चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Thursday, May 31, 2012

संक्षिप्त चर्चा ( चर्चा - 896 )

आज की चर्चा में आप सबका हार्दिक स्वागत है
चलते हैं चर्चा की ओर


                                 वैष्‍णो देवी यात्रा.......एक संस्‍मरण



श्रद्धांजलि

गुरू
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चिडिया रानी

घर की चौखटें

तुम न आए

आम लोग हुए खास

साढे साती

पॉश खेल 

रंगों पर हाइगा
 
साहित्य सुरभि पर हाइकु

एक पगडंडी नई
My Photo
झंडा जरूरी है

दो आँखें

गजल
My Photo
खुदा नहीं मिला
My Photo
लक्ष्मण रेखा
मेरा फोटो
दुखता बहुत है

त्रिवेणी
निरामिष
एलोवेरा

आमिर का आशियाना
My Photo
दिनेश जी की टिप्पणी

ट्रिक

बिना प्रमाण पत्र के

गर्म जलेबी

दो आँखें ये भी

अंत में है
खट्टी-मीठी फेसबुक
आज का लिए इतना ही
धन्यवाद
दिलबाग विर्क
**************

Wednesday, May 30, 2012

5 (1st) ऑफ़ बेस्ट 10 चर्चा ऑफ़ चर्चा-मंच : चर्चा मंच-895

सेकण्ड 5 ऑफ़ बेस्ट 10 चर्चा ऑफ़ चर्चा-मंच देखिये 06-06-2012 शुक्रवार को
 प्रवास पर रविकर -
आज आप ढेर सारे पुराने लिंक पढ़ें । 
चर्चा के निराले अंदाज भी देखें ।।
और 
अपना लिंक अपनी पोस्ट भी खोज निकालिए । 

प्रसिद्ध होने का तरीका (चर्चामंच - 708)

Thursday, November 24, 2011


             आज की चर्चा में आप सबका स्वागत है
                        
चर्चा की शुरुआत करते हैं लेखक के रूप में प्रसिद्ध होने के तरीके से. आप कोई पांच-छः वर्ष पुरानी पत्रिका निकालिए. कोई रचना अच्छी लगे तो उसका मेक अप कीजिए और अपने नाम से प्रकाशित कीजिए इंदु गुप्ता जी की तरह. यदि आप ब्लोगर हैं और अधिक से अधिक टिप्पणियाँ चाहते हैं तो अपनाइए मनोज जैसवाल जी का तरीका.
अब चलते है आज की चर्चा की ओर

गद्य रचनाएं 
पद्य रचनाएं 
             अंत में देखिए इ-पत्रिका अविराम का नया अंक 
                                         और 
                        दिल्ली में काईट फैस्टिवल की झलक 
                     आज की चर्चा में बस इतना ही 
                                                 धन्यवाद 
                                           दिलबाग विर्क 
नीचे चर्चा मंच की एक पुरानी पोस्ट भी देखिए!

Tuesday, May 24, 2011

 संगीता स्वरुप


नमस्कार , आज मंगलवार को फिर हाज़िर हूँ साप्ताहिक काव्य मंच ले कर ..ब्लॉग जगत के चमन से सुन्दर और सुगन्धित पुष्पों को चुन मंच रुपी गुलदस्ता सजाया है ..दो दिन से दिल्ली का मौसम भी खुशनुमा है .. मिट्टी की सोंधी सोंधी खुशबू मन को तारो ताजा कर रही है ..और मैं ताजे फूलों का गुलदस्ता अपने पाठकों को भेंट कर रही हूँ … अब देखना है कि पाठकों को इसके फ़ूल कितने पसंद आते हैं … सबसे पहला पुष्प है डा० रूपचन्द्र शास्त्री जी की तमन्ना का …





















बम 





















मासूम जी द्वारा लगाई गयी

यह पोस्ट भी देख लीजिए!

बेशर्मी मोर्चे से मेंढको कि टर्र टर्र तक का सफ़र

Saturday, August 6, 2011

Picture 114चर्चाकार :यह ब्लॉगजगत एस एम् मासूम के नाम से जानता है और अमन के पैग़ाम के नाम से पहचानता भी है. सामाजिक सरोकारों से जुड़ कर काम करना अच्छा लगता है . समाज में अमन और  शांति बनी रहे यही दुआ हर समय करता हूं.  बेशर्मी मोर्चे के ख़त्म होते ही रमजान की मुबारकबाद का दौर शुरू हो गया और नागपंचमी पे पर श्रद्धालुओं की उमड़ी  भीड़.

