चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Friday, February 08, 2013

भाग्योदय हो देश का, जागे आर्यावर्त : चर्चा मंच -1149


1.

जागे आर्यावर्त, गर्त में जाय दुश्मनी-

Blog News: Aryawart के प्राचीन गौरव की वापसी का एक्शन प्लान ?

एकनिष्ठ हों कोशिशें, भाई-चारा शर्त |
भाग्योदय हो देश का, जागे आर्यावर्त |

जागे आर्यावर्त, गर्त में जाय दुश्मनी |
वह हिंसा-आमर्ष, ख़तम हों दुष्ट-अवगुनी |

संविधान ही धर्म, मर्ममय स्वर्ण-पृष्ठ हो |
हो चिंतन एकात्म, कोशिशें एकनिष्ठ हों ||

लक्ष्मण प्रसाद लाडीवाला  

http://www.openbooksonline.com/

आई आई  के लिए, कुदरत का आईन |
दोनों की गोदी सुखद, कहते रहे जहीन |

कहते रहे जहीन, यहाँ आई  ले आई |
लेकिन आई मित्र, वहाँ निश्चय ले जाई |

इन्तजार दो छोड़, व्यवस्था करो ख़ुदाई |
ज्यों हर्षित आश्वस्त, देख त्यों हर्षित आई ||
आई=मौत / माता 

राजेश कुमारी
http://www.openbooksonline.com/


दादी दीदा में नमी, जमी गमी की बूँद |
देख कहानी मार्मिक, लेती आँखें मूँद |
लेती आँखें मूँद, व्यस्त दुनिया यह सारी |
कभी रही थी धूम, आज दिखती लाचारी |
लेकिन जलती ज्योति, ग़मों की हुई मुनादी |
लेता चेयर थाम, प्यार से बोले दादी ||

दो दिन बच्चन संग, चलो गुजरात गुजारें -

जा रे रोले दुष्ट-मन, जार जार दो बार ।
जरा-मरा कोई नहीं, दिखे जीव *इकतार ।
दिखे जीव *इकतार, पले हैं भले "गो-धरा" ।
जब उन्नत व्यापार, द्वंद-हथियार भोथरा ।
अव्वल है यह प्रांत, सही नीतियाँ सँवारे
दो दिन बच्चन संग, चलो गुजरात गुजारे ।।
*समान 

मर्यादा पुरुषोत्तम राम की सगी बहन : भगवती शांता-5

 भाग-5
 रावण के क्षत्रप 

सोरठा

रास रंग उत्साह,  अवधपुरी में खुब जमा |
उत्सुक देखे राह, कनक महल सजकर खड़ा ||

चौरासी विस्तार, अवध नगर का कोस में |
अक्षय धन-भण्डार,  हृदय कोष सन्तोष धन |



2.

"वासन्ती परिधान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


उच्चारण 
वासन्ती परिधान ओढ़कर,
सूरज ने भी रंग दिखाया।
मुझको यह आभास होगया-
अब बसन्त का मौसम आया।।

3

तुम्हारी यादें: हाइकू


मेरा फोटो



1
 तुम्हारी यादें
आ रही है बहुत
तड़पाती है।

4

प्रकृति के अनमोल नज़ारे

मेरा फोटो


(१) 
प्रकृति के अनमोल नजारे 
लगते बहुत प्यारे 
आँखोंमें बस गए 
रंग जीवन में भर गए |

5

59. मधु सिंह : बूढी दादी के आँचल पर

    


            बूढी   दादी   के  आँचल  पर 
            यह कैसा अभिशाप लिखा है 
            अपने    ही   घर   कोने   में 
            यह  कैसा  बनबास  लिखा है 



अरुन शर्मा "अनंत" 

9

मैं जिन्दगी का साथ निभाता चला गया !


पी.सी.गोदियाल "परचेत"  


सारी गलियां बंद हैं, सब कातिक में खेत  |
काशी के भैरव विवश, गायब शिव-अनिकेत |
गायब शिव-अनिकेत, चलो बैठकी जमायें |
रविकर ना परचेत, दिखें हैं दायें-बाएं |
जय बाबा की बोल, ढारता पारी पारी |
करके बोतल ख़त्म, कहूँगा आइ'म सॉरी ||


11
मौन में बात...




17
श्रीराम प्रभु कृपा: मानो या न मानो


20
JANOKTI : जनोक्ति : राज-समाज और जन की आवाज

आशा जोगळेकर 

25

नया सीख के आ, ना कहना कुछ नहीं बचा !

उल्लूक टाइम्स 

बहुत से मदारी
ताजिंदगी एक
ही बंदर से
काम चलाते हैं
इसी लिये
जमाने की

26

रिश्वत लिए वगैर...

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया  
काव्यान्जलि
My Photo

टिप्पणी नही करेगें अब बिना लिये वगैर,
हम दाद नही देगें  , कुछ खाए पिए वगैर!

टिप्पणी विहीन रचना को श्रीहीन समझिए,
त्यौहार मुहर्रम का हो  , जैसे ताजिऐ बगैर!

कार्टून :- आज चि‍नार में आग लगी है


काजल कुमार Kajal Kumar 

21 comments:

  1. अच्छे लिनक्स लिए चर्चा ...... आभार

    ReplyDelete
  2. सुन्दर चर्चा!
    आज सभी लिंको को देखूँगा!
    कल घर पर नहीं था!
    आभार!

