चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Saturday, June 30, 2012

"शनिवार की चर्चा" (चर्चा मंच-926)


चर्चा मंच  ------  अंक : 926
चर्चाकार : डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
ज़ाल-जगत के सभी हिन्दी-चिट्ठाकारों को 
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"" का सादर अभिवादन!
कभी-कभी पुरानी पोस्टों को भी पढ़ना सुखद लगता है।  आइए आज कुछ पुरानी पोस्टों की चर्चा करता हूँ।

"मेरा दिन चुनाव प्रचार के नामं"

इसलिए आज व्यस्तता कुछ ज्यादा ही है-

तेताला
 
ब्लॉग में अपार संभावनाएं हैं : कनिष्क कश्यप
 ब्लॉगप्रहरी एक उम्दा सोच का रिज़ल्ट ही है, आज उस उम्दा सोच के धनी कनिष्क कश्यप से हुई भेंट वार्ता सादर...

अपने वक्त पर साथ देते नहीं यह कहते हुए हम थकते कहाँ है ये अपने होते हैं कौन? यह हम समझ पाते कहाँ है!

आज फिर मन .....


आज फिर मन मचल रहा है,

मदिरालय में जाने को.

दो घूँट पी कर साकी के,

गैरों  संग  झूम जाने को.

रिश्ते नाते दुनियादारी,

चाहता हूँ भूल जाने को.

जिनसे कुछ न लिया दिया,

आते वही गले लगाने को.


बोतलों की शक्ल ही, असली नशा उत्तेजना

बोतलों का नाच-नंगा, न नजर आता कभी 

हाथ धो बदनाम के पीछे पड़े शायर सभी

जाम में होता  नशा तो  नाचती बोतल दिखे

है  सरासर  झूठ  नादाँ  ,   न  नशा दारू चखे

बोतले  कुछ यूँ  पड़ी थी, होस्टल  के सामने  देखने भर से नशे में, सर लगे सर थामने 


कविता तो मुझसे रूठी है!

कुछ बातें हैं तर्क से परे...

कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे अनायास आ गयी मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...कविता तो मुझसे रूठी है!! 
नन्हें सुमन
 
‘‘प्यारी प्राची’’ - *** * *इतनी जल्दी क्या है बिटिया, * *सिर पर पल्लू लाने की।* *अभी उम्र है गुड्डे-गुड़ियों के संग,* *समय बिताने की।।* ** *(चित्र गूगल सर्च से साभार)* *मम्मी-प.
JHAROKHA

यकीन - ** * तुम्हारे यकीं का इंतजार करते करते अब थक चुकी हूं मैं फ़िर भी तुम्हें आया नहीं यकीं मुझ पर अब तक उससे तुम नहीं मेरा आत्म सम्मान टूटता है और मै..


*बचपन में पढ़ी गीता का अर्थ मैं जान पाई बहुत देर बाद, मेरे शहर में जहाँ जीवन क्षणभंगुर है और मृत्यु एक सच्चाई है.... 
साहित्य योग
 
"युवाओं से है मेरी पुकार...सरदार भगत सिंह की कुछ पक्तियों से...." - आज आप को मैं कुछ उन पक्तियों से परिचय कराता हूँ जब सरदार भगत सिंह जेल में अपनी मंगेतर के याद में गाया करते थे. आजीवन तेरे फिराक जुदाई विछोट्र, विरह, नामिल...

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र की जान खतरे में डालकर किसी ने जबरदस्त साजिश करके बदला लेने की कोशीश की है. महाशरीफ़ और निहायत ही नेक इंसान, धर्मपूर्वक ब्लाग प्रजा पालक ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र के साथ.....

आवारा यादें ...

खोखले जिस्म में साँस लेतीं 

कुछ ज़ख्मी यादें 

कुछ लहुलुहान ख्वाब 

जागती करवटों में गुज़री अधूरी रातें ...

उच्चारण
“स्लेट और तख़्ती” - *सिसक-सिसक कर स्लेट जी रही, तख्ती ने दम तोड़ दिया है। सुन्दर लेख-सुलेख नहीं है, कलम टाट का छोड़ दिया है।। 
षटपदीय छंद
आदर्शवादी होकर  ,  बने सिर्फ नाम के
चमचागिरी करके तुम , हो जाओ काम के .
 हो जाओ काम के , होगा तुम्हारा नाम 
करना चाहे उल्टे  ,  सीधे पड़ेंगे काम . 
ज़िन्दगी
तेरे पास - सुन तेरे चेहरे पर गुलाब सी खिली मधुर स्मित नज़र आती है मुझे जब तू दूर -बहुत दूर निंदिया के आगोश में स्वप्नों के आरामगाह में विचरण कर रहा होता है तेरे सीने...
अंधड़ !
अरे भाई जी, किसी ने ये सवाल भी पूछे क्या ? - *जहां तक माया की "माया" का सवाल है,
हमारे उत्तराँचल में पूर्वजों के जांचे-परखे दो बहुत ख़ूबसूरत मुहावरे प्रचलित है,
जो समय की कसौटी पर खरे भी उतरे है ! ...

*सुन्दर-सुन्दर खेत हमारे।
बाग-बगीचे प्यारे-प्यारे।। 
पर्वत की है छटा निराली।
चारों ओर बिछी हरियाली।।
सूरज किरणें फैलाता है।
छटा अनोखी बिखराता है।।
गीत सुनहरे
शहीद - ए - आजम भगत सिंह - 5 - शहीद - ए - आजम भगत सिंह - 5 देश प्रेम का ज्वार भरा था, रोम रोम अंगार भरा था . मन में शोले भड़क रहे थे, स्वतंत्रता को तड़प रहे थे . प्रचण्ड शक्ति संचित कर भाल...


बुराई रही जीत है , अच्छाई की हार | सब पासे उलटे पड़े , कलयुग की है मार || कलयुग की है मार, राम पे रावण भारी | 
Alag sa
कबीरदासजी और छत्तीसगढ़ - साहेब बंदगी साहेब का स्वर यदि कभी सुनाई पड़े तो जान लीजिए कि कबीर पंथी आपस में एक दुसरे का अभिवादन कर रहे हैं। सत्यलोक गमन के पश्चात कबीर जी की वाणी का संग्...

(१) वक़्त के पन्ने हो गये पीले, जब भी पलटता हूँ होता है अहसास तुम्हारे होने का. (२) तोड़ कर आईना बिछा दीं किरचें फ़र्श पर, अब दिखाई देते अपने चारों ओर अनगिनत चेहरे और नहीं होता महसूस अकेलापन
गत्‍यात्‍मक चिंतन
क्‍या सचमुच हमारे सोने के चेन में उस व्‍यक्ति का हिस्‍सा था ?? - कभी कभी जीवन में कुछ ऐसी घटनाएं अवश्‍य घट जाती हैं , जिसे संयोग या दुर्योग का पर्याय कहते हुए हम भले ही उपेक्षित छोड दें , पर हमारे मन मस्तिष्‍क को झकझोर ह...

* जय जय जय हनुमान गोसाँई, कृपा करहु गुरुदेव की नाईं * मेरी पोस्ट* ' हनुमान लीला भाग -१' *में हनुमान जी के स्वरुप का चिंतन करते हुए मैंने लिखा था *' हनुमान जी वास्तव में 'जप यज्ञ...

सुबह - शाम वह कुछ सोचता है कौन नहीं सोचता यहाँ ! अपने होने के सवालों को बिन जाने बिन समझे ह़ी शायद इसलिए चुप नहीं की बोलना नहीं आता कुछ अर्थ सहित बोला जाये यही उसकी हर रोज़ की बे - सबब चुप्पी है...

आँखें उसकी नील कमल सी और कशिश उनकी , जब खींचेगीं बाँध पाएंगी होगी परिक्षा उनकी | उनका उठाना और झुक जाना गहराई है झील की आराधना और इन्तजार चाहत है मन मीत की |

ज़िन्दग़ी प्यार का नाम है। प्यार कुदरत का ईनाम है।।
जब तलक चाँद-तारे रहेंगे, नित नये ही फसाने कहेंगे।
कुछ को मिलता खुदा, कोई होता ज़ुदा।
कोई नाहक ही बदनाम है। प्यार कुदरत का ईनाम है...


