मे तो संजय महापात्रा जी ने कहर ही ढा दिया है। मुझे यह कहने में बड़ा हर्ष है कि हमारे सामने हरिशंकर परसाई जी का एक ऐसा व्यंग्य है जो आज तीस सालो बाद भी अक्षरशः फ़िट बैठता है । दस दिन का अनशन को पढ़िये जरूर और कलम की ताकत को पहचानिये। इसके बाद कुछ नयी रचनाएं, कुंवर प्रीतम के मुक्तक का तो मैं कायल हूं ही साथ ही डां शरद सिंग की रचना नैमिषारण्य के प्रमुख दर्शनीय स्थल बहुत ही अच्छी है। सतीश जायसवाल जी भी एक अनुभवी और सशक्त लेखक हैं उनकी रचना बस्तर रेल खंड की मांग अब सीधे तौर पर उठी वाकई पठनीय है। आखिर में चलते चलते में हमारी साथी लेखक से परिचित कराती बहन वंदना जी आइये मिलिये ग़ुडिया इंग्लिशतान से , अब परिचय किससे है देख कर ही मालूम पड़ेगा।
| सूचना:- इस सामूहिक ब्लॉग पर पोस्ट लगाने से पूर्व यह देख लें कि एडिट बॉक्स में आपके समय पर किसी अन्य चर्चाकार की महत्वपूर्ण चर्चा तो शैड्यूल नही है! आपके साथी चर्चाकार की पोस्टकम से कम 12 घण्टे तो चर्चा मंच के शीर्ष पटल पर चमकनी ही चाहिए! |
| सोमवार- श्रीमती सरिता भाटिया, मंगलवार-श्रीमती राजेश कुमारी, बुधवार- शशि पुरवार जी, बृहस्पतिवार-श्री दिलबाग विर्क, शुक्रवार-श्री दिनेश गुप्ता "रविकर", शनिवार-श्रीमती वन्दना गुप्ता, रविवार- श्री अरुण शर्मा अनन्त, श्रीमती सरिता भाटिया चर्चा मंच की सोमवार की चर्चाकार होंगी! शशि पुरवार जी चर्चा मंच की बुधवार की चर्चाकार होंगी! चर्चा मंच परिवार आपका स्वागत और अभिनन्दन करता है। मैं (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') स्थानापन्न चर्चाकार के रूप में चर्चा मंच की सेवा करता ही रहूँगा। |
ओपन बुक्स ऑन-लाइन को सुझाव
ओ.बी.ओ. के संचालक मण्डल से निवेदन है कि उस मर्यादा को हटा दें, जिसमें आपने प्रतिबन्ध लगाया हुआ है कि ओबीओ में अप्रकाशित रचना ही प्रकाशित होगी! मेरा तर्क यह है कि 1- जो व्यक्ति अपना ब्लॉग चलाता है वह तो सर्वप्रथम अपनी रचना को अपने ब्लॉग पर ही लगाना चाहेगा। 2- यदि वह ओ.बी.ओ.पर अपनी रचना सबसे पहले लगा दे और उसके बाद अपने ब्लॉग पर प्रकाशित कर दे तो इससे ओ.बी.ओ.पर क्या प्रतिकूल प्रभाव पड़ने वाला है । मेरी समझ में अब तक यह विज्ञान और तर्क नही समा सका है। अगर मेरी बात से संचालक मण्डल को ठेस लगी हो तो क्षमा चाहता हूँ। मगर इतना निवेदन जरूर है कि मेरे सुझावों पर विचार जरूर किया जाये...धन्यवाद! |
| चर्चाकार मित्रों! मेरा एक सुझाव है कि “चर्चा मंच” के मार्डरेटर आदरणीय डॉ,रूपचन्द्र शास्त्री‘मयंक’ जी अब एक भी दिन चर्चा नहीं कर रहे हैं। वे केवल अब स्थानापन्न चर्चा ही करेंगे, तो क्यों न उनको यह सहमति दी जाए कि वे किसी भी चर्चाकार की चर्चा के अन्त में अपनी पसंद के दो लिंक दिया करें। अतः हम लोग अन्त में“मयंक का कोना”शीर्षक भर कर छोड़ दिया करें। मेरा सुझाव अच्छा लगे तो आप भी करके देखिए न! "दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर" गुरूजी से आग्रह- |
Wednesday, August 31, 2011
"जीत के मायने" (चर्चा मंच-623)
मे तो संजय महापात्रा जी ने कहर ही ढा दिया है। मुझे यह कहने में बड़ा हर्ष है कि हमारे सामने हरिशंकर परसाई जी का एक ऐसा व्यंग्य है जो आज तीस सालो बाद भी अक्षरशः फ़िट बैठता है । दस दिन का अनशन को पढ़िये जरूर और कलम की ताकत को पहचानिये। इसके बाद कुछ नयी रचनाएं, कुंवर प्रीतम के मुक्तक का तो मैं कायल हूं ही साथ ही डां शरद सिंग की रचना नैमिषारण्य के प्रमुख दर्शनीय स्थल बहुत ही अच्छी है। सतीश जायसवाल जी भी एक अनुभवी और सशक्त लेखक हैं उनकी रचना बस्तर रेल खंड की मांग अब सीधे तौर पर उठी वाकई पठनीय है। आखिर में चलते चलते में हमारी साथी लेखक से परिचित कराती बहन वंदना जी आइये मिलिये ग़ुडिया इंग्लिशतान से , अब परिचय किससे है देख कर ही मालूम पड़ेगा।
Tuesday, August 30, 2011
"कैसा देश है भला ये" (चर्चा मंच-622)
| मित्रों! आज मंगलवार है! सबसे पहले देखिए विद्या जी के द्वारा लिए गये कुछ लिंक! |
| "निरंतर" की कलम से..... क्यों कहते हो ? तुम्हारे साथ चलूँ जैसा कहो वैसा करूँ जैसे तुम रोते रहे हो वैसे मैं भी रोऊँ मुझे अकेला छोड़ दो अपने आप चलने दो जीवन की चट्टानों से टकराने... |
| एक बिल्कुल ताज़ा ख़बर हिंदी ब्लॉगिंग की दुनिया से, ताकि आप जान लें कि कीर्तिमान यहां भी स्थापित किये जा रहे हैं तमाम तरह की दिक्क़तों के दरम्यान। |
| नत्था नहीं, हम मर रहे हैं
by जितेंद्र भट्ट
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| Author: sanjiv verma 'salil' |
आकलन:अन्ना आन्दोलन |
| नीम-निम्बौरी
अग्नि वेश धरे शिखंडी-वेश - स्वामी फिर पकड़ा गया, धरे शिखंडी-वेश, सिब्बल के षड्यंत्र से, धोखा खाता देश
| माँ ...अब तुम बहुत याद आती हो...!!
विलक्षण उज्ज्वलता.. बांटता-बांटता..
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| नीरज -0-0-0-
आओ मिलाऊँ सबको मै गुडिया इंग्लिशतान से
रहन सहन आचार वि्चार मे
जिसके बसता हिन्दुस्तान है
इंग्लिशतान से आयी वो मगर हिंदी ...
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| Near nature - प्रकृति के पास
from LITTLE FINGERS by चिन्मयी
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ये कैसा देश है भला ये कैसा आशियाँ?
from अनवरत by drdwivedi) |
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*भारतीय नारी ब्लॉग पर सितम्बर माह का विषय ? * निवेदन * भारतीय नारी ब्लॉग के योगदानकर्ता आने वाले माह में किस विषय पर लिखना चाहेंगे ? ... |
| अन्ना के लिए !
from अनुभूति ! by रूप
| हँस के मेरे करीब आवो तो! |
| टीम अन्ना को जन लोकपाल बिल पारित होने पर अब भी संदेह
from :: हिन्दुराष्ट्र :: by Net Guru
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"हार मिले तब हार बिना "
सूना जीवन प्यार बिना नीरस होता यार बिना
कला नहीं जीवन जीने की पर पलता व्यवहार बिना
दिल में उपजे प्रणय-भाव पर ...
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| कुछ अंश दान ही करो तुम .....
from SADA by सदा
| शब्दों का दंगल: "एस एम मासूम साहब के जन्मदिवस पर विशेष" |
| विदुषी ....
from 'विचार प्रवाह' by PRIYANKA राठौर
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कितना ज़रूरी है हस्तक्षेप
from 'अपनी माटी' वेबपत्रिका | खुली किताब - |
| अब देखिए! मेरे द्वारा लगाए गए कुछ लिंक! | रोक सको तो रोक लो... इन्तजार,इन्तजार है उसमें जितना गुस्सा उतना ही प्यार है.. |
| GULDASTE - E - SHAYARI
- * दर्द को भी दर्द होने लगा, दर्द ख़ुद ही मेरे घाव धोने लगा, दर्द के लिए मैं तो रोया नहीं पर मुझे दर्द छूकर **ख़ुद** रोने लगा !
