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Saturday, September 17, 2011

भुलक्कड़ तो मैं भी हूँ क्यों कि एक इंसान हूँ

fhhh-55_thumb1जी जनाब मुंबई की व्यस्त दिनचर्या किसी को भी भुलक्कड़ बना देती है. आखिर एक इंसान एक साथ कितने काम कर सकता है? इसी लिए तो कहा जाता है घर संभाल लो या दफ्तर. किसी ने कहा महिला घर संभाले तो क्या मैंने कहा फिर ले आएं घर मैं रहने वाले बच्चों के लिए दूसरी माँ.

अपने जायज़ रिश्तों के प्रति वफादार रहिये

manoj4_thumb1आज वो हर बात बिकती है जिसके खरीददार अधिक हों. मीडिया वाले भी वही बेच रहे है जो अधिक बिक रहा है. आवश्यकता है आम इंसान को जागरूक करने की. जिस दिन ऐसी ख़बरों को बकवास कह के आम इंसान नकार देगा मीडिया स्वम इनका प्रचार बंद कर देगी. डॉ मनोज मिश्रा जी ने एक अच्छी शुरूआत की है आप भी पढ़ें.
imageसड़क से गुजरते हुए अप्रयास ध्यान उस घर की ओर चला जाता। घर की बैठक बिलकुल सामने है। उस बैठक की एक दीवार पर बड़ी सी पेंटिंग टंगी हुई है। यह पेंटिंग बार-बार मेरा ध्यान खीचती।
imageमेरी पसन्द ♥मित्रों! आज 27 जून, 2009 को रचितअपनी पसन्द कीएक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ!जलने को परवाना आतुर, आशा के दीप जलाओ तोकब से बैठा प्यासा चातुर, गगरी से जल छलकाओ तो
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आज
प्रकृति से कर घात ,पहाड़ों के हृदय को
दे भारी आघात ,बांधकर नदियों को
ऊंची घाटियों में 
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चलिए तो आज आपकी नाराज़गी दूर करने के लिए मैं कुछ बहुत ही रोचक प्रसंग लेकर आपके लिए ले कर आई हूँ और उम्मीद करती हूँ कि आप इसे पढ़ कर निराश नहीं होंगे.
आज मैं आधुनिक हिंदी साहित्य की शुभश्री महादेवी वर्मा जी के जीवन के बारे में बताते हुए उनके जीवन के  कुछ अनछुए पहलुओं को भी  आपके साथ साझा करुँगी
imageतुम्हारी याद में माँ यह सावन भी बीत गया माँ , ना आम, ना अमलतास, ना गुलमोहर, ना नीम, ना बरगद, ना पीपल किसी पेड़ की डालियों पे झूले नहीं पड़े !
मैंने माँ की दुआओं का असर है देख लिया मैंने माँ की दुआओं का असर है देख लिया ; मौत आकर के मेरे पास आज लौट गयी .
image_thumb1वकीलों के कान की ताक़त देखिये सुरसुराहट अगर शुरू हो जाए तो बस समझ लीजे खबर भी आनी है. दिनिश राए जी देखिये क्या कह रहे हैं? कुछ दिनों से कान में सुरसुराहट हो रही थी, लग रहा था पेट्रोल के दाम अब बढ़े, अब बढ़े। दिन भर अदालत में व्यस्त रहे वकील बाबू शाम को थक कर घर पहुँचे तो खबर इंतजार ही कर रही थी।
imageनजर टेढ़ी जवानो की भिची जो मुट्ठिया हो फिर
भगत आजाद अशफाको  की रूहे झूम जाती है,
जय हिंद के उदघोष  से  सारा गगन काँपे 
तमिलनाडु से लहरे जा हिमालय चूम आती है.
भगत सिह की अध्यक्षता मे मेरा अभिभाषण
backgroundइंसानों मैं हमेशा यही देखा गया है कि जो पति खाता है वही पत्नी और बच्चे भी खाते हैं. जूठन खाते तो जानवरों को देखा जा सकता है.यहाँ लेखिका ने  ने जानवरों कि परम्परा को इंसानों से जोड़ के एक बेहतरीन लेख लिखा है
हिंदी बोला तो नौकरी नहीं मिलेगी.
आज हिंदी दिवस है और हिंदी ब्लॉगजगत के लिए तो यकीनन विशेष दिन है. सभी तरफ से हिंदी दिवस कि शुभकामनाओं के लेख़ पढने को मिल रहे हैं. लोग इसकी उन्नति कि दुआएँ कर रहे हैं. लेकिन क्या हम स्वम ही अपनी राष्ट्र भाषा के साथ सौतेलेपन का व्यवहार नहीं कर रहे?
हिंदी बोला तो नौकरी नहीं मिलेगी.
1मन कै अँधेरिया अँजोरिया से पूछै, टुटही झोपड़िया महलिया से पूछै, बदरी मा बिजुरी चमकिहैं कि नाँहीं, का मोरे दिनवाँ बहुरिहैं कि नाँहीं। माटी हमारि है हमरै पसीना, कोइला निकारी चाहे काढ़ी नगीना, धरती कै धूरि अकास से पूछै, Read entire article »
खैर ब्राजील में क्या हुआ और क्या नहीं हुआ यह बहुत ज़रुरी बात नहीं है । ज़रुरी है यह समझना कि दरअसल यह सौंदर्य प्रतियोगिता होती क्या है । कई लोगों का कहना है कि ऐसी प्रतियोगिताओं में रूप-रंग, बुद्धि-विवेचना, ज्ञान, जोश, हाज़िर-जवाबी, सभी कुछ जांचा परखा जाता है
imageअब तो दीपावली में लगभग एक माह रह गया है सो आइये दीपावली के तरही मुशायरे की तैयारियां प्रारंभ कर देते हैं । आज मिसरा-ए-तरह तय किया जाए ।
दीपावली, संधिकाल का दूसरा त्‍यौहार । संधिकाल का मतलब होता है जब दो ऋतुएं आपस में मिलती हैं । ये संधिकाल हमारे जीवन में भी आते हैं । जब दो अवस्‍थाएं आपस में मिलती हैं ।
नया सलीका यह विकास का बेमानी हैं जब रिश्ते
फटे आसमां को शब्दों से सुमन सिये जाते हैं
imageछोटी सी है जिंदगी --- प्यार करें या तकरार ?
आजकल टी वी पर हमारे मन पसंद कार्यक्रम --कौन बनेगा करोडपति -- की पांचवीं कड़ी चल रही है । पसंद इसलिए कि इसमें जनता के साथ साथ हमें भी अपनी औकात टेस्ट करने का अवसर मिल जाता है । कभी कभी तो लगता है कि यदि हम हौट सीट पर पहुँच गए होते तो पता नहीं कुछ जीत भी पाते या नहीं ।
छोटी सी है जिंदगी --- प्यार करें या तकरार ?
image अपनी मात्रभाषा सभी को प्यारी होती है लेकिन ज्ञान प्राप्त करने के लिए दूसरी भाषाओँ को सीखना भी आवश्यक हुआ करता है और सीखना भी चाहिए. हाँ अब यदि कोई विज्ञान अंग्रेजी मैं पढ़े और हिंदी बोलने वालों को अपने से कम समझे तो यह अपनी मात्र भाषा का अपमान होगा.

