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Monday, December 31, 2012

“साल की अन्तिम चर्चा” (चर्चा मंच-1110)

मित्रों!
      साल का अन्त हो रहा है और नया साल दस्तक दे रहा है। ऐसे में सभी का मन छुट्टी मनाने को करता है। हमारे सोमवार के चर्चाकार भाई ग़ाफ़िल साहब अभी यात्रा करके् घर पहुँचे हैं। इसलिए 2012 की अन्तिम चर्चा में अपनी पसंद के कुछ लिंक लगा रहा हूँ!
       ग़ाफ़िल साहब ने मुझे बताया है कि वो कल मंगलवार की चर्चा लगा देंगे। क्योंकि मंगलवार की चर्चाकार बहन राजेश कुमारी भी दो सप्ताह के लिए छुट्टी मनाने गयी हुई हैं।
"मुखौटे राम के"

मुखौटे राम के पहने हुए, रावण जमाने में। 
लुटेरे ओढ़ पीताम्बर, लगे खाने-कमाने में…

एक संदेश दामि‍नी के नाम, हर बेटी के नाम
गीतांजलि गीत का संदेश दामि‍नी के नाम, दुनि‍या की हर बेटी के नाम........ दामि‍नी तुम्‍हें शत शत नमन…
 अनुभूति कलश
अहसासों को संजोया है मैंने, अनुभूतियों को पिरोया है मैंने, बने सत्य,शिव, सुन्दरम यह कलश,मानस की गंगा में धोया है मैंने..

कुछ पंक्तियाँ दामिनी की स्मृति में …आहत मन से ..

लुट रही है अस्मिता, कैसे मनाएं नववर्ष हम
हो गईं हैं साँसें भी दफ़न ,कैसे मनाएं नववर्ष हम
सौ-सौ दुआएं भी न दे सकीं दामिनी को ज़िंदगी
सरकार ने दीन्हा है कफ़न ,कैसे मनाएं नववर्ष हम ।।

डॉ रमा द्विवेदी
 कबीरा खडा़ बाज़ार में
अतिथि -कविता :दूर कहीं ,
इक शख्शियत का कत्ल हुआ है
जिस वीरांगना ने कुँवारी कन्या ने जिसे हम नव रात्र पर पूजते हैं एक सोये हुए राष्ट्र की चेतना को जगा दिया है उसे राष्ट्रीय सम्मान के साथ हम विदा करें
दिल की आवाज़
महिला हूँ तो क्या हुआ  
मैं भी मानव हूँ मुझमें भी दिल व दिमाग है मुझमें भी साहस व शक्ति है अब तक सहती रही बहुत सही अत्याचार ...
ज़िन्दगी…एक खामोश सफ़र
क्या संभव है सुदृढ़ इलाज ?????????? - मेरी आत्मा लाइलाज बीमारी से जकडी विवश खडी है इंसानियत के मुहाने पर मुझे भी कुछ पल सुकून के जीने दो लगा गुहार रही है ...
विख्यात
''ये दुनिया मर्दों की नहीं '' कुंठिंत पुरुष-दंभ की ललकार पर स्त्री घुटने टेककर कैसे कर ले स्वीकार ? जिस कोख में पला;जन्मा पाए जिससे संस्कार उसी स्त्री ...
बलात्कारी के लिए कड़े क़ानून का प्रस्ताव.  राजधानी दिल्ली में सामूहिक बलात्कार पीड़िता की मौत को लेकर आक्रोश के बीच कांग्रेस ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर रोक……
! कौशल !
भारत सरकार को देश व्यवस्थित करना होगा

- छोटे से छोटा घर हो या बड़े से बड़ा राष्ट्र समुचित व्यवस्था के बिना अराजकता व् बिखराहट से भरा नज़र आता है .व्यवस्था स्थान रखती है…
ZEAL
यह सरकार अब किसी भरोसे या स्पष्टीकरण का अधिकार नहीं रखती
जन आक्रोश से बचने के लिये ब्रिटिश सरकार ने भगत सिहँ, सुखदेव और राजगुरु की लाशों को गुप्त तरीके से आधी रात में ही जला दिया था। वह इम्पीरियलिज्म जिस की आज तक...
यादें

याद आते हैं वो, अब बचपन के दिन !!! क्योंकि फुर्सत के हैं, ये अब रात-दिन... - *यादें --*-*अनकही अपने बचपन की ....इनको मैंने * *१५-१६ साल पहले लिखा था और दो साल पहले * *शुरू-शुरू में अपने ब्लॉग पर भी .......* *आज फिर मेरी यादें ,मुझे ...
शंखनाद

किधर जा रहा है मेरा देश।।
पीडिता का क्या था दोष, क्यों मर रहे है निर्दोष।
क्या नहीं संस्कृति रही शेष, किधर जा रहा है मेरा देश।। बदल रहा क्यों पूरा परिवेश, किसने धरा नेताओ का भेष..
आधा सच...

आप बताएं ! नायक या खलनायक ...- दिल्ली गैंगरेप पीड़ित बेटी की मौत ने देश को हिलाकर रख दिया है। इस पूरे घटनाक्रम को देखता हूं तो मुझे बलात्कारियों से कहीं ज्यादा गुस्सा देश की कमजोर सरकार...
सुनिये मेरी भी....

जाओ लड़की... पर यह दुनिया इतनी बुरी नहीं... - *.* *.* *.* ** * * *अपने छोटे से गाँव से* *उम्मीद की पोटली बाँध* *चली आयीं थी जब तुम* *मुल्क की राजधानी में* *पढ़ने और भविष्य बनाने* *तुम आशावान थी
अविनाश वाचस्पति
इसे मौत नहीं जागृति कहते हैं : मैं कभी नहीं मर सकती (कविता) - मैं कहीं नहीं गई मैं कभी नहीं मरी मैं कभी नहीं मर सकती देखो किसके दिल में नहीं हूँ किसके मानस में नहीं बसेरा मेरा इसे मौत नहीं जागृति कहते हैं ...
अंतर्जाल डॉट इन
नववर्ष के वालपेपर डाउनलोड करें
अंतर्जाल डॉट इन की ओर से सभी पाठकों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं…
Sudhinama
कुछ तो करना होगा 
‘दामिनी’ अंतिम बार कौंध कर सदा के लिए बादलों के पीछे छिप गयी ! लेकिन उसकी यह कौंध सदियों से गहन अन्धकार में डूबी अपनी शक्ति एवं क्षमताओं से बेखबर नारी जाति...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका
एक श्रद्धांजलि : हे अनामिके !  [आज 29 दिसम्बर 20012 ,वर्ष का अवसान. अवसान एक अनामिका का,एक दामिनी का एक निर्भया का....उसे नाम की ज़रूरत नहीं ..दरिंदों के वहशीपन की शिकार.....मुक्त हो गई ....
The Art of Living

हे द्रोपदी !! अब तो तलवार उठा लो - हर दिल में आक्रोश है, हर आखों में सिर्फ रोश है, पांडवो की संख्या बढती जा रही है, और बोलते हैं सिर्फ कौरवों का दोष है। शकुनि बिछाये द्युत है, हर राजा यहाँ ..
कागज मेरा मीत है, कलम मेरी सहेली......

दामिनी -
 " दामिनी " मुझे अपना कहने वालो मेरे आदर्श देश के वासियों अगर तुम्हे जीना है बिना शर्मिंदगी लाचारी और बिना किसी खौफ के तो मेरे मरने को जिन्दा रक्खो अपने...
दिल्ली तू तो बन बैठी महारानी है
दिल्ली तू तो बन बैठी महारानी है
लुटी सड़क पे मगर तेरी दीवानी है
सूख गया क्या आँखों का पानी दिल्ली
रहीं बेटियां लुटती तू अनजानी है…
मास्टर्स टेक टिप्स
अपनी पसंदीदा ब्लोग्स की सूची अपने ब्लॉग पर लगाएँ।

डियर रीडर्स , कुछ दिनों पहले मास्टर्स टैक के एक रीडर ने कमेन्ट के जरिये एक सवाल पूछा था की ''अपने पसंदीदा ब्लोग्स की सूची अपने ब्लॉग पर कैसे लगायें..
दामिनी : न पहली, न अन्तिम
अपनी गरेबान
27 और 28 दिसम्बर के दो दिनो में, याने पूरे 48 घण्टों तक मैंने, टीवी पर कोई समाचार नहीं देखे। आवश्यकता ही अनुभव नहीं हुई। लगा ही नहीं कि मुझसे कुछ छूट रहा है या छूट गया है।
कल, 29 दिसम्बर की सुबह भी इसी मनःस्थिति में था। अपनी डाक पेटी खोलते-खोलते, पता नहीं कैसे, फेस बुक खुल गई। उसे बन्द कर, डाक पेटी खोलता, उससे पहले ही इन्दौरवाले अशोकजी मण्डलोई प्रकट हो गए। कह रहे थे - ‘लड़की की मौत से दुःखी हूँ।’ मैंने पूछा - ‘कौन सी लड़की?’ उन्होंने जवाब दिया - ‘वही! दिल्लीवाली। बलात्कार पीड़िता। अपनी दामिनी।’ इसके बाद कुछ भी कहना-सुनना कोई मायने नहीं रखता था।
Tech Prévue · तकनीक दृष्टा

Blog बनाने से पहले Blogging Platforms की जानकारी तो चाहिए
Learn About Available Blogging Platforms [image: Blogging Platforms]
1990 के आस-पास ब्लॉगिंग अस्तित्त्व में आयी तबसे लेकर अब तक इसमें कई परिवर्तन हुए और निरंतर...
हम रहे इन्सान कितना......

हम   रहे   इन्सान    कितना,
कह   नहीं  सकते-
गिर सकता है इन्सान कितना,
कह  नहीं सकते-
मिट  गयी  है  लक्षमण   रेखा
कायम  कबूल थी
बिक सकता है ईमान कितना,
कह नहीं सकते -
एक  नारी  ने माँगा  समाज से
प्यार  की दौलत
मिला है  उसको मान कितना
कह  नहीं  सकते-
खो    गयी   जमीं    जिसे   वो
दहलीज    कह  रही   थी ,
पाया    है   आसमान  कितना,
कह  नहीं    सकते…
मेरी भावनायें...

उसके नाम - शुभकामनायें-
नया साल तुम्हारी जिजीविषा को विजिगीषा बनाये तुम्हारी रगों में वो सारी शक्तियां दौड़ें जो दुर्गा की रचना में सभी देवताओं ने दी थी चंड मुंड शुम्भ निशुम...
रायटोक्रेट कुमारेन्द्र
नववर्ष मनाने वाला उत्साह बचा रखना, अभी गंदगी बाकी है मेरे दोस्त
आने के ही साथ जगत में कहलाया जाने वाला’ बच्चन जी की मधुशाला की ये पंक्ति इस संसार मे सभी पर एकसमान रूप से लागू होती हैं

ये साल कुछ इस तरह से बीत गया

*भाई विजेंद्र शर्मा की ये वो पंक्तियाँ है जिसकी वजह से मेरी आज की ये कविता बनी ..... शर्मसार तो कर गया ,जाते जाते ये साल आने वाले साल में ,कैसा होगा हाल || (इस उम्मीद के साथ की आने वाले साल में ऐसा दिसम्बर ना आए ) विजेंद्र शर्मा * * * *सरकार की पनाह में और कानून की छतरी तले दाल महंगी हो गई और सपने अधूरे रहे गए कुछ लोग रोटी को मोहताज रहने को मजबूर हो गए हुकूमत के ही सब रंग ही बस क्यों,गाढ़े और गाढ़े हो जाते हैं बाकि क्यों सब कुछ धूमिल सा रह जाता है ?* *सरकार की पनाह में और कानून की छतरी तले अस्मत के लुटेरे हर गुनाह के बाद बन कर चूहे, छिप जाते हैं ...

अन्त में देखिए ये कार्टून!
काजल कुमार के कार्टून

कार्टून :- आज नीरो की बॉंसुरी का दि‍न है -
कार्टूनिस्ट-मयंक खटीमा (CARTOONIST-MAYANK)

"जन-जन की है यही पुकार" (कार्टूननिस्ट-मयंक)

Sunday, December 30, 2012

“बिटिया देश को जगाकर सो गई” (चर्चा मंच-1109)

मित्रों!
      रविवार के लिए कुछ लिंक दे रहा हूँ। इसके बाद तो नये साल 2013 में ही भेंट होगी।
नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!
नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!
"गधे चबाते हैं काजू, महँगाई खाते बेचारे"
आप सभी पाठकों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ!
बिटिया देश को जगाकर सो गई ...
बिटिया  देश को जगाकर सो गई
माँ की लाडली हमेशा के लिए खो गई…
एक लडकी ही तो मरी है...
एक लडकी ही तो मरी है... मैंने खोल दी हैं घर की तमाम खिडकियां, बिछा दी है गुलाबी फूलों वाली नई चादर, टी.वी. पर set कर दिया है reminder नये साल पर आने वाले नय program के लिये. ओह्! नये साल का resolution तो रह गया. क्या कहा? देशहित.. नारीहित में संकल्प लूं? कसमें खाऊं उन्हें तोड देने के लिये? क्यूं? ऐसा क्या हो गया है रातोंरात? "एक और" लडकी ही तो मरी है.. और मैं तो उसे जानती भी नहीं. हां मैं भी गई थी एक candle march में मगर वो तो बस सबको ये बताने के लिये कि मैं भी खासी संवेदनशील हूं.. और फेसबुक पर फोटो भी तो लगाने थे, image का ख़याल रख्ना पडता है यार...
काश ऐसा संभव हो!
बलात्कार की पीडिता की मौत की खबर सुनी . मेरे 60 वर्षीय जीवन में इतना संताप,इतना दर्द मुझे किसी घटना से शायद ही कभी हुआ हो जितना कि पिछले कुछ दिनों में हुआ । मै कानून को अपने हाथों में लेने के हक में कभी नहीं रही .लेकिन आज लग रहा है कि इन मुजरिमों को सजाए मौत तो मिलनी ही चाहिए…
दामिनी के लिए दो शब्द
जिन्दगी को जीना अब उसे बोझ लगने लगा होगा \ मरहम ही अब उसे चोट लगने लगा होगा । सोचा होगा उसने ,यहाँ बहुत राजनीती है मेरे जिन्दा रहने में जिन्दगी से ही उसका भरोषा उठने लगा होगा छोड़ दिया होगा उसने जिन्दगी की राह में चलना उसने उसको खुद का जिन्दा रहने से ज्यादा खामोश रहना ही सही लगा होगा ,,,
बलात्कारियों का प्रतिरोध करने वाली युवती की मौत पर जसम की शोक संवेदना
अपनी माटी डॉट कॉम(www.ApniMaati.com)आजादी, बराबरी और इंसाफ तथा उसके लिए प्रतिरोध महान जीवन मूल्य है : जन संस्कृति मंच नई दिल्ली: 29 दिसंबर 2012 हम उस बहादुर लड़की के प्रतिरोध का गहरा सम्मान करते हैं, जिसने विगत 16 सितंबर की रात अपनी आजादी और आत्मसम्मान के लिए अपनी जान को दांव पर लगा दिया और बलात्कारियों द्वारा नृशंस तरीके से शरीर के अंदरूनी अंगों के क्षत-विक्षत कर देने के बावजूद न केवल जीवन के लिए लंबा संघर्ष किया, बल्कि न्याय की अदम्य इच्छा के साथ शहीद हुई। आजादी, बराबरी और इंसाफ तथा उसके लिए प्रतिरोध महान जीवन मूल्य है,...
जिंदगी मौत के कदमो पे सफ़र करती है
"ओ बी ओ तरही मुशायरा" अंक ३० में शामिल मेरी पहली ग़ज़ल. दिल्लगी यार की बेकार हुनर करती है, मार के चोट वो *गम़ख्व़ार* फ़िकर करती है, इन्तहां याद की जब पार करे हद यारों, रात अंगारों के बिस्तर पे बसर करती है, आरजू है की तुझे भूल भुला मैं जाऊं, चाह हर बार तेरी पास मगर करती है, देखने की तुझे न चाह न कोई हसरत, माफ़ करना जो ये गुस्ताख नज़र करती है…
मास्टर्स टेक टिप्स

ऑनलाइन You Tube विडियो डाऊनलोड करें बगैर सोफ्टवेयर के - मास्टर्स टैक ब्लॉग की 100 पोस्ट्स पूरी करने के बाद आज एक नयी पोस्ट यू ट्यूब के नाम। ज्यादातर लोग यू ट्यूब विडियो ऑनलाइन देखने के बजाय डाऊनलोड करके देखना…

माधव

सर्दी की छुट्टियाँ (Winter vacation - माधव का स्कुल बंद गया है . क्रिसमस की छुट्टियाँ २३ दिसंबर से १ जनवरी तक है . छुट्टियों का उपयोग करते हुए हम आरा चले गए….
साहित्य प्रसून
सामयिकी (४)हृदय में जली हुई ज्वाला !(एक विरोधाभास) काव्य ज्वालामुखी में एक नयी सामयिक रचना - विचित्र बात है कि,एक ओर प्रगति का 'अमन के डंके' पर 'स्वाँग भरा नाटक' !दूसरी ओर 'भ्रष्टाचार का दानवीय विकास ! 'अमन' के 'ठंडे आवरण' में 'दुराचरणों की जलती...
तराने सुहाने

JOGI JAB SE TU AAYA MERE DWAARE -LATA (BANDINI 1963)-SHAILENDRA-S D BURMAN - SINGER : LATA JI LYRICS : SHAILENDRA MUSIC : S D BURMAN MOVIE : BANDINI…
ज़ख्म…जो फूलों ने दिये
ख़ामोशी की गूँज ऐसी होनी चाहिए
क्या कहूं सत्ता बीमार है या मानसिकता इंसानियत मर गयी या शर्मसार है मौत तो आनी है इक दिन मगर मौत से पहले हुयी मौत से कौन कौन शर्मसार है…


हो जाये तो क्या बात है ... -आइये आज बिना किसी भूमिका के मैं आपको उनलोगों से मिलाऊं जो शायद आपको देखन में छोटन लगे पर घाव करें गंभीर .....

न दैन्यं न पलायनम्

यार्ड में लेखन - वरिष्ठ अधिकारी का निरीक्षण है, यार्ड में नयी पिट लाइनों का निर्माण कार्य चल रहा है, पिट लाइनों का उपयोग यात्री ट्रेनों के नियमित रख रखाव के लिये किया जाता...
KAVITA RAWAT

गाँव-शहर हर जगह ठण्डो रे ठण्डो! - सुदूर पहाड़ों पर बर्फवारी के चलते वहाँ से आने वाली सर्द हवाओं से जब देश के अधिकांश हिस्से ठिठुर रहे हों, ऐसे में वे अपनी हिमपूरित पहाड़ी हवाएं अपने शहर मे...
takniki gyan

भारत बनाम पाकिस्तान क्रिकेट मैच देखे लाइव... -दोस्तों वैसे भी क्रिकेट का सीजन चल रहा है, और भारत बनाम पाकिस्तान के क्रिकेट मैच चल रहे है....
दास्ताँने - दिल (ये दुनिया है दिलवालों की)
कुण्डलिया प्रथम प्रयास
आदरणीय श्री अरुण कुमार निगम सर के द्वारा संशोधित कुण्डलिया प्रथम प्रयास सोवत जागत हर पिता, करता रहता जाप, रखना बिटिया को सुखी, हे नारायण आप…
mridula's blog
कहते हैं माँ-बाप आजकल......  बड़े होशियार हैं मेरे बच्चे, सारे 'पोयम्स' याद हैं इन्हें 'बाई -हार्ट', 'चैम्पियन'हैं 'स्विमिंग' के, हर बार 'फर्स्ट' आते हैं…
ठाले बैठे
फ़लक पे उड़ने वालो ये नसीहत भूल मत जाना - नवीन - अमावस रात को अम्बर में ज़ीनत कोई करता नईं मेरे हालात पे नज़रेइनायत कोई करता नईं….

परिवर्तन की नायिकाए... -सुधीर मौर्या 'सुधीर' 18 दिसम्बर 2011 को मिस्र की तहरीर चोक पर पर्दर्शन के दौरान सैनिको के हाथो मारपीट और खीचतान में सड़क पर एक लड़्की...
Hindi :: MyWebdunia
राष्ट्रपति बनने के बाद भी प्रणव मुखर्जी आर्थिक सुधारों के जरिये बाजार के प्रति अपनी प्रतिबद्ध! -राष्ट्रपति बनने के बाद भी प्रणव मुखर्जी आर्थिक सुधारों के जरिये बाजार के प्रति अपनी प्रतिबद्ध! एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वासबलात्कार कार्निवाल जारी…
उसे भुलाने के लिए ...
मैंने,
उसे भुलाने के लिए
क्या कुछ नहीं किया
गीत लिखने का लिया
सहारा
बार-बार शब्द बदले
कई बार भाव बदले
लेकिन लिखते-लिखते
हर बार गीत उसीका
निकला ....
‘मुझको मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन'- ग़ालिब को खिराजे अक़ीदत

'बुनियाद' ब्लॉग पर ग़ालिब को खिराजे अक़ीदत पेश करते हुए - ‘मुझको मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन  दिल के ख़ुश रखने को..
आलेख.....
- हर मंदिर की नींव में रखी हुई हर ईंट उतनी ही महत्त्वपूर्ण होती हैं जितना कि मंदिर के ऊपर दिखाई देने वाला गुम्बद...और वो आकाश की तरफ मुंह उठाये लोगों के ...
' नारी ' होने की सजा
वेदना की सीमाओं से परे
एक दबी चीख सुनी क्या
' निर्भया ' खामोश है अब
क्या कहे ? कह चुकी सब
यातनाओं से परे जो भी सहा
मौत से आँख मिलाये पड़ी…
सन्नाटा सा है दिल में
सुनो ...
आज कुछ लफ्ज़ दे दो मुझे
ना जाने मेरी कविता के
सब मायने
कहाँ खो  गये हैं
मेरे अपने लिखे लफ्ज़ अब
ना जाने क्यों ,
बेमानी  से हो गये हैं
दिखते  हैं अब सिर्फ़ इसमें
विस्फोटक ,बलात्कार,  भ्रष्टाचार…
# चिता की आग #
तुझको अग्नि के हवाले कर के ....
मैं  जड़- सी हो गई हूँ .....
कभी अपनी छाती का लहू पिलाया था  मैने ..
तेरी वो नटखट आँखें ..
वो चेहरे का भोलापन .
वो प्यारी -सी मुस्कान ? 




लो खत्म कहानी हो गई ?
दिमागी सूजन ने ले ली निर्भया की जान .इस दिमागी सूजन की वजह मंगलवार रात को पड़े दिल के दो दौरे
बने जिनमें  से एक को डायरक्त करेंट शोक देकर संभाल लिया गया .ह्रदय गति चालू कर दी गई लेकिन
दूसरा घातक साबित हुआ जिस दौरान तीन मिनिट तक उसकी नवज गायब रही .यही वह विधायक क्षण था
जब उसके दिमाग में दाब बढ़ गया .दिमाग में इसी दौरान तरल ज़रुरत से ज्यादा बढ़ गया .इसे ही सेरिब्रल
इडिमा (brain edema )कहा गया है .
इसी दौरान अंत :रक्त स्राव हुआ दिमाग में ,संक्रमण शुरू हुआ .
ब्लड वेसिल्स (रक्त वाहिकाएं सिकुड़ गईं )ऑक्सीजन आपूरण (आपूर्ति ) ठप्प हो गया .दिमागी कोशाएं
एक एक करके मरने लगीं .इन कोशाओं की मृत्यु ही अंतिम मृत्यु होती हैं .जब किसी को ब्रेन डेड घोषित
किया जाता है .हालाकि क्लीनिकली उसे ज़िंदा रखा जा सकता है तकनीकी तौर  पर .लेकिन अंतिम मृत्यु
ब्रेन डेथ होती है जिसके बाद क्लीनिकली भी किसी मरीज़ को लाइव नहीं रखा जा सकता है .
सलाम निर्भया !
TV स्टेशन-महेंद्र श्रीवास्तव
गैंगरेप : जिम्मेदार बने मीडिया !

दिल्ली गैंगरेप का मुद्दा काफी संवेदनशील है, मैं बेवजह किसी की भावनाओं को आहत नहीं करना चाहता , लेकिन मुझे लगता है कि मीडिया से जुड़े होने के कारण मुझे कम से कम इस पूरे मामले में मीडिया की भूमिका पर जरूर अपनी बात रखनी चाहिए। अगर ये बात मैं ईमानदारी से कहूं तो मुझे लगता है कि मीडिया को इस पूरे मामले में जितना संवेदनशील और सतर्क होकर काम करना चाहिए था, कहीं ना कहीं उसमें कमी रही। कमी थोड़ी बहुत नहीं, बल्कि मैं कहूंगा कि बहुत ज्यादा कमी रही। मुझे ये कहने में कत्तई संकोच नहीं है कि मीडिया को जहां इस संवेदनशील मुद्दे पर आगे बढ़कर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभानी चाहिए थी, वो जिम्मेदारी निभाने में मीडिया चूक गई, बल्कि मीडिया महज जंतर मंतर और इंडिया गेट पर जमीं भीड़ का हिस्सा भर बनकर रह गई। सच्चाई तो ये है कि मीडिया भीड़ के उबाल में अपनी टीआरपी बटोरने में लगी रही। हां वैसे हिंदी समाचार पत्र दैनिक भाष्कर ने जरूर कुछ अलग करने की कोशिश की, मगर उसमें भटकाव दिखा, वो क्या करना चाहते हैं, उनका फोकस क्लीयर नहीं था…
लो क सं घ र्ष !-रणधीर सिंह सुमन
अमीर बनने के लिए बेचैन रहना

    अमीर बनने का सपना मुझे हमेशा  ही से किसी बुरी इच्छा जैसा लगता रहा है। ऐसा कई बार हुआ जब मेरे कुछ शुभ चिन्तकों ने मुझे पैसा कमाने तथा अमीर बनने की तरकीबें बताईं, विशेष रूप से उन दिनों जब मेरी आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। पिता की बेरोजगारी फिर उनकी असमय मृत्यु ने माँ सहित मेरे सात भाई बहनों की हालत खराब कर दी थी, उन दिनों भी अमीर बनने की तरकीब बताने वालों को मैं अच्छी नजर से नहीं देखता था। हाँ, परिश्रम से आय अर्जित करने या उसमें वृद्धि का तरीका बताने वालों को अवश्य मैं गंभीरता से सुनता था, ऐसे समय में जब प्रत्येक व्यक्ति जल्द से जल्द अमीर बन जाना चाहता है और यदि वह पहले से अमीर या अच्छी आय वाला है तो अपनी अमीरी को तीन-तिकड़म और नितांत अनैतिक तरीके से…
Tips Hindi Mein / टिप्स हिंदी में
happy new year
happy new year in 3d
नया साल मुबारक* कहें नये अंदाज में *3D टेक्स्ट के रूप में ये लाइव डेमो आप नीचे देख रहे हैं Happy New Year ये डेमो Mozilla...
Tech Prévue · तकनीक दृष्टा

