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Wednesday, September 26, 2012

देश चराने के लिए, पैसे की दरकार- चर्चा मंच 1014




नया परिचय 
(पुत्र)

WoRds UnSpoKeN !!


आज उठा तो दिल में एक दर्द सा  महसूस किया . .
बड़े अरसों बाद मिले थे वो आज हमसे ख्याबों में . .
उन नजरों ने देखा हमें पलकें उठा के . .
हम आज तलक चल रहे लड़खड़ा के . .

(पिता)

भगवान् राम की सहोदरा (बहन) : भगवती शांता परम-4(II)

सृंगी जन्मकथा  

 रिस्य विविन्डक कर रहे, शोध कार्य संपन्न ।
विषय परा-विज्ञान मन, औषधि प्रजनन अन्न ।

विकट तपस्या त्याग तप, इन्द्रासन हिल जाय ।
तभी उर्वशी अप्सरा, ऋषि सम्मुख मुस्काय ।


Asha Saxena  

ये मोहब्बत जो ना कराये थोडा

Sonal Rastogi 


~: कुछ हाइकु :~

Mukesh Kumar Sinha  


नपुंसकता

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" 


शेक्सपीयर का जुलियस सीज़र बनाम अन्ना और उनका पी आर

kanu.....  


गाँव : धूमिल

मनोज कुमार 
 -----------------------------------------------------------------------------------

मेरा आकाश

मनोज कुमार  


चार रोटी का महत्व "Bas Yaari Rakho"

Bhagat Singh Panthi 

लेखन मौलिक होना चाहिए....साहित्य --लेखक व समाज -व्यक्ति का सम्बन्ध ....डा श्याम गुप्त ..



शाम, श्याम ...

 (दिगम्बर नासवा) 


दारू पियत में ...

mahendra mishra 


दोहे – हिन्दी

अरुण कुमार निगम  



दो गज़ल

ओम पुरोहित'कागद' 

.......... नकाब -- संजय भास्कर

संजय भास्कर 

आदत....मुस्कुराने की !



"नेता सचमुच महान हैं" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक)

  उच्चारण
रोटी है,
बेटी है,
बँगला है,
खेती है,
सभी जगह
घोटाले हैं,
कपड़े उजले हैं,
दिल काले हैं,



मनमोहन की डायलोगबाजी.


 रविकर लागे श्रेष्ठ, सदा ही गाँठ जोड़ना-

समय ठहर उस क्षण,है जाता,


dheerendra

  सजन श्वांस उच्छवासों में, 
सजनी जीवन सजना है ।
दिल दोनों धौकनी बने, 
कानों को तो बजना है ।

स्वेद-कणों की बात करें क्या, 
गंगा यमुने का संगम हो 
जीवन के इन प्रेम पलों हित, 
जाने क्या क्या तजना है ।।


गाँठ पड़ना ठीक है !

संतोष त्रिवेदी  
मन की गाँठों से सदा, बढ़ता दुःख अवसाद ।
मन की गाँठे खोल दे, पाए मधुरिम स्वाद ।
पाए मधुरिम स्वाद, गाँठ का पूरा कोई ।
चले गाँठ-कट चाल, पकड़ के खुपड़ी रोई ।
रविकर लागे श्रेष्ठ, सदा ही गाँठ जोड़ना ।
अपना मतलब गाँठ, जानते दुष्ट छोड़ना ।।
 

पेड़ पर नहीं उगते पैसे क्‍या ? उगते हैं, उगते हैं, उगते हैं


 देश चराने के लिए, पैसे की दरकार ।
पैसे पाने के लिए, अपनी हो सरकार ।
अपनी हो सरकार, नहीं आसान बनाना ।
सब जुगाड़ का खेल, बुला परदेशी नाना ।
नाना नया नकार, निखारे नाम पुराने ।
मनी-प्लांट लो लूट, चलो फिर देश चराने ।।

बढ़ने चला हूँ

ई. प्रदीप कुमार साहनी 
 मेरा काव्य-पिटारा  

सुन्दर कविता भाव हैं, साधुवाद हे मित्र |
सपने एवं जिजीविषा, का अति-सुन्दर चित्र ||

 कथरी

देवेन्द्र पाण्डेय 

कथरी का इक अर्थ है, नागफनी हे मित्र ।
उलट पलट के ओढ़ना, देखे चित्र विचित्र ।
देखे चित्र विचित्र, मोतियाबिंद पालती ।
आँखों का वह नूर, उसी की दवा डालती ।
रहता उनका साथ, छोड़ कर कैसे जाऊं ।
नई कथरिया ओढ़, शीघ्र ही साथ निभाऊं ।।

File:SabarimalaRush2010.JPG
मंदिर मठ मस्जिद मचे, भगदड़ हर इक साल ।
मौत-तांडव कर हते, होंय भक्त बेहाल ।
होंय भक्त बेहाल, मार डाले यह भगदड़ ।
चढ़े चढ़ावा ढेर, गिनें आयोजक रोकड़ ।
रहे प्रशासन मूक, चूक की जिम्मेदारी ।
देते सभी नकार, मुआवजा बटता  भारी ।


गंगा-दामोदर ब्लॉगर्स एसोसियेशन

आज धनबाद के ब्लॉगर्स को माननीय देवेन्द्र गौतम जी का सानिध्य प्राप्त हुआ ।

इस गोष्ठी में  गंगा-दामोदर ब्लॉगर्स एसोसियेशन की स्थापना की आवश्यकता महसूस की गयी । आपके विचार और सुझाव सादर आमंत्रित हैं । 
--------रविकर---------

43 comments:

  1. बहुत ही अच्छे लिंकस हैं अब एक एक पर जाकर देख रहा हूं पर आपको बधाई पहले ही

    ReplyDelete
  2. अच्छे लिंकों से सजी मनमोहक चर्चा!
    आभार रविकर जी!

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  3. कंटकाकीर्ण सकरी(संकरी ) पगडंडी......संकरी / उलझनो(उलझनों ) में फसता गया.....

    एक नक्सली /आतंकी की हताशा फलीभूत हुई है इस रचना में .हिंदी की बिंदी /चन्द्र बिंदु का अपना सौन्दर्य बोध है पटा नहीं क्यों अनुस्वार /अनुनासिक से लोग छिटक रहें हैं .

    हम नव -मीडिया के पुरोधा हैं वर्तनी तो हमें सुधारनी ही होगी सम्पादक भी हैं न .सबका सहयोग अपेक्षित है .

    बहुत बढ़िया रचना है आशा सक्सेना जी की .बधाई .

    ReplyDelete
  4. आंचलिक भाषा का मार्दव एवं सौन्दर्य लिए हुए है यह सहज रचना .बधाई .

    कथरी
    देवेन्द्र पाण्डेय
    बेचैन आत्मा

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  5. बढिया व्यंग्य विनोद वैसे बात वैसे ही जैसे कोई ये कहे बरसों की शोध से सिद्ध हुआ सैर करना सेहत के लिए अच्छा है .पैसे पेड़ पे न लगें देश के लिए यही अच्छा है .पेड़ को प्रजातंत्र की तरह जड़ से उखाड़ के ले जायेंगे लोग .
    ram ram bhai
    मुखपृष्ठ

    मंगलवार, 25 सितम्बर 2012
    आधे सच का आधा झूठ

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  6. आलिंगन आबध्द(आबद्ध ) युगुल(युगल ) तब
    प्रणय पाश में है बँध जाता,

    बढ़िया प्रस्तुति ,समय ठहर उस क्षण है जाता


    समय ठहर उस क्षण,है जाता,


    dheerendra

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  7. गुण से विहीन हैं
    अवगुण की खान हैं..............अवगुण का पर्याय वाची अब कोयला हो गया
    जेबों में रहते,
    इनके भगवान हैं/इनकी दुनिया का
    नया विज्ञान है
    दिन में इन्सान हैं

    रात को शैतान हैं.......दिन में माला जपत हैं ,रात हनत हैं गाय .... /न कोई धर्म है
    न ही ईमान है
    मुफ्त में करते
    नही अहसान(एहसान ) हैं/....................इनके स्साले बहनोई और फूफा सब शैतान हैं .../देश का गिरवीं रखते ईमान है ...मेरे देश के नेता बड़े महान हैं .........नेता माने प्रेत ....कविता में मात्रा की छूट है भाई हो गया "प्रेता "...आजकल बहुत प्रखर(बहुत तेज़ ) आंच लिए आ रही है आपकी हर रचना .बधाई .
    "नेता सचमुच महान हैं" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक)
    उच्चारण
    रोटी है,
    बेटी है,
    बँगला है,
    खेती है,
    सभी जगह
    घोटाले हैं,
    कपड़े उजले हैं,
    दिल काले हैं,


    ram ram bhai

    मुखपृष्ठ

    मंगलवार, 25 सितम्बर 2012
    आधे सच का आधा झूठ

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  8. कहां तक थामेंगे हाथ सफ़र-ए-ज़िन्दगी में ।
    वो जो उम्र का हर लम्हा आज जिए बैठै हैं ॥

    वो क्योंकर आने लगे अब मेरे अलाव पर ।
    जो अपने दामन में आफ़ताब लिए बैठै हैं ।

    हर अश आर खूब सूरत काबिले दाद .मर्बेहया.
    ram ram bhai
    मुखपृष्ठ

    मंगलवार, 25 सितम्बर 2012
    आधे सच का आधा झूठ
    http://veerubhai1947.blogspot.com/

