चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Friday, September 28, 2012

गैरों का दुष्कर्म, करे खुद को भी लांछित- चर्चा मंच 1016




एकताल

Rahul Singh  


मैं हूँ ना!!

चला बिहारी ब्लॉगर बनने 


ज़लजला(एक भीषण परिवर्तन) ((क)वन्दना(३) गुरु-वन्दना !! हे गुरु कृपा कर दीजिये !!

Devdutta Prasoon  


रचना जब विध्वंसक हो !

संतोष त्रिवेदी 
विध्वंसक-निर्माण का, नया चलेगा दौर ।
 नव रचनाओं से सजे, धरती चंदा सौर ।
धरती चंदा सौर, नए जोड़े बन जाएँ ।
नदियाँ चढ़ें पहाड़, कोयला कोयल खाएं
होने दो विध्वंस, खुदा का करम दिखाते  ।
धरिये मन संतोष,  नई सी रचना लाते ।।



♥ गणेशोत्सव पर विशेष ♥ (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


 ♥ गणेशोत्सव पर विशेष ♥
मित्रों! इन दिनों गणेशकोत्सव की धूम है!
इस अवसर पर
मेरी जीवन संगिनी
श्रीमती अमर भारती के स्वर में!
मेरी लिखी हुई यह गणेश वन्दना सुनिए
और आप भी साथ-साथ गाइए!
विघ्न विनाशक-सिद्धि विनायक।
कृपा करो हे गणपति नायक!!



भगवान् राम की सहोदरा (बहन) : भगवती शांता परम-17

नव महिने में जो भरे, मानव तन में प्राण |
ग्यारह में क्यों न करे, अपना नव-निर्माण ||1।।

 दस शिक्षक के तुल्य है, इक आचार्य महान |
सौ आचार्यों से बड़ा, पिता तुम्हारा जान || 2।।

  सदा हजारों गुनी है, इक माता का ज्ञान |
  शिक्षा शाश्वत सर्वथा, सर्वोत्तम वरदान ||3।।


  अब आई कॉंग्रेस की बारी

शालिनी कौशिक 

एक हादसा जिसने हिलाकर रख दिया था.

आमिर दुबई  





छोड़ा है मुझको तन्हा बेकार बनाके

"अनंत" अरुन शर्मा 
चले कार-सरकार की, होय प्रेम-व्यापार |
औजारों से खोलते, पेंच जंग के चार |
पेंच जंग के चार, चूड़ियाँ लाल हुई हैं |
यह ताजा अखबार, सफेदी छुई-मुई है |
चश्मा मोटा चढ़ा, रास्ता टूटा फूटा |
पत्थर बड़ा अड़ा, यहीं पर गाड़ू खूटा ||
 लो क सं घ र्ष !
उद्योगों के दर्द की, जायज चिंता मित्र |
नहीं किन्तु हमदर्द ये, इनकी सोच विचित्र |
इनकी सोच विचित्र, मार सूखे की पड़ती |
है किसान हलकान, पड़ी पड़ती भू गड़ती |
सूखे में भी चाह, चलो टी वी फ्रिज भोगो |
सत्ता इनके संग, कमीशन दो उद्योगों ||

मौसम ने ली अंगड़ाई

देवेन्द्र पाण्डेय  

सीधी रेखाएं खिंची, बढ़िया मेड़ मुड़ेर ।
पोली पोली माँ दिखे, मिले उर्वरक ढेर ।
मिले उर्वरक ढेर, देर क्या करना सावन ।
किलकारी ले गूंज, लगे जग को मनभावन ।
होय प्रफुल्लित गात, गजब हरियाली देखा ।
अब तो मानव जात, पकड़ ले सीधी रेखा ।

आंसू..

रश्मि 

आंसू आंशुक-जल सरिस, हरे व्यथा तन व्याधि ।
समय समय पर निकलते,  आधा करते *आधि ।
*मानसिक व्याधि

घर में पिटाई क्यों सहती हैं बाहर बोल्ड रहने वाली महिलायें ?

