चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Friday, September 07, 2012

बना अहिंसक सिंह, दन्त-नख मिटते रविकर : चर्चा मंच 995

एक में अनेक !

मोर,खरगोश,कछुआ,सांप,शेर 


पंचमेल खिचड़ी पकी, मजेदार स्वादिष्ट |
क्यूँकर व्यर्थ खरचना, श्वेत चार ठो पृष्ट |
श्वेत चार ठो पृष्ट, सर्प रह रह फुफकारे |
कछुवे की हो जीत, हारता शशक दुबारे |
मोर मोइनी सोनि, पटाले सिंह मोहना |
सर्कस चालू अहे, छोडिये  बाट जोहना ||
स्वागत है आप सबका 
Members (900) 

  1

हँसते ठट्ठा मार, दिखे फिर दस जन पथ पर-

Indian lion in Zurich Zoo (Switzerland) Stock Photo - 4911371
दस जन, पथ पर देखिये, नीचे रख कर ईंट ।
बैठे बाल मुँडा रहे, इटालियन कह सीट ।

इटालियन कह सीट, सिंह नाखून कटाए ।
कर कोयला मंजन, दशक से दांत दिखाए ।

बना अहिंसक सिंह,  दन्त-नख मिटते रविकर ।
हँसते ठट्ठा मार, दिखे फिर दस जन-पथ पर ।



2

कौन है यह वाशिंगटन पोस्ट और क्यों मच रहा है हल्ला

वरुण कुमार सखाजी 

 
इटेलियन सैलून में, कटा सिंह नाखून |
पुत्र जन्म पर बट चुका, सन पैतिस में चून |
सन पैतिस में चून, मोहिनी सूरत भाई |
भाई को बहलाय, लकड़ सुंघा बुलवाई |
लकड़ी दिया सुंघाय, आज कोयला हो जाता |
छक्के अमृत-पान, सुबह से पीजा खाता ||


4

क्यूँकी तुम अधूरे हो...

Reena Maurya 


  5

जब पैसे के लिए अंग्रेजी ब्लोगर्स हिन्दी में ब्लोगिंग करने लगेंगे



6

अंतर्जाल का मायाजाल

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur)
जो मेरा मन कहे


7

तालिबान को हथियार और ट्रेनिंग देने वाले ज़ालिम बदनाम क्यों न हुए ? Who was godfather of Taliban ?

DR. ANWER JAMAL 


  8

कैसे लिखी जाती है

Rajesh Kumari  




9

 इश्क के सिक्के

lokendra singh 


Deepti Sharma
स्पर्श


  11

"ग़ज़ल - गुरूसहाय भटनागर बदनाम" (प्रस्तोता- डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')




  12

एक चर्चित ब्लॉगर

केवल राम : 

 
आचार्य परशुराम जी 

ताल पुराना पाय के, दादुर करे गुड़ूप |
टर्राता टर टर टिकत, छोड़े अपना कूप |
छोड़े अपना कूप, मित्रता भाव निभाते |
एक कुंए की बात, बैठ के मन बहलाते |
करे प्रशंसा ढेर, बहुत आये फुदकाना |
पहली पहल सवेर, देखता ताल पुराना ||




Kumar Radharaman
स्वास्थ्य  

  18

लो दीदी राजेश, बधाई देता रविकर -

ज्योतिपर्व पर दिख रहे,  हव्य हृदय उदगार ।
प्रथम काव्य संग्रह दरस, हर्षित हिंद अपार ।
हर्षित हिंद अपार, स्वागतम साधुवाद है ।
सफल विमोचन होय, सितम्बर आठ याद है ।
खंडूरी का स्नेह, समय आया है सुन्दर ।
लो दीदी राजेश,  बधाई देता रविकर ।।


19

परिकल्पना-सम्मान और अपमान !

संतोष त्रिवेदी
नुक्कड़

नुक्कड़ पर हो भर्त्सना, सही संतुलित शब्द |
अच्छाई सह खामियाँ, देखें लिखे दशाब्द |
देखें लिखे दशाब्द, चूक को माफ़ कीजिये |
अनियमतायें व्याप्त, सभी दायित्व लीजिये |
कह रविकर करजोर, बनों न मित्रों थुक्कड़ |
लो कमियों से सीख, करो जगमग फिर नुक्कड़ ||



20

नारी शक्ति :भर लो झोली सम्पूरण से

Virendra Kumar Sharma
ram ram bhai

 चुस्त धुरी परिवार की, पर सब कुछ मत वार |
देहयष्टि का ध्यान कर, सेहत घर-संसार |
सेहत घर-संसार, स्वस्थ जब खुद न होगी |
सन्तति पति घरबार, भला हों कहाँ निरोगी ?
संरचना मजबूत, हाजमा ठीक  राखिये |
सक्रिय रहे दिमाग, पदारथ सकल चाखिये ||

21

चढ़ता उतरता प्यार

38 comments:

  1. बहुत बढ़िया और निष्पक्ष चर्चा!
    आभार रविकर जी!