* * *सोचा था आज तो कुछ कहेंगे लब* 
*पर धडकनों के शोर में * 
*फिर से शब्द खामोश हो गए !!


ख़ारों की हिफ़ाज़त लाज़िम

दिल हमारे जिसे हैवान कहा करते हैं।

हम तो उसको भी मिह्रबान कहा करते हैं।।

अब के और आदिमों के बीच फ़र्क़ बेमानी,

जिस्म से हट रहे बनियान कहा करते हैं।

An Indian in Pittsburgh - पिट्सबर्ग में एक भारतीय
 
आल इज वैल - कुछ न कुछ चलता न रहे तो ज़िंदगी क्या? इधर बीच में काफी भागदौड़ में व्यस्त रहा. न कुछ लिख सका न ज़्यादा पढ़ सका. इस बीच में बरेली के दंगे की ख़बरों से मन बहुत आहत...
जीवन के पदचिन्ह
गम है कि जिन्दा हूँ, वरना खुशियों से तो मर जाता - गम है कि जिन्दा हूँ, वरना खुशियों से तो मर जाता तनहाइयों ने थामे रखा, वरना जमाने में किधर जाता सौ बार हुआ क़त्ल रहा फिर भी धड़कता मेरा दिल माजी की थी चाहत...

जाड़े की कुनकुनी धूप तो वैसे ही सुखदायी होती है। 
गंगा का तट हो, बनारस के घाट हों और जेब में भुनी मूंगफली का थैला हो तो कहना ही क्या ! कदम अनायास ही बढ़ने लगे अस्सी घाट से दशाश्वमेध घाट की ओर.....
काजल कुमार Kajal Kumar द्वारा Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून -1 महीने पहले पर पोस्ट किया गया

Posted by IRFAN
काजल कुमार Kajal Kumar द्वारा Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून -3 महीने पहले पर पोस्ट किया गया
प्रतिभा की दुनिया ...!!!
 
वो कौन था मोड़ पर .... - वो याद ही तो थी जो एक रोज मोड़ पर मिली थी. घर के मोड़ पर. वो याद ही तो थी जो गुलमोहर के पेड़ के नीचे से गुजरते हुए छूकर गयी थी. एक कच्ची सी याद उठी साइकि...

 भूख ने मजबूर कर दिया होगा, आचरण बेच कर पेट भर लिया होगा। अंतिम सांसो पर आ गया होगा संयम, बेबसी में कोई गुनाह कर लिया होगा।

अब दीजिए आज्ञा! धन्यवाद!   नमस्कार!! 

Friday, June 29, 2012

बाई-सेक्सुयल मैन गे, करिए इन्हें सेलेक्ट- चर्चा मंच 925


एकाधिक से यौनकर्म, ड्रग करते इंजेक्ट  ।
बाई-सेक्सुयल मैन गे, करिए इन्हें सेलेक्ट । 

करिए इन्हें सेलेक्ट, जांच करवाओ इनकी ।
केस यही परफेक्ट, जान जोखिम में जिनकी ।

एच. आई. वी. प्लस,  जागरूक बनो नागरिक ।
वफादार हो मित्र , नहीं संगी  एकाधिक ।


संतोष त्रिवेदी
बैसवारी baiswari
हुवे कबूतर क्रूर सब, करें साथ मतदान ।
जब्त जमानत हो रही, बहेलिया हैरान । 

कौवों ने रंगवा लिया, सब सफ़ेद सा पेंट ।
असमंजस में कोयली, गाड़ी खुद का टेंट ।

जबरदस्त यह शायरी, तेज धार सरकार ।
सावधान रहिये जरा, करवाएगी मार । 

संगीता स्वरुप ( गीत )
सौ जी.बी. मेमोरियाँ, दस न होंय इरेज |
रोम-रैम में बाँट दे, कुछ ही कोरे पेज |

कुछ ही कोरे पेज, दाग कुछ अच्छे दीदी |
रखिये इन्हें सहेज, बढे इनसे उम्मीदी |

रविकर का यह ख्याल, किया जीवन में जैसा |
रखे साल दर साल, सही मेमोरी वैसा ||

Roshi 

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डालो बोरा फर्श पर, रखो क्रोध को *तोप |
डीप-फ्रिजर में जलन को, शीतलता से लोप |
*ढककर
शीतलता से लोप, कलेजा बिलकुल ठंडा |
पर ईर्ष्या बदनाम, खाय ले मुर्गा-अंडा |

दो जुलाब का घोल, ठीक से इसे संभालो |
पाहून ये बेइमान, विदा जल्दी कर डालो ||

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बड़े महत्व की टीप, पोस्ट पर जितनी आई |

सब की सब हैं स्वर्ण, छाँट कर धरो अमोलक |
अनुकरणीय प्रयास, बजाओ ढम ढम ढोलक ||

हृदय का संस्कार

प्रतुल वशिष्ठ 
 दर्शन-प्राशन

वर्षों की संख्या तीन हुई, नित दीन-हीन अति-क्षीण हुई |
कल्पनी काट कल्पना गई, पर विरह-पत्र उत्तीर्ण हुई ||

कल पाना कैसे भूल गए, कलपाना चालू आज किया -
बेजार हजार दिनों से मैं, क्या प्रेम-प्रगाढ़ विदीर्ण हुई  ??

सदा 
रूप निखारे वित्त-पति, रुपिया हो कमजोर ।
नोट धरे चेहरे हरे, करें चोर न शोर ।
करें चोर न शोर, रखे डालर में सारे ।
हम गंवार पशु ढोर, लगाएं बेशक नारे ।
है डालर मजबूत, इलेक्शन राष्ट्र-पती का  ।
इन्तजार कर मीत, अभी तो परम-गती का ।

अच्छी नींद के लिए....

Kumar Radharaman
स्वास्थ्य
 बरसे धन-दौलत सकल, बचे नहीं घर ठौर |
नींद रूठ जाए विकल, हजम नहीं दो कौर |
हजम नहीं दो कौर, गौर करवाते भैया |
बड़े रोग का दौर, काम का नहीं रुपैया |
करिए नित व्यायाम, गर्म पानी से न्याहो |
मिले पूर्ण विश्राम, राधा-कृष्ण सराहो |।

dheerendra 

स्वागत करता मित्रवर, शुभकामना प्रसाद |
काव्यांजलि पर धीर को, देता रविकर दाद |
देता रविकर दाद, मुबारक हों फालोवर |
मिले सफलता स्वाद, सदा ही बम-बम हरिहर |
रचनाएँ उत्कृष्ट, बढ़ें नित नव अभ्यागत |
बढ़ते जाएँ पृष्ट, मित्रवर स्वागत स्वागत ||

सिल्वर जुबिली समारोह -1987 की मार्मिक यादें

G.N.SHAW
BALAJI  
दो साथी को नमन कर, दो मिनटों का मौन |
चौंतिस साथी जम गए, मिला रेलवे भौन |
मिला रेलवे भौन, मटन सांभर आर्केस्ट्रा |
धरना भी हो गया, पार्टी होती एक्स्ट्रा |
बीता लंबा काल, बहुत कुछ खोया पाया |
चलती रोटी दाल, एक परिवार बनाया || 



चर्चामंच अनोखा मंच

अरुन शर्मा   दास्ताँने - दिल (ये दुनिया है दिलवालों की )
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आसानी से कह रहे, अरुण तरुण एहसास ।
ब्लॉग-जगत का कर रहा, चर्चा-मंच विकास ।
चर्चा-मंच विकास , आस है भारी इससे ।
छपते गीत सुलेख, विवेचन  गजलें  किस्से ।
बहुत बहुत आभार, प्यार से इसे नवाजा ।
कमी दिखे तत्काल, ध्यान शर्तिया दिला जा ।।

कौवे की तरह कावँ-२ करते हैं

खेले नेता गाँव में, धूप छाँव का खेल |
बैजू कद्दू भेजता, तेली पेट्रोल तेल |
बैंगन लुढ़क गया ||


परती की धरती पड़ी, अपना नाम चढ़ाय |
बेचे कोटेदार को, लाखों टका कमाय |
बैजू भड़क गया ||


कबंध 

रवीन्द्र प्रभात 
 
बरसों से इसी तरह ज़मीन में धंसी हुई -
श्रापग्रस्त -
तुम्हारी बाट जोहती हुई -मैं !
और तुम ...!!!
मुझसे विमुख -
रुष्ट -
असंतुष्ट -
मेरी पहुँच से कोसों दूर !!!!!
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सरस दरवारी 

गीता हरिदास -सतीश सक्सेना

सतीश सक्सेना
मेरे गीत !  
कुछ दोस्त , रिश्तेदारों से भी बढ़कर होते हैं , जिनसे आप अपना कोई भी खुशी और दुख बाँट सकते हैं , इन मित्रों के लिए एक बार लिखा यह गीत याद आ गया !
धोखे की इस दुनियां में  ,
कुछ  प्यारे बन्दे रहते हैं !
ऊपर से साधारण लगते
कुछ दिलवाले रहते हैं  !
दोनों  हाथ  सहारा देते ,  जब भी ज़ख़्मी देखे गीत  !
अगर न ऐसे कंधे मिलते,कहाँ सिसकते मेरे गीत  !

Read more: http://satish-saxena.blogspot.com/2012/06/30-2012-30-918802015020.html#ixzz1z53J1KMM

"अन्तरजाल हुआ है तन" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


कम्प्यूटर बन गई जिन्दगी, अन्तरजाल हुआ है तन।
जालजगत के बिना कहीं भी, लगता नहीं हमारा मन।।

जंगल लगता बहुत सुहाना, पर्वत लगते हैं अच्छे,
सीधी-सादी बातें करते, बच्चे लगते हैं अच्छे,
सुन्दर-सुन्दर सुमनों वाला, लगता प्यारा ये उपवन।
जालजगत के बिना कहीं भी, लगता नहीं हमारा मन।।

संतरै री फांक ज्यूं रस छळकता थारा अधर

  राजेन्द्र स्वर्णकार  
*साथीड़ां ! घणीखमा ! 
* लारला दिनां घणो अळूझ्योड़ो होवणै रै कारण
 अर कीं नेट री बीजी समस्यावां कारण 

एकाधिक से यौनकर्म, ड्रग करते इंजेक्ट --250 वीं पोस्ट : इस ब्लॉग की

धरा लूट के यूँ धरा, धनहर धूम धड़ाक

अहमक टकराते अहम् , अहम् खेल का दौरा

 
Wimbledon 2012: Sania-Bethanie in second round

(Reuters) - Sania Mirza has accused the India tennis federation of using her as "bait" to placate doubles specialist Leander Paes as discontent continues to rumble over the country's controversial selection process for the Olympics.


कवित्त नहीं है 
आयशा का तथाकथित, पार्टनर  ज्यों पति बना ।
लेंडर से एतराज था, भू-पति को लेती मना ।।
इस्तेमाल सानिया का, चारा जैसा कर रहा ।
पुरुष-वाद आरोप है, प्लेयर ने झटपट कहा ।।

Thursday, June 28, 2012

चर्चा - 924

आज की चर्चा में आपका स्वागत है 
चलते हैं चर्चा की ओर 
ब्लॉगमंच
गगन में छा गए बादल 

बूँद-बूँद तरसी धरा 
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बारिश लाओ बादल राजा 

प्रतीक्षा स्वाति की 

वर्षा- प्रतीक्षा और भय

1905 - गाँधी जी का घर 
kunwarji's
हाय संस्कृति 

फालतू में अकड़ा आदमी 

आसमां से एक तारा देखता है मेरी ओर अक्सर 
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मौत मैंने तुम्हें हरा दिया 
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सौन्दर्य - नारी वक्ष में या नारी जीवन में ?

खतरनाक भारत 


मैग्नोलिया के फूल और तुम 

शंख 

आधे संसार में पूरे दिन 
जो मेरा मन कहे
मेरी भी सुन लो 
निरामिष
डिहाईडरेशन 
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माँ मैं तुझे खोज लूँगा
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