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Tuesday, August 14, 2012

चर्चामंच ---(971) सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तान हमारा

 मंगलवारीय चर्चा में राजेश   कुमारी  की आप सब को नमस्कार ,सुप्रभात ,गुड मोर्निंग आप सब का दिन मंगल मय हो 
                          प्रेम प्रतीतहि कपि भजै,सदा धरै उर ध्यान |
                         तेहि के कारज सकल शुभ ,सिद्ध करैं हनुमान ||
श्री हनुमान का नाम लेते हुए अब चलते हैं आपके प्यारे प्यारे ब्लोग्स पर 

(1)

                                                                                              मेरा संघर्ष
                                                         वो एक भयानक रात .
                                                                             (2)

(3)
(4)
(5)

(7)
(8)
गृहस्थ जीवन ! अविवाहित व्यक्ति 
(9)


(10)
(11)
(12)

                                 [रंजू भाटिया] at कुछ मेरी कलम से kuch meri kalam se 
                                                               (13)

                                            ईसाई पादरी अपना रहे हैं इस्लाम Spirituality



                                                       DR. ANWER JAMAL 

                                         (14)



                                                 प्रतिभा सक्सेना at लालित्यम् 

                                          (15)


                                                   at रचनाकार -

                                    (16)


                                               मोहब्बत नामा

(17)


                                          संतोष त्रिवेदी at बैसवारी baiswari - 



                                       (18)

                                        बनी दुनियाँ तब खुशबू बहुत थी
 संध्या आर्य at हमसफ़र शब्द 
(19)
                                                       आखिर कब...
                               
(21)

मनोज कुमार at मनोज 
(22)
                      

            फटेहाली ...
 उदय - uday at कडुवा सच ... - 

                               (23)

prerna argal at prerna ki kalpanayen 
(24)

(25)
                                                  (26)
                                    इंतज़ार धूमिल आँखों का -






अब  चलती हूँ फिर मिलूंगी शुभविदा ,बाय बाय 

************************************************************************                           


56 comments:

  1. बहुत बढ़िया लिनक्स को समेटे चर्चा..... आभार

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  2. बहुत ही सुन्दर सूत्र...

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  3. बढिया रचना हैSADA
    नज़रे चुरा मत लेना कभी .... - इसी संदर्भ में कबीर का एक दोहा याद आगया -
    अच्छों को अच्छे मिलें ,मिले नींच को ,नींच .
    पानी से पानी मिले ,मिले कीच सो कीच .
    कृपया यहाँ भी पधारें -
    ram ram bhai
    मंगलवार, 14 अगस्त 2012
    क्या है काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा की बुनियाद ?
    http://veerubhai1947.blogspot.com/

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  4. नफ़रत को तुम मिटाकर,दिल से मिलाओ दिल को -

    सन्देशा यही लाया,रमज़ान का महीना ||कौमी एकता को सींच गया रमजान का महीना .

    (20)

    रमजान का महीना
    Devdutta Prasoon at प्रसून
    कृपया यहाँ भी पधारें -
    ram ram bhai
    मंगलवार, 14 अगस्त 2012
    क्या है काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा की बुनियाद ?
    http://veerubhai1947.blogspot.com/

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  5. सर्वग्राही संस्कृति के समायोजन से बावस्ता इससे बढिया कौमी तराना फिर लिखा नहीं गया दोस्त -

    हमारा राष्ट्रीय गीत - 15 अफ़सोस यही है अब ये तराने चुनाव में काम आते हैं उसी दरमियान बजतें हैं ये गीत पूरे शोर - शराबे के साथ ...अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ भुला सकते नहीं ...
    ram ram bhai
    मंगलवार, 14 अगस्त 2012
    क्या है काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा की बुनियाद ?
    http://veerubhai1947.blogspot.com/

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  6. मन फूला फूला फिरे ,जगत में झूंठा नाता रे ,जब तक जीवे माता रोवे ,बहन रोये दस मासा रे ,और तेरह दिन तक तिरिया रोवे ,फेर करे घर वासा रे ----