    ReplyDelete
  2. बहुत बढ़िया और सफल चर्चा!
    आभार रविकर जी!

    ReplyDelete
  3. सुन्दर चर्चा ....संतुलित व सामायिक ......बधाईयाँ जी रविकर साहब ..

    ReplyDelete

  4. बहुत खूब चलिये
    जायें चर्चा में डूब

    प्यार उतार चढा़ रहे हैं
    देखें रविकर आज
    प्यार को कहां कहां
    तक पहुँचा रहे है

    ReplyDelete
  5. 21
    चढ़ता उतरता प्यार
    Mukesh Kumar Sinha
    जिंदगी की राहें -

    बहुत खूबसूरत !

    बिल्कुल जिंदगी
    की तरह किया
    उसने व्यव्हार
    बच्चे की तरह
    खिलकिलाते चढं
    गयी ऊपर
    बूढी़ हो कर
    उतर आई !

    ReplyDelete
  6. 20
    नारी शक्ति :भर लो झोली सम्पूरण से
    Virendra Kumar Sharma
    ram ram bhai

    लाजवाब रहती है :
    वीरू भाई की दवाई
    अगर आपने खाई
    झोला भर शक्ति बनाई
    आदमी की फिर तो
    हो सकती है पिटाई !

    ReplyDelete
  7. 19
    परिकल्पना-सम्मान और अपमान !
    संतोष त्रिवेदी
    नुक्कड़

    बीच बीच में ध्यान भटक जाता है
    अच्छा लगता है जब कोई समझाता है
    उल्लूक वापस पेड़ पर जाकर
    अपनी उसी डाल पर बैठ जाता है
    फिर से देखना शुरू हो जाता है
    रास्ते में कौन इधर और कौन उधर जाता है !

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  8. 18
    लो दीदी राजेश, बधाई देता रविकर -

    रविकर ही नहीं हमको भी सरोकार है
    आने वाला सामने एक उपहार है
    मोतियाँ छाँट कर लाया है ज्योति पर्व
    माला गीतों की बनने को तैयार है !

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  9. 17
    हड्डियां कमजोर कर सकते हैं तेज खर्राटे
    Kumar Radharaman
    स्वास्थ्य

    वाह !
    दूर किसी जगह जा कर सोना
    लगता है रहेगा ठीक !

    बगल में लेटी हुवी
    बीबी अगर खर्राटे भरेगी
    हड्डियाँ अगर रोज रात
    को पतिदेव की हिलेगी
    आज नहीं तो कल
    कमजोर हो ही जायेंगी
    खर्राटे बढ़ते चले अगर तो
    किसी दिन टूट भी जायेंगी !

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    Replies
    1. उल्लू पिटता जा रहा, बड़ी घनेरी धूप |
      खर्राटों से जगे जब, बीबी बदले रूप |
      बीबी बदले रूप, खुले बिन आँखें पिटता |
      खर्राटे दिन-रात, हड्डियाँ रहता घिसता |
      बोले है उल्लूक, रहम हम पर अब करिए |
      रही हड्डियाँ तोड़, तनिक कौवे से डरिये ||

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  10. 16
    गम मेरा झलक गया
    अरुन शर्मा
    दास्ताँने - दिल (ये दुनिया है दिलवालों की )

    वाह जी वाह !
    बहुत अच्छे बलके हो
    बलकना समझा गये
    अपना तो उबल ही रहे थे
    हमको भी उबलना बता गये !

    ReplyDelete
  11. 15
    प्रेम और उपासना
    avanti singh
    गीत अंतरात्मा के

    वाह बहुत सुंदर रचना !!

    इसीलिये लगता है
    अब लोग प्रेम का
    मंदिर बना रहे हैं
    किराये पर पंडित
    रखकर उसमें
    शुबह शाम की
    आरती भी रोज
    करवा रहे हैं !

    ReplyDelete
  12. 13
    आँच –119
    मनोज

    आचार्य परशुराम जी

    बहुत सुंदर
    बह्त ही सटीक है!
    हरीश प्रकाश गुप्त जी से सौ आने सहमत हूँ क्योंकी मैं खुद डमरू बजाता हूँ !

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  13. 12
    एक चर्चित ब्लॉगर
    केवल राम :
    चलते -चलते...!

    अरे वाह !

