चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

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Saturday, December 15, 2012

ईश्वर ने चाहा तो हम फिर मिलेंगे :)


दोस्तों

आज सिर्फ़ लिंक्स ही दे पाऊँगी बडी मुश्किल से कम्प्यूटर हाथ लगा है सिर्फ़ एक घंटे के लिये …………बच्चे अपना काम कर रहे हैं इसलिये आज इसी से गुजारा कीजिये …………

1)

समझौतों की कोई जु़बान नहीं होती !!!

इसमें क्या शक है ………




2)

देह से परे मन की चाह

वो कभी पूरी नही होती………




3)

आवरण

हटाना आसान नहीं ………




4)

"कम्प्यूटर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

तेरे बिना जीया जाये ना …………




5)

तुम काबिल हो, काबिल-ए-तारीफ़ हो

इसमें क्या शक है …………




6)

उलझे,सुलझे आंखमिचौली खेलते एहसास

बहुत कुछ याद दिला जाते हैं ………




7)

अपनी बेटी को कितना चाहते हैं आप ?

जिसका अन्दाज़ा किसी खास पल मे ही होता है …




8)

आजीबो गरीब सनक

कौन सी ?



9)

नाज़ुक सा इश्क़

इश्क तो हमेशा ही नाज़ुक होता है 



10)

'फ़र्क पड़ना '

किसे ?


11)

सत्य का वीभत्स रस भी जीवन में होता है

सत्य है तो अपने हर रंग दिखायेगा ही 




12)

मेरा सहयात्री - ऋता

मेरे साथ है ……अब ना कोई और आस है


13)

मन के आर-पार

किसे देखूँ अब ?


14)

तुम्हारी अपार करूणा

निरन्तर बरस रही है ………माधव!




15)

आई लव यू टू 

बस तीन लफ़्ज़ और ज़िन्दगी तमाम्…………

 16)

.....साँवली बिटिया .....

तो क्या हुआ ?




17)

माँ तुम्हारा चूल्हा

यादों में समा गया…… 


18)

बेसलीका ही रहे तुम

ये भी एक अन्दाज़ है………




चलिये दोस्तों आज इन्हीं लिंक्स से काम चलाइये ………फिर मिलूँगी अगले हफ़्ते इसी दिन ………ओह!अगर साँस रही तो ………अरे बाबा! लिख गयी बडे यकीन के साथ कि फिर मिलूँगी इसी दिन मगर साँस का क्या भरोसा कब दगा दे जाये …………इसलिये ईश्वर ने चाहा तो हम फिर मिलेंगे :)

19 comments:

  1. शुभप्रभात :))
    लाजबाब है ....
    शुभकामनायें !!

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  2. सार्थक लिंक्स चयन .....शुभकामनायें वंदना जी ...

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  3. बहुत ही सुन्दर है सभी लिंक्स.........जज़्बात की पोस्ट यहाँ शामिल करने का बहुत शुक्रिया।

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  4. बहुत बढ़िया सुव्यवस्थित स्तरीय चर्चा सभी शानदार सूत्रों से सजी मेरे आलेख को शामिल किया दिल से आभारी हूँ वंदना जी

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  5. अनुपम लिंक्‍स संयोजित किये हैं आपने ... आभार

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  6. बढ़िया चर्चा सुन्दर लिंक्स

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  7. बहुत ही बढ़ियाँ लिंक्स...
    आभार...
    :-)

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  8. बहुत सुन्दर सूत्र संयोजित किये हैं आपने..

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  9. चर्चा बहुत बढिया हैँ लेकिन चर्चा मंच के चर्चाकार अब केवल अपने पसंदीदा ब्लाँग के ही लिँक देने लगे हैँ कई ब्लाँगर के अच्छे अच्छे पोस्ट के लिँक जो यहाँ होने चाहिए नही आ रहे हैँ इसका कारन चर्चाकार का एक तरफ ही केवल उत्कृष्ठ व चर्चित ब्लाँग पर ही रुझान दिखना साफ साफ दिख रहा हैँ ऐसा मैँ बहुत महिने हिँदी ब्लाँगर के पोस्ट देखने के बाद कह रहा हुँ मैँ अपनी बात नही कर रहा क्योकि मैने ब्लाँग लिखना छोड दिया । यह एक सत्यता चर्चा मंच कि नजर आ रही हैँ ।आप चाहे इसे सत्य माने या असत्य लेकिन एक बात समझ ले बिना वाणी के कभी बाधयँत्र नही बजते ।

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    1. वरुण जी
      देखिये जब चर्चाकार लिंक्स लेता है तो जो उसके डैशबोर्ड पर होते हैं या किसी संकलक पर वो वहाँ से लिंक लेता है और यदि उस वक्त तक जो भी पोस्ट आती हैं और जिसे जो उपयुक्त लगती हैं वो ही ले सकता है अब यदि उस वक्त तक कोई जिसे हम नही जानते उनकी पोस्ट नही आती तो क्या कहा जा सकता है…………फिर भी हमारी कोशिश होती है हर बार कुछ ऐसे लिंक्स दें जो सबने ना पढे हों ……… और ये कोशिश निरन्तर चलती रहती है और रही बात कुछ चर्चित ब्लोग की तो यदि कुछ अच्छा है तो उसे कैसे छोडा जा सकता है उसका भी सब तक पहुँचना बहुत जरूरी है……… हम अच्छी और सार्थक ब्लोग्स की भी अनदेखी नही कर सकते …………और बहुत ज्यादा लिंक्स भी नही ले सकते क्योंकि उससे रस खत्म होता है ऐसे में सामन्जस्य बिठाना आसान नहीं होता इसलिये कोशिश करते हैं कि सार्थक और उपयोगी लिंक्स जरूर पाठकों तक पहुंच जायें।

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  10. बढ़िया लिंक्स...सुंदर चर्चा...आभार!!

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  11. बहुत बढ़िया लिंक्स के साथ सार्थक चर्चा प्रस्तुति
    आभार!

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  12. वरुण जी!
    मैं श्रीमती वन्दना गुप्ता जी की बात से सहमत हूँ। इसके साथ ही यह भी स्प्ष्ट कर देना चाहता हूँ कि चर्चा में चर्चाकार अपनी पसंद के ही लिंक लेता है और हमारे सभी चर्चाकार सहयोगी अपनी पसंद के लिंक चुनने के लिए स्वतन्त्र है!
    अर्थात जो चर्चा करेगा वो अपनी पसंद के ही तो लिंक चुनेगा। किसी और की पसंद के लिंक वो भला क्यों लगायेगा?
    मेरी बात कुछ कड़वी जरूर है लेकिन हम लोग किसी से चर्चा करने का कोई प्रतिदान नहीं लेते हैं। स्वान्तःसुखाय चर्चा करना हम सभी का धर्म और ईमान भी है। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि-
    कबिरा खड़ा बजार में, सबकी माँगे खैर।
    न काहू से दोस्ती, न काहू से् बैर।।
    सादर!

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  13. सार्थक सुंदर चर्चा,,,बंदना जी,,,,

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  14. बहुत उम्दा लिंक्स लगाए हैं आपने | आभार |

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