    यही है हकीकत सपूतों की यही है फलसफा पिंड दान करने वाले का ..ये सब कन्या भ्रूण हत्या का नतीजा है -पूत कपूत सुनें हैं लेकिन ,माता हुईं सुमाता रे ...(25)


    Kashish - My Poetry
    ram ram bhai
    मंगलवार, 14 अगस्त 2012
    क्या है काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा की बुनियाद ?
    http://veerubhai1947.blogspot.com/

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  7. आक्रोश और वेदना और सवालों के सलीब ताने है कविता का पूरा ताना -बाना ....फ़ूड फॉर थाट...स्वतंत्रता दिवस की पूर्व सध्या पर इस रचना का प्रकाशन अनेक अर्थ लिए है जब कि मीरा कुमार और सोनिया एक ही संसद में एक ही समय पर हैं ,क्या कर रहीं हैं ये यहाँ ?सोनिया तो सुना है बड़ी ताकतवर महिला हैं टाइम मैगजीन के अनुसार विश्व की पहली पच्चीस में से एक हैं ?२०१२ में ये सब क्यों ?ब्द
    (19)

    आखिर कब...

    भारतीय नारी
    ram ram bhai
    मंगलवार, 14 अगस्त 2012
    क्या है काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा की बुनियाद ?
    http://veerubhai1947.blogspot.com/

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  8. अब तो स्वर दो इस आक्रोश और वेदना को ...प्रासंगिक प्रस्तुति जोश और आक्रोश पैदा करती है एक धरातल तलाशती रचना खुले घूमते आवारा पशुवत स्वानों को अब बांधों पट्टे

    (23)


    सुरक्षा नारी की
    prerna argal at prerna ki kalpanayen -


    ,ram ram bhai
    मंगलवार, 14 अगस्त 2012
    क्या है काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा की बुनियाद ?
    http://veerubhai1947.blogspot.com/

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  9. बहुत सार्थक पोस्ट है बधाई कृपया वर्तनी शुद्ध कर लें,सोने पे सुहागा होगा -मै ,
    सोते हुए भी
    आँखें नहीं मूंदना चाहता
    डरता हूँ
    कही न खुलीं तो
    एक भय कहीं दूर तक
    मेरे अंतर्मन मे
    घर किये बैठा है
    नस्वर शरीर
    नास्वर्ता प्रदान करने के लिए कोई
    छिपकर बैठा है
    नश्वर ./नश्वरता /
    "पत्नी ही दमित इक्षाएं"
    पूरी करनी हैं बहुत सी अभिलाषाएं
    पत्नी की दमित इच्छाएं कर लें .
    इस "वीभास्त्ता" को
    वीभत्सता कर लें
    शुक्रिया करता हूँ आपका .हिमाकत की है .(24)

    अद्रश्य भय से.
    कुश्वंश at अनुभूतियों का आकाश


    ,ram ram bhai
    मंगलवार, 14 अगस्त 2012
    क्या है काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा की बुनियाद ?
    http://veerubhai1947.blogspot.com/

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  10. ...
    अहिंसा का मान, फिरंगी समझते थे 'उदय'
    पर, आज के लोग, हिंसा ही समझते हैं ?? फटेहाली ...

    उदय - uday at कडुवा सच ... -
    ...
    उन्हें तो हर हाल में, है फटेहाली से मतलब
    फटेहाली देश की, उनके लिए वरदान जो है ? सच कहें हैं भाई साहब ,आम आदमी के लिए रुपया ३२ मयस्सर है ,देश महा -शक्ति बनने के कगार पे है ,आंकडें झूंठ नहीं बोलते ,....दो धारी तलवार हैं इधर भी -न हो कमीज़ तो पांवों से पेट ढक लेंगे ये लोग कितने मुनासिब हैं "इस सफर "के लिए (इसे स्विस बैंकियों के लिए पढ़ें ).बहुत उत्कृष्ट व्यंजना लिए है यह रचना ...बारीक व्यंग्य छान के परोसा है यौमे आज़ादी में अनुपम पर्व पर ....फिर मौन सिंह बोलेंगे ......नपे तुले सधे हुए रिमोट से ...


    ,ram ram bhai
    मंगलवार, 14 अगस्त 2012
    क्या है काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा की बुनियाद ?
    http://veerubhai1947.blogspot.com/

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  11. सुंदर लिंक्स से सजी चर्चा में उपयोगी पोस्ट तक जाने के सूत्र मिले।

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  12. बनी दुनियाँ तब खुशबू बहुत थी
    बिखरना
    नसीब फूलो का
    माली नही वे कि
    सँवार देंगें
    हौसलों को उड़ान देंगें

    मंझघार में
    छोडते रहे कस्तियों को
    बुझाते रहें रौशनी
    टटोलते हुये अंधेरों को

    बाबूल से
    बबूल हुये वे कब
    कंटिली ढाँचों के बीच अब
    बसा फूलो का शहर

    बनी दुनिया तब
    खुशबू बहुत थी !बहुत सुन्दर भाव व्यंजना लिए है रचना ,बधाई .
    शद्ध कर लें वर्तनी ...कविता और उड़ान भरे ...
    बिखरना नसीब "फूलों "का
    माली "नहीं " वे ...

    "मंझधार" में ...'

    "छोड़ते " रहे "कश्तियों" को वे ...
    बुझाते "रहे ".......रौशनी

    "कंटीली "........शुक्रिया .....

    (18)


    बनी दुनियाँ तब खुशबू बहुत थी

    संध्या आर्य at हमसफ़र शब्द




    ,ram ram bhai
    मंगलवार, 14 अगस्त 2012
    क्या है काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा की बुनियाद ?
    http://veerubhai1947.blogspot.com/

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  13. एक ब्लॉग सबका
    हमारा राष्ट्रीय गीत - 15 सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तान हमारा
    हम बुलबुलें है इस की, यह गुलसितां हमारा
    इकबाल के इस गीत में वाकई भारत की आत्मा बसती है !
    बहुत खूब !

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  14. Kashish - My Poetry
    (26)
    इंतज़ार धूमिल आँखों का -
    पता नहीं
    पर कहीं पर
    दिये गये संस्कार
    लिये गये संस्कार
    के बराबर
    हो जाते हैं
    और
    संस्कार खो जाते हैं !

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  15. ... इन लुटेरों की हवेली के लिए
    एक अक्षर भी नहीं गंदा करूंगा।
    गीत लिख लिख झोपड़ी के वेदना के
    इक जनम में मौत मैं सौ सौ मरूंगा।
    यश कमाकर अमर होने से कहीं
    इस तरह की मौत मरना भी बड़ा है।
    श्याम नारायण पाण्डेय जी के एक और वर्ग संघर्ष को समर्पित रचना आपने पढवाई शुक्रिया .मनोज जी , मेरे लिए भी काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा नै थी यहाँ यु एस में यह बहुत प्रचलित है मेरी छोटी बिटिया स्पाइनल एडजस्ट मेंट (लम्बर हर्नियेशन )के समाधान के लिए यह चिकित्सा ले रही है मैं भी उसके साथ काइरो -प्रेक्टिक क्लिनिक गया हूँ जिज्ञासा भाव जागा साहित्य संजोया क्लिनिक से ही और लिखने का सिलसिला धारावाहिक इसी चिकित्सा व्यवस्था पे चल निकला लगभग दस पोस्ट मौजूद हैं राम राम भाई पर . अगला आलेख TMJ SYNDROME AND CHIROPRACTIC.
    (21)

    एक अक्षर भी नहीं गंदा करूंगा

    मनोज कुमार at मनोज
    (22)




    ,ram ram bhai
    मंगलवार, 14 अगस्त 2012
    क्या है काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा की बुनियाद ?
    http://veerubhai1947.blogspot.com/

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  16. अद्रश्य भय से.
    कुश्वंश at अनुभूतियों का आकाश

    आँख खोलता है
    आदमी रात को
    बंद कर लेता है
    उसी आँख को दिन में
    उजाले से भी डर
    लगता है जब कभी !

    बहुत सुंदर रचना !!

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  17. सुरक्षा नारी की
    prerna argal at prerna ki kalpanayen

    आक्रोश होना ही है
    जब इंसान जानवर
    जैसा अगर हो जाये
    अपनी ही नस्ल को
    नोचना शुरु हो जाये
    दूसरे इंसान देखते रहें
    उसके वीभ्त्स रूप को
    इस तरक एक लड़की
    का जीना दूभर हो जाये !

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  18. क्या करें दिव्या जी बेचारा बोलना तो चाहता है "मौन सिंह "
    आवाज़ ही नहीं निकलती .श्रवण यंत्र पात्र देख कर बांटों ....क्या सुनेगी मूक बधिर सरकार ...../इटली की करनी सरकार .../पीजा पर पलती सरकार /नित मुटियाती ये सरकार ....


    ,
    ZEAL
    गृहस्थ जीवन ! - अविवाहित व्यक्ति ram ram bhai
    मंगलवार, 14 अगस्त 2012
    क्या है काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा की बुनियाद ?
    http://veerubhai1947.blogspot.com/

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  19. prasanshaneey prastuti ... jay ho ...

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  20. उदय - uday at कडुवा सच ... -
    उन्हें तो हर हाल में, है फटेहाली से मतलब
    फटेहाली देश की, उनके लिए वरदान जो है ?

    वाकई में वरदान है उसके लिये फटेहाली
    बहुत खूब कहा है !

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  21. सुन्दर चेहरों के साथ सुन्दर लिंक्स...
    बढ़िया चर्चा राजेश जी.

    शुक्रिया
    अनु

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  22. एक अक्षर भी नहीं गंदा करूंगा

    मनोज कुमार at मनोज

    गीत लिख लिख झोपड़ी के वेदना के
    इक जनम में मौत मैं सौ सौ मरूंगा।

    कितनी वेदना है दिख रहा है !

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  23. मुहाजिरों की बसी बस्तियां, और सरायें बनवाना |
    मियांमार के मियां बुलाओ, कैम्प असम में लगवाना |
    आते जाते खाते जाते, संसाधन सीमित अपने-
    मनमोहन की दृष्टि मोहनी, फिर से अपनी राय बताना ||
    "मौन सिंह "को फिर चुन लाना(9)

    दिनेश की दिल्लगी, दिल की सगी ram ram bhai
    मंगलवार, 14 अगस्त 2012
    क्या है काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा की बुनियाद ?
    http://veerubhai1947.blogspot.com/

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  24. रमजान का महीना
    Devdutta Prasoon at प्रसून
    नफ़रत को तुम मिटाकर,दिल से मिलाओ दिल को -

    सन्देशा यही लाया,रमज़ान का महीना ||

    बहुत खूब !

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  25. मेरा संघर्ष
    वाह!!
    लगे रहो जमे रहो !

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    Replies
    1. धन्यवाद!.......सुशील जी!!!!!!!!!!!!!

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  26. आलोचनाएं अपने गले में डाल लो !


    संतोष त्रिवेदी

    आलोचनाओं को
    पिरोकर डाल लो अपने गले में

    बहुत खूब बहुत खूब !!

    हम तो पहले से ही डाले हुऎ हैं
    चलिये आप भी आ गये
    अब निकलते हैं बेचने मालायें
    आलोचनाओं के साथ साथ !

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  27. दिनेश की दिल्लगी, दिल की सगी

    एक से बढ़कर एक
    होती हैं इसकी झोलियाँ
    हाजमें की होती हैं उसमें कुछ
    कुछ होती है खेलने की गोलियाँ!

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  28. ZEAL
    गृहस्थ जीवन ! - अविवाहित व्यक्ति
    और एक अविवाहित व्यक्ति शादीशुदा को जंचता नहीं
    क्यों आजाद घूम रहा है वो खुलेआम पचता नहीं !!

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  29. SADA
    नज़रे चुरा मत लेना कभी .... -

    अच्‍छाईयों में 'सदा' रब़ बसता है ऐसा सुना है बुजुर्गों से,

    बहुत सुंदर रचना है !!

    यही तो वह चाबी है कोई भी ताला खोल सकती है
    इसे संभाल के रख लेना मुश्किल में लगा लेना कभी !

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  30. (1)

    मेरा संघर्ष

    वो एक भयानक रात .

    फैजाबादी होकर के तुम डर जाते हो राम जी ।

    किडनैपिंग मर्डर कामन था, जीवन रहा हराम जी ।

    हनुमत का ही नाम जापकर, कितने बरस यहाँ काटे-

    हंसी उड़ाना नहीं किसी की, यह सच्चा पैगाम जी ।।

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  31. (2)

    स्वप्न मेरे................
    सुख दुःख से जब परे हुए हो ... -

    क्या बात है भाई जी --

    पीले पत्ते नीचे गिरते -
    घाव आज भी हरे भरे हैं |

    परदे में क्या शक्ल धरे वे-
    बदकिस्मत हम मरे मरे हैं |

    हरियाली जो तनिक दिखी तो
    रविकर पशुता चरे धरे है |

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  32. (4)
    SADA
    नज़रे चुरा मत लेना कभी .... -

    अच्छी भली सलाह पर, साधुवाद आभार |
    गाँठ बाँध कर राखिये, शुभ आचार-विचार ||

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  33. badhiyaa links se sarobar charcha.badhayee

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  34. (8)
    ZEAL
    गृहस्थ जीवन ! - अविवाहित व्यक्ति

    अविवाहित के बड़े मजे हैं-रचना उत्तम ईश्वर की |
    जिम्मेदारी, बड़े बझे हैं, घनचक्कर सा बदतर की |
    लेकिन शादी बड़ी जरुरी, शान्ति व्यवस्था जग खातिर-
    *छड़ा बखेड़ा खड़ा कर सके, रहे ताक में अवसर की |
    पहले जैसे इक्के-दुक्के, बाबा विदुषी सन्यासिन
    करें क्रान्ति परिवर्तन बढ़िया, देश दिशा भी बेहतर की |
    गृहस्थी में फंसे लोग हैं, खुराफात का समय नहीं है-
    फुर्सत में होते हैं जब भी, खबर खूब लें रविकर की ||

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  35. उपयोगी लिंकों के साथ बढ़िया चर्चा!

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  36. (17)
    आलोचनाएं अपने गले में डाल लो !


    संतोष त्रिवेदी at बैसवारी baiswari -
    दबा रखो आक्रोश को, इतना अधिक अधीर |
    मिर्ची खाकर दे रहे, किसके मुंह को पीर |
    किसके मुंह को पीर, दफ़न कर दुश्मन मन को |
    चल यमुना के तीर, साँस दे दे भक्तन को |
    यह कटाक्ष यह तीर, चीर देंगे वह छाती |
    मत मारो हे मीर, सहन अब न कर पाती ||

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  37. 19

    आखिर कब...

    भारतीय नारी

    चुलबुल बुलबुल ढुलमुला, घुलमिल चीं चीं चोंच |
    बाज बाज आवे नहीं, हलकट निश्चर पोच |
    हलकट निश्चर पोच, सोच के कहता रविकर |
    तन-मन मार खरोंच, नोच कर हालत बदतर |
    कर जी का जंजाल, सुधारे कौन बाज को |
    बेहतर रखो सँभाल, स्वयं से प्रिये लाज को ||

    ReplyDelete
  38. 25

    इंतज़ार धूमिल आँखों का
    Kailash Sharma
    Kashish - My Poetry

    नौ महिने माता ढोई थी,
    इर्द गिर्द तेरे जीवन था
    सोई न गोदी में लेकर ,
    न रोई न कभी थकी थी |

    पिता बना घोडा गदहा नित,
    तेरा बोझ उठाये टहला-
    मात-पिता पर तोहमत रविकर,
    दो मिनटों के सुख से पैदा -

    इसीलिए क्या आज भेजता,
    वृद्धाश्रम बदला लेने को-
    पत्नी के संग ऐश करेगा,
    पीढ़ी दर पीढ़ी यह होगा -

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  39. (23)

    सुरक्षा नारी की
    prerna argal at prerna ki kalpanayen -

    बहुत बढ़िया -
    दुष्टों को लेकिन सजा मिलेगी कब ?
    बहुत दिनों से यह प्रश्न अनुत्तरित है-

    कुछ सलाह और आक्रोश है इन पंक्तियों में-
    (1)
    चुलबुल बुलबुल ढुलमुला, घुलमिल चीं चीं चोंच |
    बाज बाज आवे नहीं, हलकट निश्चर पोच |

    हलकट निश्चर पोच, सोच के कहता रविकर |
    तन-मन मार खरोंच, नोच कर हालत बदतर |

    कर जी का जंजाल, सुधारे कौन बाज को |
    बेहतर रखो सँभाल, स्वयं से प्रिये लाज को ||
    (2)
    नई रीति से प्रीति गीतिका, दादी अम्मा गौर कीजिये |
    संसर्गों की होती आदी, याद पुराना दौर कीजिये |

    आँखों को पढना न जाने, पढ़ी लिखी अब की महिलाएं -
    वर्षों मौन यौन शोषण हो, किन्तु भरोसा और कीजिये |।

    कांडा कांदा परत दर परत, छील-छाल कर रहा चाबता-
    देह-यष्टि पर गिद्ध-दृष्टि है, हाथ मांसल कौर दीजिये |।

    अधमी उधमी चामचोर को, देंह सौंपते नहीं विचारा-
    दो पैसे घर वाले पाते, जालिम को सिरमौर कीजिये ।।

    मीठी मीठी बातें करके, मात-पिता भाई बहलाए -
    अनदेखी करते अभिभावक, क्यूँकर घर में ठौर दीजिये ??

    व्यवसायिक सम्बंधो में कब, कोमल भाव जगह पा जाते -
    स्वामी स्वामी बना सकामा, क्यूँ मस्तक पर खौर दीजिये ??

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  40. देश प्रेम से सजा हुआ है आज का चर्चा मंच ,
    राष्ट्रीय गीत दिया है जिसने उस इकबाल को नमन.
    मंगलवार की चर्चा के लिंक क्या ही खूब सजाये हैं ,
    इनको पढने भारत वासी दुनिया भर से आये हैं.


    मोहब्बत नामा
    मास्टर्स टेक टिप्स

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  41. (14)

    पांचाली 55.& 56.
    प्रतिभा सक्सेना
    लालित्यम्



    अश्वश्थामा के सिर पर, इक ख़ूनी घाव बहा करता है |
    निरपराध बच्चों की हत्या, यह संताप सहा करता है |
    मामा श्री के कर कमलों से जीवन दान मिला था तुमको-
    ब्रह्मास्त्र का शेष चिन्ह है , जिससे व्यक्ति सदा मरता है ||

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  42. चुनी हुई रचनायें मिल गईँ, पढ़ने का अच्छा मसाला जिसके लिये आपका आभार ,पांचाली को सम्मिलित किया -कृतज्ञ हूँ .
    सारी टिप्पणियाँ पढ़ीं ,उनकी मौलिकता टिप्पणीकार की रचनात्मकता से पूर्ण होने कारण आनंद दे गईं.रविकर जी की अधिकांश टिप्णियाँ रचना को जैसे नये सिरे से व्याख्यायित कर जाती है- आश्चर्य होता है इतनी लीनता से पढ़ कर कुछ बिंब सृजित कर लेना -विलक्षण क्षमता !

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    1. वाकई रविकर अदभुत ही लिखता है
      जिस पोस्ट पर रविकर टिपिया जाता है
      वो पोस्ट एक टिप्पणी और
      उसपर रविकर की टिप्पणी
      एक बहुत खूबसूरत पोस्ट हो जाता है ।

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  43. जी हाँ प्रतिभा जी आप सही कह रही हैं रविकर जी ,सुशील जी ,धीरेंद्रे जी ,वीरू भाई जी ,शास्त्री जी की टिप्पणियाँ आश्चर्य चकित करती है ये इन सब की रचना धर्मिता शब्द कौशल्य ,सृजन क्षमता की ही तो परिचायक हैं |