    हमें मालूम ही नहीं था
    कि चार अक्षर लिखने वाला
    चर्चित यहाँ पूछा जाता है
    इसका मतलब
    लम्बे लम्बे टिपयाने से
    कोई फायदा नहीं हो पाता है !

    ReplyDelete
  14. 11
    "ग़ज़ल - गुरूसहाय भटनागर बदनाम" (प्रस्तोता- डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
    उच्चारण
    बहुत सुंदर गजल
    बदनाम होकर लिख रहे हैं बहुत खूब
    फिर नाम होने की जरूरत क्या है !

    ReplyDelete
  15. 10
    क्यों प्राण प्रियतम आये ना ??
    Deepti Sharma
    स्पर्श

    प्राण प्रियतम आयेंगे सुन
    विरह वेदना का सुंदर गीत
    दूर कर सब शिकायत
    कह उठेंगे जरा बैठो मीत !

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  16. सभी लिंक अच्छे लगे.. यशवंत जी की 'अंतर्जाल' विवेचना रुचिकर लगी.

    ReplyDelete
  17. बहुत बहुत धन्यवाद अंकल हमे शामिल करने के लिये।


    सादर

    ReplyDelete
  18. आभार बंधुवरय़

    ReplyDelete
  19. भाई साहब अब न्यूज़ मेरी तेरी उसकी नहीं होतीं हैं( ये न्यूज़ वाशिंगटन पोस्ट /टाइम की क्यों है ?)न्यज़ इस दौर में ग्लोबल होती है और जो कुछ कहा गया भले वह न कहा जाता तो बेहतर था लेकिन ये काग भगोड़े से रिमोटिया चेहरे और ये सरकार अपनी सी भी तो नहीं लगती .अन्दर से अच्छा ही लगा अपने चिरकुटिया अखबारी लाल क्या ये सच बोल पाते .
    2
    कौन है यह वाशिंगटन पोस्ट और क्यों मच रहा है हल्ला
    वरुण कुमार सखाजी
    All India Bloggers' Associationऑल इंडिया ब्लॉगर्स एसोसियेशन

    ram ram bhai
    शुक्रवार, 7 सितम्बर 2012
    क्या अपपठन (डिसलेक्सिया )और आत्मविमोह (ऑटिज्म )का भी इलाज़ है काइरोप्रेक्टिक में ?

    ReplyDelete
  20. कविता :पूडल ही पूडल
    डॉ .वागीश मेहता ,१२ १८ ,शब्दालोक ,गुडगाँव -१२२ ००१

    जिधर देखिएगा ,है पूडल ही पूडल ,
    इधर भी है पूडल ,उधर भी है पूडल .

    (१)नहीं खेल आसाँ ,बनाया कंप्यूटर ,

    यह सी .डी .में देखो ,नहीं कोई कमतर

    फिर चाहे हो देसी ,या परदेसी पूडल

    यह सोनी का पूडल ,वह गूगल का डूडल .

    (२)ये मालिक ,ये नौकर ,बनें सब हैं सेकुलर ,

    ये वोटों का चक्कर ,क्यों बनते हो फच्चर .

    हो चाहे मंडल या फिर कमंडल ,

    है कुर्सी सलामत ,तो बंडल ही बंडल .


    (३)यह कैसी है पिक्चर ,सभी लगते जोकर ,

    हो क़ानून कैसा ,ये मजहबी चक्कर ,

    अभी शेर -सर्कस ,यूं बोलेगा घुर -घुर,

    है झूठों पे लानत ,बनो तुम भी सच्चर .


    (४)सभी खिडकियों पे ,ये बैठे हैं बंदर ,

    ये धरती भी इनकी ,ये इनका है अम्बर ,

    अपना है डमरू ,है अपना कलंदर ,

    ये सब नाचतें हैं ,इशारों से डरकर .

    (५) क्या राजा -रानी ,क्या कोई चाकर

    सभी बांटते हैं ,अपनों में शक्कर ,

    है बाकी तो धूलि ,और धूप धक्कड़ ,

    यही राजनीति है ,इंडिया की फ्यूडल.


    (६) नहीं कोई ज़ज्बा ,है गैरत है बाकी ,

    खतरनाक चुप्पी ,ये कैसी उदासी ,

    सरकती है जाती ,ये सरकार उनकी ,

    जो फैलाए फ़न से ,लगतें हैं विषधर ,

    (७)ये डी .एन. ए .कैसा ,ये किसका कबूतर ,

    अगर हाथ गोली तो ,हाथी से न डर

    जो खाकी का रूतबा ,उसे हाथ में रख

    फिर बाबा भी खातें हैं ,बच्चों का नूडल .

