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Saturday, April 28, 2012

"मुश्किल ये पहाड़ सी ज़िन्दगी" ( चर्चा मंच - 863 )

मित्रों!
शनिवार के लिए चर्चा प्रस्तुत है!

ये धूप की बेला ये धूप की बेला ये छांव सी ज़िन्दगी
न चांदनी रात न सितारों से दिल्लगी
जमी हूँ मै शिला पर -
बर्फ की तरह काटना है
मुश्किल ये पहाड़ सी ज़िन्दगी
कल जब मैने सुना कि सचिन तेंदुलकर ने
10 जनपथ में हाजिरी लगाई, तो मैं हैरान हो गया।
क्योंकि दो दिन पहले ही उनका 39 वां जन्मदिन था, लेकिन ....
"नजर न आया वेद कहीं"

*देश-वेश और जाति**, **धर्म का**, **मन में कुछ भी भेद नहीं।***
*भोग लिया जीवन सारा**, **अब मर जाने का खेद नहीं।
अनंत की खोज

अनंत की खोज में भटकता ही रहा,
पंछी अकेला बस तरसता ही रहा,
दर-ब-दर, यहाँ वहाँ, और न जाने कहाँ-कहाँ,
जो ढूंढा वो मिला ही नहीं, जो मिला उसकी तो चाह ही ...
फेसबुक ने बदल दी है ब्लॉगिंग की तस्वीर
लम्बे सप्ताहांत पर लम्बे सफ़र की लम्बी दास्ताँ जारी रहेगी .
हालाँकि अभी दो दिलचस्प किस्त बाकि हैं .
लेकिन अभी लेते हैं एक छोटा सा ब्रेक .
हो गयी माँ डोकरी है
प्यार का सागर लबालब,
अनुभव से वो भरी है हो गयी माँ डोकरी है
नौ दशक निज जिंदगी के,कर लिए है पार
उनने सभी अपनों और परायों ,
पर लुटाया प्यार उनने सात थे ...
** इस जलती धुप में पल में सारा आलम गुलाबी हो गया …
घर में कदम रखते ही देखा .
इक गुलाबी सा ख़त धुप को जला रहा था .!
उदास मन को भी समाधान मिल गया ..

*कुछ प्रश्न मन को यूँ ही परेशान कर रहे थे की अचानक ही समाधान मिल गया।
इस समाधान को यहाँ पोस्ट कर रही हूँ ताकि औरों के भी काम आ सके....
अच्छे बच्चे कभी न लड़ते

शोर मचाकर छवि यूं बोली, मुझको मुन्नी ने मारा।
मुन्नी बोली छवि ने मारा, छवि बोली मुन्नी ने मारा।
परेशान हो अंकल बोले , अच्छा दोनों बतलाओ।
बुद्ध .........कौन ? ........एक दृष्टिकोण

बुद्ध .........कौन ? सिर्फ एक व्यक्तित्व या उससे भी इतर कुछ और ?* *
* *एक प्रश्न जिसके ना जाने कितने उत्तर सबने दिए.
- पवन कुमार -

शायर पवन कुमार शायर पवन कुमार का दमदार आग़ाज़ “
*वाबस्ता* समीक्षा
आरोग्य की खिड़की
*(१) विटामिन डी रहता है मददगार हाई ब्लड प्रेशर को कम करने में *
*एक नए अध्ययन के अनुसार हाई ब्लड प्रेशर को कम करने में विटामिन डी..
इमाम बुखारी : धर्मगुरु या सांप्रदायिक-राजनीतिग्य आत्मा ??
२००८ का यह वीडियो जरुर देखें *
किसी भी धर्म का धर्म गुरु देश या कौम में भाई चारे से कैसे रहे,
तो क्‍या सचिन कांग्रेसी हो गये ?

खुश तो बहुत होगे तुम आंय,
अरे भई तुम्हारे भगवान उच्च सदन के सदस्य जो बन गये,
राष्ट्रपति ने उन्हें राज्‍य सभा के लिए मनोनीत जो कर लिया है,
प्रेम........

इंसान को पूर्ण अपने आप में होना चाहिए,
अपने प्यार में खुद पूर्ण होना चाहिए....!
दूसरों में अपनी अपूर्णता को पूर्ण करना चाहेंगे....
आज भी जो कुछ लिखा.....
भीतर-ही-भीतर कोई पिघलता जा रहा है
मेरे भीतर से जैसे कोई बाहर आ रहा है !!
किसी के समझ नहीं आने को है यह बात
मुझे भी कोई बहुत देर से ये समझा रहा है !!
नेपथ्‍य में भव्‍यता

वाराणसी, राम कुमार. 'मेघदूतम' में कालिदास, उज्‍जैन को
स्‍वर्ग से टूटकर गिरा एक टुकड़ा कहते हैं.
जब मेघदूत इस शहर की छत से गुज़रता है,
तो बस, इसे निहार...
उम्मीदों का सूरज.
आज निकली है धूप बहुत अरसे बाद
सोचती हूँ निकलूँ बाहर समेट लूं
जल्दी जल्दी कर लूं कोटा पूरा
मन के विटामिन डी का इससे पहले कि
फिर पलट आयें बादल....
नदी और समय
नदी रूकती नहीं समय भी ठहरता नहीं
नदी रुकी सी लगती है समय भी कई बार ठहर सा जाता है
समय का ठहरना आभासी है नदी का रुकना भी
नदी चंचल है समय भी चंचल है ...
औरत कहती है..
औरत कहती है दुख को पहचानना चाहती हूं *
*हंसकर आगे जोड़ती है, दुख को पहचानती औरत के बहाने*
*शायद इस अपने परिवेश को ज़रा नज़दीक से जान लूंगी...*
वक्ष सुदर्शनाएँ!

भारत के एक मशहूर मीडिया हाउस ने
अपनी एक प्रमुख पत्रिका के अंगरेजी हिन्दी दोनों संस्करणों के
ताजे अंक की कवर स्टोरी को नारी वक्षों में उभार के प्रति आयी न...
कला का आलोक : ५ : प्रत्यक्षा

‘द ट्यूरीन हॉर्स’ का एक दृश्य *
[ फिल्म हमारे समय का एक विलक्षण कला-माध्यम है.
फ़िल्में देखते हुए हम उस आत्मिक-बौद्धिक अंतर्क्रिया का अनुभव कर सकते ...
आप अपने ब्लॉग को फेसबुक से जोड़ सकते हो Facebook

अगर आप भी फेसबुक पर अपना पेज बनाना चाहते है
तो सबसे पहले फेसबुक पर जाये और वहा सबसे निचे
*Create a Page* पर क्लीक करे जेसा आप निचे चित्र में देख रहे है ..
जीवन दर्पण 45
जब आप क्रोध में हों तब देखना उसके होनें के कारण को**,
**कारण आप स्वयं नहीं कोई और होगा*
आखिर क्यों ये काफी नही .. Is the feelings are bounded by words?

क्या ये काफी नही कि तेरा मुझसे कुछ और नही दिल का नाता है
क्या ये काफी नही कि तुझ पर ही शुरू और खत्म होती है
तलाश मेरी क्या ये काफी नही कि मेरी खामोशी को ...
बोलो रामसहारे जी
भैया ,रामसहारे जी ।
क्यों हो हारे--हारे जी
क्यों तन्हा बेचारे जी ।
सोचो रामसहारे जी...
खोना

खेलता हुआ बच्चा खो जाता हैं
रेत उसे याद करती है
छूते हुए आहिस्ता सलोनी त्वचा की सलवटें
जिनमें छिपा है पेड़ का गिल्ली डंडा बनना
एक विखंडनकारी अवधारणा
भारतीय संविधान के निर्माण के पश्चात अगले दस वर्षो तक
आरक्षण की व्यवस्था इसलिये की गयी थी कि
जो हजारो वर्षो दबे कुचले थे उन्हे
उनकी जनसंख्या के अनुसार ...
*ग़ज़ल*
*आया ज़रा सुकून में चौंका दिया मुझे *
*मुझसे न पूछ ज़िंदगी ने क्या दिया मुझे* *
* *इक दिलफ़रेब साया था इक लम्हे की ख़ातिर*
राम तुम्हें वनवास मिलेगा
दुहराता इतिहास मिलेगा राम तुम्हें वनवास मिलेगा
युग बदला पर हाल वही है लेकिन रावण खास मिलेगा
अगजल - 39
छूटता जा रहा है हंसते - खेलते जीने का फलसफा 
सियासत की छोडो, अब मोहब्बत में भी मिलता है दगा ।
दस्तूर इस जमाने के देखकर बड़ा हैरान हूँ मैं
पास-पास रहने वाले लोगों में है कितना फासिला ।

आज के लिए बस इतना ही-
बाकी कल...!

16 comments:

  1. ़़़़़़़़़़
    सचिन का कांग्रेसी होना
    लगता है बुखार ला रहा है
    विटामिन डी से खून का
    दाब कम करवाया जा रहा है
    ब्लाग अपना फेसबुक से
    जुड़वाने को जा रहा है
    शास्त्री जी का चर्चामंच आज
    वाकई में गजब ढा रहा है ।
    ़़़़़़़़़़़

    ReplyDelete
  2. @"मुश्किल ये पहाड़ सी ज़िन्दगी" ( चर्चा मंच - 863 )

    हिम्मत से रहिये डटे, घटे नहीं उत्साह |
    कोशिश चढ़ने की सतत, चाहे दुर्गम राह |


    चाहे दुर्गम राह, चाह से मिले सफलता |
    करो नहीं परवाह, दिया तूफां में जलता |


    चढ़ते रहो पहाड़, सदा जय माँ जी कहिये |
    दीजै झंडे गाड़, डटे हिम्मत से रहिये ||

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  3. सभी लिंक्स बहुत बढियां,,,पढ़ कर मजा अगया...लेकिन मेरा संसद वाला लिंक?

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  4. बहुत सुन्दर लिंक्स का संयोजन । मेरी रचना को शमिल करने के लिए आभार ।

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  5. मेहनत से ढूंढ लाये ,करीने से फिर सजाये ,चर्चा यूं ही ज़मायें ,वो शाष्त्री कहाएँ -बधाई !

    कृपया यहाँ भी पधारें रक्त तांत्रिक गांधिक आकर्षण है यह ,मामूली नशा नहीं
    शुक्रवार, 27 अप्रैल 2012

    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/2012/04/blog-post_2612.html
    मार -कुटौवल से होती है बच्चों के खानदानी अणुओं में भी टूट फूट
    Posted 26th April by veerubhai
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/2012/04/blog-post_27.html

    ReplyDelete
  6. काफी वक़्त हों जाता है आजकल इधर आये ....आज बड़े दिनों बाद ..लिनक्स पर भरपूर नज़र मारी.....संयोजन बहुत दिलचस्प है....लिनक्स को बहुत अच्छे से पेश किया गया है.....खूबसूरती से ...

    अच्छे लिनक्स भी हैं....सब तक जाने में अभी वक़्त है..जो पढ़ पायी ..अच्छे लगे.
    मेरी पोस्ट को जगह देने के लिए....तह ए दिल से शुक्रिया

    ReplyDelete
  7. बहुत बढ़िया लिंक्स के साथ सार्थक चर्चा प्रस्तुति के लिए आभार!

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  8. bahut badhiya links....sare padh liye

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  9. This comment has been removed by the author.

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  10. इस मंच की लगभग सभी रचनाएं पढी । सभी अच्छी लगी ।मेरी रचना को यहाँ शामिल करने के लिये बहुत-बहुत धन्यवाद

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  11. बाहर था,
    अभी देखा मंच
    बहुत सुंदर चर्चा

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  12. aaj din kafi wyast raha, kuch er pahle socha thoda pad kr thakan dur k jay to charchaa manch se behtar kuch nahi sooza.
    and i am happy to visit this, its a good collection.

    ReplyDelete
  13. aaj din kafi wyast raha, kuch er pahle socha thoda pad kr thakan dur k jay to charchaa manch se behtar kuch nahi sooza.
    and i am happy to visit this, its a good collection.

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