चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Wednesday, July 17, 2013

उफ़ ये बारिश और पुरसूकून जिंदगी ..........बुधवारीय चर्चा १३७५

बुधवारीय चर्चा में मै  शशि पुरवार आपका स्वागत करती हूँ ....बारिश का मौसम और मन में उमंगो का रंग भरना ...ऐसे ही जीवन के अनेक रंगों के साथ आज के लिनक्स की और हम प्रस्थान करते है , आप सभी का दिन मंगलमय हो , शुभ अस्तु 

उफ़ ये बारिश और तुभात म ...

Pratibha Verma 
उफ़ ये बारिश और तुम बिना बताये आ जाते हो कुछ तो समानता है तुम दोनों में जहाँ बरस गए धीरे - धीरे कर उसकी दुनिया ही उजाड़ डालते हो फिर तुम्हे फर्क नहीं पड़ता किसी ने तुम्हे कितनी सिद्दत से चाहा तुम्हारी

ऐ पुरसुकून जिन्दगी

Asha Saxena 
ऐ पुरसुकून जिन्दगी तुझे किसी की नज़र न लगे क्या सुबह क्या शाम तुझ में महक रहे |

चाँद …

induravisinghj
इतरा कर चाँद का यूँ मौन पुकारा है सब आशिक हमारे हैं कौन तुम्हारा है। हर नूर हम से बरसे कि नूर ही हैं हम चिलमन से न छुपे ऐसा रूप हमारा है।
नवगीत 


फूलों की घाटी में
फूलों की घाटी में बजता
कानफोड़ सन्नाटा.

शशि  कान्त गीते
"मेरा काव्य संग्रह सुख का सूरज" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

उसका लिखा-लिखवाया...!

अनुपमा पाठक
आँसुओं ने लिखा लिखवाया... क्या कहूँ? भींगते हुए मैंने क्या पाया... अपना ही मन फ़फ़क फ़फ़क कर मुझसे मेरी ही पहचान करा रहा था, सुर ताल कभी नहीं सीखे मैंने पर मेरे भीतर कोई गा रहा था! गी

अभी भी आशा है,

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया
अभी भी आशा है, हिम्मत न हारो तुम ,अभी भी आशा है आँख में आँसू न लाओ,अभी भी आशा है, कोई आ सकता अभी, कोई दस्तक देगा द्वार पर कान लगाओ,अभी भी आशा है, आख़री क्षण में ,परिणाम बदल सकता है आख़री जोर लगाओ अभी भी आशा है, अब भी संभव है

हमें खुद पे गुमां हो जाएं.....

रश्मि शर्मा
इस कदर भी ना चाहो तुम, कि हमें खुद पे गुमां हो जाएं । खुशि‍यां भरते रहो मेरे दामन में, हम कद से आस्मां हो जाएं ।। फूल नहीं, कांटे भी मेरी राहों के तुम पलकों से उठाते हो

श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (५४वीं कड़ी)

Kailash Sharma 
मेरी प्रकाशित पुस्तक 'श्रीमद्भगवद्गीता (भाव पद्यानुवाद)' के कुछ अंश: तेरहवां अध्याय (क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभाग-योग-१३.२७-३४) समत्व भाव से सब प्राणी में परमात्मा को जो है देखता. जो विनाश अविनाशी समझे मुझे वस्तुतः वही देखता. (१३.२७) सम भाव से स्थित ईश्वर को सब में है जो समान समझता.
समुन्दर किनारे, एक अनजाना

अमृतरस पर डॉ. नूतन डिमरी गैरो
उसका लिखा-लिखवाया...!
आँसुओं ने लिखा लिखवाया... क्या कहूँ? भींगते हुए मैंने क्या पाया...
अनुशील पर अनुपमा पाठक 
क्या से क्या हो गया !
*निकम्मों को अब मुल्क लायक कहता है,* *राजकर्ता को प्रजा का सहायक कहता है, ...
अंधड़ ! पर पी.सी.गोदियाल "परचेत" 
"चला है दौर ये कैसा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सियासत में विरासत का, चला है दौर ये कैसा*** *इबारत में बनावट का, चला है दौर ये कैसा*...
बादलों का एक भी टुकड़ा...
बादलों का एक भी टुकड़ा नहीं बचा आंखों में सावन-भादों में बनाए बांधों के द्वार खोल दिये हैं मैने अंतर में बसी भागीरथी विलुप्त हो गई है...
वीणा के सुर पर Veena Srivastava 

बेटियाँ

सरिता भाटिया 

युद्ध कर रहा हूँ काल की चाल से

मेरा अव्यक्त --राम किशोर उपाध्याय 
युद्ध कर रहा हूँ काल की चाल से हस्त में खड़ग नहीं ढाल भी बेहाल हैं र
निधि  टंडन
शहर में रहा करो
  • मुक्तक और अशआर
    दुनिया के रंजो गम मेँ पलना ही गजल है 
    बेजान जिन्दगी में सपना ही गजल है 
    तकदीर की तस्वीर को अक्सर बनाये जो
    इन झील सी आँखो मेँ बसना ही गजल है
    दिलीप कुमार तिवारी
  •  

माँ का हिस्सा ...