आप भी देख लें बेह्तारीक व्यंगकार और लेखक का कमाल
योग और रात मैं देर से जागें फिर भी रहे तंदरुस्त
समझदार पागल  से मिलने.  और जो देखा
अगर कांटें इकट्ठे किये हैं तो दिखाई तो पड़ेंगे " ब्लॉगजगत से परेशान लोगों को इस बात पे अवश्य ध्यान  देना चाहिए
आप भी देखीं क्या आप ने  कोई पाप तो नहीं किया फिर ??/
आग लगायी लोगों ने 
आनी चाहिए। जरूरी नहीं है कि मेरा ब्लॉग सभी कि दृष्टि में हो।

विकीलीक्स द्वारा स्विस बैंकों के भारतीयों की पहली सूची जारी

संतुष्ट नहीं दिखते. शास्त्री जी को तो लगता है कि हम चाहे जंगली होते, पौधे होते लेकिन होते आपस मैं प्रेम बांटने वाले. उच्च विचार और मैं सहमत
कभी बेवजह नहीं हुआ करती. बड़ी बेहतरीन बात कह रहे हैं
की जगह गज़ब ढा  रहे हैं शाहनवाज़ साहब.   क्या इसका हल धार्मिक लोगों से दूरे है? इस सवाल का जवाब अवश्य तलाशें?

वत्स जी ने भी चर्चा इस प्रकार लगाई थी!

न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर---(चर्चा मंच-215)

Thursday, July 15, 2010

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सभी पाठकों को डी.के.शर्मा”वत्स” की ओर से राम-राम,नमस्ते,सलाम,सत श्री अकाल,जय हिन्द….

समय की कमी के चलते बिना आपसे कुछ कहे सुने सीधे चर्चा शुरू करते हैं….अपने द्वारा पढी गई चन्द पोस्टस को एकत्रित कर आज का ये चर्चा मंच सजा दिया है…..आप पढिए और आनन्द लीजिए……जै राम जी की!

कहानी--भूखा कहीं का ---कहानीकार सुश्री प्रतिभा सक्सेना---चिट्ठा---कहानी - कुञ्ज
 
कहानी---सांझ पहर का उगता सूरज--कहानीकार सुमन कुमार—चिट्ठा---दादा जी का जूता
स्‍पष्‍ट लिखने वालों के पाठक होते हैं और जो अस्‍पष्‍ट लिखते हैं. . .रचनाकार—श्रीमति अजीत गुप्ता—चिट्ठा---अजित गुप्‍ता का कोना
मीठा खाओ तनाव भगाओ---संजीव शर्मा—चिट्ठाSanjivani
ज़िंदगी का गणित---संगीता स्वरूप---चिट्ठा--गीत....मेरी अनुभूतियाँ
ओक में पानी की इच्छा--प्रमोद
बदलती हवायें---पलाश
आ कि तुझ बिन इस तरह ऐ दोस्त घबराता हूं मैं !---अली सैयद---चिट्ठा---उम्मतें 
सुबह सुबह दिनेश राय द्विवेदी जी के हैंगोवर के टिकाऊपन के लिए चिंता व्यक्त कर ही रहा था कि डा.अरविन्द मिश्र जी 
सावधान,आपकी प्रोफाईल कमेंट्स खा रही है।—-बता रहे हैं जाकिर रजनीशचिट्ठा---मेरी दुनिया मेरे सपने
आखिर धर्म परिवर्तन जरुरी क्यों है ? - तारकेश्वर गिरी.चिट्ठा---काम की बातें
हमारे देश मैं जो भी धर्मपरिवर्तन कि गतिविधियाँ चल रही हैं,उसे देख कर यही लगता है कि धर्म परिवर्तन आस्था के साथ-साथ लालच के लिए भी किया जा रहा है.गाज़ियाबाद के विजय नगर में इसाई मशीनरियां आज भी पैसे के बल पर धर्म परिवर्तन करवा रही हैं. और वो भी मात्र ३ लाख रुपये में. गरीब और पिछड़े हुए लोग इसमें बढ़ चढ़ करके भाग ले रहे हैं.पैसे के साथ-साथ उन्हें तुरंत चमत्कार का लालच भी दिया जा रहा है. आज भी अगर आप सुबह- सुबह टी वी खोल कर के देखे तो उसमे कैसे-कैसे चमत्कार दिखा कर के लालच दिया जाता है कि आप अपना धर्म परिवर्तन करले.
दर्द दिया है तुमने मुझको, दवा न तुमसे मांगूंगा - सतीश सक्सेना----चिट्ठा--मेरे गीत !
यात्रा----साकार से निराकार तक.....पं.डी.के.शर्मा “वत्स”---चिट्ठा---धर्म यात्रा
 