DR. ANWER JAMAL 
 Blog News  

कहना चाहूँ कान में, मेहरबान धर कान |
दिखता है जो सामने, मत दे उस पर ध्यान |
मत दे उस पर ध्यान, मजा ले आजादी का |
मर्द सदा व्यवधान, विकट बंधन शादी का |
पिटते कितने मर्द, मगर मर्दाना छवि है |
होते नित-प्रति हवन, यही तो असली हवि है |||



...और वो अकेली ही रह गई

बड़ी मार्मिक कथा यह, प्रिया करे ना माफ़ |
परिजन को करनी पड़े, अपनी स्थिति साफ़ |
अपनी स्थिति साफ़, किया बर्ताव अवांछित |
गैरों का दुष्कर्म, करे खुद को भी लांछित |
मात-पिता तकरार, हुई बेटी मरियल सी |
ढोई जीवन बोझ, नहीं इक पल को हुलसी ||

Politics To Fashion
आयेगा उत्कृष्ट अब, रहो सदा तैयार ।
काँटा चम्मच हाथ में, मजेदार उपहार ।
मजेदार उपहार, वाह युवती की इच्छा ।
मृत्यु सुनिश्चित देख, किन्तु देती है शिक्षा ।
होना नहीं निराश, जगत तुमको भायेगा ।
जैसा भी हो आज, श्रेष्ठ तो कल आएगा ।।

मेरी कविता

आशा बिष्ट 

टूटा दर्पण कर गया, अर्पण अपना स्नेह ।
बोझिल मन आँखे सजल, देखा कम्पित देह ।
देखा कम्पित देह, देखता रहता नियमित ।
होता हर दिन एक, दर्द नव जिस पर अंकित ।
कर पाता बर्दाश्त, नहीं वह काजल छूटा।
रूठा मन का चैन, और यह दर्पण टूटा ।।

बस तुम ....

Anupama Tripathi 

कान्हा कब का कहा ना, कितना तू चालाक ।
गीता का उपदेश या , जमा रहा तू धाक ।
जमा रहा तू धाक,  वहाँ तू युद्ध कराये ।
किन्तु  कालिमा श्याम, कौन मन शुद्ध कराये ।
तू ही तू सब ओर, धूप में छाया बनकर ।
तू ही है दिन-रात, ताकता हरदम रविकर ।।

हो रहा भारत निर्माण ( व्यंग्य कविता )


क्या भारत निर्माण है, जियो मित्र लिक्खाड़ ।
खाय दलाली कोयला, रहे कमीशन ताड़ ।
रहे कमीशन ताड़ , देश को गर बेचोगे ।
फिफ्टी फिफ्टी होय, फिरी झंझट से होगे ।
चलो घुटाले बाल, घुटाले को दफनाना ।
आयेगा फिर राज,  नए गांधी का नाना ।।

सियानी गोठ

अरुण कुमार निगम  
राख राख ले ठीक से, रखियाना हर पात्र |
सर्वाधिक शुद्धता लिए, मिलती राखी मात्र ||



बधाई हो!! मनमोहनजी बड़े हो गए!!!


  दो-स्वास्थ्य-चर्चा  

काश,बर्फी के कानों की जांच हुई होती !

Kumar Radharaman at स्वास्थ्य - 1 hour ago

क्या है यह बीमारी डिश (पहली और दूसरी किस्त संयुक्त )

Virendra Kumar Sharma 


दो घुमक्कड़ 

हर्षिल सेब का बाग व गंगौत्री से दिल्ली तक लगातार बस यात्रा Harsil Apple Garden, Bus journey from Gangautri to Delhi


दक्षिण भारत का सुहाना और धार्मिक सफर ,Tour of south india

Manu Tyagi  
yatra  

60 comments:

  1. हम मरें भूख , महंगाई, गरीबी , बदहाली से
    और वो ख़ामोशी ओढ़े ,कोयले की दलाली से
    दाग अच्छे है ! कोयले से भी न टूटा ईमान
    अबे चुप रहो ! हो रहा भारत निर्माण .....

    इटली से आया है एक रोबोटीय मचान ,

    अबे चुप रहो ,मेरा भारत महान .

    बढिया व्यंजना है विलुप्त प्राय सरकार की .
    हो रहा भारत निर्माण ( व्यंग्य कविता )
    मुकेश पाण्डेय "चन्दन"

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  2. बहुत बढ़िया लिंकों के साथ सन्तुलित चर्चा करने के लिए रविकर जी का आभार!

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  3. मोबाइल से जुडी है आपके कानों की सेहत ,शोर से जुडी है धमनी की हरारत .ज्यादा शोर में रहने से धमनी में अव्रोश पैदा होता है ब्लड प्रेशर बढ़ता है .

    कानों के स्वास्थ्य पर इससे ज्यादा व्यापक जानकारी वाला आलेख हमने इससे पहले नहीं पढ़ा है .विस्तृत जानकारी के लिए शुक्रिया .इत्तेफाक है बर्फी फिल्म आज ही देखी है जिसका सन्देश है -एक गूंगे बहरे युवक और एक आत्म -विमोही युवती के बीच यदयपि शब्द नहीं हैं लेकिन सम्वाद मौजूद हैं ,दोनों एक दूसरे की हरारत को समझतें हैं लेकिन जिनके साथ लडकी को यह समझ के ब्याह दिया जाता है कि वहां यह बेहतर रहेगी वहां दोनों पति -पत्नी के बीच भाषा तो है संवाद नहीं है .औपचारिकताएं हैं एक घर में रहने निभाने की .

    बढ़िया आलेख लेकर आये राधा रमण जी .बधाई .

    दो-स्वास्थ्य-चर्चा
    काश,बर्फी के कानों की जांच हुई होती !
    Kumar Radharaman at स्वास्थ्य - 1 hour ago

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  4. बधाई हो!! मनमोहनजी बड़े हो गए!!!
    Cartoon, Hindi Cartoon, Indian Cartoon, Cartoon on Indian Politcs: BAMULAHIJA


    लेकिन दोस्त बैठते अभी भी इटली निर्मित मचान पे हैं .

    ReplyDelete

  5. बधाई हो!! मनमोहनजी बड़े हो गए!!!
    Cartoon, Hindi Cartoon, Indian Cartoon, Cartoon on Indian Politcs: BAMULAHIJA


    लेकिन दोस्त बैठते अभी भी इटली निर्मित मचान पे हैं .

    ReplyDelete
  6. मौसम ने ली अंगड़ाई
    देवेन्द्र पाण्डेय
    बेचैन आत्मा

    खेत बजे शहनाई !

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  7. परछाईं सा जो सदा साथ चले ....
    साथ साथ उड़े भी ...
    हर लम्हा ...हर घड़ी ...हर पल .....
    मन के उजाले में ....
    मन के अंधेरे में भी ...
    जो रक्षा करे ....
    बस तुम ....लाली मेरे लाल की जीत देखूं उत लाल ,.......सुन्दर मनोहर प्रस्तुति .

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  8. दिल टूट गया आवाज़ न हुई ,किरचे इतने यहाँ वहां बिखरे ,किसी को खबर न हुई ....बढ़िया प्रस्तुति ,ब्लॉग की पहली सालगिरह मुबारक .


    मेरी कविता
    आशा बिष्ट
    शब्द अनवरत...!!!

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  9. आने वाले को आना होगा ,

    जाने वाले को जाना होगा ,

    कल भी कितना सुहाना होगा ,

    अब न कोई बहाना होगा .
    बहुत बढ़िया रचना है -सर्वोत्तम की प्रतीक्षा करो ....

    The Story of Young Woman and Fork
    SM
    Politics To Fashion

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  10. छांट छांट कर नगीने लाये हैं आप
    धन्यवाद मेरी यात्रा को शामिल करने के लिये

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  11. और वो अकेली ही रह गई बाल यौन शोषण के एक और आयाम घरेलू कलह पर प्रकाश डालती है .सौ फीसद खरी कहानी कहानी कला के तत्वों पर खरी .