  (दिगम्बर नासवा)
मैं खाता था रोटी, माँ बनाती थी रोटी वो बनाती रही, मैं खाता रहा न मैं रुका, न वो उम्र भर रोटी बनाने के बावजूद उसके हाथों में दर्द नहीं हुआ सुबह से शाम तक इंसान बनाने की कोशिश में करती रही वो

मेरी सोच,मेरा चिंतन

Anju (Anu) Chaudhary
कुछ ऐसे वचन जो हर किसी पर लागूं होते हैं अगर कोई उसे दिल से माने तो ...बस ऐसे ही पढ़ते पढ़ते कुछ वचन मेरे हाथ भी लेगे...

तेरा ख़याल आया !

त्रिवेणी
*हरकीरत हीर ** 1* *खूँटी पे टँगा** हँसता है विश्वास चौंक जाती धरा भी देख खुदाया ! तेरे किये हक़ औ' नसीबों के हिसाब ...! 2 स्याह- से लफ़्ज दुआएँ माँगते हैं ज़र्द -सी ख़ामोशी में , लिपटी रात उतरी है छाती में आज दर्द के साथ ....! 3* *आग का रंग** मेरे लिबास पर लहू सेक रहा है कैद साँसों में रात मुस्कुराई है कब्र उठा लाई है ।.

एक पग तुमने बढ़ाया

sadhana vaid 
एक पग तुमने बढ़ाया रास्ते मिलते गये , गुलमोहर की डालियों पर फूल से खिलते गये ! भावना की वादियों में वेदना के राग पर , एक सुर तुमने लगाया गीत खुद बनते गये ! चाँदनी का चूम माथा नींद से चेता दिया

सुख -दुःख

कालीपद प्रसाद 
दिन के उजाला में लोग भूल जाते है काली रात को काली रात फिर आएगी ,तुम याद रखकर तो देखो। रौशनी के आने पर ,तम भाग जाता है गम को भुलाकर एकबार, हंसकर तो देखो। तुम को दुखी देखकर ,दुखी है अपने सारे उनके दुःख का भी एहसास, करके तो देखो। चाहत अनंत है ,हर चाहत पूरी नहीं होती यकीन न हो तो दोस्तों से पूछकर तो देखो।
मारकंडेय काटजू बोले तो निर्मल बाबा !
 My Photo
 महेन्द्र श्रीवास्तव
एक वक्त था कोई बहुत पुरानी नहीं हमारे दौर की ही बात है परिवार का

Virendra Kumar Sharma
सरकार सेकुलरिज्म को बचाने में लगी है
आगे देखिए..."मयंक का कोना"
(1-अ)
एक हास्य कुण्डली- डा.राज सक्सेना
सृजन मंच ऑनलाइन
सृजन मंच ऑनलाइन पर DrRaaj saksena 

(1-आ)
लोकतंत्र
मुद्दों को हम दें भुला , डालें जब भी वोट | 
लोकतंत्र में फिर सभी , निकालते हैं खोट...
सृजन मंच ऑनलाइन पर दिलबाग विर्क

(2)
क्या बिसात है अपनी
गये तुरंग कहाँ अस्तबल के देखते हैं 
कहाँ से आये गधे हैं निकल के देखते हैं 
सभी ने ओढ़ रखी खाल शेर की शायद 
डरे - डरे से सभी दल बदल के देखते हैं....
अरुण कुमार निगम (हिंदी कवितायेँ) पर अरुण कुमार निगम 

(3)
उम्र हो कम ग़म नहीं .

उम्र हो कम ग़म नहीं * 
*श्वांस थके ग़म नहीं * 
*क़दम रुके ग़म नहीं * 
*पलकें मुंदी ग़म नहीं...
झरोख़ा पर निवेदिता श्रीवास्तव
(4)
पूछ रहा है पता जो खुद है लापता
बहुत दिनों से कई कई बार सुन रहा था 
नया आया है एक हथियार 
कह रहे थे लोग बहुत ही काम की चीज है ..
उल्लूक टाईम्स पर सुशील

(5)
कार्टून :- ये कि‍सकी छतरी के नीचे जा रहे हो

काजल कुमार के कार्टून

30 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    विपदाओं से हार गये तो , सँवर नहीं पायेंगे।
    जीवन की झंझावातों से, उबर नहीं पायेंगे।।
    --
    शशि बिटिया हारमानना ठीक नहीं है।
    आपका मेल मिला मुझे।
    शुभकामनाएँ ही व्यक्त कर सकता हूँ मैं तो...!

    ReplyDelete
    Replies
    1. ji chacha ji ,haar nahi maani bas ek dhakka sa laga kal dil ko ,jaise jindagi tham gayi ho

      Delete
  2. सुंदर लिंक्स की सुंदर प्रस्तुति ।

    बहुतों पर गई और रस लिया और भी देखती हूँ ।

    ReplyDelete
  3. आज भी कई लिंक्स| पढ़ने के लिए पर्याप्त मेटर|
    बढ़िया चर्चा |मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |
    आशा

    ReplyDelete
  4. सुन्दर प्रस्तुति-
    आभार आदरणीया
    चर्चा मंच के बढ़िया लिंकों के लिए-

    ReplyDelete
  5. बढ़िया लिंकों की सुन्दर प्रस्तुति- मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार!

    ReplyDelete
  6. सुंदर लिंक्स चयन ...
    बढ़िया चर्चा ....शुभकामनायें शशि जी ....!!

    ReplyDelete
  7. सुन्दर प्रस्तुति, आभार!

    ReplyDelete
  8. सुंदर चर्चा...
    मेरी नयी रचना... सावन ने ये कहा है मुझसे...

    ReplyDelete
  9. बहुत सुंदर सूत्रों की माला
    आभार मयंक जी का
    उल्लूक का सूत्र जो है
    अपने कोने में डाला !

    ReplyDelete
  10. चर्चामंच बढ़िया बढ़िया सूत्रों से बनी... इसमें "समुन्दर किनारे, एक अन्जाना" मेरा यह लिंक भी शामिल देख खुशी हुई ... आपका आभार

    ReplyDelete
  11. सुन्दर चर्चा सजाई है !!

    ReplyDelete
  12. सुंदर लिंक्स से सुसज्जित चर्चा मंच शास्त्री जी ! इसमें मेरी रचना को भी स्थान दिया आभारी हूँ !

    ReplyDelete
  13. बहुत -बहुत शुक्रिया शशि जी मेरी रचना को यहाँ तक पहुँचाने के लिए ...

    ReplyDelete
  14. बढिया चर्चा
    मुझे स्थान देने के लिए आभार

    ReplyDelete
  15. बहुत सुन्दर लिंक्स...रोचक चर्चा...आभार..

    ReplyDelete
  16. बेहतरीन लिंक्स, आभार.

    रामराम.

    ReplyDelete
  17. विस्तृत चर्चा ... सागर की तारा ... बहुत से लिंक ...
    शुक्रिया मुझे शामिल करने का ...

    ReplyDelete
  18. बढ़िया लिंकों की सुन्दर प्रस्तुति

    ReplyDelete
  19. बेहतरीन लिंक्स, आभार.

    ReplyDelete
  20. सुंदर प्रस्तुति, रचना शामिल करने के लिए आभार।

    सादर

    ReplyDelete
  21. बहुत सुन्‍दर चर्चा बहुत बहुत आभार
    नवीन लेख
    How to keep laptop happy लैपटॉप को खुश कैसे रखें

    ReplyDelete
  22. बहुत सुंदर लिंक्स मेरी रचना को मंच में स्थान देने के लिए आभार,,,शशि जी,,,

    ReplyDelete
  23. सुन्दर संकलित सूत्र..

    ReplyDelete
  24. बहुत सुंदर लिंक्स....मेरी रचना को मंच में स्थान देने के लिए आभार शशि जी

    ReplyDelete
  25. बहुत सुन्दर सूत्रों से सजा चर्चामंच ,आपको बहुत बहुत बधाई प्रिय शशि पुरवार जी |

    ReplyDelete
  26. अच्छे लिंक्स...

    ReplyDelete
  27. आपके कविता संग्रह का कवर पृष्ठ बहुत अच्छा है...
    उसके लिए बहुत-बहुत बधाई और शुभ कामनाएं...
    और चर्चा मंच में मुझे शामिल करने पर भी आभार...

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin