


















| सूचना:- इस सामूहिक ब्लॉग पर पोस्ट लगाने से पूर्व यह देख लें कि एडिट बॉक्स में आपके समय पर किसी अन्य चर्चाकार की महत्वपूर्ण चर्चा तो शैड्यूल नही है! आपके साथी चर्चाकार की पोस्टकम से कम 12 घण्टे तो चर्चा मंच के शीर्ष पटल पर चमकनी ही चाहिए! |
| सोमवार- श्रीमती सरिता भाटिया, मंगलवार-श्रीमती राजेश कुमारी, बुधवार- शशि पुरवार जी, बृहस्पतिवार-श्री दिलबाग विर्क, शुक्रवार-श्री दिनेश गुप्ता "रविकर", शनिवार-श्रीमती वन्दना गुप्ता, रविवार- श्री अरुण शर्मा अनन्त, श्रीमती सरिता भाटिया चर्चा मंच की सोमवार की चर्चाकार होंगी! शशि पुरवार जी चर्चा मंच की बुधवार की चर्चाकार होंगी! चर्चा मंच परिवार आपका स्वागत और अभिनन्दन करता है। मैं (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') स्थानापन्न चर्चाकार के रूप में चर्चा मंच की सेवा करता ही रहूँगा। |
ओ.बी.ओ. के संचालक मण्डल से निवेदन है कि उस मर्यादा को हटा दें, जिसमें आपने प्रतिबन्ध लगाया हुआ है कि ओबीओ में अप्रकाशित रचना ही प्रकाशित होगी! मेरा तर्क यह है कि 1- जो व्यक्ति अपना ब्लॉग चलाता है वह तो सर्वप्रथम अपनी रचना को अपने ब्लॉग पर ही लगाना चाहेगा। 2- यदि वह ओ.बी.ओ.पर अपनी रचना सबसे पहले लगा दे और उसके बाद अपने ब्लॉग पर प्रकाशित कर दे तो इससे ओ.बी.ओ.पर क्या प्रतिकूल प्रभाव पड़ने वाला है । मेरी समझ में अब तक यह विज्ञान और तर्क नही समा सका है। अगर मेरी बात से संचालक मण्डल को ठेस लगी हो तो क्षमा चाहता हूँ। मगर इतना निवेदन जरूर है कि मेरे सुझावों पर विचार जरूर किया जाये...धन्यवाद! |
| चर्चाकार मित्रों! मेरा एक सुझाव है कि “चर्चा मंच” के मार्डरेटर आदरणीय डॉ,रूपचन्द्र शास्त्री‘मयंक’ जी अब एक भी दिन चर्चा नहीं कर रहे हैं। वे केवल अब स्थानापन्न चर्चा ही करेंगे, तो क्यों न उनको यह सहमति दी जाए कि वे किसी भी चर्चाकार की चर्चा के अन्त में अपनी पसंद के दो लिंक दिया करें। अतः हम लोग अन्त में“मयंक का कोना”शीर्षक भर कर छोड़ दिया करें। मेरा सुझाव अच्छा लगे तो आप भी करके देखिए न! "दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर" गुरूजी से आग्रह- |



















तीसरीअनुभूतियों का आकाशदीपावली की शुभकामनाएंइस छोर से उस छोर तकउस पूरी लाइन में जगमग करते गली चौबारे रोशनी और पटाखों से खिलखिलाते बचपन दीपावली की शुभकामनाएं |
| जब खाने के लिए प्रकृति ने भाँती-भाँती की वनस्पतियाँ, फल और अनाज उपलब्ध करा दिए हों तो हिंसक पशुओं के समान 'लाश' के टुकड़े खाने की क्या आवश्यकता है ? कम से कम उन पशुओं से ही कुछ सीखिए जिनके मृत शवों को आप............. |
सातवींचुनमुन चिड़ियाप्यारी सी एक चुनमुन चिड़िया, रोज फुदकती है आँगन में. दाना चुगती, चूँ चूँ करती, खुशियाँ भरती मेरे मन में. |
आठवींजनता की मांग और उसकी चेतावनीदिल की बातेंभ्रष्टाचार का बाज़ार आजकल गर्म है | सभी राजनैतिक पार्टियाँ इसको मुद्दा बना कर सत्ता........ क्योंकि जनता तो बहुत भोली है ...... जनता क्या मांगती ? तुमने क्या कमाया है यह हिसाब नहीं मांगती, कैसे वह कमाया है यह जबाब नहीं मांगती | भूखी प्यासी जनता सोना चाँदी नहीं मांगती, वह तो तन को एक कपड़ा और रोटी सूखी मांगती | |
| *आज एक धडकन तुम्हारे नाम गिरवीं रख रही हूँ देखो ज़रा संभाल कर रखना अमानत मेरी बस उस दिन लौटा देना जब रुखसत होउँ जहाँ से मेरी चिता पर आखिरी आहुति दे देना बस उस धडकन पर अपना............. |
दसवींमेरी त्वरित टिप्पणियां और लिंक -5तन्मात्रा हो हे सखी, शब्द, रूप, रस, गन्ध | सस्पर्श पञ्च-भूतियाँ, सांख्य-मत से बन्ध || कार्य में अपने हे सखी, रहो सदा लवलीन | तन्नी नित खुरचा करे, मन-पट हुई मलीन || (२) हरिगीतिका छंद भारतीय नारी बड़े-बुजुर्गों से मिले, व्यवहारिक सन्देश | पालन मन से जो करे, पावे मान विशेष || |
ग्यारहवींस्त्री-पुरुष विमर्श गाथा...भाग दो ..सहजीवन.व श्रम विभाजन ...सभी सम्मानित सदस्यों को सूचनार्थ- अक्टूबर व् नवम्बर माह में ''भारतीय नारी '' ब्लॉग पर चर्चा के मुख्य विषय रहेंगें - *तनाव का शिकार होती महिलाएं -कारण व् समाधान *कैसे सामंजस्य बैठाएं आधुनिक सास-बहू ? *अधिक पढ़ी-लिखी पत्नी को क्या वास्तव में पति वैसा सम्मान दे पाता है जिसकी वो हक़दार है ? शुभकामनाओं के साथ ! शिखा कौशिक वह आकृति अपनी गुफा में से अपने फल आदि उठाकर आगंतुक की गुफा में साथ रहने चली आई | यह मैत्री भाव था, साहचर्य --निश्चय ही संरक्षण-सुरक्षा भाव था..पर अधीनता नहीं ....बिना अनिवार्यता..बिना किसी बंधन के.....| इस प्रकार प्रथम बार मानव जीवन में सहजीवन की नींव पडी | साथ साथ रहना...फल जुटाना ..कार्य करना..स्वरक्षण...स्वजीवन रक्षा...अन्य प्राणियों की भांति | चाहे कोई भी फल या खाना जुटाए...एक बाहर जाए या दोनों ...पर मिल बाँट कर खाना व रहने की निश्चित प्रक्रिया -सहजीविता - ने जीवन की कुछ चिंताओं को -खतरे की आशंका व खाना जुटाने की चिंता -अवश्य ही कुछ कम किया | और सिर्फ खाना जुटाने की अपेक्षा कुछ और देखने समझने जानने का समय मिलने लगा | |
बारहवींगर्भ रोधी गोलियों का सेवन अंडाशयीय कैंसर के जोखिम को घटाता है .कबीरा खडा़ बाज़ार में--गर्भ रोधी गोलियों का सेवन अंडाशयीय कैंसर के जोखिम को घटाता है .एक अध्ययन से संपुष्ट हुआ है कि तकरीबन दस सालों तक जो महिलाएं गर्भज निरोधी गोलियों का नियमित सेवन करतीं हैं उनके लिए अंडाशयीय (ओवेरियन कैंसर )कैंसर के खतरे का वजन घटकर आधा ही रह जाता है .अध्ययन 'ब्रिटिश जर्नल ऑफ़ कैंसर '(इंग्लैण्ड की मशहूर विज्ञान पत्रिका )में प्रकाशित हुआ है... | तेरहवीं राग- हिंदुस्तान[भार्या ने कहा ,जा रहे हो ,तो कुछ आवश्यक सामान हैं ,हो सके तो लेते आना .......]टूटे ख्वाब जोड़ देने का सामान लेते आना , मेरे आँगन में बरसे फूल वो आसमान लेते आना - करुणा का संवेग , दया की धरा का कलरव छम - छम , क्षमा प्रेम की ,मलय निरंतर न्याय ,नम्रता ,लहराए परचम नाप सकें गहराई नभ की ,प्रतिमान लेते आना - |
चौदहवीं फुरसत में… मनोज कुमार पिछले अंक में हमने देखा कि ई.पू. छठी शताब्दी के पहले मगध में बार्हद्रथ के वंश का शासन था। इसकी राजधानी राजगृह या गिरिव्रज में थी। राजगृह यानी राजा का घर या निवास स्थान। चारों तरफ़ पाहाड़ियों से घिरे होने के कारण इसका नाम “गिरिव्रज” पड़ा। “गृध्रकूट” राजगृह बौद्ध धर्म का एक महत्वपूर्ण केन्द्र है। राजकुमार सिद्धार्थ (बुद्ध) संसार त्यागने के बाद मोक्ष प्राप्त करने की अभिलाषा से इस नगर में आए थे। अपने धर्म के प्रचार के लिए लम्बे समय तक यहां ठहरे। बुद्ध के लिए इस नगर का सबसे प्रिय स्थल “गृध्रकूट” अथवा ........ |

सोलहवींमेरे सपनेजो तुम आ जाते एक बारजो तुम आ जाते एक बारकितनी करूणा कितने संदेश पथ में बिछ जाते बन पराग; गाता प्राणों का तार तार अनुराग भरा उन्माद राग; आँसू लेते वे पथ पखार| हंस उठते पल में आर्द्र नयन धुल जाता होठों से विषाद, छा जाता जीवन में बसंत लुट जाता चिर संचित विराग; आँखें देतीं सर्वस्व वार| -महादेवी वर्मा |
