चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Tuesday, October 23, 2012

चर्चा मंच --(1041) नवरात्रों एवं दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं


आज की मंगलवारीय चर्चा में आप सब का स्वागत है राजेश कुमारी की आप सब को नमस्ते आप सब का दिन मंगल मय हो 
दुर्गाष्टमी और दशहरे की सभी को शुभकामनाएं 
       अब चलते हैं आपके प्यारे ब्लोग्स पर 

                                 रावण से फेसबुक पर मुन्‍नाभाई की लाइव चैट

                                               रवीन्द्र प्रभात at वटवृक्ष 
                                                                      

बच्चों के संग नवरात्र-दशहरा के रंग!

कविता रावत at KAVITA RAWAT

मेरी यादों को मिटाने की कोशिश में

                                                              Untitled

                                 Asha Saxena at       Akanksha - 

माता वैष्णोदेवी यात्रा - भाग (चरणपादुका से माता का भवन)

प्रवीण गुप्ता at घुमक्कड़ यात्री - GHUMAKKAD YATRI 

शुभ शक्तिपात करो !

Amrita Tanmay at Amrita Tanmay - 

                              अपनों से अपनी सी. . . - आ. संजीव वर्मा 'सलिल'

                                                            NAVIN C. CHATURVEDI at ठाले बैठे - 

पेड़ और प्रकाश संश्लेषण

vandana at तितली - 

वह प्राचीन क़िला

मनोज कुमार at मनोज - 

आँखों मे टूटा समंदर ...

swati at swati 

प्रिये !!

. प्रदीप कुमार साहनी at मेरा काव्य-पिटारा - 

Khamoshi Poetry, Silence Poem in Hindi

पंछी at Hindi 

कोई एक कविता ...

कल भी मिला था...

मन्टू कुमार at मन के कोने से - 

यह भाव देना ह्रदय में ...

सदा at SADA

वहीँ यादें तुम्हारी

सगी मौसी हूँ, कोई सौतेली माँ नहीं !



                                                                               ज़िन्दगी…एक खामोश सफ़र


                                                                                                परिकल्पना
                         सर्दियों का आगाज़ सर्दियों का आगाज़ आ गया 
--------------------------------------------------------------------------------
                                                                         नवगीत की पाठशाला
                         २. फि‍र हम एक हुए घर घर दीप जले, लगता है, 

                                                  

-                        नवरात्रों एवं दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं
बस आज की चर्चा यहीं समाप्त करती हूँ अगले मंगल वार फिर मिलूंगी कुछ नए सूत्रों के साथ तब तक के लिए शुभ विदा बाय बाय 

******************************************************************

38 comments:

  1. बहुत बढ़िया रचना है दोस्त आपकी

    वहीँ यादें तुम्हारी,
    वहीँ आँखें मेरी नम,
    वहीँ बातें तुम्हारी,
    वहीँ पलछिन हैं हरदम,

    वहीँ यादें तुम्हारी
    "अनंत" अरुन शर्मा at दास्ताँने - दिल (ये दुनिया है दिलवालों की ) -

    ReplyDelete
  2. हे माँ!
    विहिंसक वृत्तियों पर वज्रपात करो!
    और सब पर शुभ शक्तिपात करो!

    हे माँ!
    अपने वैभव-विलास युत वक्ष से
    अजात प्रकृति-शिशुओं को दीर्घजात करो !
    और सब पर शुभ शक्तिपात करो!

    पूरी रचना में एक आनुप्रासिक ओज और छटा ,माँ का आवाहन है काल रात्रि के विनाश का .सब पर शक्ति पात का .एक सात्विक उल्लास बुनती है रचना .
    शुभ शक्तिपात करो !
    Amrita Tanmay at Amrita Tanmay -

    ReplyDelete
  3. आसमान से बातें करता,
    वह प्राचीन क़िला।
    हमको मरे हुए कछुए-सा,
    औंधा पड़ा मिला।

    इन पुण्य आत्माओं की अप्रतिम रचनाएं पढ़वा संजोके आप एक बड़ा काम कर रहें हैं .
    वह प्राचीन क़िला
    मनोज कुमार at मनोज -


    ReplyDelete
  4. बहुत बढ़िया रचना है दोस्त आपकी

    वहीँ यादें तुम्हारी,
    वहीँ आँखें मेरी नम,
    वहीँ बातें तुम्हारी,
    वहीँ पलछिन हैं हरदम,

    अन्तर मन की पूरी आहट देती रचना .बहुत सुन्दर .

    वहीँ यादें तुम्हारी
    "अनंत" अरुन शर्मा at दास्ताँने - दिल (ये दुनिया है दिलवालों की ) -

    ReplyDelete

  5. मोहतरमा चिठ्ठियाँ स्पैम बोक्स गटकने लगा है .

    ReplyDelete
  6. बहुत बढ़िया रचना है दोस्त आपकी

    वहीँ यादें तुम्हारी,
    वहीँ आँखें मेरी नम,
    वहीँ बातें तुम्हारी,
    वहीँ पलछिन हैं हरदम,

    अन्तर मन की पूरी आहट देती रचना .बहुत सुन्दर .

    ReplyDelete
  7. साहित्य भाव जगत की रागात्मक वृत्ति है .गूंगे का गुड़ है , इसके निष्पादन के लिए किसी तर्क पंडित की ज़रुरत नहीं

    अपनों से अपनी सी. . . - आ. संजीव वर्मा 'सलिल'
    NAVIN C. CHATURVEDI at ठाले बैठे -

    ReplyDelete
  8. बेहद सशक्त रचना .

    जच्चा सोहर से जाज़ तक ,
    बन्ना बन्नी से पॉप तक ,
    कत्थक से रॉक तक
    मैंने कितनी वर्जनाओं के थपेड़ों को झेला है
    तुम क्या जानो !
    बिम्ब गति और व्यंजना की ऐसी अबेहद सशक्त रचना .अन्विति बिरले ही देखने को मिलती है जैसी साधना वेद जी की इस रचना में है .हां !सुनीता
    विलियम्स और भी हैं ,आयेंगी नए कीर्तिमान बनाएंगी .जग को रस्ता दिखलाएंगी .

    ReplyDelete
  9. बेहद सशक्त रचना .

    जच्चा सोहर से जाज़ तक ,
    बन्ना बन्नी से पॉप तक ,
    कत्थक से रॉक तक
    मैंने कितनी वर्जनाओं के थपेड़ों को झेला है
    तुम क्या जानो !
    बिम्ब गति और व्यंजना की ऐसी अबेहद सशक्त रचना .अन्विति बिरले ही देखने को मिलती है जैसी साधना वेद जी की इस रचना में है .हां !सुनीता
    विलियम्स और भी हैं ,आयेंगी नए कीर्तिमान बनाएंगी .जग को रस्ता दिखलाएंगी .


    Sudhinama
    नारी विमर्श की व्यथा कथा -

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  10. बहुत बढ़िया रचना है दोस्त आपकी

    वहीँ यादें तुम्हारी,
    वहीँ आँखें मेरी नम,
    वहीँ बातें तुम्हारी,
    वहीँ पलछिन हैं हरदम,

    अन्तर मन की पूरी आहट देती रचना .बहुत सुन्दर .


    हे माँ!
    विहिंसक वृत्तियों पर वज्रपात करो!
    और सब पर शुभ शक्तिपात करो!

    हे माँ!
    अपने वैभव-विलास युत वक्ष से
    अजात प्रकृति-शिशुओं को दीर्घजात करो !
    और सब पर शुभ शक्तिपात करो!

    पूरी रचना में एक आनुप्रासिक ओज और छटा ,माँ का आवाहन है काल रात्रि के विनाश का .सब पर शक्ति पात का .एक सात्विक उल्लास बुनती है रचना .
    आसमान से बातें करता,
    वह प्राचीन क़िला।
    हमको मरे हुए कछुए-सा,
    औंधा पड़ा मिला।

    इन पुण्य आत्माओं की अप्रतिम रचनाएं पढ़वा संजोके आप एक बड़ा काम कर रहें हैं .

    मोहतरमा चिठ्ठियाँ स्पैम बोक्स गटकने लगा है .

    Virendra Kumar Sharma said...
    साहित्य भाव जगत की रागात्मक वृत्ति है .गूंगे का गुड़ है , इसके निष्पादन के लिए किसी तर्क पंडित की ज़रुरत नहीं
    Mon Oct 22, 12:16:00 AM 2012
    बेहद सशक्त रचना .

    जच्चा सोहर से जाज़ तक ,
    बन्ना बन्नी से पॉप तक ,
    कत्थक से रॉक तक
    मैंने कितनी वर्जनाओं के थपेड़ों को झेला है
    तुम क्या जानो !
    बिम्ब गति और व्यंजना की ऐसी अबेहद सशक्त रचना .अन्विति बिरले ही देखने को मिलती है जैसी साधना वेद जी की इस रचना में है .हां !सुनीता
    विलियम्स और भी हैं ,आयेंगी नए कीर्तिमान बनाएंगी .जग को रस्ता दिखलाएंगी .

    Sudhinama
    नारी विमर्श की व्यथा कथा -

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  11. MONDAY, OCTOBER 22, 2012

    मुन्‍नाभाई से भ्रष्टाचार रावण संवाद

    व्यंग्य



    mls tc ekjk x;k rks mlds eqag ls fudyus okys vafre 'kCn Fks & gs jko.k] gs jko.k] gs jko.kA rhu ckj tksj ls ph[kus dh vkokt vkbZ vkSj oks s feVkuk pkgs] ij bl ;qx esa dke;kch eqUuk‍ dks gh feysxhA vUuks gtkjs gks] ij dke;kc eqUukHkkbZ gh jgsxkA eqUukHkkbZ dks ijkftr djus dh rkdr vkSj fdlh HkkbZ vFkok cgu esa ugha gSA

    Hkz"Vkpkj bruh vklkuh ls çk.k NksM+us okyk ugha FkkA oks s rgl ugl djus] tM+ ls feVkus&Hkxkus ds fy, jks"k O;kIr gS] ftldh ckuxh jkstkuk gks jgs e'kky tqywlksa] çn'kZuksa esa ns[kh tk ldrh gSA viuk ,slk fojksèk eSaus vius thoudky esa igyh ckj ns[kk gSA rqe Mjks er oRl ] jko.k us tc tksj nsdj iwjs foÜokl ls dgk rks Hkz"Vkpkj dks foÜokl djuk gh iM+kA

    eq>s gh ns[k yksA eSa ekjk x;k ij ejk ughaA iqryk cudj gj o"kZ ftank gks tkrk gwaA esjs iqrys dh yackbZ pkSM+kbZ gj lky c<+ tkrh gSA esjs uke ij mRlo euk, tkrs gSaA vkt cktkj esa esjk lfØ; ;ksxnku gSA rqe ugha ej ldrsA vUuk us pkgs fdruk cM+k thoar lekjksg dj fy;kA ij rqe ugha ejksxsA rqEgkujs HkkX; esa iqryk cuuk Hkh ugha fy[kk gSA tc rd ns'k esa ,d Hkh usrk gS] tc rd ns'k esa yksdra= gS] laln gS] rqEgsa rfud Hkh fpafrr gksus dh t:jr ugha gSA

    u rqEgsa ekjk tk ldrk gS vkSj u gh rqEgkjk iqryk gh tyk;k tk ldrk gSA lcds eu esa] tsc esa rqEgkjk gh okl gSA fQj dkgs dk miokl gSA ozr djus dh tks dgrs gSa] os vly esa rqEgsa cjrus ¼ozr ;kuh cjr½ dh pkgr eu esa j[krs gSa vkSj mlesa lQyrk çkIr djrs gSaA pkgs miokl gks] vu'ku gks & bu lcls rqEgkjk dn c<+ gh jgk gSA jko.k ds iqrys ds bu opuksa ls Hkz"Vkpkj fQj ls fuMj Fkk] mlds gkSlys cqyan gks pqds FksA mlds psgjs ij usrkvksa ls vfèkd èkwrZrk] f esa vPNh rjg vk pqdk gSA
    ये कौन सी भाषा की लिपि है मेरे मुन्ना भाई ?वंचित रह गए रसास्वादन से .बड़ी आरजू रावण के साथ सीधी बात सुनने की .

    ReplyDelete
    Replies
    1. उसे जब मारा गया तो उसके मुंह से निकलने वाले अंतिम शब्द थे - हे रावण, हे रावण, हे रावण। तीन बार जोर से चीखने की आवाज आई और वो ये मिटाना चाहे, पर इस युग में कामयाबी मुन्ना‍ को ही मिलेगी। अन्नो हजारे हो, पर कामयाब मुन्नाभाई ही रहेगा। मुन्नाभाई को पराजित करने की ताकत और किसी भाई अथवा बहन में नहीं है।

      भ्रष्टाचार इतनी आसानी से प्राण छोड़ने वाला नहीं था। वो इसे तहस नहस करने, जड़ से मिटाने-भगाने के लिए रोष व्याप्त है, जिसकी बानगी रोजाना हो रहे मशाल जुलूसों, प्रदर्शनों में देखी जा सकती है। अपना ऐसा विरोध मैंने अपने जीवनकाल में पहली बार देखा है। तुम डरो मत वत्स , रावण ने जब जोर देकर पूरे विश्वास से कहा तो भ्रष्टाचार को विश्वास करना ही पड़ा।

      मुझे ही देख लो। मैं मारा गया पर मरा नहीं। पुतला बनकर हर वर्ष जिंदा हो जाता हूं। मेरे पुतले की लंबाई चैड़ाई हर साल बढ़ जाती है। मेरे नाम पर उत्सव मनाए जाते हैं। आज बाजार में मेरा सक्रिय योगदान है। तुम नहीं मर सकते। अन्ना ने चाहे कितना बड़ा जीवंत समारोह कर लिया। पर तुम नहीं मरोगे। तुम्हानरे भाग्य में पुतला बनना भी नहीं लिखा है। जब तक देश में एक भी नेता है, जब तक देश में लोकतंत्र है, संसद है, तुम्हें तनिक भी चिंतित होने की जरूरत नहीं है।

      न तुम्हें मारा जा सकता है और न ही तुम्हारा पुतला ही जलाया जा सकता है। सबके मन में, जेब में तुम्हारा ही वास है। फिर काहे का उपवास है। व्रत करने की जो कहते हैं, वे असल में तुम्हें बरतने (व्रत यानी बरत) की चाहत मन में रखते हैं और उसमें सफलता प्राप्त करते हैं। चाहे उपवास हो, अनशन हो - इन सबसे तुम्हारा कद बढ़ ही रहा है। रावण के पुतले के इन वचनों से भ्रष्टाचार फिर से निडर था, उसके हौसले बुलंद हो चुके थे। उसके चेहरे पर नेताओं से अधिक धूर्तता, इसमें अच्छी तरह आ चुका है।

      Delete
    2. कृतिदेव फॉंट को नेट स्वीकार नहीं करता है!
      इसलिए इसको यूनिकोड में हदलकर लगा दिया है मैंने!
      --
      उसे जब मारा गया तो उसके मुंह से निकलने वाले अंतिम शब्द थे - हे रावण, हे रावण, हे रावण। तीन बार जोर से चीखने की आवाज आई और वो ये मिटाना चाहे, पर इस युग में कामयाबी मुन्ना‍ को ही मिलेगी। अन्नो हजारे हो, पर कामयाब मुन्नाभाई ही रहेगा। मुन्नाभाई को पराजित करने की ताकत और किसी भाई अथवा बहन में नहीं है।

      भ्रष्टाचार इतनी आसानी से प्राण छोड़ने वाला नहीं था। वो इसे तहस नहस करने, जड़ से मिटाने-भगाने के लिए रोष व्याप्त है, जिसकी बानगी रोजाना हो रहे मशाल जुलूसों, प्रदर्शनों में देखी जा सकती है। अपना ऐसा विरोध मैंने अपने जीवनकाल में पहली बार देखा है। तुम डरो मत वत्स , रावण ने जब जोर देकर पूरे विश्वास से कहा तो भ्रष्टाचार को विश्वास करना ही पड़ा।

      मुझे ही देख लो। मैं मारा गया पर मरा नहीं। पुतला बनकर हर वर्ष जिंदा हो जाता हूं। मेरे पुतले की लंबाई चैड़ाई हर साल बढ़ जाती है। मेरे नाम पर उत्सव मनाए जाते हैं। आज बाजार में मेरा सक्रिय योगदान है। तुम नहीं मर सकते। अन्ना ने चाहे कितना बड़ा जीवंत समारोह कर लिया। पर तुम नहीं मरोगे। तुम्हानरे भाग्य में पुतला बनना भी नहीं लिखा है। जब तक देश में एक भी नेता है, जब तक देश में लोकतंत्र है, संसद है, तुम्हें तनिक भी चिंतित होने की जरूरत नहीं है।

      न तुम्हें मारा जा सकता है और न ही तुम्हारा पुतला ही जलाया जा सकता है। सबके मन में, जेब में तुम्हारा ही वास है। फिर काहे का उपवास है। व्रत करने की जो कहते हैं, वे असल में तुम्हें बरतने (व्रत यानी बरत) की चाहत मन में रखते हैं और उसमें सफलता प्राप्त करते हैं। चाहे उपवास हो, अनशन हो - इन सबसे तुम्हारा कद बढ़ ही रहा है। रावण के पुतले के इन वचनों से भ्रष्टाचार फिर से निडर था, उसके हौसले बुलंद हो चुके थे। उसके चेहरे पर नेताओं से अधिक धूर्तता, इसमें अच्छी तरह आ चुका है।

      Delete
  12. बहन राजेश कुमारी जी!
    आपने बहुत सुन्दर चर्चा लगाई है!
    आज नवरात्र का अन्तिम दिन है!
    कल विजयादशमी है!
    चर्चा मंच की ओर से सभी पाठकों को हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  13. विजय दशमी पर हार्दिक शुभ कामनाएं |उम्दा चर्चा |
    आशा

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  14. शुक्रिया शास्त्री जी इतना धारदार तंज पढ़वा दिया .

    बधाई रावण .बढाया मुन्ना भाया !

    ReplyDelete
  15. शुक्रिया शास्त्री जी इतना धारदार तंज पढ़वा दिया .

    बधाई रावण .बढाया मुन्ना भाया !

    जब तक देश में एक भी नेता है, जब तक देश में लोकतंत्र है, संसद है, तुम्हें तनिक भी चिंतित होने की जरूरत नहीं है।देख लेना केजरीवाल भी मारा जायेगा (खुदा खैर करे ).

    ReplyDelete
  16. हम आज भी बच्चों जैसे ही मासूम हैं जो तामसी और स्वार्थान्धता के विचारों के भेष में हमारे बीच घुल-मिलकरए पलने-बढने वाली बुराईयों की ओर ध्यान न देते हुए हर वर्ष पुतलों को प्रतीक बनाकर फिर अगले वर्ष बुराईयों के बोझ तले दूसरे पुतलों को जलाने के लिए एक साथ मिलकर उठ खड़े होते हैंएजबकि वर्षभर इन बुराईयों के प्रति उदासीनता का रवैया अपनाते हुए कभी इस तरह एकजुट कभी नहीं हो पाते हैं!
    नवरात्र और दशहरा की शुभकामनाओं सहित!
    .........कविता रावत

    बहुत ही खूब सूरत चित्रात्मक झांकी प्रस्तुत की है कविता जी ने .भारतीय मानस में पैठी उदासीनता भी उभर आई है .

    शिव शक्तियां जिस देश में रौंदी जाती हैं वहां भैरों जी रुपी भ्रष्टाचार को कौन मार सकता है .