देसिल बयना:-बैठे बैठे पेट पर हाथकरण समस्तीपुरी---चिट्ठा---मनोज
कहाँ से आया था वो......शरद कोकास---चिट्ठा---ना जादू ना टोना
"जीवन की अभिव्यक्ति!” (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘‘मयंक’’)चिट्ठाउच्चारण
 
अगर आप मोबाईल रिचार्ज का काम करते है तो सावधान हो जाए !—खबरदार कर रहे हैं नरेश सिँह राठौड---चिट्ठामेरी शेखावटी
माँ की चिट्ठी ---रामेश्वर पटेल---चिट्ठा--स्वान्तः सुखाय

सूचनार्थ

गणतंत्र दिवस पर बहादुरी पुरस्कार के लिए बच्चों से आवेदन आमंत्रित--चिट्ठा--बाल-दुनिया
कल  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" ने एक कार्टून लगाया था!
कार्टून : वाह!! ....... इतनी सारी गरीबी ??!!!

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जनसँख्या दिवस पर एक कार्टून ...


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चर्चा द्वारा -डॉ नूतन गैरोला

चलो आज सूरज ले आयें–चर्चा 438-

Friday, February 25, 2011


                              
            आह्वान करती हूँ आप सबका इस मंच पर --
                      प्रभात की इस सुन्दर बेला में  
           और कहतीं हूँ क्यों न हम साथ साथ कुछ चर्चाएँ करें      
   
               
दूर हो, सब बिखरे हो, साथी तुम कहाँ
                आओ सब मिल कर बसायें फिर जहां
                जिन राह  से चलते हुवे बिछडे थे कभी
               रास्ते सब मिलते जिधर आओ चलें वहाँ ....
…………
अंधेरों सा आलम होता तुम बिन सूना जहां
ओझल हो नजरों से तुम मशगूल हो वहाँ 
सूरज की रौशनी से हम-तुम चमकें थे जहाँ
आओ हम तुम, हम सब फिर से मिलें वहाँ ......
****************डॉ नूतन गैरोला*****************

              आप सबको मेरा सादर अभिवादन
       
                    सुबह से रात तक के कुछ रंग

                             
                        चलो  आज  सूरज  ले  आयें      अन्धकार को दूर भगाएं | 
                      Kailash C Sharma जी की पोस्ट  
                     
                      बच्चों का कोना ब्लॉग से  

                              "धूप के दोहे"                
                           
                      धूप के दोहे” – उच्चारण ब्लॉग से 
                           रूपचन्द्र शास्त्री जी की पोस्ट 
                तेज घटा जब सूर्य का, हुवी लुप्त तब धूप  
                  वृधावस्था  में   कहाँ     यौवन  जैसा  रूप |    

                               सिन्दुरी शाम
                
                                 सिंदूरी शाम
                                उस निस्तब्ध..
                                अन्धकार में ..
                                 पलास वृक्षों तले ..
                                 फुसफुसाते हुवे
                                 अपनी जादुई आवाज में 
                                 तुमने मुझसे पूछा था 
                                
मैं कौन हूँ ?             अनुभूति ब्लॉग से श्रीप्रकाश डिमरी जी की पोस्ट
                            आशा की किरण
                                         आशा की किरणअमृतरस ब्लॉग से
                       रात के गहन अन्धकार में                        आसमान के असीम विस्तार में ..  

                       मेघ  दूत : पाब्लो नेरुदा      पाब्लो नेरुदा की हिंदी में अनुवादित कविताएँ
                      

                  समालोचन ब्लॉग से अरुण देव जी की पोस्ट  अनुवाद किया है
                         अपर्णा मनोज भटनागर जी ने

                                   
                                  ब्लॉग संवादी से
                     
                               अरुण देव जी  

                                  तुम अब    
  
    तुम्हारे साथ  कोई   तुम सा याद आता है 
    तुम्हारी हँसी में वही कोई परिचित से फूल                         

                     उजला आसमां - संगीता स्वरुप     
                                पुस्तक समीक्षा
                          रूपचन्द्र शास्त्री जी द्वारा
                  संगीता स्वरुप “गीत” जी की हाल ही में
                                 प्रकाशित पुस्तक   
                              
                           संगीता स्वरुप "गीत" जी

           भजगोविन्दम
      भगवान श्री शंकराचार्य विरचित 
  भजगोविन्दम का हिंदी भाव पद्यनुवाद  
   
         प्रभा तिवारी जी

 "बा के बिना जीवन की मैं कल्पना नहीं कर सकता"

 कस्तूरबा गाँधी जी की पुण्य तिथि पर
मनोज जी की एक पोस्ट
   
           मनोज जी          ब्लॉग विचार से
   
      योगमार्ग ब्लॉग से
जिस प्रार्थना में मांग है,क्या वह प्रार्थना है?
     