    ReplyDelete
  3. बहुत ही सुन्दर चर्चा..

    ReplyDelete
  4. ज्ञानवर्धक और पठनीय लिंकों से सजी सुन्दर चर्चा ,आभार !!

    ReplyDelete
  5. जबरदस्त ! आभार रविकर जी !

    ReplyDelete
  6. हार्दिक आभार रविकर भाई सभी सूत्र बेहतरीन लिए हैं सुंदर चर्चा मेरी कहानी को भी शामिल करने के लिए दिल से आभार

    ReplyDelete
  7. धन्यवाद रविकर जी चर्चामंच में "दो बहने जापानी गेइशा और भारतीय मुजरेवाली" को शामिल करने लिए

    ReplyDelete
  8. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति आज शुक्रवार के चर्चा मंच पर ।।

    वाह !
    पहले कल होता था
    आज आज है
    बहुत खूब है
    राज है
    उसी समय
    पर्दा फाश है !

    आभार !

    ReplyDelete
  9. आदरणीय रविकर सर प्रणाम, बहुत सुन्दरता एवं सहजता से सजा है चर्चा मंच, वसंत का सुन्दर रूप दिख रहा है, मेरी रचना को स्थान दिया आपके ह्रदय से आभारी हूँ. इस शानदार चर्चा हेतु हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर

    ReplyDelete
  10. इस शानदार चर्चा लिए हार्दिक बधाई,,,,,रविकर जी,,,,
    चर्चामंच में मेरी रचना को स्थान देने के लिए बहुत२ शुक्रिया,,,

    ReplyDelete
  11. बढ़िया सजा चर्चा मंच |
    मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |
    आशा

    ReplyDelete
  12. मनमन्दिर में धार लो. प्रेमदिवस का सार।
    जो जीवनभर निभ सके, वो होता है प्यार।७।


    बसंत के संग मदनोत्सव के रंग .वेलेंटाइन डे की अप्रतिम पोस्ट .

    2.
    "वासन्ती परिधान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

    ReplyDelete
  13. Virendra Kumar SharmaFebruary 8, 2013 at 12:29 AM
    बहुत मौजू पोस्ट फतवा कला के खिलाफ हो ही क्यों .जुम्मे की नमाज़ हो या रोक बैंड के स्वर संगीत के सुरों का ही खेल है .अलबता इंडियन और वेस्टर्न म्यूजिकल स्केल्स में नोट्स थोड़े से जुदा ज़रूर

    हैं .कैसा मज़हब है संगीत से डरता है .

    ReplyDelete
  14. स्वागत है प्रिय अरुण |

    ReplyDelete
  15. अरुण शर्मा जी का स्वागत है।
    सुन्दर चर्चा मंच

    ReplyDelete
  16. आदरणीय श्री शास्त्री सर मैं ह्रदय के अन्तः स्थल से आभार व्यक्त करता हूँ. इस मंच पर खुद को देखना ही बेहद सुखद होता है, इस मंच से मेरा लगाव शुरुआत से ही रहा है, जो भी थोड़ी बहुत ख्याति प्राप्ति हुई है यहीं से हुई है, यहीं से मुझे मेरे दो प्रिय गुरु मिलें आदरणीय गुरुदेव श्री रविकर सर एवं आदरणीय गुरुदेव श्री अरुण कुमार निगम सर. मेरी लालसा थी की कभी मैं भी चर्चा लगाऊं, एक बार आदरणीय गुरुदेव श्री रविकर सर नें मुझे आमंत्रण भी भेजा था परन्तु कुछ कारणवश आ नहीं सका. आखिर आज वो शुभ घड़ी आ ही गई मुझे यह सुनहरा मौका मिल ही गया. आदरणीय रविकर सर, ग़ाफिल सर, दिलबाग सर, आदरणीया राजेश कुमारी जी, आदरणीया वंदना जी एवं भ्राताश्री प्रदीप जी बीच खुद को पाना परम आनंद जैसा है. आदरणीय श्री शास्त्री सर को पुनः कोटि-कोटि प्रणाम एवं धन्यवाद....

    ReplyDelete
  17. धन्यवाद गुरुदेव श्री रविकर सर एवं आदरणीया वंदना जी.

    ReplyDelete
  18. सुस्वागतम अरुण जी.... सुन्दर लिंक संयोजन!

    ReplyDelete
  19. बहुत सुन्दर तरीके बंधा है आज का चर्चा मंच,उत्कृष्ट कोटि के लिंकों के साथ मेरी रचना को भी शामिल करने के लिए सादर आभार। चर्चा मंच से जुड़ने के लिए अरुण कुमार जी का हम हार्दिक अभिनन्दन करते है।

    ReplyDelete
  20. रविकर जी नमस्कार
    आप रवि हैऔर कवि भी हैं यह विल्कुल सच है और आपके आज के लिंक्स से भी यह बात साबित होती है कि रवि औऱ कवि समाज या प्रकृति से अन्धेरा ही दूर करते हैं सो आज के लिंक एसे हैं कि समाज में जो इन्हैं पढ़ेगा उसे ज्ञान की ज्योति मिल ही जाएगी
    धन्यबाद मेरे लिंक को भी शामिल करने के लिए आपका आभार

    ReplyDelete
  21. बहुत उम्दा लिंक्स.
    शुक्रिया.

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin