चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Sunday, March 25, 2012

"आकाश मे उड़ता पंछी...और मैं" (चर्चा मंच-829)

मित्रों!
 

      रविवार की चर्चा के लिए लिंकों की शृंखला प्रस्तुत कर रहा हूँ! आशा है कि छुट्टी के दिन आपके पढ़ने के लिए बहुत सारी सामग्री यहाँ पर मिल जायेगी।
     १. अझुली भर फूल/ प्यार भरा दिल/ आकाश मे उड़ता पंछी/ और मैं. २. बहती हुई नदिया/ उड़ता हुआ बादल/ हवाओं मे खुश्बू/ और मैं. ३. पेड़ पर पत्ते/ पत्ते पर बारिश... और मैं!! चोका (1. नन्ही चिड़िया,2.पेड़ निपाती ) नन्ही** **चिड़िया*** * **धूप** -**स्पर्श** **ढूँढती*** * **फुदकती -सी*** * **! चलो अच्छा हुआ- मुझे मेरा दोस्त मिल गया! मिले थे आप हमे  बहारों की तरह , बिछड़े भी कुछ ऐसे की हजारों की तरह....। जाने कितने आए और चले गए --- पता चला है कि हिंदी ब्लोगर्स की संख्या ५०००० का आंकड़ा पार कर गई है । हालाँकि सक्रिय हिंदी ब्लोगर्स की संख्या १००० से ज्यादा नहीं है....। तुम्हारी धुन पर नाचे आज मेरे गीत....कहो तुम हो कहाँ ओ व्याकुल मन के मीत.....। कुछ अनकही बाते ? , मेरा बचपन  खिला एक फूल फिर इन रेगिस्तान में. मुरझाने फिर चला दिल्ली की गलियों में. ग्रॅजुयेट की डिग्री हाथ में थामे निकल गया....! माँ- A Life of a Child तुम ईश्वर की श्रेष्ठतम कृति तुम ही तो धरती का वरदान जो कुछ मुझमें , है वो सब तेरा ये सौभाग्य मेरा हम तेरी सन्तान......। असफल औरत यानी एक घुटन भरी डायरी औरत की निष्ठा उसकी हार बनती है उसकी ख़ामोशी उसकी निजी डायरी में सिसकियाँ लेती है ...! ) हास्य गज़ल ( उमर ढली पर अभी भी दिखते शवाब में ये काली जुल्फें रँगी हैं जब से खिजाब में.....! रातें लम्बी, दिन छोटे हैं, हम व्यथा बनाये ढोते हैं, रातों की काली स्याही में, हम उजले दिन भी खोते हैं। जब आशा बन उद्गार जगी, तब रोक वृत्ति चिन्तित मन की,...उपलब्धि रही यह जीवन की...! फेसबुक ने यूजर्स के अकाउंट की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाएं है। इनकी मदद से आप भी अपने अकाउंट को सुरक्षित बना सकते हैं....फेसबुक को बनाएं और भी सुरक्षित...! दफ़्न करना जरा, साथ में इक कलश- मुझे नहीं पता यह क्या हो गया मुझको -- क्षमा सहित यह तुरंती । डाकिया डाकुओं से, बुरा हो गया ....। 
        जब कभी मन  बि‍न डोर की पतंग.... बन आकाश की अनंत उंचाईयों को छूने को बेकरार होता है...! ज़ोया का चाँद इक शाम थी जिसे चाँद की तलाश थी पर चाँद था के रात के आँचल में छुपा हुआ मद्दतों तरस की उमस में शाम झुलसती रही मुद्दतों प्यास की नदी में शाम तैरती रही...!  नुश्खे सेहत के : पेट में अफारा है ,बादी हो रही है या गैस बनती है ? सुबह उठते ही खाली पेट एक ग्लास ताज़ा जल के साथ दो कलियाँ छिलका हटाकर लहसुन की गटक लीजिए...! निरमा बाबा कि फूटी आँख -जोखुआ अब जवान हो चूका है, कोलेज आता जाता है, इस कोलेज में प्रवेश लेने से पहले जोखुआ ने कितने सपने सजाये थे, कितना अरमान था, नया कोलेज नयी पढाई , नए दोस्त....! कर पौरुष नि:शेष, लौट आया क्यूँ बूढ़ा ...! *शब्दों की दुनिया* Ankita Panwar पदचाप तुम्हारी सुनी हे अक्सर उन लहरों पर जी पर कोंधता हे सूर्य का प्रकाश कितनी उजली हे ये राहें जी पर फेली हे घास कुछ एहसासों की....! मेरे बचपन की गलियाँ ......*मेरे बचपन की गलियाँ * *अब मुझे नहीं पहचानती वहाँ की धूप -छाँव जो थी जीवन मेरा ... अब भर देती हैं मन के भीतर क्रंदन ही क्रंदन बंदिशे जो अब और तब ...अब कहाँ हैं ?? हर भूखे को चाँद भी रोटी नज़र आता है जिधर देखो ,  हर दिल टुटा नज़र आता है // कुछ इस कदर हिल गया है,विश्वास का पेड़ अब तो हर दोस्त भी ,दुश्मन नज़र आता है ....! ताऊ की ब्लॉग लिखाई ! ब्लॉग जगत की सबसे बड़ी लाफ्टर मशीन* ताऊ* नजर नहीं आ रहे बहुत दिनों से . हंसोड़ों को हंसी कि तलब हो रही थी , क्या करे अब ...जा पहुंचे* रामप्यारी* के पास ......! कैसे रंग दिखाती है ये रंगीली ?
      ब्लॉगर हुआ अब थोडा और बेहतर -आपका चहेता ब्लॉगर धीरे धीरे और भी आधुनिक सुविधाएँ जोड़ता जा रहा है इसी क्रम में ब्लॉगर ने Meta Tags, Errors and Redirections, Crawlers and Indexing जैसी सुविधाएँ.....! प्यार में थोड़ी सी कमी, कम नहीं होती - अक़ील नोमानी - मयंक अवस्थी पूर्ण समीक्षा लफ्ज़ वेबसाइट पर उपलब्ध है। यहाँ कुछ बेहद ख़ूबसूरत अशआर पेश किये जा रहे हैं .....! आतंकवाद का राजनीतिक चेहरा!! -*दृश्य एक* :- बम और गोले की खेंप पहुँच जाएगी समय पर ढा दो दहशत बिछा दो लाशें बजा दो ईंट पर ईंट फ़ाड़ दो सत्ताधारी सरकार के कान फोन पर आ रही थी - .... फुसफुस...! वैज्ञानिक पद्धति एवं आस्था और विश्वास। उपयोगी है वैज्ञानिक पद्धति लेकिन मानवीय व्यवहार और सरोकारों पर इसे लागू करना विचार और हमारी आस्था और विश्वासों को रोबोटीय बनाने के तुल्य है....! अलग-अलग हैं शाहबाज लाल कलंदर व झूलेलाल? जिस गीत दमा दम मस्त कलंदर को गा और सुन कर सिंधी ही नहीं, अन्य समुदाय के लोग भी झूम उठते है, उस पर यह सवाल आज भी मौजूं है उसका सिंधी समुदाय से कोई ताल्लुक भी है अथवा नहीं...! जाट देवता का सफ़र... KILBARI किलबरी (नैनीताल के भ्रमण पर) NAINA/ CHINA PEAK से लौटने पर मैं ठीक उसी जगह पर आ बैठा जहाँ से इस जगह की ऊँचाई तीन किमी बाकि रह जाती है। अन्तर सोहिल का फ़ोन आया कि अब हम नैनीताल में झील...! शब्दों का उजाला... कुछ न माँगूँ (हाइकु) *1* * कुछ न माँगूँ बस पल दो पल ख़ुशी के सिवा* *2.* *कभी ढूँढ़ती** यादों के आँगन में ख़ुशी अपनी* *3* *बिन बुलाए,** ये गम पता नहीं क्यों चले आए....! पहचान गंध आप उसे देख नहीं सकते, छू नहीं सकते और ना ही सुन सकते हैं, परन्तु गंध प्रबल और प्रभावी होती है.....। 'ज्‍योतिष दिवस' आते जाते रहेंगे .. न ज्‍योतिष और न ही ज्‍योतिषी को सम्‍मान मिलेगा !! कल के अखबार में पढने को मिला कि इस वर्ष से नव संवत्सर को 'विश्व ज्योतिष दिवस' के रूप में मनाया जाएगा....! आदमी के भेष में शैतान था , हम समझते थे कि वो भगवान था. एक-इक अक्षर का उसको ज्ञान था. उसके घर में वेद था, कुरआन था.....! बुरांश (एक प्रतीक ) लिखते-लिखते ......... ममता की धमकी माया की हार, दलितों की बस्ती से राहुल का प्यार, कहते थे वो हैं बहुत जरुरी, उनके बिना जीत आधी-अधूरी वादों की झाड़ियाँ विवादों के रेले, लगते ...! तन पर लपेटे फटे व पुराने कपड़े  वह सांवली सी लड़की , कर रही थी कोशिश शायद ढक पाये तन को अपने, हर बार ही होती शिकार वह असफलता और हीनता का समाज की ...! एक गीत: ना मैं जोगी ,ना मैं...... ना मैं जोगी ,ना मैं ज्ञानी, मैं कबिरा की सीधी बानी । वेद पुरान में क्या लिख्खा है ,मैं अनपढ हूं ,मैं क्या जानू दिल से दिल की राह मिलेगी मन निच्छल हो,मैं...!
आज के लिए बस इतना ही!
अगले शनिवार फिर मिलूँगा!!
तब तक के लिए शुभविदा!!!

23 comments:

  1. पहले जब पढते थे याद करते थे कौन सा दिन कब मनाया जाएगा |
    पर अब तो पूरे साल में रोज ही कोइ न कोइ दिन मनता है |उसे कैसे याद रखें कोइ तरकीब बताइये |
    नव वर्ष पर आप सब को हार्दिक शुभ कामनाएं |
    आशा

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  2. बहुत अच्छी प्रास्तुति। नव वर्ष पर आपको हार्दिक शुभ कामनाएं......

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  3. लिंक्स का बेहतर संकलन, जानकारियों से भरी बेहतरीन प्रस्तुति, मेरे लिंक को शामिल करने के लिए शुक्रिया!

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  4. स्तरीय सूत्र, रविवार में पढ़ने के लिये पर्याप्त।

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  5. ram ram bhai

    क्षमा करें, इस ब्लॉग में जिस पृष्ठ को आप खोज रहे हैं वह मौजूद नहीं है.
    मुखपृष्ठ
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    यहाँ है यह लिंक -
    http://veerubhai1947.blogspot.in/
    शनिवार, 24 मार्च 2012
    एक साधारण सा रक्त परीक्षण करेगा दिल के दौरे की भविष्यवाणी .
    इस आलेख की कोख में वह लिंक भी .मेरी गलती से इसके पेट में चला गया .
    शास्त्री जी असुविधा के लिए क्षमा प्

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  6. आभार सर |
    प्रभावशाली प्रस्तुति |
    प्रेरित करती हुई ||

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  7. सुन्दर चर्चा, मेरी रचना को स्थान देने के लिए आभार :)

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  8. लिंक्स बटोरने चयन करने में आपने दर दर की ख़ाक छानी है .यह चर्चा कर्म के प्रति आपका समर्पण नहीं तो और क्या है इनमे से खाफी लिंक्स हमने पढ़ें हैं शेष पढने हैं टिपियाना भी है .आभार आपका .हमें साथ लिया इस जीवंत चर्चा में .

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  9. विस्तृत चर्चा के लिए आभार शास्त्री जी ।

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  10. कुछ अनकही बाते ? , मेरा बचपन
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" जी पहले तो मैं आपका बहुत बहुत धन्यवाद् कहूँगा की मेरी कविता को आप ने चर्चा मंच में सामिल किया ये दूसरा मोका है जब मेरी कोई पोस्ट चर्चा मंच में सामिल हुई है मैं बहुत खुश हु
    आपका बहुत बहुत धन्यवाद
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" जी आप बहुत अच्छी प्रास्तुति। नव वर्ष पर आपको हार्दिक शुभ कामनाएं
    और आप ने तो लगता है काफी ब्लोगेरो के ब्लॉग की खाक कहानी है वरना इतनी बड़ी जानकारी एकत्रित करना बी बड़ी बात है
    आपको बहुत बहुत सुभकामनाये
    दिनेश पारीक

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  11. चर्च मंच के माध्यम से हमारी कविताओं को ज्यादा से ज्यादे लोगों तक पहुँचाने के बहुत बहुत धन्यवाद.
    उम्मीद है लोगों को रचना पसंद आयेगी.
    http://musafir-theunknownjourney.blogspot.in
    आभार!!

    प्रणाम

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  12. itani sari links se milvane ke liye dhanyavad,mere blog par svagat hae sir.

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  13. सुन्दर लिन्क संयोजन

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  14. सभी लिंक्स बढ़िया है!....नए संवत्सर का स्वागत है!

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  15. very beautiful charchaa, and thanks for including my post here....

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  16. बढ़िया लिंक्स
    बढ़िया चर्चा मंच ....

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  17. इस विशिष्ठ अंदाजा में इतने लिंक्स देने और मेरे ब्लॉग को भी सम्मिलित करने के लिए बहुत धन्यवाद|

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  18. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


    इंडिया दर्पण
    की ओर से नव संवत्सर व नवरात्रि की शुभकामनाए।

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  19. अच्छी चर्चा... कुछ लिंक जुड़ नहीं रहे...

    सादर आभार...

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  20. कितनी मिहनत से हमें देते सुंदर सूत्र
    मानों चर्चा मंच हो सबसे प्यारा पुत्र
    सबसे प्यारा पुत्र गुणों से सज्जित होता
    उसे देखकर पिता बड़ा ही गर्वित होता
    कम पड़ती तारीफ चाहे की जाय जितनी
    देते सुंदर सूत्र हमें मिहनत से कितनी.

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  21. बहुत सारे लिंक्‍स हैं आज तो.....अच्‍छे लगे। बहुत मेहनत से एकत्र करते हैं आप इन्‍हें। आपका आभार.....मुझे शामि‍ल करने का भी। सभी को नवसंवत्‍सर की बधाई।

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  22. hmmmmm
    shastri jii
    waqt ki kmii se jydaa links tak nhii pahunch paayi....pr jin tak pahunch paaayi...bahut ache lge'

    koi 2-3 mahino baad aanaa huaa ...vaapis blog pe.......aur aate hi apne newborn babyboy ke naam ..ik kavitaa likh daali.........aur aap sab ne itna sneh diya....aankhen nam ho aayi.........bahut bahut shukriya
    take care

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  23. अच्छी रही रविवासरीय चर्चा, महज तुकबंदी को चर्चा मंच में शामिल करने हेतु आपका आभार व्यक्त करता हूँ ,

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