          Rajey Sha ji
  
  कोई धुंवा फिर दिल चीर के निकला    

       Arvind Jangid
  
     नया ब्लॉग- इनका
      उत्साहवर्धन करें |
    mun ke –manke           ब्लॉग से

        बिखरें हैं स्वर्ग
        चारों ….तरफ
 

     Bikhre Hai Swarg
 
           अपेक्षाएं 
      श्रद्धा सुमन ब्लॉग से
    
        अनीता निहलानी जी
         
  छुईमुई मेरे आँगन में
ब्लॉग Main Aur Meri Kavitayen
    
           सुमन जी
     दरकती मान्यताएं
        आलोकित जी
      


         
      साहित्य और अंतरजाल - परिवर्तन की बयार ..भाग –१
                           उड़न तस्तरी ब्लॉग से

                      
                             श्री समीर लाल जी

ये चाहे तो सर पे बिठा दें, चाहें फैंक दें
     
     P S Bhakuni ji
         ताऊ डॉट इन
     
    पी सी रामपुरिया जी
     ( ब्लॉग पर चित्र )
       ताऊ रामपुरिया
मिस समीरा टेडी को उनके स्लिम एवं जीरो साइज़ उपन्यासिका के लिए ताऊ की अंतिम चेतावनी
             मेरे गीत ! 

      
        सतीश सक्सेना जी
 
           हताश अपेक्षाएं
       ललित डॉट इन

      
        ललित शर्मा जी
       ( ब्लॉग पर चित्र ) 
कल्लू मल घी वाले की बेटी और चचा ग़ालिब -- ललित शर्मा

    अंधविश्वासों के खिलाफ          TSLIM ब्लॉग 

डॉ यतीश अग्रवाल जी की पोस्ट
 
काले साए : आत्‍माएं, टोने-टोटके और काला जादू ... Kaale Saye, Aatmayen, Tone-Totke aur Kala Jadu
 
     विस्तार समेटती हूँ मैं
     anupama's sukrity
      blog se
        
      अनुपमा त्रिपाठी जी
   चंद सवाल जो चीखतें हैं |
      काव्यांजली ब्लॉग से

    

         ज्योति सिंह जी 
 ए मेरे बच्चे, तुमने नहीं देखा
  ब्लॉग मेरे एहसास – भाव
     

            स्वाति जी



                      जिंदगी.... एक खामोश सफर                            ब्लॉग से वंदना जी
                          
                           सीरतों पर भी नकाब है
    
                          सीरत पे फिदां होने वाले
                          ये तेज़ाब के खौलते नालों में 
                          अपना पता कहाँ पायेगा
                          खुद भी फ़ना हो जाएगा |                         
                                
  
                          बच्चों के लिए

      चैतन्य का कोना    सुन्दर तस्वीरें- बरफ ही बरफ    
       
           चैतन्य शर्मा

    सुन्दर सफ़ेद चमकते पेड़
     पाखी की दुनियाँ 

   जंगल के बीच हाथी की सवारी 
   
      अक्षिता / पाखी
      
          चल मेरे हाथी 
    

   मेरा बस्ता कितना भारी      ब्लॉग बाल मन से         


     मेरा बस्ता कितना भारी
     बोझ उठाना है लाचारी 
 
   बच्चों के लिए बहुत सुन्दर ब्लॉग .. सच बताऊँ मन तो बड़ों का भी खूब लगेगा यहाँ ..
            कहानी
  दुष्टों का क्षणिक संग भी कष्टकारी होता है |

ब्लॉग - दादी माँ की काहानियाँ

     प्यारा लगता है हाथी
   
      उच्चारण ब्लॉग से
 
   क्या मैना ऐसी होती है
  
        नन्हें सुमन से
Pankhuri's TOP TEN songs List...!
 
   ब्लॉग पंखुरी Times ... !
           माधव

   जब माधव पापा मम्मी के साथ
    चिड़ियाघर देखने गया था
      
   तन का अवसान             ब्लॉग काव्य कल्पना से Er सत्यम शिवम


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