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Friday, March 15, 2013

कामुकता को छूट मिल गई है दो वर्षों की- -चर्चा मंच 1184

"मेरी पौत्री प्राची की वर्षगाँठ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) 
 
प्राची को शुभकामना, जन्म दिवस शुभ छंद |
बल बुद्धि विद्या तेज मन, रहे स्वस्थ सानन्द ||


शादी की बधाइयाँ

  पुरुषोत्तम पाण्डेय) 



कमल कुमार सिंह (नारद )  





किसके मामा हैं इटली में ?


महेन्द्र श्रीवास्तव 

यादों के चिराग़ -

प्रतिभा सक्सेना  







किन्तु कालिया-नाग, आज मिलता चौराहे -


सदा 

 SADA  

धूप-हौसले से सदा, पिघले हिम-परवाह |
जल-प्रवाह से मनुज यह, पाए जीवन थाह-

पी.सी.गोदियाल "परचेत"  

बड़ी बुआ का घर मिला, भैया फुफ्फु जात । 
क्वात्रोची दादा सरिस, अपने रिश्ते नात । 
अपने रिश्ते नात, यहाँ  जलवा है भारी । 
भारत के अभिजात, मानते हैं महतारी । 
बाल न बांका होय, अगर अपना हो आका । 
काके रह  निश्चिन्त, स्नेह है बड़ी बुआ का ॥

मैं कहीं रहूं ....

Dr (Miss) Sharad Singh 
चाहे मथुरा जा बसे, जाय द्वारिका द्वीप |
होली के हुडदंग में, आये कृष्ण समीप |
आये कृष्ण समीप, मार पिचकारी गीला |
छुप छुप मारे टीप, रास आती है लीला |
किन्तु कालिया-नाग, आज मिलता चौराहे |
करता अनुचित मांग, खेलना होली चाहे ||

pankhuri goel  


आकांक्षा छूने चली, उचक उचक आकाश |
नखत चकाचक टिमटिमा, उड़ा रहे उपहास-

जीवन चक्र


तुषार राज रस्तोगी 
प्रश्न मोक्ष का है खड़ा, लेकर गजब तिलस्म |
कई तीन-तेरह हुवे, चले अनवरत रस्म ||

!!..शायद ,मैं फेल हो गई.. !!


सरिता भाटिया 

सुनी सनाई बात पर , मत करना विश्वास |
अंतरात्मा जो कहे, वही सत्य है ख़ास ||

अजमा ले गर जोर, नहीं कानून टूटता-

अट्ठारह से कम वयस, बल्ले बल्ले बोल ।
सोलह की लेगा पटा, विद्यालय में डोल ।
विद्यालय में डोल, पटा के मजा लूटता ।
अजमा ले गर जोर, नहीं कानून टूटता ।
मजनूं कालेज छोड़, इधर हो रहे इकट्ठा ।
विद्यालय के मोड़, रोज जाता अब पट्ठा ॥

सहमति से सम्भोग कि उम्र १६ साल , सही या गलत !!


पूरण खण्डेलवाल 


अट्ठारह सोलह लड़े, भूला सतरह साल |
कम्प्रोमाइज करो झट, टालो तर्क बवाल |
टालो तर्क बवाल, आयु सतरह करवाओ  |
करो नहीं  अंधेर,  सख्त कानून बनाओ |
फास्ट ट्रैक में केस, जड़ों पे डालो मठ्ठा |
नाशों पाप समूल, बिठा मत मंत्री भट्ठा ||



मनसायन आयन मन्मथ भायन मानस वेग बढ़ा कसके |
रजनी सजनी मधुचन्द मिली, मकु खेल-कुलेल पड़ा लसके-
अब स्वप्न भरोस करे मनुवा पिय आय रहो हिय में बसके-
खट राग लगे कुल रात जगे मन मौज करे रजके हँसके |

"मयंक का कोना"
(1)

सोचो जरा
Dr.NISHA MAHARANA

अपनी गलती से मिले, हमें घाव पर घाव।
चन्दन पेड़ कटा दिया, मिले कहाँ अब छाँव।।

(2)

रुको सोचो और बढ़ो !
मेरा फोटो


करनी तो भरनी पड़े, कर के क्यों पछताय।
बोलो कंटक पेड़ पे, आम कहाँ से आय।।

21 comments:

  1. बढिया चर्चा, अच्छे लिंक्स

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  2. सुचना ****सूचना **** सुचना

    सभी लेखक-लेखिकाओं के लिए एक महत्वपूर्ण सुचना सदबुद्धी यज्ञ

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  3. बहुत अच्छे लिंकों का चयन किया है चर्चा में रविकर जी आपने!और शीर्षक तो बहुत ही सामयिक है!
    आभार!

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  4. दिनेश भाई
    आभार
    मेरी पसंदीदा रचना यहाँ प्रस्तुत की गई
    एक बात जो अहम है
    इस कविता के कवि प्रवासी भारतीय हैं
    हिन्दी भाषा में विशेष महारत हासिल है इन्हें
    सादर

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  5. क्या तय था, क्या हो गया। बात तो बलात्कार के १७ वर्षीय अपराधी को दण्ड देने की थी, अब तो उसे सहमति का विषय बना दिया।
    बहुत सुन्दर सूत्र..

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  6. दिल से सजाया सुन्दर गुलदस्ता ...

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  7. bahut sundar aur mnbhawan links ...thanks nd aabhar ....

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  8. शानदार लिंकों से सजी चर्चा !!
    आभार !!

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  9. मेरी रचना को सम्मान देने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया गुरूजी | आभार

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  10. सामयिक शीर्षक के साथ बेहतरीन चर्चा आदरणीय सादर आभार.

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  11. सुनदर चर्चा , मेरा यात्रा वृतांत लगाने के लिए शुक्रिया .

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  12. रविकर जी, मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए हार्दिक आभार!

    बढिया चर्चा....
    अच्छे लिंक्स....

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  13. बहुत बढ़िया लिनक्स के साथ सार्थक चर्चा प्रस्तुति ..आभार!!

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  14. रविकर जी, सुंदर चर्चा ! साभार !

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  15. सुन्दर रंग बिरंगे लिनक्स से सजी आप की आज की चर्चा ..मेरी रचना को शामिल करने के लिए शुक्रिया :-)

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  16. अतिसुन्दर काव्यात्मक संयोजन सेतुओं का .आभार हमने जगह देने के लिए .

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  17. सुंदर लिंक्स से सुसज्ज्जित सुंदर चर्चा...

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  18. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति,अपनी रचना को यहाँ देख हार्दिक आनन्द मिला,सादर धन्यबाद.

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