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  17. नद-नालों, सरिताओँ को भी,
    जो खुश होकर अंग लगाती।
    धरती की जो प्यास बुझाती,
    वो पावन गंगा कहलाती।।
    चिंता इस दौर में यह है अब गंगा मैली ही नहीं ज़हरीली हो गई है कैंसर रोग समूहों की वजह बन रहा है गंगा जल .गंगा किनारे बसेरा करने वाले इस रोग समूह की चपेट में हैं .

    उच्चारण
    "गंगा का अस्तित्व बचाओ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') - *नद-नालों, सरिताओँ को भी,*** *जो खुश

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  18. आँखों मे टूटा समंदर ...
    जुड़ता रहा बिछोह सजन का....
    इक और जन्म लेकर देख लहर ,
    इस बार साहिल बड़ी दूर है !

    ये किसका कर्ज़ उतरता नहीं ,
    किसका शाप छूटता नहीं ....
    इक कच्चा हिसाब है रूह का मेरी
    इस बार भी पोथे रूल गए
    इस बार इंसाफ फिर काफ़ूर है !
    आँखों में टूटता समुन्दर क्या कहने है अभिव्यक्ति के नै ज़मीन तोड़ी है अभिव्यंजना ने ,पीड़ा ने ,अनुभूति की प्रगाढता ने .

    आँखों मे टूटा समंदर ...
    swati at swati

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  19. बड़े स्तरीय सूत्र सजाये हैं चर्चा में।

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  20. अरे वाह आज तो अपने भाई मुन्ना जी से ही शुरुआत हुई है चर्चा की
    राम की पार्टी छोड़ कर रावण से चैट क्या बात है !
    बहुत सुंदर सजा है इसीलिये आज का चर्चा मंच !!

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    Replies
    1. रावण से फेसबुक पर मुन्‍नाभाई की लाइव चैट रवीन्द्र प्रभात at वटवृक्ष

      मेरे कंप्यूटर में भी चिडिया उड़ती दिख रही हैं !
      शास्त्री जी ने बता दिता यूनीकोड में बदलकर चर्चामच में
      वैसे लिखा बहुत ही उम्दा है पर राम जी से शिकायत तो करनी ही पडे़गी की रावण से चैट कर रहे थे करके ।

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  21. Gaafil ji sundar charchaa mein meree kavitaa ko shamil karne ke liye dhanywaad

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  22. बहुत सुंदर चर्चा | मेहनत से अच्छे लिंक्स ढूंढ के लाई आप | आभार |
    साथ ही "चर्चा मंच" के प्रस्तुतकर्ता "दिलबग विर्क" जी को उनके जन्म दिवस की हार्दिक शुभकामनायें |

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  24. बेहतरीन लिंक्‍स ... लिये उत्‍तम चर्चा ...आभार

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  25. बहुत बढ़िया लिंक्स के साथ सुन्दर चर्चा प्रस्तुति में मेरी ब्लॉग पोस्ट शामिल करने के लिए आभार ....सबको दुर्गानवमी और दशहरा की हार्दिक शुभकामनायें!

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  26. नारी जीवन के करे, जब विद्वान विभाग |
    एक एक पल बाँट ले, नेह समर्पण राग |
    नेह समर्पण राग, सुहाग परमेश्वर होता |
    लेकिन हे चाणक्य, सूत्र जो जीव पिरोता |
    रहटा सदा अलोप, पुरुष की है मक्कारी |
    एक पहर तो छोड़, कहे अपना जो नारी ||

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  27. बेहतरीन लिंक्‍स .....आभार!

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  28. अच्छी चर्चा
    बढिया लिंक्स

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  29. सुंदर चर्चा सजायी है आपने ।

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  30. बढिया लिंक्स.अच्छी चर्चा... विजय दशमी पर हार्दिक शुभ कामनाएं

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  31. बढ़िया संकलन , विजयदशमी की हार्दिक शुभ कामनाएँ

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  32. अभी अभी दिल्ली से लौटी हूँ ! अभी देखा मेरा आलेख आपने चर्चामंच के लिये चयनित किया है ! आभारी हूँ राजेश कुमारी जी ! आपको अनेकानेक धन्यवाद तथा आपको एवँ सभी पाठकों को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनायें !

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  33. विजयदशमी की शुभकामनाएं

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