    प्रस्तुति :वीरेंद्र शर्मा (वीरुभाई ,४३३०९ ,सिल्वरवुड ड्राइव ,कैंटन (मिशगन )
    ४८ १८८ -१७८१

    2
    कौन है यह वाशिंगटन पोस्ट और क्यों मच रहा है हल्ला
    वरुण कुमार सखाजी
    All India Bloggers' Associationऑल इंडिया ब्लॉगर्स एसोसियेशन

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  21. हमें तो दोनों तस्वीरें अपने मौन सिंह रिमोटिया की लगें हैं बहरसूरत "अभिसार त्रिवेदी "का ज़वाब नहीं नन्ना बाल कलाकार भविष्य की अनेक संभावनाएं छिपाए है सब कुछ बनियों "हुसैन "
    एम् .ऍफ़ न बनियों सबको ram ram bhai करियो देवी देवताओं का अपमान न करियो ....
    शुक्रवार, 7 सितम्बर 2012
    क्या अपपठन (डिसलेक्सिया )और आत्मविमोह (ऑटिज्म )का भी इलाज़ है काइरोप्रेक्टिक में ?

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  22. हमें तो दोनों तस्वीरें अपने मौन सिंह रिमोटिया की लगें हैं बहरसूरत "अभिसार त्रिवेदी "का ज़वाब नहीं नन्ना बाल कलाकार भविष्य की अनेक संभावनाएं छिपाए है सब कुछ बनियों "हुसैन "
    एम् .ऍफ़ न बनियों सबको ram ram bhai करियो देवी देवताओं का अपमान न करियो ....ये मिठ्ठू सोनिया जी के तो नहीं हैं ?
    शुक्रवार, 7 सितम्बर 2012
    क्या अपपठन (डिसलेक्सिया )और आत्मविमोह (ऑटिज्म )का भी इलाज़ है काइरोप्रेक्टिक में ?

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  23. अभिसार भाई एक तस्वीर टू इन वन अपने पूडल की भी बनाओ ,विषय की अवधारणा पिता जी समझा देंगे .जियो हज़ारों साल इस हुनर के साथ .

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  24. बढ़िया जानकारी दी है भाई बहु -आयामीय टू इन वन .र्युमेतोइड आर्थ्राइतिस होने पर प्रोटीन बहुल खाद्य यथा दालें ,पनीर ,अंडा ,गोस्त ,छाछ (दही ),टमाटर आदि से परहेजी राहत दिलवाती है .ई -कोड /सी -कोड /फिश आयल के कैप्स्युल्स फायदा करते हैं .चलना बंद नहीं करना है दर्द हो तो हो .और खराटे तो भाई साहब नींद में ही नहीं श्वसन में भी खलल होता है .
    17
    हड्डियां कमजोर कर सकते हैं तेज खर्राटे
    Kumar Radharaman
    स्वास्थ्य


    शुक्रवार, 7 सितम्बर 2012
    क्या अपपठन (डिसलेक्सिया )और आत्मविमोह (ऑटिज्म )का भी इलाज़ है काइरोप्रेक्टिक में ?

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  25. कुछ ऐसे दोस्तों, थी मेरी तकदीर जली,
    चिंगारी भड़की सीने में, मैं बलक* गया. बलक बलक प्रेम अगन में झुलस गया वाह भाई! बहुत बढ़िया अशआर तमाम के तमाम कोई भी शैर भर्ती का नहीं सभी दिल से बलते हुए निकले हैं.आग बल रही है भाई इशक(इश्क) की बलने दो ,जा रही है रूठ के ,जाने दो ,कुछ दे कर ही गई ,अपना क्या ले गई ...

    शुक्रवार, 7 सितम्बर 2012
    क्या अपपठन (डिसलेक्सिया )और आत्मविमोह (ऑटिज्म )का भी इलाज़ है काइरोप्रेक्टिक में ?

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  26. बेहतरीन प्रस्‍तुति।

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  27. चलिए जी आज भी हो गई चर्चा..

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  28. सुन्दर लिंक्स के साथ सुन्दर चर्चा |

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  29. सुन्दर लिंक्स..
    आभार सर..
    :-)

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  30. सुन्दर कविताए ,काबिले तारीफ ।
    मेरी नयी पोस्ट -"क्या आप इंटरनेट पर ऐसे मशहूर होना चाहते है?" को अवश्य देखे ।धन्यवाद ।
    मेरे ब्लॉग का पता है - HARSHPRACHAR.BLOGSPOT.COM

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  31. सुंदर चर्चा
    900 के आंकडे के लिए बधाई.............

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  32. बेहतरीन सुंदर चर्चा,,,,,

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  33. एक से एक रोचक सूत्र और टिप्पणी..

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