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  44. बड़ा काम अंजाम देने का तरीक़ा
    आम तौर पर लोग यह समझते हैं कि अविवाहित आदमी बड़े मज़े में है. वह हरेक घरेलू ज़िम्मेदारी से मुक्त है और वह अपनी सारी ताक़त और सारा समय जिस काम में चाहे लगा सकता है लेकिन हकीक़त इसके ख़िलाफ़ है. दुनिया में बड़े काम करने वाले ज़्यादातर व्यक्ति विवाहित थे. असल चीज़ व्यक्ति के हालात नहीं बल्कि उसका हौसला है. हरेक आदमी अपने हौसले के मुताबिक़ ही अपनी योग्यता से काम ले पाता है.
    यदि आप कोई बड़ा काम अंजाम देना चाहते हैं तो
    १- अपना मक़सद हर समय अपने सामने रखें.
    २- उसे पूरा करने के लिए व्यवहारिक योजना बनाएं.
    ३- उसे पूरा करने के लिए समय सीमा मुक़र्रर करें.
    ४- समय समय पर उसका जायज़ा लेते रहें और अपनी कमज़ोरियाँ दूर करते रहें.
    -----------------
    उपयोगी लिंकों के साथ बढ़िया चर्चा के लिए आभार !

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  45. समय ठीक से न मिल पाने के कारण विस्तृत टिप्पणी नहीं कर पा रहा हूँ!............लेकिन फिर भी सौ बात की एक बात- देश भक्ति की भावना से निहित आज का चर्चामंच अत्यंत विचारणीय और संवेदनशील है!...............आप सभी को मेरा हार्दिक अभिनन्दन!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

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  46. बहुत रोचक लिंक्स...सुन्दर चर्चा...आभार

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  47. वाह ... सभी खूबसूरत लिंक्स हैं ... लाजवाब चर्चा ...
    मुझे भी शामिल करने का शुक्रिया ...

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  48. excellent links now going to read them.

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  49. comment on ईसाई पादरी अपना रहे है इस्लाम spirituality:

    Hindus do not take it upon themselves to convert others to Hinduism. They never target a certain religion or faith to be subject to their criticism or attempts to be converted to Hinduism. They feel that the focus of any spiritual path should be on God, not on making or accumulating converts like some network marketing scheme that counts profits in terms of the quantity of followers it has. The effort should be in giving high quality spiritual education and, thus, by purity, inspire others to go toward God. Therefore, they have no motive to spread hate or lies or discord amongst any other community or religion. On the other hand, it is seen that Christians often view Hindus as pagans or heathens, meaning, in essence, that they are Godless and doomed to hell, and must accept God in the form of Christianity in order to be "saved." Muslims also view Hindus as idolaters or polytheists, and thus damned per the descriptions of the Koran, or so they say. Yet, Hindus are free from any such doctrine or attitude toward Islam or Christianity. Nonetheless, when Hindus begin to react to this constant criticism of their religion by such dogmatists, it is primarily an angry backlash and a defense of their culture rather than an attempt to start friction or trouble with those of other faiths. After all, how long can Hindus continue to be as tolerant as they have been toward those of other religions who are so aggressive in their attempts to make converts and who take advantage of this tolerant attitude?
    There are different sects in Islam, and many different denominations in Christianity, all with their differences and criticisms of each other. So much so that wars between two major sects in Christianity (Catholics and Protestants) have been killing each other for hundreds of years. They are highly critical of each other and also get upset when one makes converts from the other side, even though both are Christian paths. However, you will never find this within the ranks and genuine schools of Vedic culture.

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  50. स्वतंत्रता दिवस पर,,,,

    वे क़त्ल होकर कर गये देश को आजाद,
    अब कर्म आपका अपने देश को बचाइए!,,,,

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  51. बहुत खूबसूरत चर्चा है राजेश कुमारी जी आज की ! इतनी चित्रात्मक अद्भुत चर्चा में मेरी रचना के शामिल करने के लिये आपका बहुत बहुत आभार ! स्वतन्त्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आप सभीको हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें !

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