    ReplyDelete
  9. कहां तक थामेंगे हाथ सफ़र-ए-ज़िन्दगी में ।
    वो जो उम्र का हर लम्हा आज जिए बैठै हैं ॥

    वो क्योंकर आने लगे अब मेरे अलाव पर ।
    जो अपने दामन में आफ़ताब लिए बैठै हैं ।

    हर अश आर खूब सूरत काबिले दाद .मर्बेहया.
    ram ram bhai
    मुखपृष्ठ

    मंगलवार, 25 सितम्बर 2012
    आधे सच का आधा झूठ
    http://veerubhai1947.blogspot.com/

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  10. हिंदी पखवाड़े में ,हिंदी के चौमासे में दोहों की बारिश .आनंद वर्षण कर दियो .मन हर्षायो .

    अरुण कुमार निगम (हिंदी कवितायेँ)
    TUESDAY, SEPTEMBER 25, 2012

    दोहे – हिन्दी

    [दोहा – प्रथम और तृतीय (विषम) चरणों में 13 मात्राएँ. द्वितीय और चतुर्थ (सम) चरणों में 11 मात्राएँ . प्रत्येक दल में 24 मात्राएँ. अंत में एक गुरु ,एक लघु.]

    ReplyDelete
  11. हर आदमी में होतें हैं दस बीस आदमी ,जिसे भी देखना दस बीस बार देखना .अब तो राजनीति में भी सिर्फ मुखोटे ही हैं बोले तो रोबोट .बढ़िया प्रस्तुति .

    .... नकाब -- संजय भास्कर
    संजय भास्करatआदत....मुस्कुराने की !

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  12. ये राजनीति

    कुल की अव -नीति

    कर ले प्रीती .

    मार दिया तुक्का हमने भी भाई .

    बढ़िया हाइकु लाये हो .

    ,
    ram ram bhai
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    मंगलवार, 25 सितम्बर 2012
    आधे सच का आधा झूठ

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  13. शाम
    श्याम

    जप लो
    नाम

    बोल
    राम

    तू ही
    धाम

    सुर को
    थाम

    खोल
    जाम

    क्या है
    काम

    सुबहो शाम ,

    कर सलाम

    दिल को थाम,

    बन गुलाम .

    सुर को साध ,

    कर प्रणाम .

    बढ़िया बंदिश है भाई साहब .बधाई .एकाक्षरी पर कब आओगे .

    ,
    ram ram bhai
    मुखपृष्ठ

    मंगलवार, 25 सितम्बर 2012
    आधे सच का आधा झूठ

    शाम, श्याम ...
    (दिगम्बर नासवा)
    स्वप्न मेरे................

    ,

    ReplyDelete
  14. मूत और गोबर की सारी गंध उठाए
    हवा बैल के सूजे कंधे से टकराए
    खाल उतारी हुई भेड़-सी
    पसरी छाया नीम पेड़ की।
    डॉय-डॉय करते डॉगर के सींगों में
    आकाश फँसा है। उपकृत हुए आपने कवि धूमिल को सुनवाया -संसद से सड़क तक के रचनाकार से रु -बा -रु करवाया जिन्होनें तब कहा था -

    गणतंत्री चूहे प्रजा तंत्र को कुतुर कुतुर (कुतर कुतर )के खा रहें हैं .........शुक्रिया ...

    ReplyDelete
  15. सफलता के लिये कोई लिफ्ट नही(नहीं ) जाती इसलिये सीढ़ियों से ही जाना पड़ेगा। सार्थक सन्देश रुकना नहीं बढ़ते जाना है .....हर बाधा से टकराना है .
    ,
    ram ram bhai
    मुखपृष्ठ

    मंगलवार, 25 सितम्बर 2012
    आधे सच का आधा झूठ

    ,

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  16. बेहद उम्दा चर्चा .........मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिए आपका बहुत बहुत आभार ....... रविकर जी!

    ReplyDelete
  17. अत्यन्त पठनीय चर्चा..

    ReplyDelete
  18. बहुत सुंदर चर्चा !
    बेहतरीन लिंक्स !

    ReplyDelete
  19. गंगा-दामोदर ब्लॉगर्स एसोसियेशन
    बधाई !

    ReplyDelete
  20. देवघर के सत्संग आश्रम में भगदड़, 9 की मौत

    भीड़ को नियंत्रित करने के साधन होने चाहिये
    सरकार को बैरिकेडिंग रास्तों में करनी चाहिये
    आने का एक अलग और जाने का एक अलग
    रास्ता जरूर ऎसी जगहों पर बनाना चाहिये
    आदमी को मरने से पहले बचाना चाहिये !