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और यह हकीकत है कि हमने इन्सान को अपने मां बाप के हक पहचानने की खुद ताकीद की है। उसकी मां ने निढ़ाल (दु:ख) पर निढ़ाल होकर उसे पेट में रखा। दो साल उसके दूध छूटने में लगे (इसीलिए

मां बाप के साथ सुलूक

fshakirआप भले ही कितनी भी सावधानी रख लें, लेकिन जाने - अनजाने में बच्चे चोट की चपेट में आ ही जाते हैं। अगर आपका बच्चा कुछ गलत चीज खा ले , आइए जानते हैं कि आप पहले सही क्या सावधानियां बरत सकते हैं :
अरे नहीं सर, हम लोग को तो अईसा परेसान कर देता है कि पूछीये मत. बोल देगा कि यहाँ काहे खरा किया है. परमिट, लायसेंस, ई लाओ, उ लाओ... हेन-तेन… पचास ठो नाटक है.’
‘गांधी मैदान?… बैठिये… अरे आइये ना महाराज. केतना तो जगह है. आगे-पीछे हो जाइए थोडा-थोडा.’ एक सवारी बैठाने के बात वार्ता आगे बढ़ी:
imageमैं और मेरी कवितायेँ...: बहने लगे आंसू... संध्या शर्मा 
बहने लगे आंसू... संध्या शर्मा. फिर चोट लगी भर आई आँखे पर आंसू नहीं बहे नहीं बहने दिया उन्हें अपने सीने से लगा लिया छुपा लिया... फिर टूटे ख्वाब रोया दिल भर आई आँखे
imageपिछले कुछ दीनों में देखने में आया था एक लेख जो लिखा गया था, नारी के विवाह को लेकर की क्या किसी भी स्त्री का विवाह करना ज़रूर है। क्या बिना विवाह किये जीवन जीने लायक नहीं रहता.
क्या औरत कि जिंदगी में विवाह का होना ज़रूरी है ?
imageदिमाग तो सात तालों में बंद है.....!
स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय के लम्बे सफर के बाद
ज्ञान हुआ
मेरे पास भी दिमाग है
लेकिन जब भी काम लेना चाहता
धोखा देता
काम नहीं आता
कहीं आप भी खुद को "गांधी" तो नहीं समझ रहे ?
imageजब रोम जलरहा था तो "नीरो" शहनाई बजा रहा था। आज जब हमारे देश में हर तरफ
हाहाकार मचा हुआ है , कहीं भ्रष्टाचार पाँव पसार रहा है तो कहीं मासूम नागरिक आतंकवादी हमले का शिकार हो रहे
imageमक्खनी को मक्खन से बड़ी शिकायत थी कि वो बेटे गुल्ली की पढ़ाई पर बिल्कुल ध्यान नहीं देता...
कई दिन ताने सुनने के बाद मक्खन परेशान हो गया.
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मन को मनाने के अंदाज निराले है
हुए नही वो हम ही उसके हवाले हैं
उसने कसम दी तो न पी अभी तकहाथ में पकड़े लो खाली प्याले है

अपने जायज़ रिश्तों के प्रति वफादार रहिये22

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