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  12. जब तलाक की अर्जी दे दी और पुलिस में शिकायत भी दर्ज़ करवा दी घरेलू हिंसा की फिर यह तो कुसूर हमारी लचर सामाजिक व्यवस्था और उससे भी लचर मृत प्राय :व्यवस्था का है न कि बोल्ड होने का .आपके शीर्षक की कथा के साथ संगती नहीं बैठती है .क्या कहना चाहते हैं आप ?

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  13. लिटमस पेपर टेस्ट प्रेम का कर लेना चाहती है कवियित्री .सुन्दर रचना

    .आंसू..
    रश्मि
    रूप-अरूप

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  14. दक्षिण भारत का सुहाना और धार्मिक सफर,
    Tour of south india
    Manu Tyagi
    yatra

    हम भी चल रहे हैं
    आपकी ब्लाग ट्रेन में !

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  15. दो घुमक्कड़
    हर्षिल सेब का बाग व गंगौत्री से दिल्ली तक लगातार बस यात्रा Harsil Apple Garden, Bus journey from Gangautri to Delhi
    जाट देवता का सफर -

    अरे तीन रुपिये किलो सेब
    लूट हो गयी भाई ये तो !

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  16. क्या है यह बीमारी डिश (पहली और दूसरी किस्त संयुक्त )
    Virendra Kumar Sharma
    कबीरा खडा़ बाज़ार में

    आपका भी जवाब नहीं !

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  17. घोटाला - है रिश्वत - भ्रस्ठाचार (भ्रष्टाचार )बढा है, .......भ्रष्टाचार
    जनता की बिगड़ी हालत, सरकार बनाके,

    धड़कन को मेरी साँसों, को काम यही है,
    जख्मों को रक्खा मुझमे(मुझमें ), त्योहार बनाके, ..........मुझमें

    बहुत सशक्त रचना है .युवा कवि भविष्य के लिए अपार संभावनाएं छिपाए है अपनी कलम में .

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    Replies
    1. सर तहे दिल से शुक्रिया आप सभी आदरणीय गुरुजनों का आशीर्वाद बना रहे .

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  18. काश,बर्फी के कानों की जांच हुई होती !
    Kumar Radharaman at स्वास्थ्य - 1 hour ago

    बहुत उपयोगी !

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  19. न जाने किस तरह तो रात भर छप्पड़ बनातें हैं ,

    सवेरे ही सवेरे आंधियां ,फिर लौट आतीं हैं .

    यही है बुधिया का असल भारत .बहुत सशक्त रचना है "चाँद और ढिबरी ",बचपन की ढिबरी और लालटेन याद आगई .वो चूने का कच्चा पक्का मकान ,वो पिताजी का झौला ,सुरमे मंजन का ,वो छज्जू पंसारी से रोज़ चार आने का कोटोज़म खरीदना ,लिफ़ाफ़े रद्दी में बेचके आना ,माँ के कहे उसी दूकान पे ,दोस्तों से आँख बचाते ,सब कुछ तो याद आगया ये कविता पढके .

    पांचवीं से बारवीं कक्षा तक का दौर (१९५६-१९६३ )याद आगया .

    वही है हिन्दुस्तान आज भी .फिर भी रोज़ होता है यहाँ भारत बंद .

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  20. ज़लजला(एक भीषण परिवर्तन) ((क)वन्दना(३) गुरु-वन्दना !! हे गुरु कृपा कर दीजिये !!
    Devdutta Prasoon
    साहित्य प्रसून
    बहुत ही सुंदर !

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  21. रचना जब विध्वंसक हो !
    संतोष त्रिवेदी
    बैसवारी baiswari

    है क्या पास में करने को
    रचना को अगर कोई फोड़ने
    को जा रहा हो
    विध्वंसक बना रहा हो
    चुप रहते हों जहाँ सभी
    वहाँ एक शब्दों का बम
    कहीं बना रहा हो
    दिखता नहीं फिर भी
    कहीं कोई मरता हुआ
    शब्दों के तीर कोई
    कितना ही चला रहा हो !

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  22. भाईसाहब ये तमाम सेतु पढ़े इनकी काव्यात्मक अभिव्यक्ति भी .सोने पे सुहागा और उससे आगे क्या होता है भला वह सभी कुछ मिल गया .बधाई .

    गैरों का दुष्कर्म, करे खुद को भी लांछित-

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  23. ♥ गणेशोत्सव पर विशेष ♥ (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

    वाह!
    शब्द और स्वर
    दोनो बहुत ही सुंदर !

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  24. भगवान् राम की सहोदरा (बहन) : भगवती शांता परम-17
    अदभुत !

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  25. अनामिका की सदाएं और आप एक साथ छा गईं .गूंजित हैं टिप्पणियाँ और मूल लेखन और उसकी लेखिका .


    एक अध्याय और - उपन्यास ('एक थी तरु' )के समापन के बाद !
    प्रतिभा सक्सेना
    लालित्यम्

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  26. एक हादसा जिसने हिलाकर रख दिया था.
    आमिर दुबई
    मोहब्बत नामा
    सब ऊपर वाले के हाथ में है !

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  27. आंच-120 : चांद और ढिबरी
    मनोज कुमार
    मनोज

    जितनी सुंदर कविता उतना सुंदर ही विश्लेशण भी !

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  28. छोड़ा है मुझको तन्हा बेकार बनाके
    "अनंत" अरुन शर्मा
    दास्ताँने - दिल (ये दुनिया है दिलवालों की )

    क्या मिल गया आखिर तुझको
    मुझको बस एक उल्लू बनाके !!

    बहुत सुंदर !

    ReplyDelete
    Replies
    1. आदरणीय सुशील सर मेरी रचना को जब भी चर्चा मंच पर स्थान मिलता है बड़ी ख़ुशी होती है और उस पर आपकी टिप्पणियां सोने पे सुहागा का काम करती हैं. शुक्रिया

      Delete
  29. अब आई कॉंग्रेस की बारी,

    हिन्दुस्तान की कब आयेगी बारी ?


    ''देश बेचकर खाने का जिस पर आरोप लगाते हैं ,
    परदे की पीछे उससे ही दोस्ती निभाते हैं .
    हम नेता हैं देश के मांगे सबकी खैर
    न काहू से दोस्ती न काहू से बैर.''

    आखिरी दो लाइनें बस यूं कर लें -

    हम नेता हैं देश के खाएं सब कुछ बेच ,

    इटली से है दोस्ती ,अपने घर से वैर .

    अब आई कॉंग्रेस की बारी
    शालिनी कौशिक
    ! कौशल !

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  30. मौसम ने ली अंगड़ाई
    देवेन्द्र पाण्डेय
    बेचैन आत्मा

    इसके बाद की पोस्ट पर कमेंट का लिंक कहाँ छुपा दिया?
    इसलिये यहीं पर लिख दे रहे हैं !
    तीनो फोटो में बैचेन आत्मा की फोटो
    सबसे सुंदर नजर आ रही है
    दो फोटो में हमको पता चल गया है
    रविकर की कविता आ रहे है !

    ReplyDelete
  31. अब आई कॉंग्रेस की बारी
    शालिनी कौशिक
    ! कौशल !
    देश क्या भाजपा और कांग्रेस की लुगाई है जिसे दोनों बारी बारी से भुगताएंगे.बहुत ही तंग दायरा है सोच का शब्द चयन का .
    असल सवाल गुम है देश की बारी कब आयेगी

    क्या जनता यूं ही सब कुछ लुटायेगी ?

    ReplyDelete
  32. आंसू..
    रश्मि
    रूप-अरूप

    बहुत सुंदर!

    आँसू में आसूँ अगर
    मिला दिया जाये
    देखिये क्या पता
    नमकीन कुछ
    मीठा हो जाये !

    ReplyDelete
  33. घर में पिटाई क्यों सहती हैं बाहर बोल्ड रहने वाली महिलायें ?
    DR. ANWER JAMAL
    Blog News
    पत्नियां पिटती है
    ये तो आप बता रहे हैं
    कैसे पिट जाती होंगीं
    ये हम नहीं समझ
    अभी पा रहे
    वैसे ज्यादातर
    पति भी पिटा
    करते हैं कई जगहों पर
    ये बात तो आप
    हमें नहीं बता रहे !

    ReplyDelete
  34. आनुप्रासिक छटा बिखेर दी है आपने इन पंक्तियों में गीत तो खुद ही गायन हार भी बना हुआ है गेयता से भरा हुआ है .स्वर भी अर्थ भी प्रस्तुति भी .धुन और बंदिश दोनों सहज माधुर्य से संसिक्त .

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  35. बस तुम ....
    Anupama Tripathi
    anupama's sukrity.

    वाह !
    कोई कहाँ जा कर पिटे
    कोई तो जगह कहीं बचे !

    ReplyDelete
    Replies
    1. समस्त भुवन मे प्रभु का संरक्षण ...!!

      बहुत आभार सुशील जी ।

      Delete
  36. आज के लेख में हर्षिल में बगौरी गाँव जाकर सेब के बाग से सेब खरीदना व बस में लगातार चौबीस घन्टे सफ़र कर घर वापसी तक का वर्णन किया है। चलो बताता हूँ, मुझे गंगौत्री में आये हुए लगभग एक सप्ताह पूरा हो रहा था, घर पर मम्मी से फ़ोन पर बात की तो उन्होंने कुछ जरुरी काम बता दिया था जिस कारण घर जाना पड रहा था। वैसे तो गंगौत्री से दिल्ली जाने का मन बिल्कुल भी नहीं हो रहा था लेकिन क्या करे? काम-धाम भी जरुरी है, जिसके बिना जीवन निर्वाह नहीं हो सकता है। जिस समय मैंने यह यात्रा की थी उस समय मैं कक्षा 10 के बच्चों को गणित का ट्यूशन अपने घर पर दिया करता था। बच्चों की पहली परीक्षा तो हो गयी थी। उनकी चिंता नहीं थी। घर पर मम्मी अकेली रह गयी थी। बिजली का बिल मैंने एक साल से भरा नहीं था। जिस कारण बिजली विभाग का एक कर्मचारी घर आया था और बोला था कि जल्दी बिल भर दो नहीं तो घर-घर औचक निरीक्षण अभियान में आपका बिजली का केबिल उतार दिया जायेगा। यह अचानक की मुसीबत जानने के बाद मुझे एक दो दिन में ही घर पहुँचना था।

    दोस्त बहुत बिंदास लिखते हो और अपनों को इधर उधर उलझाने से भी बचाए रहते हो एक साथ दो यात्रा एक सामाजिक और दूसरी पर्यटन वाली .बधाई इस खूब सूरत रिपोर्ताज के लिए .
    दो घुमक्कड़
    हर्षिल सेब का बाग व गंगौत्री से दिल्ली तक लगातार बस यात्रा Harsil Apple Garden, Bus journey from Gangautri to Delhi
    जाट देवता का सफर -

    ReplyDelete
  37. मेरी कविता
    आशा बिष्ट
    शब्द अनवरत...!!!

    बहुत सुंदर रचना !

    दर्पण बहुत ही सीधा था
    सादगी से टूट गया
    वरना अब तो बस
    आवाज आती है
    टूटने की कई बार
    पर दर्पण टूटता नहीं
    ठहाके लगाता है !

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  38. बहुआयामी चर्चा है |
    आशा

    ReplyDelete
  39. बहुत सुन्दर चर्चा

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  40. वाह ... बेहतरीन प्रस्‍तुति।

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  41. सर आज तो एक से बढ़कर एक लिंक्स चर्चा में सम्मिलित किया है आपने, मेरी रचना को स्थान दिया वो भी अपने उम्दा दोहों के साथ मेरा दिन बन गया सर, तहे दिल से शुक्रिया

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  42. पोस्ट अच्छी है.

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  43. शुक्रिया चर्चा मंच टीम.मोहब्बत नामा का लिंक देने के लिए दिल से शुक्रिया.आज छुट्टी होने के बावजूद भी मै चर्चा मंच पर आया हूँ.

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  44. meri pravishti ko sthan dene ke liye aapka punah dhnywaaad ravikar ji..bahut hi achchhe links..

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  45. बहुत बढ़िया विस्तृत परिश्रम से लगाईं चर्चा वाह हार्दिक बधाई रविकर भाई

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  46. बहुत ही विस्तृत चर्चा, रसमयी..

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  47. बेहतरीन लिंकों से सजी सुंदर चर्चा,,,,,

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  48. बहुत बहुत आभार रविकर जी आपको मेरी रचना मे गीता का सार दिखा ...!!आध्यात्मिक आलेख पढ़ते पढ़ते ही इसे लिखने की प्रेरणा मिली थी ....!!

    पुनः आभार ...!!

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  49. मैं हूँ ना!!
    चला बिहारी ब्लॉगर बनने
    चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    पहले सोचा बीबी को भी पढ़वा देता हूँ ये सुंदर लघु कथा फिर सोचा रहने दो मैं थोडे़ मैं हूँ ना :)).

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  50. बहुत सुंदर चर्चा |
    कृपया इस समूहिक ब्लॉग में आए और इस से जुड़ें|
    काव्य का संसार

    ReplyDelete
  51. बहुत सुंदर चर्चा सजाई है आपने...मेरी रचना शामि‍ल करने के लि‍ए धन्‍यवाद

    ReplyDelete
  52. अब आई कांग्रेस की बारी

    ब्लॉग जगत में बहनापा है यह अच्छी बात है मान लो दो बहनें हैं एक एम ए हिंदी है ,भाषा प्रवीण है .दूसरी वकील है.एक के पास अच्छी भाषा है दूसरी के पास तर्क है . दोनों मिलके एक तर्क खडा करतीं हैं .चलो यह भी ठीक है .लेकिन इस तर्क के कोई सामाजिक सरोकार भी तो होना चाहिए .यह महज़ एक तमाशाई प्रवृति है .दो मुर्गों को आपस में लड़ वाना है जब एक हार जाए तो कहना है चौधरी साहब आपका मुर्गा तो हार गया .

    "अब कांग्रेस की बारी है "शीर्षक में मानसिक सरोकार कम हैं तमाशबीनी ज्यादा है .देश के सरोकारों से कोई लेना देना नहीं है .यह उसी तरह से है जैसे कोई कहे कि मैं कहता न था देखा ये भी भ्रष्ट है .अब ऊँट पहाड़ के नीचे आया है .
    चलिए मान लिया गडकरी साहब ने कहा भी -मैं नहीं कहता पवार को पर उन्होंने यह तो नहीं कहा कि दूसरे भी ये मुद्दा न उठाएं .

    राजनीति में दो विरोधी एक दूसरे के उस तरह से विरोधी नहीं हैं जैसे दो मुर्गे गर्दन ऊंची करके एक दूसरे को काटतें हैं .इनके आपस में भी सरोकार हैं .भाई चारा है .होता है .होता रहेगा .

    हमारा कहना यह है सच्चा सरोकार रखिए देश के मुद्दों से तमाश बीन मत बनिए .तमाशबीन बनके दूसरों को हड्काने का कोई फायदा नहीं है .

    राष्ट्र ऊपर है व्यक्ति से .

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  53. लिए आइना फिरते हरदम,
    खुद झांकेंगे तब क्या होगा ?

    सामने दर्पण के जब तुम आओगे ,
    अपनी करनी पे बहुत पछताओगे .

    बहुत बढ़िया रचना हर पंक्ति एक चित्र उकेरती है इसका उसका ...

    रचना जब विध्वंसक हो !
    संतोष त्रिवेदी
    बैसवारी baiswari

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  54. छतीसगढ़ अंचल की एक बेहतरीन परम्परा गत कला और कलाकारों से रु -बा -रु करवाया .आभारा एकताल एक लय एक नूखा गाँव नुपूर सा बाजे रे ....

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  55. कितनी ढूँढ बटोर कर ,जमा किये हैं रत्न ,
    उस पर सोंधी छौंक-का कितना-कितना यत्न .
    अभी लगेगा कुछ समय ,पाने में आस्वाद ,
    बंधु ,धन्य है आपका यह आयास-प्रयास !

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