ! जागती रही
दर्द था या बेचैनी -
पता नहीं ... ... जो भी हो -
उस दर्द को चकमा देकर मैंने कुछ खरीदार...

तुमने यह कैसा नेह किया ,कितना सताया तुमने |
ना ही कभी पलट कर देखा ,राह भी देखी उसने |
प्रीत की पेंग बढ़ाई क्यूं ,तुम तो कान्हां निकले |
याद न आई राधा उनको ,...

*MMS*** घबरायें नहीं मैं आपको* **“रागिनी”* MMS के विषय में कुछ कहने या बताने नहीं जा रही हूँ जी
यह विषय वैसे तो अब बहुत पुराना हो चुका है और आज इस विषय से ...

सफर के इस संध्या में चलते-चलते,
लगता है .थक गई हूँ
कदम आगे बढ़ने को तैयार नहीं
साँस थमने लगती है सोचती हूँ ..
बस यहीं रुक जाऊँ ,सुस्ताऊ...

जितनी जीने के लिये ज़रूरी हो थोड़ी बदगुमानी रख लूँ
बड़ी धूप है ऐ दोस्त थोड़ी मेहरबानी रख लूँ
भरम सारे मुकर गये देखो चलने को जिन्दगानी रख लूँ ...

उम्र भर साथ निभाने का था वादा कोई ,
उसी करार में हम, जीते रहे वर्षों तक /
तल्ख़ झोंको से लरजती हुयी चादर अपनी ,
सहेजते भी रहे , सीते रहे वर्षों तक ...

होम रेमेडी (पेट में कीड़े )

बस स्टेंड के पास एक चाय की छोटी सी दुकान
जिसमें केवल चाय और बिस्कुट के सिवा कुछ भी नहीं
इसके अतिरिक्त दो बेंच और अलग अलग भाषाओँ के तीन अख़बार...

आस्‍था तुम्‍हारी किसके साथ है
तुम किसके आगे नतमस्‍तक होना चाहते हो
यह तुम्‍हें तय करना है
दिल से पूछना फिर तय करना ......

बम का धमाका करना, आतंक फैलाना कितना आसान लगता है,
हमारे नौजवानों को उपर बैठे उनके आका,
पथ-भ्रष्ट करते इंसानों को कितनी मांगें होती हैं सूनी,
कितनी कोख उजडती...

एक दिन एक ब्लॉगर का सवाल था ,*
" भारतीय संस्कृति को मानने वाले लोंग फेसबुक पर क्या कर रहे हैं "*
...सोचा , मगर ऐतराज का कोई कारण
मुझे समझ नहीं आया. फेसबुक ...

- शब्द व्याकरण रस की वर्षा ,
पुस्तक के भीतर बरसे ,
सावन सिक्त प्रीतम रस भीगे बंधन मुक्त बादल जैसे .
लिपट रही है काव्य - मंजरी ...

*श्यामनारायण मिश्र*
ढोल बजाते बादल देखे, घुंघरू बांधे बिजली।
चौमासे के संग बावरी धरती गाती कजली। ...
अन्त में देखिए!

"आओ ज्ञान बढ़ाएँ-पहेली:99" (श्रीमती अमर भारती)


भाग लेना न भूलिए!

अमर भारती साप्ताहिक पहेली-100

18 सितम्बर को प्रकाशित होगी!
जिसका उत्तर प्रकाशित करने में
हमारी टीम को 15 दिनों का समय लग जाएगा!
जिसमें आद्योपान्त लेखा-जोखा निकाल कर ही
परिणाम दिये जाएँगे।


पहेली नं. 100 का सही उत्तर देने वालों को
ब्लॉगश्री की मानद उपाधि से
अलंकृत किया जाएगा!


आपका स्वागत है! इस पौधे का नाम बताइए!

22 comments:

  1. विद्या जी और शास्त्री जी की मिली जुली चर्चा के लिंक्स पढ़ने में तो काफी समय लगेगा |अभी तक जितनी पोस्ट देखीं हर बार की तरह चुनी गयी अच्छी लगीं |बाकी दोपहर के लिए बचाई हैं |मेरी पोस्ट शामिल करने के लिए आभार |
    आशा

    ReplyDelete
  2. बहुत ही अच्छी सही चर्चा ...

    ReplyDelete
  3. अच्छी चर्चा ...
    आभार !

    ReplyDelete
  4. बढ़िया रचना लिंक से, धन्य हुआ आभार |
    मंच बधाई-शुक्रिया, बढे पोस्ट भण्डार ||

    ReplyDelete
  5. बहुत उपयोगी लिंक मिले। पूरी प्रस्तुति में मेहनत साफ झलकती है। ऐसे प्रयास जारी रहें।

    ReplyDelete
  6. बहुत सुन्दर और सारगर्भित लिंक से सजाई है..आप लोगो ने ये चर्चामंच.....विद्या जी और रूप्चन्द्र गी आप दोनो को बहुत -बहुत धन्यवाद मुझे शामिल करने के लिए.....आभार..

    ReplyDelete
  7. बहुत ही अच्‍छे लिंक्‍स दिये हैं आपने ...मेरी रचना को स्‍थान देने के लिये आभार ।

    ReplyDelete
  8. Vidya ji aur Roopchandra ji, aap dono ka dil se shukriya, mujhe yahan sthaan dene ke liye. bahut achchhe achchhe links diye hain aapne. bahut aabhar.

    ReplyDelete
  9. डॉ श्रीमती विद्या जी ,डॉ शाष्त्री मयंक जी ,उदासी का सृजन करती ,एकांत पहनती अनेक रचनाएं इस चर्चा अंक के पाश में थीं .मेहनत की गई है चयन में बधाई .http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/2011/09/blog-post_13.हटमल
    अफवाह फैलाना नहीं है वकील का काम .

    ReplyDelete
  10. इतने सुन्दर लिंक देने के लिए बहुत बहुत आभार..

    ReplyDelete
  11. बहुत ही सार्थक लिंक्स थे ........आभार

    ReplyDelete
  12. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  13. hamesha ki tarah dher saara gyaan batore..par meri ek soch hai:
    Is blog ke posts ki formatting kuchh aur behtar ho sakti hai...jisme alag alag post zyada saaf tareeke se pata chale..abhi kuch adhik rangeen ho jaane e karan bahut saaf se alag alag posts ka pata nahi lagta..aisa mera sochna hai

    Apne blog par fir se sajag hone ke prayaas me hoon:
    http://teri-galatfahmi.blogspot.com/

    ReplyDelete
  14. हिंदी की जय बोल |

    मन की गांठे खोल ||


    विश्व-हाट में शीघ्र-

    बाजे बम-बम ढोल |


    सरस-सरलतम-मधुरिम

    जैसे चाहे तोल |


    जो भी सीखे हिंदी-

    घूमे वो भू-गोल |


    उन्नति गर चाहे बन्दा-

    ले जाये बिन मोल ||


    हिंदी की जय बोल |

    हिंदी की जय बोल |

    ReplyDelete
  15. आपने मेरी पोस्ट को यहाँ स्थान दिया...उसके लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया सर....

    ReplyDelete
  16. आप दोनों चर्चाकारों ने चर्चामंच को चार चांद लगा दिया है।

    ReplyDelete
  17. श्रीमती विद्या और डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"ji
    sabhi sathiyon ko jodane,sabhi ki baat ek-dusare tak pahunchane ka mahati kaam swagat yogay hai,mujhe khushi hain ki mujhe es manch ke yogay samajha,v aap sabhi ka sanidhay mila.thanx 2all of u regard.

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin