खंजर घोपे पीठ जब, छोड़ शब्द की मार-Sunday, March 4, 2012
चर्चा-मंच 808
व्यंगकार का हो नहीं, सकता तब उद्धार ।
खंजर घोपे पीठ जब, छोड़ शब्द की मार ।
छोड़ शब्द की मार, मारता हरदम जाए ।
पड़े तनिक चिचियाय, पोस्ट भी तुरत लगाए ।
पर रविकर कंजूस, रखो अभ्यास मार का ।
यूँ जाओ ना रूस, मामला व्योपार का ।।
---रविकर
परीक्षा की विधियाँगीत क्या लिक्खें कोई"दोहे-होली का त्यौहार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') |
दुर्लभ चित्र के साथ खास चर्चा ……चर्चा मंच
Monday, May 23, 2011
वन्दना
दोस्तों
काफी दिनों से मन था कि कभी- कभी चर्चा में सिर्फ भगवद प्रेम की चर्चा ही की जाये .........संयोग से आज कुछ पोस्ट मिल गयी हैं तो सोचा क्यों न आज लीक से हटकर आप सबको कान्हा के नजदीक ले जाया जाये क्योंकि आजकल मैं भी उन्ही की कथा में जा रही हूँ शायद उसी का प्रभाव है ये ..........तो चलिए देर किस बात की ..........देखिये किस किस ने अपने भावों को कैसे उजागर किया है
सबसे पहले ........ये चित्र मुझे फेसबुक पर मिला जो की अत्यंत दुर्लभ है तो सोचा आप सबको भी इस चित्र का दर्शन कराये जायें
अब कैसे मिलन हो पाए?
(sant kabir vani-adhik chaturai dikhane se labh nahin)
आपके दस पोस्टों की स्पेशल काव्यमयी चर्चाः-(शनिवासरीय चर्चा).....Er. सत्यम शिवम
Saturday, February 19, 2011
प्यार में हिसाब नहीं जनता (सोमवारीय चर्चामंच 684)
Monday, October 31, 2011
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“आज एक अप्रैल है! महफूज और उड़न तश्तरी जबलपुर में!” (चर्चा मंच)
Thursday, April 1, 2010
"चर्चा मंच" अंक - 106
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मूर्ख-दिवस के महामूर्ख
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आइए आज का "चर्चा मंच" सजाते हैं-
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मूर्ख दिवस पर देखिए सबसे छोटी चर्चा-
आज शाम को ताऊ रामपुरिया, महफूज और उड़न तश्तरी खटीमा में भी देखे गये थे! अरे भइया! मैंने तो उन्हें शाम का लंच भी करवाया था! होटल का नाम था- "ब्लॉगिंग रेस्टोरेण्ट" इसके बाद उन्हें खटीमा एयरपोर्ट तक छोड़ने भी गया था! |
और सब कुछ ठीक है ? ' हया ' लता 'हया' | महफूज जी और उड़न तश्तरी अचानक जबलपुर शहर में...
समयचक्र महेन्द्र मिश्र |
हँसी ठिठोली...बड़ा मज़ा आया... साझा-संसार जेन्नी शबनम | अप्रैल फूल :आज से हर बच्चे को होगा शिक्षा का अधिकार
बकवास रिपोर्ट... vinod kumar mishra |
मूर्ख बनने से बचने के १०१ तरीके
अनौपचारिक अर्कजेश | 1 अप्रैल 2010 को समय 0000 आवर्स से महँगाई खत्म व्यंग्य |
अप्रिल फूल एक सामाजिक बुराई हमारी अन्जुमन safat alam taimi | अप्रैल फूल के दिन मूर्ख बनने के बचने का नायाब तरीका (अविनाश वाचस्पति) नुक्कड़ अविनाश |
फिर तुझे क्या पड़ी थी बेवकूफ !?