अपने Blog की Speed (Loading time) Optimize कीजिए
Optimize your Blog Loading Speed | Make your Web Site Faster [image: Make your web site and blog faster] जब से गूगल (Google) ने यह सूचना जारी की है
ई-पण्डित / ePandit - Hindi Tech Blog
स्विफ्टकी ऍण्ड्रॉइड कीबोर्ड ३.१ में हिन्दी, हिंग्लिश समर्थन शामिल-
स्विफ्टकी ऍण्ड्रॉइड स्मार्टफोन तथा टैबलेट के लिये एक प्रसिद्ध और लोकप्रिय कीबोर्ड ऍप्लिकेशन है। जैसे-जैसे आप टाइप करते जाते हैं यह सीखती जाती है ताकि आपको ...
आधा सच-महेंद्र श्रीवास्तव
शिरड़ी : बाबा के वीआईपी

बात बड़े दिन यानि इसी 25 दिसंबर की है। बच्चों के स्कूल की छुट्टी थी,  मुझे भी आफिस से छुट्टी मिल गई, सोचा चलो बड़े दिन पर कुछ बड़ा करते हैं, शिरड़ी चल कर बाबा का दर्शन कर आते हैं। कार्यक्रम ये बना कि 23 दिसंबर की रात कर्नाटक एक्सप्रेस से दिल्ली से चलें  अगले दिन दोपहर तीन बजे के करीब वहां पहुंच जाऊंगा। चूंकि 25 दिसंबर को बड़ा दिन होने की वजह से बाबा का दर्शन आसान नहीं होगा, लिहाजा 24 को ही बाबा का दर्शन कर रात्रि विश्राम किया जाए और अगले दिन शनि महाराज के यहां हाजिरी लगाकर शाम को वापसी की ट्रेन पकड़ी जाए। पर ऐसा हुआ नहीं, क्योंकि कुहरे की वजह से हमारी ट्रेन लगभग आठ घंटे लेट हो गई। लिहाजा अब 24 तारीख को तो कुछ होना नहीं था, 25 को दर्शन और वापसी भी थी। क्या करता, पूरा सफर मैने वीआईपी दर्शन के इंतजाम में काट दिया…
ये पन्ने ........सारे मेरे अपने
मै अपनी तकदीर खुद लिखूंगी

इन दोनों मन बहुत विचलित रहा
एक अजीब सी उदासी घेरे हैं
नींद मानो बैर ठाने है
आखिर थक कर पलकें झपक जाती है
फिर वही ख्वाब जो बार बार दीखता है
कोई मेरे हाथों से कलम छीनता है
और कहता है मै तेरी किस्मत लिखूंगा
मै मुकद्दर का फ़रिश्ता हूँ….

"देश की बेटी दामिनी" (भावभीनी श्रद्धांजलि!)

ज़ुल्म की सलीब पे, वार गई ज़िन्दग़ी 
लड़ते-लड़ते मौत से, हार गई ज़िन्दग़ी
अन्त में कुछ कार्टून!

"धरना-प्रद्र्शन, लोकतन्त्र की शान!"


कार्टूनिस्ट-मयंक खटीमा (CARTOONIST-MAYANK)
-0-0-0-

कार्टून:- ताला उद्योग के भी दि‍न फि‍रे
 kajal
काजल कुमार के कार्टून

Saturday, December 29, 2012

मैं दिल्‍ली हूं... मुझे बदनाम मत करो

दोस्तों

साल तो जा ही रहा है अपने रंग भी दिखा रहा है और जाते साल के साथ साथ कुछ खट्ट- मीठी यादें तो हैं ही दूसरी तरह हर शख्स तो अपने रंग दिखाता ही है मौसम भी दिखा रहा है अपने तेवर तो बिजली महारानी कहती है मैं क्यों पीछे रहूँ और वो आती है तो नैट महाराज धोखा दे रहे हैं तो चलिये इन्ही सब महामायाजाल में उलझे हम सब बहुत मुश्किल से कुछ वक्त चुरा पाते हैं और आज इन्हीं हालात से गुजरते हुये आपके समक्ष ये चर्चा लेकर आयी हूँ …………बहुत जल्दी में कहीं कोई धोखा ना दे जाये वैसे भी धोखा खाते- खाते तंग हो चुके हैं हम सब अब और नहीं…………तो आज सिर्फ़ लिंक्स के टाइटल पर ही विचार रख रही हूँ पता नहीं बिजली या नैट कब धोखा दे जायें ………

 

 

"सरस्वती माता का करता वन्दन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जय माँ………पहली शुरुआत माँ की वन्दना से


कैसी सर्दी आई है ?

जैसी हमेशा आती है ………


सीपीएम विधायक ने पूछा- अपने बलात्कार का कितना मुआवजा लेंगी ममता बनर्जी?

ओह ! सच में ?

 

 

ब्रूनो की बेटियाँ ........ आलोक धन्वा

एक अहसास

 

 

saboot / सबूत

क्या दें ?



मैं दिल्‍ली हूं... मुझे बदनाम मत करो

तो क्या करें ?



तुझे कैसे भूल गई !' 

पता नहीं ?

 

फांसी के नाम पर कुहासा पैदा मत करो

तो क्या पैदा किया जाये ?

 

हाइकु के स्वाद

अजब गजब :)



घर

किसका , कैसा ?

 

कविता पोस्‍टर - 2

कुछ ख्याल लायी हूँ 



कहते हैं माँ-बाप आजकल......

क्या कहते हैं?



कविता-मकरंद की मिठास

 अब तो इसी का सहारा है 

 

 

नींव,दीवार,छत थे पिता

अबूझे अहसास

 

 

एंटी-ऑक्सीडेंट करता है शरीर को विषमुक्त

कारगर उपाय

 

 

नए साल में फिर से करेंगे मिलकर नए घोटाले----- हम भारत वाले----हम भारत वाले-------!

जय हो घोटालों की

 

 

ये सब होता आया हैं तो "गलत कैसे " हुआ .

बिल्कुल वाज़िब प्रश्न ?

 

 

2012 -- ब्लॉगिंग की राह में मज़बूर हो गए --- हिंदी ब्लॉगिंग का कच्चा (चर्चा) चिट्ठा !

अब कच्चे चिट्ठे खुलने लगे तो खिसकने मे ही भलाई है :)





अब चलते चलते एक जरूरी सूचना


सृजक पत्रिका का आगामी अंक "प्रेम विशेषांक " है। 

सृजक पत्रिका के आगामी अंक "प्रेम विशेषांक "के लिए अपनी रचनायें इनमे से किसी भी विषय पर 31 दिसंबर से 5 जनवरी तक भेजिए पसंद आने पर पत्रिका में शामिल की जाएँगी .........

1. कोई अमर प्रेम हीर रांझा या अन्य....जो छुपी है.
2.प्रेम विवाह या अरैंज मैरेज............कौन सही पर परिचर्चा
3.प्रेम का अंतिम लक्ष्य क्या..............सेक्स ?


 कोई हीर रांझा , सोहनी महिवाल शीरी फ़रहाद की अमर कहानी पूरी तरह या कोई जो लोगों को ना पता हो ऐसी कोई कहानीभी आप भेज सकते हैं।
 आर्टिकल भी चलेगा, कहानी भी, कविता भी और कोई परिचर्चा हो प्रेम पर तो वो भी और सच्ची घटनायें हों तो वो भी आप भेज सकते हैं इस मेल आई डी पर 

 rosered8flower@gmail.com




 
चलिये दोस्तों आज की चर्चा को यहीं विराम देती हूँ …………उम्मीद करती हूँ अगले साल जब हम मिलेंगे तो इस साल की कडवाहटों को मिटाकर मिलेंगे………एक नयी दुनिया बसाने का सपना देखकर और उसे हकीकत में बदलने के लिये कुछ भी कर गुजरने के जज़्बे को लेकर मिलेंगे तभी नये साल के साथ नये सपने उडान भरेंगे और हमारा नव वर्ष शुभ हो कहना सार्थक होगा जब हम अपने दोषों को दूर करते हुये आने वाले कल को खुशहाल करने के लिये कर्तव्यबद्ध होंगे…………अब मिलते हैं अगले साल ………2013 सबके लिये मंगलमय हो इस चाहत के साथ ………शुभ विदा



Friday, December 28, 2012

""आओ नूतन वर्ष मनायें"" (चर्चा मंचः1107)

मित्रों!
                   शुक्रवार की चर्चा के चर्चाकार आदरणीय रविकर जी अगले सप्ताह से अपनी चर्चा में नियमित हो जायेंगे। आज उनके स्थान पर आपका यह नाचीज ही शुक्रवार की चर्चा में अपनी पसंद के कुछ लिंक आप सबके अवलोकनार्थ प्रस्तुत कर रहा हूँ!
"आओ नूतन वर्ष मनायें"
happy_NEWyEAR

अपना देश महान बनायें।
आओ नूतन वर्ष मनायें।।
My Photo
सुबह सुबह ही अखबार के फ़्रंट पेज पर दिल्ली गैंग रेप पर यह खबर पढकर मन ग्लानि से भर गया. मध्यम प्रदेश यानि मध्य प्रदेश महिला दुष्कर्मों में अब्बल क्यों है? ...
नए ब्लॉग की शुरुआत के लिए कुछ टिप्स
जब एक नया ब्लोगर ब्लोगिंग के मैदान में आता है ,तो एक बारगी उसे कुछ समझ नही आता की क्या करना है कैसे करना है। इसकी तैयारी कैसे करनी है। फिर ऐसे में कोई यारो मददगार नही मिले तो काफी परेशानियों का सामना रहता है। मै कोशिश करूँगा की ब्लॉग की शुरूआती दिनों के लिए कुछ टिप्स दे सकूं। ताकि एक नए ब्लोगर के लिए मददगार साबित हों। एक बात का ख्याल रखें की नए ब्लोगर के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी तो यही होता है की वो ब्लॉग सम्बन्धी टिप्स को ध्यान से पढ़े ,उन्हें समझने की कोशिश करे। और उनके मुताबिक अपने ब्लॉग को ढाले। ताकि सही मायनो में उसका ब्लॉग लोगों के सामने आ सके। मै स्टेप बाय स्टेप आपको बताता हूँ ...
कोढ़ियों के मिस्ल होगा यह समाज
ग़ाफ़िल की अमानत

ज़ुल्मो-सितम को ख़ाक करने के लिए,
लाज़िमी है कुछ हवा की जाय और।
उस लपट की ज़द में तो आएगा ही;
चोर या कोई सिपाही या के और।।
यह ऊना जिले में नारी गांव के पास स्थित एक प्रमुख पर्यटन स्‍थल है जो ऊना से 10 किमी. की दूरी पर बना हुआ है। यह मंदिर हिंदू धर्म के भ्रगवान शिव के...
खड़ा मैं कब से समुन्दर के किनारे, देखता हूँ अनवरत, सब सुध बिसारे । काश लहरों की अनूठी भीड़ में अब, कोई पहचानी, पुरानी आ रही हो । कोई हो जो कह सके, मत जा...
थर्रा गये मंदिर ,मस्जिद ,गिरिजा घर * *जब कर्ण में पड़ी मासूम की चीत्कार * *सहम गए दरख़्त के सब फूल पत्ते * *बिलख पड़ी हर वर्ण हर वर्ग की दीवार
याद करना याद आना, जिंदगी तेरे हवाले, छोड़ दो या मार जाना, प्यार तेरा बंदगी है, आज है तुझको बताना, चाहते हैं लोग सारे, दाग से...
पृथ्वी का पहला व्यक्ति
मैने जब पृथ्वी पर पहला पग रखा
सौन्दर्याचारी बना- मां का मुंह निहार
फिर बना लोभाचारी-अच्छे स्वादिष्ट भोजन,
सुस्वादिक वह सब कुछ जिससे पेट भरता हो
तभी प्रेम के अंकुर उगने लगे
मैंने जब धरती पर प्रथम पग रखा
बनाये कितने सारे मित्र, सखा
मां के प्रथम चुम्बन से मेरे भीतर पैदा हुई
नई शक्ति और वही मेरे अस्तित्व का औदार्य
मरे मिले करोड़
My Photo
Rahul Upadhyaya
जितनी लम्बी चादर हो
उतने ही पांव पसार
यहीं पाठ पढ़ाया गया
जीवन में हर एक बार
पाई पाई गिन के
जब जब पाई पगार…
पाखी की दुनिया

दो साल दो महीने की हो गईं अपूर्वा - ये हैं हमारी सिस्टर अपूर्वा। आज 27 दिसंबर, 2012 को पूरे दो साल दो महीने की हो गईं। अब चीजों को समझने लगी हैं और खूब जिद भी करने लगी है…
बच्चों का कोना

सेंटा क्लॉज़ का इंतज़ार है -जब क्रिसमस त्यौहार है आता, खुशियाँ छा जाती हैं मन में. जगमग करता है घर सारा, क्रिसमस ट्री सजता आँगन में. तरह तरह के केक हैं बनते, जिनको मिलजुल कर खाते….
बाल सजग
शीर्षक : ग्रामीण महिला और अधूरे सपने - ग्रामीण महिला और अधूरे सपने एक अदद जहाँ घूमने की आजादी मिल जाए अगर । सपनो की दुनिया बसाने की एक राह मिल जाए अगर
काजल कुमार के कार्टून

कार्टून :- कि‍सी को अंधा ना कीजौ सावन में

yatra (यात्रा ) मुसाफिर हूं ..............

कुदरत के नजारे और ये अदभुत मंदिर का दृश्य - ये फोटो बैजनाथ मंदिर के पास फूलो की क्लोजअप फोटो लेने के दौरान लिया गया है । मंदिर तक पहुंचने से पहले जो थोडा सा रास्ता है ...

अपनों का साथ

मैं एक नारी हूँ
*Artist*....Ameeta Verma हे!सखा कृष्ण मैं एक नारी हूँ , आत्मा हूँ हर युग की मैं एक चुनौती-एक आवहान हूँ…
साहित्य प्रसून
मेरी पुस्तक 'ठहरो मेरी बात सुनो' में एक ताज़ा सामयिक परवर्धन- 'माता की पुकार' (व्याजोक्ति) -भारत की गरिमा कई बार भंग हो चुकी है | पर अब तो हद हो गयी है | इतना घिनौना काण्ड, 'पशुता' का 'मानवता' पर आक्रमण ! सीधे तरीके से फैसला ...
BHRAMAR KA DARD AUR DARPAN
दिया ह्रदय में रख दूंगा 
 दिया ह्रदय में रख दूंगा मन में मेरे जो आएगा लिख कर उसको रख दूंगा चाह नहीं कुछ नाम कमाऊँ दिया ह्रदय में रख दूंगा ! घर में मेरे जो आएगा मान दिए खुश कर दूंगा...
डॉ अनीता शुक्ला का घटिया और वाहियात बयान --- - कृषि अनुसंधान केंद्र की वैज्ञानिक और लायंस क्लब की अध्यक्ष कृषि अनुसंधान केंद्र की वैज्ञानिक और लायंस क्लब की अध्यक्ष डॉ अनीता शुक्ला का घटिया और वाहियात बयान... शिप्रा की लहरें
किं-बहुना !
तुमने जो भी दिया ,निबाहा क्षमता भर ,धर सिर-आँखों पर , ले इतना विश्वास , कि मेरी लज्जा-मान तुम्हीं रक्खोगे! - मेरी त्रुटियाँ ,दुर्बलताएँ,मेरे मति-भ्रम ,मेरे...
***कम्बल वितरण का दौर***
Hindi Bloggers Forum International (HBFI)
जैसे-जैसे ठंड बढ़ रही है , पारा गिर रहा है वैसे-वैसे कई सामाजिक संस्थानों और सरकार द्वारा कम्बल वितरण का दौर बढ़ते जा रहा है । अख़बारों में फोटो के साथ ख़बरें आ रही है कि अमुक संस्था ने इतने कम्बल बनते, फलाना ने इतने कम्बल दिए । पर ध्यान देने वाली बात ये है कि इनमे से ज्यादातर परोपकार कम और नाम कमाने और वाह-वाही लूटने का भाव ज्यादा रहता है । जो कम्बल गरीबों को दिया जाता है वह बड़ा ही निम्न कोटि का होता है और जिसे भी खरीदने की जिम्मेदारी दी जाती है वो अपने स्तर से घोटाला करने में कोई कसर नहीं छोड़ता । 200 रुपय्ये का समान लेके 600 का बिल जरुर बनवा लेता है । कम्बल लेने वाले लाभुक भी…
'शशि'-एक आम स्त्री का प्रतिबिम्ब
Vyom ke Paar...व्योम के पार
शुक्रवार की शाम को  मेरी सहेली हेमा  का फोन आता है- भाभी जी ,आप ने 'इग्लिश- विन्ग्लिश' देखी? नहीं ,पता नहीं क्यों हेमा  ,मुझे पुरानी  श्रीदेवी पसंद है उनका नया लुक टोलरेट नहीं हो रहा, इसलिए देखने नहीं ग
सिर्फ़ एक झलक दिखा जाओ
एक प्रयास
सुना है कान्हा निधि वन मे रास रचाते हैं गोपियों को नाच नचाते हैं मै गोपी बन कर आ गयी मुझे मिले ना श्याम मुरारी मेरी चुनर रह गयी कोरी श्याम ने खेली ना प्रीत की होरी ललिता से प्रीत बढाते हैं राधा संग पींग बढाते हैं हर गोपी के मन को भाते हैं पर मुझसे मूँह चुराते हैं और मुझे ही इतना तडपाते हैं ये कैसा रास रचाते हैं जिसमे मुझे ना गोपी बनाते हैं मेरी प्रीत परीक्षा लेते है पर अपनी नही बनाते हैं और मधुर मधुर मुस्काते हैं अधरों पर बांसुरी लगाते हैं मुझे ना बांसुरी बनाते हैं सखि री वो कैसा रास रचाते हैं मुझे मुझसे छीने जाते हैं पर दूरी भी बनाते हैं पल पल मुझे तडपाते हैं उर की पीडा को बढाते हैं
ज्ञान दर्पण

अखबारों की सुर्खिया कहती है
तुम्हारे थोड़े से राशन बचाने से ,बच नहीं जाएगी उसकी लाज टूट पड़ेगा गिद्ध सा , घर से भूखा निकला हैं वो आज ये क्या बचकानी हरकते करती हो तुम…?
आर्यावर्त
नव-वर्ष मे एक चिन्तन यह भी
समय-चक्र की गतिशीलता के कारण प्रकृति की स्वतः परिवर्तन प्रक्रिया के परिणामस्वरूप हम वर्ष 2013 के समय-काल मे पहुंच चुके हैं। आईये, नव-वर्ष मे हम सब मिल कर ..

चित्रात्मक--कहानी सोनू चिड़िया
JHAROKHA

*सोनू चिड़िया और रुपहली दोस्त थीं। दोंनों पेड़ों पर फ़ुदक रही थीं।तभी सोनू को **एक पेड़ पर एक बहुत सुन्दर रंग बिरंगा फ़ल दिखा।* *सोनू बोली,“मैं ये फ़ल खाऊंगी।”* *उसकी प्यारी दोस्त सुनहरी ने बहुत समझाया।मना किया।

Madhu Singh: Kuch To Karo
Benakab

* * * कुछ तो करो* पास बैठो मेरे,कोई शरारत करो नफ़रत करो या मोहब्बत करो न डूबें कहीं हम भँवर में अकेले साथ जीने की कोई सूरत करो चुप न हो, तुम यूँ हीं बैठी रहो कोई खंजर चलाओ शरारत करो छलक जाएँ न आँखों से आँसूं कहीं इन्हे तुम छुपाने की हिम्मत करो कहीं खो न जाए मंजिल तुम्हारी मोहब्बत की अपनी हिफाज़त करो ...
State VS people
कबीरा खडा़ बाज़ार में

State VS people Battle of India Gate raises questions यह थेन मन चौक की घटना नहीं है जहां युवा विरोधियों पर टेंक चढ़ा दिए गये थे न यह मिश्र के कैरों के तहरीर स्क्वायर का दमन चक्र है जहां प्रजातांत्रिक विरोध को बर्बरता पूर्वक ख़ट खट करते बूटों ने रौंद डाला था .यह किस्सा है भारत के प्रतीक इंडिया गेट का जहां शान्ति पूर्वक दिल्ली रेप की जां बाज़ युवती निर्भय को बर्बरता पूर्वक अपराध तत्वों द्वारा रौंदे जाने के बाद लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे थे . गणतंत्र दिवस के प्रतीक खम्बों को(जो आगामी गणतंत्र दिवस के लिए खड़े किए गएँ हैं ) उखाड़ कर युवा भीड़ ने जला डाला था शायद ..
दिमागी तौर पर ठस रह सकती गूगल पीढ़ी
कबीरा खडा़ बाज़ार में

दिमागी तौर पर ठस रह सकती गूगल पीढ़ी जहां तक स्वयं करके सीखने का सवाल है व्यवहारिक हुनर का सवाल है हर चीज़ के लिए हर जानकारी के लिए कंप्यूटर बैशाखी का सहारा लेने वाली गूगल जेनरेशन बेतहाशा पिछड़ सकती है दिमाग ठस हो सकता है इस गूगल बाबा की ऊंगली थाम चलने वाली पीढ़ी का . यह कथन और प्रागुक्ति है मशहूर ब्रितानी अन्वेषक ट्रेवोर बय्लिस का जिन्हें' वाइंड अप रेडिओ 'के आविष्कार के लिए जाना जाता है . कंप्यूटर मानीटर्स के आगे अधिकाधिक रहने वाली पीढ़ी अपनी रचनात्मकता ,काल्पनिक उड़ान भूलती जा रही है

पर्यावरण --हाइगा में
हिन्दी-हाइगा

वर्ष २०१२ बस खत्म होने ही वाला है...नए वर्ष में भी पर्यावरण की सुरक्षा ही हमारा उद्देश्य होना चाहिए...दूषित पर्यावरण के कुछ दुष्परिणामों पर नजर डालते हैं और पर्यावरण को स्वच्छ बनाने के संकल्प के साथ नये वर्ष की शुरुआत करते हैं... नव वर्ष मंगलमय हो...अनंत शुभकामनाएँ
मौन ही होता जहाँ अभिषेक !!!
SADA
SADA
मेरी खामोशियों को देख शब्‍द आपस में कानाफूसी करते हैं इन दिनो अपने-अपने क़यास लगाते जुबां कुछ कहने को तैयार नहीं मन अपनी धुन में हर वक्‍़त शून्‍य में विचरता आखिर वज़ह क्‍या है ?? ...
Hindi :: MyWebdunia
प्रेरणा!!सुभाष बुड़ावनवाला - इतिहास के अनुभवों से हम सबक नहीं लेते इसलिए...-इतिहास के अनुभवों से हम सबक नहीं लेते इसलिए उसकी पुनरावृत्ति होती है।विनोबा-जिसकी आत्मा पवित्र हो वहीं ऊंचा ...
मयंक

"पुस्तक समीक्षा-लक्ष्य"
लक्ष्य को न भुलाने की परिणति है लक्ष्य…
परिकल्पना

भावों का परिचय - शाँत सागर में बेचैन लहरें...साहिल तक आतीं, हमारे पाँवों से लिपट लिपट जातीं..फिर लौट जातीं चुपचाप..छोड़ अपने वजूद की निशानी..रेत पर आडी-तिरछी लक़ीरें…
कर्मनाशा

स्वप्न , यथार्थ और कविता का गेंदा फूल
'शीतल वाणी' पत्रिका का उदय प्रकाश पर केन्द्रित विशेष अंक किसी तरह डाक की सेवा में घूमता - भटकता -अटकता हुआ मिल (ही) गया…


मेरी कविता
ख्वाब क्या अपनाओगे ? - प्रत्यक्ष को अपना न सके, ख्वाब क्या अपनाओगे; बने कपड़े भी पहन न पाये, नए कहाँ सिलवाओगे | दुनिया उटपटांगों की है, सहज कहाँ रह पावोगे, हर हफ्ते तुम एक ...
जाले
मातृ देवो भव: - सीकर के नजदीक गाँव में रहने वाली एक गरीब विधवा, रतनी बाई, ने मेहनत मजदूरी करके अपने इकलौते बेटे हरिलाल को हाईस्कूल तक पढ़ाया और रिश्तेदारों की सलाह पर उसे...
धान के देश में!
अगर ब्लोगवाणी चाहे तो आज भी फिर से हिन्दी ब्लोगिंग में जान फूँक सकती है - और किसी को लगे, न लगे, पर मुझे लगता है कि हिन्दी ब्लोगिंग की प्राणशक्ति बेहद कमजोर हो चुकी है, इसके पीछे कारण यही लगता है कि हिन्दी ब्लोगिंग के लिए अच्छे एग्रीगेटर...
विचार
तेरी याद सताए
तेरी याद सताए *खिले धूप**, **यदि छटे कुहासा* *फिर बगिया लहराए**,* *देखें जब हरियाली अंखियाँ* *रूप तेरा मन आये**,* *सरदी के इस मौसम में अब* *तेरी याद सताए।*...
काव्यान्जलि ...

नववर्ष की बधाई,,, - *2013* *नववर्ष की बधाई,* * * साल बीत गया दुख में,कोई खुशी नही पाई, नया साल सुखमय गुजरे,नववर्ष की बधाई! 2012 बीत रहा, क्या खोया क्या पाया...
takniki gyan

कमाल का सॉफ्टवेर Atube Cather.......... - दोस्तों आज मैं आप लोगों के लिए एक बेहतरीन सॉफ्टवेर लेकर आया हूँ..... इस सॉफ्टवेर से आप किसी भी विडियो शेरिंग वेबसाइट से विडियो डाउनलोड कर सकते है।, साथ...

''राम! अब आ ही जाओ''

''त्रेता में तो कर दिया था संहार उसका
कैसे बढ़ा  कलियुग में परिवार उसका
मैं तो हूँ एक,फिर कैसे हो संहार सबका
कर सकूंगा फिर से क्या उद्धार सबका?''…
तो फिर...
मेरी आंखों में आंसू,
फिर भी लवों पे मुस्‍कान क्‍यूं है,
जिन्‍दगी जीते हैं हम,
फिर भी हर कोई परेशान क्‍यों है,
गुलशन है अगर सफर जिन्‍दगी का
तो फिर .......
मेरी कविताओं का संग्रह
अब और सहन नहीं होता है
अब और सहन नहीं होता है देख इस देश की हालत उस दिन अखबार मैं इस कड़क ती ठंड मैं पसीने की बूंद भी खून बन गई एक बेटी , बहन की इज्जत तार
अशोकनामा

एक बात तो बताओ 
एक बात तो बताओ तुम्हारे पास अंग्रेज़ों के दिए संस्कार हैं अंग्रेज़ों के ज़माने का कानून तुम्हारे पास है अनगिनत झूठे केस तुम बना चुके हो लेकिन...
आज के लिए बस इतना ही…!

"लाचार हुआ सारा समाज" (चर्चा अंक-2820)

मित्रों! रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...