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  21. कथरी
    देवेन्द्र पाण्डेय
    बेचैन आत्मा

    बहुत उम्दा रचना !

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  22. पेड़ पर नहीं उगते पैसे क्‍या ? उगते हैं, उगते हैं, उगते हैं
    नुक्कड़

    समझ में आ गया जी
    अब मैं भी पेड़ लगाउंगा
    पैसे लगना शुरू हो गये हैं
    किसी को नहीं बताउंगा
    मन्मोहन को भी एक पत्ता
    सबूत के तौर पर
    तोड़ कर दे के आउंगा !

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  23. गाँठ पड़ना ठीक है !
    संतोष त्रिवेदी
    बैसवारी baiswari

    बाँध ली मैने ये बात
    आपकी गाँठ की तरह
    गाँठ पड़ गयी अगर
    खोलूंगा ही नहीं मगर
    जुड़ा रहूँगा पास पास
    दूर भी नहीं जाउंगा
    और रहूंगा भी बेखबर !

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  24. बहुत सुन्दर चर्चा है काफी पढ़ने योग्य लिंक मिले.... समयचक्र के माध्यम से पंडितजी के लोकगीत को चर्चा में स्थान देने के लिए आभारी हूँ ...

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  25. "नेता सचमुच महान हैं" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक)
    उच्चारण

    बहुत सुंदर !

    कुछ भक्त चमचों के ये
    खुद होते ये भगवान हैं
    भक्त इनके और
    ये भक्तों के करते
    रहते गुणगान हैं !

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  26. .......... नकाब -- संजय भास्कर
    संजय भास्करatआदत....मुस्कुराने की !

    बहुत खूब जनाब
    जरा इसे भी सुनिये आप
    आप चेहरे पर कुछ
    नकाब देख कर आये हैं
    इसलिये इतना भड़भड़ाये हैं
    यहाँ तो चेहरे मिलते ही नहीं
    सबके चेहरे नकाब पे होते हैं
    हम चेहरे हटा के धो लेते हैं
    बेनकाब कोई नहीं होते हैं !

    ReplyDelete
  27. मेरा आकाश
    मनोज कुमार
    विचार

    सुंदर रचना !

    ReplyDelete
  28. गाँव : धूमिल
    मनोज कुमार
    राजभाषा हिंदी

    वाह !!
    बहुत सुंदर !

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  29. नया परिचय
    (पुत्र)
    बेतरतीब
    WoRds UnSpoKeN

    जेनेटिकैली सुंदर होना ही है !
    पर रविकर को भी तो शुक्रिया कह लो जी !

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  30. टूटे- रिश्ते जोड़ती , गाँठ मिलाती योग
    भले काम के वास्ते ,इसका करें प्रयोग
    इसका करें प्रयोग,आप हर गठबंधन में
    सात उम्र का साथ, बाँधती प्रेमांगन में
    जीवन के दिन चार, न कोई साथी छूटे
    गाँठ मिलाती योग , जोड़ती रिश्ते टूटे ||

    ReplyDelete
  31. बहुत सुंदर चर्चा

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  32. आप एग्रीगेटर की कमी नहीं खलने देते

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  33. रोटी है,
    बेटी है,
    बँगला है,
    खेती है,
    सभी जगह
    घोटाले हैं,
    कपड़े उजले हैं,
    दिल काले हैं,... सुंदर और स्पस्ट

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  34. बढिया चर्चा
    एक से बढकर एक लिंक्स

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  35. बढिया चर्चा.

    aabhar.

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  36. बढ़िया लिंक्स, अच्छी चर्चा

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  37. चर्चा मंच पर कई लिंक्स पढने को मिलीं | मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार|
    आशा

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  38. बहुत सुन्दर चर्चा बढ़िया सूत्र रविकर भाई बहुत बहुत बधाई आपको

    ReplyDelete
  39. बहुत ही सुंदर चर्चा | मेरी रचना को शामिल करने के लिए आभार | बहुत ही उम्दा लिंक्स का संयोजन |

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  40. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति
    आभार

    ReplyDelete
  41. रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय ।
    टूटे से फिर ना जूड़े, जूड़े गाँठ परि जाय ।।
    ----- ।। रहीम ।। -----

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  42. बहुत सुन्दर चर्चा बढ़िया सूत्र
    मेरे पोस्ट को शामिल करने के लिये हादिक आभार,,,,,

    RECENT POST : गीत,

    ReplyDelete
  43. मेहनत आपकी और मीठा फल हम खातें हैं, धन्यवाद

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

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चर्चा - 2817

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