| जनसामान्य के लिए कैसा रहेगा कल शाम साढे तीन से साढे पांच के मध्य का समय ?? - गत्यात्मक ज्योतिष इस बात को नहीं मानता कि ग्रहों के हिसाब से रं... |
| मेरे दिल की बात
इन्हें भी तो जोड़ो
जन-लोकपाल में ! - दुनिया उम्मीद पर ही टिकी होती है. हमें उम्मीद करनी चाहिए कि असत्य . अहंकार ,अत्याचार और भ्रष्टाचार पर आधारित यह समाज व्यवस्था बहुत... | HOME REMEDY ( HICHAKI ) ( हिचकी )* ==== कई कारणो से हमे हिचकी लग जाती है,काफी परेशानी होती है. क्या करे ? बस अपने दोनो कानो में अपनी उंगली... | विशेषधिकार की बात करने वालों से दो टूक . - आज संसद के विशेषाधिकार हनन की तलवार -ए - तोहमत माननीय किरण बेदी पर लटकाने वाले,ॐ पुरी पे गुस्साए हमारे सांसद, उस वक्त कहाँ थे जब कोंग्रेस के एक प्राधिकृत ..... |
| दिनेश की दिल्लगी, दिल की सगी
सान-*सान सद*-कर्म को, बसा के *बद* में प्राण | *अपनी रोटी सेक के*, करते महा-प्रयाण | करते महा-प्रयाण, *साँस दो*-दो वे ढोते | ढो-ढो लाखों गुनी,...
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"आओ ज्ञान बढ़ाएँ-पहेली:97"
उत्तर देने का समय
30 अगस्त, 2011, सायं 7 बजे तक!
परिणाम 31 अगस्त, 2011 को प्रातः10 बजे तक
प्रकाशित किये जायेंगे!
-0-0-0- |
| Love Everybody
*चन्दा मामा आवो ना ,*
*साथ मुझे ले जावो ना.*
*बादल के घोड़े पर चढ़ कर*
*मुझे घुमा कर लाओ ना.* ....
-0-0- हम दोनों के बीच |
| राजभाषा हिंदी
- एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो।
इन जंजीरों की चर्चा में कितनों ने निज हाथ बँधाए,
कितनों ने इनको छूने के कारण कारागार बसाए...
-- "वो आना तो चाहती थी !"
पर छुपा न पायी
सुर्ख आँखों से बहे काजल से
चेहरे कि लाली छुपा न पायी
--00--
ये अंश लिखने से पहले मन में बहुत से ख्यालात आये
नारियों की आज भी सामाजिक स्थिति दयनीय देख कर
मन कुंठा से भर गया
जब कुछ नारियों के मुंह से सुनी उनकी व्यथा...
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सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी का प्यारी सोनिया मम्मी को खत आदरणीय मम्मी जी पहले तो मेरी गुजारिश स्वीकार करें, लौटती डाक से अपनी चरणधूली भेजने की असीम क्रुपा करें। ........ |
| कर्मनाशा
इच्छाओं का जंगल और विराम से बाहर - * * *इच्छाओं के जंगल में* *दौड़ता फिरता है मन बावरा* *कहीं ओर न छोर* *बस रास्ते ही रास्ते **हर ओर * *एक दूसरे में गुम होता* *जंगल हरा - भरा..
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- अशोक सलूजा सब देख रहा भगवान ,
मत भूल अरे इंसान ........ यादें.....
मेरी यादों के गुलदस्ते से एक फूल आज फिर लाया हूँ
आप के लिए :- आज एक अपने मन-पसंद 'भजन' क...
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हमारे अधिकार, हमारा जीवन. 28 अगस्त 2011,
रविवार का दिन भारत के लोगों और लोकतंत्र के लिए
एक बड़ा दिन है. अन्ना हजारे की क्रांति को कामयाबी मिली है.
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जीवन की लंबी डगर पर देखे कई उतार चढ़ाव
अनेकों पड़ाव पार किये फिर भी विश्वास अडिग रहा |
कभी हार नहीं मानी जीवन लगा न बेमानी
जटिल समस्याओं का भी सहज.......
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अन्ना के आह्वान पर भारत की जनता का
बारह दिनों तक अहर्निश चलने वाला
ऐतिहासिकआंदोलन और आशा निराशा,
विश्वास अविश्वास और आश्वासन एवं
विश्वासघात के प्रहारों से..
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एक नई सोच का आगाज़
♥ अन्त में देखिए कार्टूनिस्ट के उद्गार ♥
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*मैं भी अन्ना.. तू भी अन्ना...*
*-- *आज हमने आजादी की दूसरी लड़ाई जीती है ..
सत्य है धरती पर जब-जब पाप बढेगा, ईश्वर उस...
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