samwaadghar sanjaygrover | खुशखबरी.... हिन्दी ब्लॉगर्स के लिए खुशखबरी .......कमाई की शुरूआत हुई..... meraashiyana shashisinghal |
क्या आज आप कोई चिट्ठी नही पढेंगें? अन्तर सोहिल = Inner Beautiful अन्तर सोहिल | हिंदी टेक ब्लॉग बंद
Hindi Tech Blog नवीन प्रकाश |
किसे मूर्ख बना रहे हैं आप? ... हम तो पहले से ही मूर्ख हैं धान के देश में! जी.के. | लिव- इन रिश्ता बोले तो . . . अप्रैल fool !!! likhdala varsha |
अप्रैल फूल यानि मूर्ख दिवस-हास्य कविता (april fool-hindi hasya kavita)दीपक भारतदीप का हिन्दी-पत्रिका दीपक भारतदीप | बाल (ब्लॉग ) ना बाँका कर सके जो जग बैरी होय पास पड़ोस शरद कोकास |
तकरार-ए-अप्रैल फूल ! अंधड़ ! पी.सी.गोदियाल | इस पोस्ट का 1 अप्रेल से कोई संबंध नही है ----एक धांसु व्यंग्य ………………ललितडॉटकॉम ललित शर्मा |
क्या आप इंटेलिजेंट समझते हैं अपने ...तो डरते क्यों हैं मूर्ख बनने से ? ज़रा हिम्मत तो दिखाइए ! प्राइमरी का मास्टर प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI | खुशदीप के टी.वी.शो "नाच छमकछल्लो नाच" में रामप्यारी ताऊ डॉट इन ताऊ रामपुरिया |
वैशाख्नंदन सम्मान प्रतियोगिता मे : श्री विनोद कुमार पांडेय
ताऊजी डाट काम ताऊ | भाड में जाए ब्लोग्गिंग मैं छोड रहा हूं इसे ........अजय कुमार झा .... bihari babu kahin अजय कुमार झा |
| गत्यात्मक ज्योतिष एक महीने में एक भी भविष्यवाणी सही नहीं हुई .. आज से ज्योतिष का अध्ययन बंद !! - | घुघूतीबासूती जरा माचिस तो देना!.............................घुघूती बासूती - |
| काव्य मंजूषा अल्लाह इस नामुराद को जन्नत बक्शे..... - | देशनामा महफूज़ के ब्लास्ट को अमेरिकी सैल्यूट...खुशदीप |
| रवि मन तुमसे बिछुड़कर : रावेंद्रकुमार रवि - | naturica सारे गुलाब:ग़ज़ल - |
| अमीर धरती गरीब लोग क्या मिनी स्कर्ट या टांगो की नुमाईश ही नौकरी की फ़ुल गारंटी है? . | मुझे शिकायत हे. Mujhe Sikayaat Hay. इसे सबसे बाद में पढना जी खाली वक्त होने पर - |
| ह्रदय पुष्प हथियार - | मिसफिट:सीधीबात शुक्रिया "नईदुनिया"जबलपुर |
कुछ कार्टून -कैसे कैसे नेता Posted by sudhakar soni,cartoonist | एक कार्टून ek प्रस्तुतकर्ता Doobe ji आदमजात हुए क्यों बौने ? डॉ. चन्द्रकुमार जैन Dr. Chandra Kumar Jain |
“मूर्ख-दिवस पर अवकाश घोषित!”
(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)
गुरुवार, १ अप्रैल २०१०
“महत्वपूर्ण घोषणा”
कृपया आज चर्चा मंच पर न जायें!
क्योंकि आज यहाँ फर्स्ट-अप्रैल के उपलक्ष्य में सबसे छोटी चर्चा लगी है!








बेहतरीन प्रस्तुति । पठनीय सूत्र । आभार शास्त्री जी ।
ReplyDeleteसंकलन की तारीफ़ करने के लिए शब्द कम पडने लगे हैं. पठनीय व दर्शनीय लिंक्स आपके अथक प्रयासों का ही परिणाम है. आपकी ऊर्जा और लेखनी को सलाम.
ReplyDeleteएक बार और मेरी रचना को आपके चर्चा मंच में देखने का सौभाग्य प्राप्त किया ... इसके लिए अनेक धन्यवाद ... आपकी चर्चा की चर्चा चहुँ दिशा है ... यह मंच और बढे यही मनोकामना है ...
ReplyDeleteरविकर नजर नहीं आ रहा था
ReplyDeleteअब पता चला चर्चा के डब्बे
एक एक कर एक लम्बी
चर्चामंच की रेल बना रहा था
पहले ही डब्बे में अपने को
कंजूस बताये जा रहा था।
टोकरी भर चर्चा ही चर्चा , बहुत बेहतरीन पठनीय लिंक्स मिले ...
ReplyDeleteआभार !
चर्चा का दूसरा लिंक गायब है !
ReplyDeleteउलझ गयी हूँ लिक्क्स में....
ReplyDelete:-)
सुलझाते हैं धीरे धीरे.....
सादर
अनु
Maza aa gayaa puranee yaaden taaza ho gai .
ReplyDeleteJabardast link ke saath bahurange links ke saath sundar charcha prastuti...aabhar!
ReplyDeleteपठनीय सूत्रों के साथ इस विषद चर्चामंच की साज सज्जा दर्शनीय है ! इसमें आपने मेरी प्रस्तुति को भी स्थान दिया आभारी हूँ ! बहुत बहुत धन्यवाद !
ReplyDeleteपठनीय लिंक्स,बेहतरीन प्रस्तुति,बहुत बहुत धन्यवाद।
ReplyDeleteबहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....
ReplyDeleteइंडिया दर्पण पर भी पधारेँ।
बहुरंगी चर्चा में बहुत सी लिक्स पढने को मिली |मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |
ReplyDeleteआशा
कोरम पूरा करना हो तो मैं भी कह दूं बहुत सुंदर चर्चा,
ReplyDeleteपर सब कुछ मेरे ऊपर से निकल गया, समझ में नहीं आया ये सब है क्या....
नए प्रकार की पहल देख रहा हूं। शुभकामनाएं देना चाहूंगा।
ReplyDeleteशास्त्री जी, इस मेहनत और बेहतरीन संकलन प्रस्तुत करने के लिए बहुत बधाई एवं धन्यवाद.
ReplyDeleteइतने सारे लिंक्स आनन्द नही आया,,,क्योकि,,,,,,सिर्फ
ReplyDeleteदेखने की फार्मेल्टी रह जाती,,,,,पढ़ने की नही,,,,,,
MY RESENT POST,,,,,काव्यान्जलि ...: स्वागत गीत,,,,,
लाज़वाब चर्चा....आभार
ReplyDeleteबेहतरीन लिंक्स,बेहतरीन पठनीय प्रस्तुति,
ReplyDeleteधन्यवाद बहुत बहुत।
पुरानी चर्चाओं (अप्रैल १, २०१०) को पुनः चर्चा में लाकर मेरे ब्लॉग 'साझा संसार' पर प्रेषित 'हँसी ठिठोली... बड़ा मज़ा आया' लेख की याद ताज़ा करा दी आपने. चर्चाओं के प्रस्तुतीकरण का अनोखा अंदाज़. बहुत धन्यवाद.
ReplyDeleteबहुत सुन्दर चर्चा की है रविकर जी ने बहुत पुराने लिंक्स भी देखने को मिले |बधाई आपको
ReplyDeleteवाह, चर्चामंच का यह अंदाज पसंद आया।
ReplyDeleteवाह...!
ReplyDeleteआज की चर्चा पढ़कर तो सभी पुरानी यादें ताजा हो गईं!
आभार!
अति सुंदर, अविस्मर्णीय प्रस्तुति.
ReplyDeleteधन्यवाद.
chochak pe charchaa badhiyaa rahi .
ReplyDeleteलाजवाब चर्चा!!
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